‘लखनऊ के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के कारण पूरे देश में हमारे यूपी के पत्रकारों की भद्द पिट रही है’

मेरे प्रिय साथियों

प्रभात कुमार त्रिपाठी का अपने सभी 614 मान्यता प्राप्त भाई और बहनों को नमस्कार…

मैंने कल दिन भर लखनऊ एनेक्सी से लेकर अपने सभी साथियों के बीच एक प्रस्ताव रखा जो पत्रकार एकता के लिये अहम प्रस्ताव था जिसे भारी मतों से देर शाम साथियों ने स्वीकार भी किया। प्रस्ताव था कि मै इस बात को लेकर दुखी हूं कि मुट्ठी पर वरिष्ठ पत्रकारों के जिद्द के चलते 40 सालों से चली आ रही पत्रकार कमेटी का दो जगह अलग-अलग चुनाव कराया जा रहा है जो अनुचित है। कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के कारण पूरे देश में हमारे यूपी के पत्रकारों की भद्द पिट रही है। इसका लाभ नौकरशाह और राजनेता उठाने में लग गये हैं। चर्चाएं भी हो रही हैं।

कुछ समाचार पत्रों में चटकारे लेकर इस पूरे घटनाक्रम की चर्चा मिर्च मसाला लगाकर की जा रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरा एक प्रयास अभी तक है कि एक चुनाव हो और सभी 614 पत्रकार इस पर्व में एक साथ भाग ले। जिसका जनाधार हो वह फिर चुनाव लड़कर कमेटी का सदस्य, सचिव, उपाध्यक्ष संयुक्त सचिव व अध्यक्ष बन जाये। यह समिति सभी सम्मानित पत्रकार भाईयों के योगदान से चल रही है। इसमें कोई छोटा या कोई बड़ा नहीं है।  कुछ सीनियरों की इस बात की पहल करनी चाहिये कि अभी भी कमेटी नहीं बटें।

मैने हमेशा से यही प्रयास किया है कि सभी भाईयों को एक समान समझते हुये कमेटी के सीनियर सदस्य उनकी महत्वता को महत्व दे। लेकिन मैं पिछले 22 सालों से देख रहा हूं कि यूपी की पत्रकारित में सीनियर बनाम जूनियर की खाई बढती जा रही है। कुछ लोग लम्बी लकीर खींच कर छोटो को छोटा समझते है। और इस बात का फर्क डाल रहे है कि फलां पत्रकार चैनल का है फला फोटोग्राफर का है फला प्रिंट मीडिया से है। फला कथित पत्रकार है। इसी कारण आज यह स्थित आ गई है कि हम बुद्वजीवी वर्ग से होकर भी अपने आपको नीचे गिराते जा रहे है। और हम दोराहे पर आकर खड़े हो गये है। जो चिंता का विषय हम सभी 614 पत्रकारों के लिये है।

मैं कल एनेक्सी में मीडिया सेंटर में गया तो कुछ लोगों ने कहा आप फला कमेटी की तरफ से आये है अगर आपमें हिम्मत हो तो आप यहां पर्चा दखिल करो। मेरे कुछ साथियों में नावेद, भरत सिंह, अविनाथ शुक्ता, उमेश चन्द्र मिश्रा सहित कामरान और कई साथी इस बात के साक्षी हैं। मैंने कुछ लोगों द्वारा आरोपित होने के बाद सभी की भावना और पत्रकार एकता बनी रहे, उसके कारण दूसरी जगह भी अध्यक्ष के पद पर पर्चा भर दिया। मैं अपने साथियों को यह बताना चाहता हूं कि पर्चा भरने का यह मकसद था कि अभी भी दो कमेटी एक हो जाये और एक फोरम में आकर हमेशा की तरह चुनाव एकजुटता से कराये।

मुझे आप लोग भले पसंद न करते हों लेकिन मैं हमेशा आप सभी की बात को सच्चाई से रखता चला आया हूं। चुनाव जीतकर कोई मैं प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री नहीं बन जाऊंगा। पत्रकार ही रहूंगा। आपके बीच रहूंगा उसी स्थित मे रहूंगा। मैं हमेशा सच का साथ देता आया हूं। अपनी बात को बेबाक रखता आया हूं। अब आप लोग पसंद करें या न करें। मैं पत्रकारिता के गिरते स्तर को सुधारना चाहता हूं। मैं अपने फोरम में अपने 614 साथियों के बीच अपनी बात रखना चाहता हूं। मेरे लिये कोई छोटा और कोई बड़ा नहीं है। जिसका सम्मान करना है वह दिल में है। मैं दिल से बात करना और आपका सम्मान करना चाहता हूं। जो दिल में है वहीं दिमाक में है। मैं दोहरे मापदंड को अपना कर अपना उल्लू सीधा नहीं करना चाहता। एक मौका चाहता हूं कि आप लोगों की सेवा मन से कर सकूं। मैं अगर एक चुनाव और एकजुटता चाहता हूं तो इसमें सभी की भलाई है।

कुछ सीनियर पत्रकार अगर इस कमेटी को अपनी जिद्द से हाईजैक करके उन 605 लोगों को हक को मारना चाहते हैं तो मैं यह नहीं होने दूंगा। मै अपनी कुर्बानी देकर अगर सब एक हो जाये तो मैं अपना पर्चा जो मैंने अपने दोनों जगह से भरा है, वापस लेकर पत्रकार एकजुटता के लिये चुनाव मैदान से स्वेच्छा से हट जाउंगा। मेरे लिये चुनाव होना ही काफी है चुनाव लड़ना नहीं। सिर्फ मेरे लिये मेरे साथियों का सम्मान बड़ा है। आज जो चर्चाएं यूपी की पत्रकारिता को लेकर हो रही है, उससे मैं बहुत चिंतित हूं। मुझे कोई चुनाव जीतकर सूचना आयुक्त नहीं बनना है न ही अपनी पहचान में कोई इजाफा करना है।

प्रभात को आप सभी भाईयों का स्नेह मिलता रहे वही काफी है। मैं यह अपील इसलिये सभी भाईयों से कर रहा हूं कि अब आप लोग ही इस बात का फैसला करें कि कौन गलत है कौन सही है। क्यों कुछ सीनियर अपनी एक दूसरे से दुश्मनी इस फोरम में निकाल रहे हैं। दुश्मनी निकालनी है तो बाहर निकालें। उन सभी नये साथियों के हक पर डाका क्यों डाल रहे हैं जो अभी इस फोरम में नये
साथी के रूप मे जुड़े हैं। और हम सब के बीच में अपनी योग्यता और संघर्ष से आये हैं या फिर कई सालों से आपके बीच हैं। क्या आप लोगों की हठधर्मिता का शिकार वह अच्छे पत्रकार भी हों जो हमेशा से पत्रकारिता के लिये कुछ कर गुजरने की इच्छा रखते हैं।

चैनल से लेकर फोटोग्राफर हो या प्रिंट मीडिया के भाई बहन हों, सभी सम्मान के पात्र हैं, न कि असम्मान के। सभी के बारे में कुछ लोगों के कारण रोज कुछ कहा जा रहा है, लिखा जा रहा है जो पूरी तरह से निन्दनीय है। इसकी निंदा अपने फोरम में भाईयों के बीच होनी चाहिये और वह चेहरा सामने आना चाहिये जिसने इस पूरी स्थित को पैदा किया है। मैं ईश्वर और अल्ला से प्रार्थना करता हूं और अपने सीनियर भाईयों से निवेदन करता हूं कि अभी भी देर शाम तक या कल तक कुछ सीनियरों को सद्बुद्धि आ जाये कि वह इस कमेटी को टूटने से बचा लें और सभी को बैठकार एक चुनाव करा लें जिससे बाहरी तत्व इस बात का फायदा न उठा पायें कि यूपी की पत्रकारित बंटी हुई है।

आप सभी का अपना भाई
प्रभात कुमार त्रिपाठी
प्रत्याशी अध्यक्ष पद
राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता
संयोजक
पत्रकार एकता मंच
मो0 9450410050








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Comments on “‘लखनऊ के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के कारण पूरे देश में हमारे यूपी के पत्रकारों की भद्द पिट रही है’

  • Jyada ter to …frazi patrakar….manayta prapat kiya hotay hain….manyta daynay ka nayam badalna bhi jarori hai…..na koi Exam hota hai ..na koi qualification decide hai….koi dhanda n.a. Milay to patrakar ban hai….es per Rok lagagyee….nahi to patrakarita ka status….waisay hi khtm honay ko hai….

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