अंधेरे से उजाले की ओर पाक्षिक पत्रिका ‘शुक्लपक्ष’

निशिकांत ठाकुर : ‘शुक्लपक्ष’ पाक्षिक  पत्रिका का स्वरूप पूरी तरह से राजनीतिक होगा, लेकिन अन्य विषयों को कतई नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। मसलन- खेल, मनोरंजन, यूथ, धर्म-अध्यात्म, साहित्य, ज्योतिष, आधी आबादी, साइंस-टेक्नोलाजी, करियर, विदेश, बालजगत, बिजनेस-कारोबार, क्राइम से जुड़े आलेख पत्रिका में अनिवार्य रूप से समाहित होंगे, ताकि इसे समाज के हर वर्ग के साथ हर आयु-वर्ग एवं हर लिंग की पत्रिका बनाया जा सके। पत्रिका में हम ज्वलंत समस्याओं, यानी घटनाओं को छुएंगे जरूर, लेकिन यह महज रिपोर्ट नहीं होगी, बल्कि वर्तमान के जरिये भविष्य को फोकस करने वाले विश्लेषणात्मक आलेख होंगे, जिनकी पुष्टि तथ्य, आंकड़े, आकलन व संबंधित लोगों से बातचीत करेंगे। 

चूंकि यह एक राजनीतिक पत्रिका होगी, इसलिए राजनीतिक लेखों के जरिये देश की सियासत का नया रंग-रूप और अंदाज पेश करने की कोशिश की जाएगी। खास बात यह होगी कि हम पत्रिका में एक्सक्लूसिव और राजनीतिक विश्लेषण पर अधिक से अधिक फोकस करेंगे तथा विश्वसनीयता ही हमारा सबसे बड़ा हथियार होगा।

यह जिज्ञासा कि पत्रिका आम के लिए होगी या खास के लिए? इसका जवाब है कि हमारा पाठक खास और क्लास, दोनों वर्ग से होगा, लेकिन पत्रिका का कंटेंट खास होगा, ताकि आम लोगों को भी खास पत्रिका पढ़ने का अहसास हो सके। 

‘शुक्लपक्ष’ के नाम को लेकर भी यह जिज्ञासा है कि कहीं यह पत्रिका धर्म-अध्यात्म या ज्योतिष से जुड़ी तो नहीं! यहां स्पष्ट करना चाहूंगा कि ‘शुक्लपक्ष’ का तात्पर्य रोशनी, यानी उजाले से होता है। हम देश और समाज के हर स्याह पहलू पर पत्रकारीय कलम से रोशनी डालना चाहते हैं, यानी पत्रिका का मकसद अंधेरे से उजाले की ओर होगा। हम पत्रिका के आलेखों के जरिये देश और समाज में पैर पसार चुकी पारंपरिक वर्जनाओं को तोड़ने की कोशिश करेंगे।

हमें उम्मीद है कि आप लोगों की ओर से और भी महत्वपूर्ण सुझाव पेश किए जाएंगे। साथ ही सवालों का भी हार्दिक स्वागत।

‘शुक्लपक्ष’ संपादक निशिकांत ठाकुर से संपर्क : 9990053283



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