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उत्तर प्रदेश

डासना जेल में कैद आईएएस राजीव कुमार क्या ईमानदार अधिकारी है?

-कुमार सौवीर-

लखनऊ : बेहद पढ़ाकू और परिश्रमी रहा है राजीव कुमार। शुरू से ही उसका सपना रहा है कि वह अपने देश और अपने देशवासियों की सेवा के लिए अपनी हर सांस अर्पित कर देगा। अपने इस सपने को साबित करने के लिए राजीव ने कठोर परिश्रम किया और वह आईएएस बन ही गया। लेकिन नौकरी की शुरूआती पेंचीदगियों ने उसे तोड़ना शुरू कर दिया। वह संशय में फंस गया कि उसके जीवन और उसके सपनों की नैया राजनीतिज्ञ निबटायेंगे या फिर उसके संवर्ग के वरिष्‍ठ सहयोगी। सोचा तो पता चला कि जिस तरह उसके वरिष्‍ठ सफलता की पींगें में लात उचका रहे हैं, वह ही रास्‍ता सर्वश्रेष्‍ठ है।

-कुमार सौवीर-

लखनऊ : बेहद पढ़ाकू और परिश्रमी रहा है राजीव कुमार। शुरू से ही उसका सपना रहा है कि वह अपने देश और अपने देशवासियों की सेवा के लिए अपनी हर सांस अर्पित कर देगा। अपने इस सपने को साबित करने के लिए राजीव ने कठोर परिश्रम किया और वह आईएएस बन ही गया। लेकिन नौकरी की शुरूआती पेंचीदगियों ने उसे तोड़ना शुरू कर दिया। वह संशय में फंस गया कि उसके जीवन और उसके सपनों की नैया राजनीतिज्ञ निबटायेंगे या फिर उसके संवर्ग के वरिष्‍ठ सहयोगी। सोचा तो पता चला कि जिस तरह उसके वरिष्‍ठ सफलता की पींगें में लात उचका रहे हैं, वह ही रास्‍ता सर्वश्रेष्‍ठ है।

राजीव कुमार को उसके वक्‍त ने तोड़ा, उसकी नौकरी ने तबाह किया या फिर हताश खिलाड़ी जैसा हश्र हुआ राजीव का। आज तक पता नहीं। ले‍किन आजकल अंदाज यह लगाया जाता है कि राजीव एक ईमानदार और कम बोलने वाला शख्‍स है। वह मीडिया-फ्रेंडली कभी भी नहीं रहा। व्‍यवहार में हमेशा रूखापन रहा राजीव में। पत्रकार उसकी इस प्रवृत्ति से खासे नाराज रहे हैं।

लेकिन हकीकत यही है कि राजीव नीरा यादव के शिकंजे में फंस चुका था। नीरा ने अपने उसकी पोस्टिंग करा दी। बस, फिर क्‍या था। नीरा यादव ने उसकी इस ख्‍वाहिशों को पहचान लिया और उसे लपक कर अपने गले लगा दिया। राजीव नया लड़का था, नीरा की लालच में फंस गया। नीरा ने उसे अपना डिप्‍टी बनवा लिया। और फिर उसके माध्‍यम में ऐसे-ऐसे धोखाबाजियों करा लिया कि फिर तौबा-तौबा। नीरा यादव का हर धोखा उसने ईमानदारी में साबित करने में अपनी जिन्‍दगी भिड़ा दी। सन-95 में नोएडा में नीरा के अधीनस्‍थ बन कर उसने नीरा की जूतियां तक चाटना शुरू कर दिया।

लेकिन मामला फंस गया। राजीव भूल गया कि वह मूलत: नौकर है, शाहंशाह नहीं। नतीजा, मामला अदालतों तक पहुंच गया। सुप्रीम तक ने उसे तीन साल की सजा दे दी। साबित कर दिया कि राजीव कुमार बेईमान था, जिसने धोखाधड़ी के चलते सरकार को चूना लगाया। लेकिन जानने वाले आज भी जानते हैं कि राजीव कुमार वाकई ईमानदार शख्‍स है। लेकिन उसने अपने आकाओं की शह पर बेईमानियों पर ईमानदारियों का ठप्‍पा लगा दिया।

लेखक कुमार सौवीर लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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1 Comment

1 Comment

  1. Dwijendra

    October 13, 2016 at 6:04 am

    Still he is paying for his honesty .having 5 years job left many senior dishonest babuji may be loosing 1000 of cr if he comes clean on senior post.mr kumar you should write full truth not with ? Marks.pls read high court judgement and decide .his case is not connected with Noida land scam.plot alloted to him was as per rule which high court agrees but still he is victimised??? If u r bindas , go to deep yourself and right full truth. He is dead honest and not guilty. Now question is left” kya supreme Court me Naya Milta hai?”

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