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मजीठिया वेज बोर्ड : नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट ने की कामगार मंत्री से शिकायत

मुंबई : देश भर के मीडियाकर्मियों के लिए गठित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को महाराष्ट्र में अखबार मालिक और कामगार आयुक्त की सांठगांठ से लागू नहीं कराया जा रहा है। यह आरोप लगाते हुए नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष डाक्टर उदय जोशी और महासचिव शीतल करदेकर ने महाराष्ट्र के कामगार मंत्री को एक शिकायती पत्र लिखा है। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि जानबूझ कर कामगार आयुक्त की तरफ से माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहवेलना की जा रही है।

<p>मुंबई : देश भर के मीडियाकर्मियों के लिए गठित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को महाराष्ट्र में अखबार मालिक और कामगार आयुक्त की सांठगांठ से लागू नहीं कराया जा रहा है। यह आरोप लगाते हुए नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष डाक्टर उदय जोशी और महासचिव शीतल करदेकर ने महाराष्ट्र के कामगार मंत्री को एक शिकायती पत्र लिखा है। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि जानबूझ कर कामगार आयुक्त की तरफ से माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहवेलना की जा रही है।</p>

मुंबई : देश भर के मीडियाकर्मियों के लिए गठित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को महाराष्ट्र में अखबार मालिक और कामगार आयुक्त की सांठगांठ से लागू नहीं कराया जा रहा है। यह आरोप लगाते हुए नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष डाक्टर उदय जोशी और महासचिव शीतल करदेकर ने महाराष्ट्र के कामगार मंत्री को एक शिकायती पत्र लिखा है। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि जानबूझ कर कामगार आयुक्त की तरफ से माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहवेलना की जा रही है।

डाक्टर उदय जोशी और शीतल करदेकर ने पत्र में आरोप लगाया है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू कराने की जिम्मेदारी राज्यों के श्रम मंत्रालय और कामगार आयुक्तों को दी है। डेढ़ साल पहले मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू कराने के कार्य के निरीक्षण के लिए एक समिति बनाई जाय, ऐसा निवेदन भी यूनियन की तरफ से महाराष्ट्र सरकार को दिया गया था। न्यायालय की कड़ी फटकार के बाद वर्ष 2016 के मई महीने में तत्कालीन श्रम मंत्री ने समिति गठन की घोषणा की। उसका नतीजा 19/9/16 में निकला ओर समिति गठित हुयी। इस समिति के गठन के 70 दिन बाद 30/11/16 को इसकी मीटिंग रखी गयी।

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समिति का गठन मजीठिया सिफारिशों की इंप्लीमेंटेशन के लिये किया जा रहा है, ऐसा जी आर कहता है मगर कामगार आयुक्त ने समिति सदस्यों के अधिकारों के बारे मे पूछने के बाद साफ़ तौर पर कहा कि सदस्यों को कुछ अधिकार नहीं है, सिर्फ निरिक्षण करने का काम करना है. ऐसा कहकर पत्रकारों की तरफ से सुझाव देने वालों की आवाज दबाने की कोशिश की गयी। समिति सदस्यों को एफिडेबिट की कापी जो मालिकों से ली गयी है, वह केवल आरटीआई से ही मिलेगी, ऐसा मनमाना रवैय्या अपनाया गया है कामगार आयुक्त की तरफ से। आयुक्त के ऐसे गलत रवैये पर एनयूजे महाराष्ट्र की तरफ से पत्र में लिखा गया है कि ये लोकतंत्र पर हमला है। आज मजीठिया वेजबोर्ड के अनुसार वेतन या बकाया मांगने पर जबरी रिजाइन लिखवा लिया जा रहा है। मजीठिया पत्रकारों का हक है और उसकी सिफारशों का अच्छी तरह से इमप्लिमेन्टेशन कराने के लिये श्रम सचिव व आयुक्त से युनियन के दिये हुए सुझावों पर तत्काल विचार-विमर्श करने और परिस्थिति में सुधार लाने का आग्रह किया गया है। कामगार सचिव व आयुक्त के साथ यूनियन की मीटिंग की मांग भी की गयी है। इस पत्र के साथ 10 बिंदुओं पर ध्यान भी कामगार मन्त्री का दिलाया गया है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
मुंबई
9322411335

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0 Comments

  1. मंगेश विश्वासराव

    December 7, 2016 at 1:32 pm

    इस मिलिभगत को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखना चाहिए. करदेकर मॅडम एक संघर्ष करने वाली पत्रकार हैं. सबने उनका साथ देना चाहिए. लडते रहो. जीत अपनीही होगी.

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