जंतर-मंतर पर आइपीएफ का धरना, कृषि को प्राथमिक क्षेत्र में शामिल करने की मांग

नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर आयोजित आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के धरने में वक्ताओं ने कहा कि सरकार व कारपोरेट के पास उद्योग व सार्वजनिक संस्थाओं के निर्माण के लिए पर्याप्त जमीन है। आकंड़े बताते हैं कि रेल, सेना और उद्योगों के पास हजारों हेक्टेयर जमीन बिना किसी काम के खाली पड़ी है। 152 सेजों के अध्ययन के बाद सीएजी की रिपोर्ट तक में कहा गया है कि रोजगार के अवसर नहीं बढ़े हैं और विकास के लिए किसानों से ली गयी जमीनों का अच्छा खासा हिस्सा बिल्डरों ने सरकार से मिलकर हड़प लिया। 

वक्ताओं ने कहा कि सरकार चाहे जो तर्क दे, इस बात को छिपा नहीं सकती कि वह कारपोरेट घरानों के रियल स्टेट के लिए किसानों को जमीन से बेदखल करना चाहती है। इसलिए वक्त की जरूरत है कि एक राष्ट्रीय भूमि उपयोग नीति के लिए आयोग का गठन हो, जिससे यह पता चले कि उद्योग, मकान, अस्पताल, स्कूल, सड़क आदि के लिए कितनी जमीन जरूरी है। भूमि उपयोग नीति बनने तक कृषियोग्य जमीनों की कारपोरेट व एनआरआई द्वारा खरीद पर रोक लगाई जाए। 

धरने पर आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि मोदी व मनमोहन का कारपोरेटपरस्त विकास माडल न तो रोजगार का सवाल हल कर सकता है और न ही देश की संप्रभुता की रक्षा कर सकता है। कृषि क्षेत्र का विकास ही देश में रोजगार, आम आदमी की समृद्धि और देश की सम्प्रभुता की रक्षा करेगा। इसलिए कृषि को सरकार प्राथमिकता के क्षेत्र में शामिल करें और देश के चंद कारपोरेट धरानों को टैक्स छूट के रुप में दिए जा रहे 5 लाख करोड़ के इनसेंनटिव को वसूलकर उसे कृषि क्षेत्र में लगाएं। उन्होंने स्वराज अभियान के जय किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि देश में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए शुरू हुई यह लड़ाई दूसरी आजादी का संघर्ष है इसलिए आइपीएफ के कार्यकर्ता पूरी ताकत से जय किसान आंदोलन में शामिल होंगे। 

बेल्लारी में प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ लड़ रहे एस. आर. हिरेमथ ने कहा कि प्रमुख खनिज से लेकर लधु खनिज तक का राष्ट्रीयकरण किया जाना चाहिए और इस पर कारपोरेट का नहीं समाज का अधिकार होना चाहिए।

सभा में कर्नाटक के किसान नेता राधवेन्द्र कुस्तगी ने बताया कि कर्नाटक में चीनी मिलों ने किसानों के गन्ने के करोड़ों रुपए का भुगतान करने से मना कर दिया है परिणामतः पिछले दो माह में कर्नाटक में कर्ज से परेशान तीन सौ से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है और वहां के दस जिलों में अकाल पड़ा हुआ है।  

हरियाणा के किसान नेता जगमोहन मलिक ने कहा कि यह सरासर झूठ है कि किसान मुआवजा पाकर जमीन बेचना चाहता है। दरअसल सरकार की नीतियों से खेती को घाटे में लाया जा रहा है ताकि किसान अपना खेत छोड़ने के लिए मजबूर हो जाए और खेती की जमीनों को सरकार आसानी से पूंजीपतियों के हवाले कर सके।

धरने को दास माली पाटिल, पूर्व न्यायाधीश ए. पी. चैहान, राधेश्याम, कुसुम भारती, जे. पी. राव, अशोक वर्मा, लाल बहादुर सिंह, दिनकर कपूर, आलू उत्पादक संघ के अध्यक्ष द्वारिका सिंह, यादवेन्द्र यादव, मजहर, शमीम आदि ने सम्बोधित किया। धरने पर आयोजित सभा का संचालन किसान नेता अजीत सिंह यादव ने किया। धरने में कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, हरियाणा, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत तमाम राज्यों से नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। धरने की अध्यक्षता पूर्व आई.जी. और आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी ने की।

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