न्यूज़लांड्री में भड़ास की कहानी छप गई!

यशवंत सिंह-

27 वर्षीय आयुष तिवारी न्यूज़लांड्री के रिपोर्टर हैं। अंग्रेज़ी वाले पत्रकार। एक दिन इनका फ़ोन आया। इंटरव्यू टाइप कुछ करने के वास्ते मिलने के लिए।

नोएडा वाले मेरे किराए के घर पर ही हम दोनों की बैठकी हो गई। लगभग चार घंटे तक बातचीत हुई।

उनने सब पूछा, हमने कूद कूद कर हर कुछ बता दिया।

क्या छिपाना। ये आइफ़ोन ये टच लैपटॉप… सब गिफ़्ट का माल है। कुछ पत्रकार साथी लगातार सपोर्ट करते हैं। कुछ ग़ैर पत्रकार मित्र लगातार फंड करते हैं। हमारी ज़रूरतें इतनी नहीं हैं कि हम बड़े सेठों और लीचड़ सरकारों का पैसा पकड़ें और फिर रेवेन्यू बढ़ाने के नाम पर दर दर कंप्रोमाइज करते फिरें। जिसने श्रद्धा भाव से चढ़ावा चढ़ाया उसका क़ुबूल।

भड़ास के बनने की कहानी और मेरी अनप्रिडक्टबल जिंदगानी, जिसमें अच्छे बुरे सच्चे स्याह नीले पीले लाल सब रंग हैं, भाई आयुष ने अपने तरीक़े से दर्ज किया।

सारी बातें लिखी भी नहीं जा सकतीं। बहुत कुछ छूट गया, बहुत कुछ छप गया। थोड़ी सी पी शराब थोड़ी उछाल दी! इसी भाव से पढ़िए।

वैसे, ये मुझे कैसा लगा?

अंग्रेज़ी में लिखा है न! इसलिए जो भी है, अच्छा है 🙂

लेकिन आपको कैसा लगा?

पढ़िए, फिर बताइये… लिंक ये है-

https://www.newslaundry.com/2022/07/07/bhadas4media-hindi-media-watchdog-that-thrives-on-guts-and-gossip

यशवंत की उपरोक्त पोस्ट पर आई प्रतिक्रियाओं को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें-

https://www.facebook.com/100002252487400/posts/pfbid02y8rdqNi313Jn9cXJYmeG6DNM5qB6jiUgW6vmrXGATDskapr686qCAci6LQ8gavz3l/?d=n



भड़ास का ऐसे करें भला- Donate

भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849



One comment on “न्यूज़लांड्री में भड़ास की कहानी छप गई!”

  • Dr Ashok Kumar Sharma says:

    मैं तो इस पोस्ट पर, न्यूज़ लॉन्ड्री में ही, अंग्रेजी में बहुत लंबी टिप्पणी लिख चुका था, लेकिन जब मैं उसे सबमिट करने लगा तब न्यूज़ लॉन्ड्री ने मुझसे तीन हज़ार रुपए मांग लिए। मेरे पास नहीं थे इसलिए पोस्ट स्वीकार नहीं हुई।

    मैंने सोचा कि 7 बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता 27 बेस्ट सेलिंग किताबों का लेखक, पत्रकारिता, जनसंपर्क तथा मीडिया प्रबंधन में बहुत लंबी पारी खेलने के साथ ही, देश के विश्वविद्यालयों में अनेक पत्रकारिता एवं जनसंपर्क पाठ्यक्रमों का विजिटिंग फैकल्टी होने की नाते, मैं न्यूजलॉन्ड्री के कंट्रीब्यूटर के तौर पर ज्वाइन कर लेता हूं और इस तरह मेरे ₹3000 बच जाएंगे और मैं यशवंत की पोस्ट पर अपनी टिप्पणी भी लिख सकूंगा। लेकिन वहां पर भी झोल था।

    आपको समझ में ना आए तो आप न्यूज लॉन्ड्री की किसी पोस्ट पर टिप्पणी करके देखिए या कंट्रीब्यूटर के रूप में फुल टाइम ज्वाइन करने की सोचिए।

    दरअसल न्यूजलॉन्ड्री के बारे में मेरी धारणा जो बनी, वह यशवंत की तारीफ़ वाले इस वाकए से मेल नहीं खाती। मुझे नहीं मालूम कि कितने लोग न्यूज़ लॉन्ड्री को ₹3000 सालाना या मासिक शुल्क भुगतान करके उसके नियमित ग्राहक बनने सब्सक्रिप्शन ले लेते हैं, परंतु मेरी शुभकामनाएं दिल से उनके साथ हैं। ये रहा मेरा जवाबी पोस्ट, जो भुगतान ना होने के कारण छपा नहीं :

    Dear Ayush, my blessings and congratulations for such a wonderful write up on Yashwant Singh, a selfless man who is a visionary, a missionary and a whole time, free for all sort of mercenary without bias or selfish motives.

    I have a 40 years blotless outstanding and incomparable career in media management, information administration, and government relations. And I know the dangers of praising a person like Yashwant Singh who work full time to make enemies without any personal reasons, fighting with diverse sized media dinasours for aggrieved media fraternity and harvesting thankless friends despite doing everything for them. Yet, he is a self contented satisfied media Saint.

    Yashwant never hides what he’s not and never boasts what he actually have become. You never know, when you get good opportunity, and I firmly believe I have some more innings to play post retirement. And if God willing I get any chance working for the Union Government, I’ll ensure, Yashwant gets a Padma Award without fail.

    I want to conclude that promoting, encouraging and helping stalwarts like Yashwant Singh will make our journalism flourish more, prosper more strengthen more.

    Lastly, my best wishes for you all at NewsLaundry!

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