आज से मेरे पसंदीदा अखबार ‘दि इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी डिजाइनिंग बदल ली..वाह !

आज से मेरे पसंदीदा अखबार ‘दि इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी डिजाइनिंग बदल ली. इसकी सादगी वाली खूबसूरती अब जवां लगने लगी है. आत्मा जेएनयू वाली है और रंग रूप डीयू वाला. जाने क्यों ऐसा लग रहा है कि मैं भी अंदर से स्मार्ट हो गया हूं. सुबह-सुबह कॉन्फिडेंस लग रहा है. बार-बार आईना देखने का मन कर रहा है. दिल ‘गार्डियन-गार्डियन’ हो रहा है.

एंकर स्टोरी के ऊपर नीली पट्टी, अक्षर विन्यास और खुलापन बिटेन के ‘द गार्डियन’ की याद दिलाते हैं. जर्मनी में था तो डिपार्टमेंट वाला ‘गार्डियन’ घर ले जाकर बिस्तर पर लेटकर पढ़ता था. हाथ ऊपर करके एकदम देसी स्टाइल में. जाने क्यों अखबार आज भी ज्यादा भरोसा देते हैं.टीवी में काम करते हुए भी टीवी देखने का मन नहीं करता. लोग कहते हैं कि फलनवां पत्रकार टीवी का मास्टर है. ढेकनवां ने टीवी को घोट कर पी लिया है.

पीने पिलाने के चक्कर में बहुत कुछ छूट गया. अब क्या कहें अपनी बिरादरी के बारे में !! मुझे याद है कि जिस सुबह ‘जनसत्ता’ रंगीन होने वाला था–शायद 9-10 की बात है– लक्ष्मीनगर में बहुत दूर जाकर एक हॉकर के यहां से खरीद कर लाया था. और बहुत दिनों तक उसे संभाल करके रखा था. आज भी उस सुबह को याद करके ‘फील गुड’ होता है. 

विश्वदीपक के एफबी वॉल से 



भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप- BWG-10

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate






भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code