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सुख-दुख

पापी पुतिन का अंत नज़दीक आ रहा है!

विश्व दीपक-

रूस के आधुनिक जार पुतिन के विरोध में कल रूस की जनता ने अलग-अलग शहरों में जोरदार प्रदर्शन किया. रूस की जनता पुतिन को “हत्यारा” बोल रही लेकिन भारत के गुलाम हवा का रुख भांपने में लगे हैं.

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक पुतिन की पुलिस ने करीब 1800 लोगों को हिरासत में लिया है कल. रूस के लिहाज से यह संख्या कम नहीं. रूस की प्रगतिशील, लेनिनवादी जनता उक्रेन के साथ खड़ी है.

आने वाले वक्त में रूस की जनता और वहां के शासक वर्ग के बीज संघर्ष बढ़ेगा. रूस की डिफेंस लॉबी के नुमाइंदे पुतिन की लेजिटिमेसी पहले ही खत्म हो चुकी थी. वो हत्याएं करवाकर सत्ता पर बना हुआ है. लेकिन कब तक बना रहेगा?

जनता उसकी तैयार की हुई oligarchY को लात मारकर ढहा देगी. ढहा देना चाहिए. पापी पुतिन का अंत नज़दीक आ रहा है. पुतिन के अंधभक्त, इतिहास के गुलाम चाहें तो अपना stand बदल सकते हैं.

यूक्रेन से आ रही तस्वीरें. एकाध बॉम्ब अगर मॉस्को में गिर जाए तो समझ आ जाएगा. उसके पहले नहीं आएगा.

हैरान हूं उन लोगों की असंवेदनशीलता पर जो बात-बात पर मानव अधिकार, शांति, न्याय प्रिय विश्व व्यवस्था का नारा उछालते थे.

पिछले कई सालों में जिन्हें हमने जंतर-मंतर से लेकर, जेएनयू के गंगा ढाबा तक और अमेरिकी दूतावास के सामने एक कॉल पर तख्ती बनाकर प्रदर्शन करते देखा है, उनमें से अधिकतर खामोश हैं या इफ-बट की भाषा में बात कर रहे.

खासतौर से JNU इंटीलीजेंसिया की प्रतिक्रिया हैरान करने वाली है इस मुद्दे पर. फिलिस्तीन से लेकर वियतनाम तक पोस्टर छापने वालों में से
•आधे चुप हैं,
•आधे रूस के आधुनिक जार सनकी पुतिन के समर्थन में कचरा तर्क दे रहे,
•आधे दावा कर रहे हैं कि उन्हें तो कुछ पता ही नहीं
पहले पांच साल पीएचडी करेंगे फिर लिखेंगे इस मुद्दे पर.

सिर्फ एमएल को छोड़कर किसी ने अभी तक साफ स्टैंड नहीं लिया. शबनम हाशमी ने कल एक कॉल दिया है यूक्रेन पर रूसी हमले के विरोध में. हिजाब विवाद पर भी उनका स्टैंड कबील e तारीफ़ था.

मानवीय, तार्किक और न्याय प्रिय बनना है तो कट्टर “भक्ति” छोड़नी पड़ेगी. चाहे लेफ्ट की हो या राइट की. सबसे ज्यादा धूर्तता, सीपीआईएम और एसएफआई वाले कर रहे. सीपीआई का कुछ कहना या ना कहना कोई मतलब नहीं रखता. शायद खुद उनके लिए भी. वर्ना अब तक कम से कम एक बयान तो जारी ही कर सकते थे.

दुनिया का का हर तानशाह झूठ बोलता है. झूठ नहीं बोलेगा तो तानाशाही नहीं चल पाएगी. हिटलर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. अब रूस का आधुनिक जार पुतिन उसकी जगह ले चुका है.

पहले पुतिन ने पहले कहा कि उसे नाटो के विस्तार से दिक्कत है. इसलिए उसने यूक्रेन पर हमला किया. यहां तक तो ठीक था. उसने, यूक्रेन के दो अलग क्षेत्रों को अलग देशों के रूप में मान्यता भी दे दी. यहां तक भी बर्दाश्त किया गया.

लेकिन इतने भर से उसका काम बनना नही था. लिहाजा इस सनकी तानाशाह ने यह कहना शुरू किया कि यूक्रेन के राष्ट्रपति, वोलोडोमिर जेलेंस्की का नाज़ियों से संबंध है. इसलिए उसे कीव पर हमला करना जरूरी है ताकि वह कीव को मुक्त करा सके. पुतिन के इस झूठ को भारत में आनंद पटवर्धन जैसे लोगों ने आगे बढ़ाया.

पुतिन को यह नहीं पता की जेलेंस्की यहूदी है. जेलेंस्की का यहूदियों की उसी जाति से संबंध है जिसके पूर्वजों को हिटलर ने गैस चैंबर में भून डाला था.

सोचिए तानाशाह कितना खोखला, अनपढ़ और झूठा होता है.

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