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मजीठिया वेतनमान : भास्कर और राजस्थान पत्रिका ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए झूठे जवाब

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में देश भर के पत्रकारों के भविष्य से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड के मामले  महत्वपूर्ण सुनवाई की तिथि अब चार-पांच दिन दूर है। इसके साथ ही मीडिया मालिकों ने पेशबंदी तेज कर दी है। पत्रकारों का हक मारने के लिए वे कानूनी स्तर पर तरह तरह की कागजी फरेब में लगे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक गत दिनो सुप्रीम कोर्ट में दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका ने अपने झूठे जवाब दाखिल करते हुए अदालत को बताया है कि उन्होंने अप्रैल 2014 से अपने यहां मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू कर दी हैं। उन्होंने यह भी सफेद झूठ बयान किया है कि मजीठिया की धारा 20-जी के अनुसार उनके संस्थान के सभी मीडिया कर्मियों ने प्रबंधन को लिख कर दे दिया है कि वे पुराने वेतनमान से संतुष्ट हैं। इसके पीछे मंशा ये साबित करने की है कि जो मीडिया कर्मी कोर्ट नहीं गए हैं, उन्हें मजीठिया वेतनमान नहीं मिलेगा। बाकी कर्मचारियों का काम प्रबंधकीय प्रकृति का है, इसलिए वे मजीठिया वेतनमान के हकदार नहीं हैं।

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में देश भर के पत्रकारों के भविष्य से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड के मामले  महत्वपूर्ण सुनवाई की तिथि अब चार-पांच दिन दूर है। इसके साथ ही मीडिया मालिकों ने पेशबंदी तेज कर दी है। पत्रकारों का हक मारने के लिए वे कानूनी स्तर पर तरह तरह की कागजी फरेब में लगे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक गत दिनो सुप्रीम कोर्ट में दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका ने अपने झूठे जवाब दाखिल करते हुए अदालत को बताया है कि उन्होंने अप्रैल 2014 से अपने यहां मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू कर दी हैं। उन्होंने यह भी सफेद झूठ बयान किया है कि मजीठिया की धारा 20-जी के अनुसार उनके संस्थान के सभी मीडिया कर्मियों ने प्रबंधन को लिख कर दे दिया है कि वे पुराने वेतनमान से संतुष्ट हैं। इसके पीछे मंशा ये साबित करने की है कि जो मीडिया कर्मी कोर्ट नहीं गए हैं, उन्हें मजीठिया वेतनमान नहीं मिलेगा। बाकी कर्मचारियों का काम प्रबंधकीय प्रकृति का है, इसलिए वे मजीठिया वेतनमान के हकदार नहीं हैं।

 

….और ये रहा राजस्थान पत्रिका के सफेद झूठ का दावा 

सूत्रों के मुताबिक अपने दाखिल जवाब में दोनो अखबार मालिकों ने ये भी कहा है कि मजीठिया वेतनमान दिलाने का काम सुप्रीम कोर्ट का नहीं है। यह काम तो लेबर कोर्ट का है। इसलिए याचिकाकर्ता वहीं से अपने मामले पर फैसला लें। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल उपरोक्त जवाब में गुलाब कोठारी और निहार कोठारी को पार्टी बनाया गया है। यह नियमतः गलत है। कम्पनी के ऐसे सभी कामों के लिए एच पी तिवाड़ी जिम्मेदार हैं। 

सुप्रीम कोर्ट में देश भर के पत्रकारों के आर्थिक हितों की लड़ाई लड़ रहे संगठनों ने आह्वान किया है कि ‘साथियों, अब जवाब तैयार करना है। जवाब सभी को मिलकर तैयार करना है। आप सभी के सहयोग की जरूरत पड़ेगी। किसी भी कीमत पर पीछे न हटें। मालिकान को ये लड़ाई हारनी ही हारनी है। बताया गया है कि गुलाब कोठारी और निहार कोठारी को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और जेल जाने से बचाने के लिए एचपी तिवाड़ी को बलि का बकरा बनाया गया है। राजस्थान पत्रिका का जवाब झूठ के पुलिंदे के सिवा और कुछ नहीं। पत्रकारों ने इसका भी करारा जवाब देने की तैयारी कर ली है। पत्रिका प्रबंधन कुछ एक कर्मचारियों को 20 प्रतिशत वेतन वृद्धि से फुसलाकर उनके हक मार जाना चाहता है लेकिन वह अपनी चाल में कामयाब होने से रहा।   

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1 Comment

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  1. Bhupendra Pratibaddh

    April 24, 2015 at 10:15 am

    ताजातरीन जानकारी के अनुसार दैनिक भास्कर ने अभी तक अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नहीं किया है। दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, प्रभात खबर और इंडियन एक्सप्रेस मालिकान ने अपने जवाब सुप्रीम कोर्ट में जमा करा दिए हैं।

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