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ब्लैकमेलिंग के तीन लाख रुपये देने से मना करने पर पत्रकार ने धमकाया- अब तो तेरे से पांच लाख लूंगा (सुनें टेप)

Yashwant Singh :  ये पत्रकार है या माफिया…  सच कहूं तो जब पहली बार ये टेप सुना तो मैं खुद सहम गया. कोई पत्रकार इतना ढीठ / इतना आपराधिक प्रवृत्ति का कैसे हो सकता है. पहली बार ऐसा कोई पत्रकार सुन रहा हूं जो तीन लाख रुपये की रंगदारी / ब्लैकमेलिंग न देने वाले से कह रहा है कि अब तो पांच लाख लूंगा…

Yashwant Singh :  ये पत्रकार है या माफिया…  सच कहूं तो जब पहली बार ये टेप सुना तो मैं खुद सहम गया. कोई पत्रकार इतना ढीठ / इतना आपराधिक प्रवृत्ति का कैसे हो सकता है. पहली बार ऐसा कोई पत्रकार सुन रहा हूं जो तीन लाख रुपये की रंगदारी / ब्लैकमेलिंग न देने वाले से कह रहा है कि अब तो पांच लाख लूंगा…

बाप रे… लगने लगा है कि पत्रकारिता अब माफियागिरी में तब्दील होने लगी है… ये टेप मेरे ह्वाट्सअप पर किसी ने भेजा है… किस जगह का है, कौन पत्रकार है, यह अभी पता नहीं चल सका है… कृपया किसी को मालूम हो तो मेरी मदद करे ताकि इस भेड़िए की शिनाख्त हो सके और इस पर थूका जा सके…

टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें : https://youtu.be/cQEJ7vH6YkI

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Pankaj Gupta यशवंत भाई ये कोई नई बात नही है हर जिले हर कस्बे में इस तरह के लोग मिल जायेंगे जो सिर्फ और सिर्फ ब्लैक मेलिंग ही करते है अफ़सोस तो इस बात पर होता है कि बड़े बड़े बैनर चाहे वो प्रिंट से हो या इलेक्ट्रॉनिक से उन्हें अपने यहाँ स्थान दिए हुए है

Mahabir Singh Khatri ये तो छोटा है, 100 करोड़ वाले का क्या हुआ, अब supplements or antibiotic सॆ काम नहीं चलेगा, surgery करनी पड़ेगी.

Syed Mazhar Husain यशवंत भाई ऐसे माफिया किस्म के लोग जिन्होंने पत्रकारिता का चोला ओढ़ रक्खा है और जिनका काम ब्लैकमेलिंग के सिवा कुछ भी नहीं है बहुतायत है

Virendra Pandey मजहर चाचा, आपके शहर ऐसा कुछ ज्यादा ही है।

Syed Mazhar Husain बिलकुल आप भी जानते फिर लिख भेजिए यशवंत भाई को मैं तो दूर हु वरना लिखता ज़रूर

Yashwant Singh बात लिखने से सिर्फ नहीं बनेगी. बिना प्रमाण कोई भी किसी लिखे को खारिज कर मानहानि बता सकता है. इनका इलाज ऐसे टेप ही हैं. स्टिंग कराइए.

Virendra Pandey ओके बॉस, मैं आपको भेजूंगा स्टिंग क्लिप ।

Vivek Dutt Mathuria कुछ अपवाद स्वरूप भले लोगों की बात छोड़ दी जाए तो पत्रकारिता दलाली के लिए बेहतर पेशा साबित हो रहा है। नौकरशाही दलाल पत्रकारों को अपने संसाधन के रूप में उपयोग करना सीख गई है…. पूरा सूचनातंत्र उनकी मुट्ठी में है। दलाल पत्रकार जनद्रोही, लोकतंत्रद्रोही और संविधानद्रोही हैं जो देश समाज को लूटने वाले भ्रष्ट तंत्र के जड़ खरीद गुलाम है…. उनके कुकृत्यों से कोई मरे उनका कोई लेना-देना नहीं…बस दलाली न मर जाए

Singhasan Chauhan वाह रे पत्रकारिता …..

Neelesh Misra My god.

Sanjaya Kumar Singh इससे तो ‘पत्रकारिता’ सीखनी पड़ेगी। उधार सीखाए तो कमाएगा। लोग कमाकर डबल चुकाएंगे। तीन लाख देने में आना-कानी करने पर सीधा पांच लाख कर दिया। बता रहा है कि पुलिस प्रशासन सब पत्रकारों के अंडर में काम करते हैं – बड़ा वाला पत्रकार है ये तो …

Shashank Mishra जहाँ तक मेरा मानना है ये पत्रकार नहीं हो सकता ….

Neeraj Sharma Kon patrkar hai..

Ganesh Dubey Sahaj हर घर रावण बैठा, इतने राम कहाँ से लाऊं

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