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अदाणी के एनडीटीवी से निकले इन पुराने चेहरों को एक ‘ओल्ड NDTV यूट्यूबर संघ’ बना लेना चाहिए!

NDTV, जो कभी भारतीय टेलीविज़न पत्रकारिता का ‘ट्रेनिंग स्कूल’ माना जाता था, अब धीरे-धीरे यूट्यूब यूनिवर्सिटी का ‘अलमाइटर’ बनता जा रहा है। कारण साफ है — NDTV से जुड़े तमाम पुराने चेहरे अब अलग-अलग यूट्यूब चैनलों के ज़रिए अपने पत्रकारिता के जुनून को आगे बढ़ा रहे हैं।

रवीश कुमार से लेकर अभिग्यान प्रकाश, संकेत उपाध्याय, निधि राजदान, सौरभ शुक्ला, शरद शर्मा, सुशील मोहापात्रा और यहां तक कि कैमरे के पीछे काम करने वाले कई वरिष्ठ पत्रकार — NDTV छोड़ने के बाद अब डिजिटल मीडिया की इस आंधी में अपने-अपने जहाज लिए सवार हो चुके हैं। कोई अपने नाम से चैनल चला रहा है, कोई स्वतंत्र मंच बनाकर काम कर रहा है, तो कोई किसी संस्थान से जुड़कर लेकिन यूट्यूब के ज़रिए पहुंच बना रहा है।

रवीश कुमार के “रवीश कुमार ऑफिशियल” चैनल ने तो आते ही तहलका मचा दिया था। महज़ हफ़्तों में लाखों सब्सक्राइबर और मिलियनों व्यूज़ ने ये साफ कर दिया कि NDTV से तो वो निकले, लेकिन NDTV वाला भरोसा और तेवर अब उनके नाम के साथ चिपक चुका है।

अभिग्यान प्रकाश, जो कभी स्टूडियो में सूट-बूट में धाराप्रवाह बोलते थे, अब यूट्यूब पर अपने खास अंदाज़ में जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं।

निधि राजदान, जो लंबे समय तक ‘Left, Right and Centre’ का चेहरा रहीं, अब स्वतंत्र टिप्पणीकार और विश्लेषक के रूप में डिजिटल माध्यम में सक्रिय हैं। वहीं सोनाल मेहरोत्रा कपूर, अरुण सिंह जैसे कुछ नए दौर के पत्रकार भी अपने-अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खबरों को ‘कूल अंदाज़’ में परोस रहे हैं।

NDTV की पहचान रही ‘गंभीर पत्रकारिता’ — जहाँ शोर से ज़्यादा विश्लेषण होता था — अब इन यूट्यूब चैनलों के ज़रिए दोबारा ज़िंदा होती दिख रही है। फर्क बस इतना है कि अब न कोई प्राइम टाइम की बंदिश है, न एड ब्रेक की बाधा।

कुछ पुराने NDTV कर्मी तो मज़ाक में कहने लगे हैं — अब समय आ गया है कि एक ‘ओल्ड NDTV यूट्यूबर संघ’ बना ही दिया जाए। इसके तहत ये सभी चेहरे एक मंच पर आएं, सहयोग करें, और डिजिटल पत्रकारिता के इस नए युग को एक संगठित रूप दें।

जहाँ एक ओर मेनस्ट्रीम मीडिया TRP और कॉरपोरेट दबाव के बीच पिसता दिख रहा है, वहीं यूट्यूब पर पत्रकारों का यह ‘पुनर्जन्म’ उम्मीद की एक नई किरण बन गया है।

NDTV भले आज नई मालिकियत, नई दिशा में जा रहा हो, लेकिन NDTV की आत्मा — गंभीर, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता — अब इन स्वतंत्र यूट्यूब चैनलों में सांस ले रही है।

क्या ये पुराने NDTV पत्रकार डिजिटल मीडिया में कोई सामूहिक क्रांति ला सकते हैं? फिलहाल तो दर्शक यही कह रहे हैं — “NDTV टू यूट्यूब: कंटेंट बदला नहीं, प्लेटफॉर्म बदल गया है!”

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