भवानी प्रसाद मिश्र की कविता पढ़ें- ‘आज का दैनिक’

आज का दैनिक


भवानी प्रसाद मिश्र


‘देना अखबार देना’

साथी ने बिना कुछ बोले पढ़ना बंद करके

हिन्दी का दैनिक वह,

मुझ तक बढ़ा दिया।

पहले ही नज़र जो पड़ी

देखा रणचंडी पर

किसी भक्त दल ने

आज सहस्रों को चढ़ा दिया।

पन्ना उलटकर देखा

उसमें भी लिखा था,

मरने का, मारने का

जीतने का, हारने का

करुणाहीन स्वर में

कहीं धमकी थी मारने की

और यदि शरण में आओ

शेखी थी, तारने की

…. पूरा पढ़ने के लिए नीचे देखें-

  • भड़ास की पत्रकारिता को जिंदा रखने के लिए आपसे सहयोग अपेक्षित है- SUPPORT

 

 

  • भड़ास तक खबरें-सूचनाएं इस मेल के जरिए पहुंचाएं- bhadas4media@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *