नई दिल्ली: विपक्षी दलों ने सरकारी प्रसारक प्रसार भारती पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया है। आरोप है कि उसकी ओटीटी प्लेटफॉर्म Waves ने लियोनेल मेस्सी के “GOAT इंडिया टूर” के हैदराबाद कार्यक्रम को लाइव कवरेज की घोषित सूची से बाहर रखा, जबकि मेस्सी के अन्य तीन शहरों के कार्यक्रमों का मुफ्त प्रसारण तय किया गया था।
न्यूज़ड्रम की रिपोर्ट के अनुसार, Waves ओटीटी ने “तीन शहर, तीन रात” की लाइव स्ट्रीमिंग योजना का प्रचार किया था, जिसमें कोलकाता (13 दिसंबर), मुंबई (14 दिसंबर) और दिल्ली (15 दिसंबर) शामिल थे। लेकिन हैदराबाद का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जबकि यहां शनिवार को राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में होने वाले कार्यक्रम में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी तय थी।
इस रिपोर्ट को एक्स पर साझा करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने प्रसार भारती पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे “छोटी सोच” और “खुलेआम नियंत्रण” का उदाहरण बताया। बाजवा ने लिखा, “जब संस्थाएं अपनी रीढ़ खो देती हैं, तो लोकतंत्र कमजोर होता है।” उनका आरोप था कि “हैदराबाद को छोड़कर बाकी जगहों पर मेस्सी का लाइव प्रसारण करना इस बात को उजागर करता है कि आज प्रसार भारती कैसे काम कर रहा है।”
बाजवा ने यह भी कहा कि मौजूदा व्यवस्था में “जनसेवा और पार्टी प्रचार के बीच की रेखा मिट चुकी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि “जहां राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी दिखाई देते हैं, वहां कैमरा हटा लिया जाता है,” और इसे “सच का ऑरवेलियन विकृतिकरण” करार दिया।
न्यूज़ड्रम ने इससे पहले रिपोर्ट में तेलंगाना के कई राजनीतिक नेताओं के हवाले से कहा था कि सरकारी प्लेटफॉर्म द्वारा हैदराबाद कार्यक्रम को बाहर रखने से अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि अगर हैदराबाद का लाइव प्रसारण होता, तो मेस्सी के साथ मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और राहुल गांधी की तस्वीरें और वीडियो सामने आते, जिससे केंद्र सरकार के लिए राजनीतिक रूप से असहज दृश्य बन सकते थे।
राजनीतिक विरोधियों का निजी तौर पर यह भी कहना है कि केंद्र सरकार के प्लेटफॉर्म पर ऐसे दृश्य दो दिन बाद मेस्सी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होने वाली कथित मुलाकात से पहले सोशल मीडिया और न्यूज साइकिल पर हावी हो सकते थे।
हालांकि, इस पूरे विवाद पर अब तक न तो प्रसार भारती और न ही Waves ओटीटी की ओर से कोई आधिकारिक सफाई दी गई है कि हैदराबाद कार्यक्रम को लाइव स्ट्रीमिंग शेड्यूल से क्यों बाहर रखा गया।
इस विवाद ने एक बार फिर सरकारी वित्तपोषित प्रसारकों की संपादकीय स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानूनन एक स्वायत्त सार्वजनिक सेवा प्रसारक होने के बावजूद, विपक्षी दल लंबे समय से प्रसार भारती पर सत्तारूढ़ दल के पक्ष में कवरेज करने के आरोप लगाते रहे हैं।



