मजीठिया देने में तो अखबारों की घिग्घी बंध जा रही मगर आईआरएस रिपोर्ट आने के बाद पढ़ने लगे ‘नंबर-1’ होने का पहाड़ा

मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें लागूं करने में तो घिग्घी बंध जाती है लेकिन इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) 2014 के आंकड़े जारी होने के बाद कारपोरेट मीडिया में बाजार कब्जियाने के लिए शब्दों की बाजीगरी के साथ नंबर-1 से टॉप-10 तक की दावेदारियां हो रही हैं। स्वार्थ इतना भर है कि बड़े बड़े दावे कर किस तरह एक-दूसरे को दांव देते हुए विज्ञापन बाजार को अपने-अपने पाले में खींचा-घसीटा जाए। मसलन, रिपोर्ट आने के बाद दैनिक हिंदुस्तान ने पहले पेज पर अपनी पीठ इन शब्दों के साथ थपथपा ली – ‘हिंदुस्तान की बादशाहत बरकरार, देश का दूसरा सबसे बड़ा अखबार।’ अंग्रेजी के हिंदुस्तान टाइम ने फ्रंट पेज पर लिखा- ‘HT is No-1.’ राजस्थान पत्रिका ने विज्ञापन के माध्यम से लिखा- ‘2 लाख 40 हजार पाठकों ने दैनिक भास्कर को छोड़ा।’ और तो और, सातवें से नौवें नंबर पर जा चुके ‘हरिभूमि’ ने कुछ इस तरह अपनी पीठ ठोंकी – ‘हरिभूमि एक बार फिर से देश में सर्वाधिक पढ़े जाने वाले टॉप 10 हिंदी समाचार पत्रों में काबिज है।’ फिलहाल, इतना तो सच है कि सभीन अखबारों की पाठक संख्या में इजाफा हुआ है और मीडिया इंडस्ट्री इंडिया में ग्रोथ कर रही है।

 

उल्लेखनीय है कि मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल (एमआरयूसी) के इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) 2014 के आंकड़े के मुताबिक इस बार विभिन्न श्रेणियों के प्रकाशनों का क्रम जस का तस रहा है। सर्वे में पूरा सैम्पल 2.38 लाख पाठकों का रहा है। शीर्ष हिंदी समाचारपत्रों के रूप में दैनिक जागरण, हिंदुस्तान और दैनिक भास्कर की श्रेष्ठता बरकरार रही है। सभी श्रेणियों में मीडिया की खपत बढ़ने का दावा किया गया है। अपने-अपने प्रसार क्षेत्र में दैनिक जागरण (हिंदी), टाइम्स ऑफ इंडिया (अंग्रेज़ी) और मलयालम मनोरमा (क्षेत्रीय भाषाओं) पहले नंबर पर रहे। हरिभूमि अखबार सातवें नंबर से खिसक कर नौवें नंबर पर पहुंच गया है। शीर्ष की पत्रिकाओं में इंडिया टुडे (हिंदी) चौथे स्थान पर पहुंच गई है। सर्वे पीरिएड में प्रिंट मीडिया की खपत 197.4 लाख बढ़कर 3015.7 लाख पर और टेलिविज़न सेक्टर की खपत 185 लाख बढ़कर 6211.2 लाख पर पहुंच गई है। शीर्ष के क्षेत्रीय दैनिक अखबार क्षेत्रीय भाषा के दैनिक समाचार पत्रों में भी यही स्थिति पाई गई है। संदेश (गुजराती) और मातृभूमि (मलयालम) को छोड़कर ज्यादातर अखबारों की प्रति अंक पाठकों की संख्या (एआईआर) में वृद्धि हुई है। थोड़ी गिरावट के बावजूद मातृभूमि, तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्रीय दैनिक बना रहा, जबकि संदेश पिछले आईआरएस के आठवें स्थान से खिसककर इस बार नौवें स्थान पर पहुंच गया।

सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ‘हरिभूमि’ लिखता है – ‘इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) के 2014 के ताजा सर्वे में हरिभूमि एक बार फिर से देश में सर्वाधिक पढ़े जाने वाले टॉप 10 हिंदी समाचार पत्रों में काबिज है। हरिभूमि इस श्रेणी में नौवें स्थान पर विराजमान है। आईआरएस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश में हरिभूमि के पाठकों की संख्या 25 लाख 71 हजार है। इनमें हरियाणा के 9 लाख 68 हजार पाठक भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ में 13 लाख 55 हजार पाठक संख्या के साथ हरिभूमि नं.1 के स्थान पर बरकरार है। इतना ही नहीं यहां पाठकों की संख्या में पिछली रिपोर्ट के मुकाबले 61 हजार की उल्लेखनीय वृद्धि भी की है। मध्यप्रदेश में 2 लाख 41 हजार पाठकों के साथ हरिभूमि अपनी सशक्त उपस्थिति बना कर प्रगति के पथ पर अनवरत बढ़ रहा है। पाठकों से सीधे जुड़ाव और उनके हितों की आवाज बुलंद करते रहने के कारण हरिभूमि पाठकों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है।हरियाणा में हरिभूमि ने 9 लाख 68 हजार पाठकों के साथ तीसरा स्थान पाया है। दैनिक भास्कर के 13 लाख 34 हजार पाठक, दैनिक जागरण के 13 लाख 2 हजार पाठक और पंजाब केसरी के 8 लाख 72 हजार पाठक हैं।’

प्रभात खबर लिखता है – ‘ बिहार, झारखंड में प्रभात खबर सबसे तेज बढ़ता हिंदी अखबार है. इंडियन रीडरशिप सर्वे (आइआरएस) 2014 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रभात खबर ने सबसे ज्यादा दो लाख 75 हजार नये पाठकों के साथ अपनी पाठक संख्या में 11 फीसदी का इजाफा किया है. जबकि हिंदुस्तान की पाठक संख्या में वृद्धि नगण्य रही और दैनिक जागरण ने नौ फीसदी की वृद्धि ही दर्ज की.  रांची जिले में प्रभात खबर 27 फीसदी पाठक वृद्धि दर के साथ अपने प्रतिद्वंद्वी अखबारों से बहुत आगे है. जबकि हिंदुस्तान की पाठक संख्या छह फीसदी कम हुई, दैनिक जागरण की पाठक संख्या 11 फीसदी कम हुई. जमशेदपुर(अरबन एरिया) में प्रभात खबर ने 29 हजार नये पाठकों के साथ अपनी पाठक संख्या में 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की.  सिर्फ बिहार में देखें, तो प्रभात खबर अपनी पाठक संख्या में वृद्धि दर के हिसाब से अपने प्रतिद्वंद्वी अखबारों से बहुत आगे है. प्रभात खबर ने बिहार में तीन लाख दो हजार नये पाठकों को अपने साथ जोड़ा है. बिहार में प्रभात खबर की पाठक वृद्धि दर 21 फीसदी रही, जबकि हिंदुस्तान की पाठक संख्या वृद्धि तीन फीसदी रही.’ 

अंग्रेजी अखबार एचटी ने लिखा – ‘Delhi-NCR vote decisively: HT is No 1, yet again. In a sign that India’s Capital does not quite believe in fractured mandates, Delhi-NCR region has voted for Hindustan Times as the city’s paper of choice — reinforcing its status as the most widely read newspaper yet again. HT has not only grown in absolute numbers, with over 23 lakh readers in the Capital now, but has also increased its lead over its closest competitor, Times of India, in the past year, to nearly 6.5 lakh readers.

‘These are some of the findings of the Indian Readership Survey (IRS) 2014, released on Friday. IRS has also confirmed HT’s status as the second largest paper in Mumbai. With 14.35 lakh readers, it is close to two thirds of TOI’s readership in the city — and is bigger than Mumbai Mirror and DNA put together. HT is also the Number 2 paper in Punjab/Chandigarh – with a 31% jump in readership to 2.1 lakh.

‘Hindustan, HT Media’s Hindi offering, has a staggering 1.47 crore daily readers, comfortably making it the second largest newspaper in the country, while Mint, the second biggest business paper in the country, has registered a 12% growth, and crossed the 3 lakh figure in readership.

‘The IRS, released by the Media Research Users Council (MRUC), is the largest and most credible survey of its kind in the country, and incorporates innovative changes introduced last year in its methodology to make it more scientific and secure – it now has a more representative sample size; it is based on a computerized rather than pen and paper method; it asks readers what they have read in the past month rather than the past year; and it is based on 2011 census figures.

‘The latest IRS findings confirm HT’s dominance on other parameters as well, especially the quality of the readership. The latest IRS findings confirm HT’s dominance on other parameters as well, especially the quality of the readership.

‘In Delhi-NCR alone, there are over 18 lakh readers who only read HT and not ToI; and HT’s lead is 5.8 lakh among the most educated and affluent segment of the market, termed New Consumer Classification System (NCCS)-A in industry circles. In Mumbai, too, over nine lakh readers have opted to read only HT and not ToI – and 70% of HT’s readers are from NCCS-A segment. Mint’s appeal in this premier readership segment is exceptionally strong, with 51% readers belonging to the NCCS A1 and 87% to NCCS A segment.

‘Hindustan continues to be Number 1 in Bihar, Jharkhand and Uttarakhand and a strong Number 2 in Uttar Pradesh and Delhi. If the five Hindi states are taken together, Hindustan is the largest publication, ahead of both Dainik Jagran (with its 1.39 crore readers) and Amar Ujala (67.3 lakh readers). HT’s success in the Capital is a reflection of its continued engagement with readers, through its journalism and civic campaigns. Clean My Delhi, HT for Delhi, HT for Gurgaon, HT for Noida and Ghaziabad, and now a new HT South Delhi raise issues that strike at the core of local concerns of readers.’

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