Connect with us

Hi, what are you looking for?

सुख-दुख

रेलवे की लूट का एक छोटा सा अनुभव सुना रहे हैं साहित्यकार अरुण माहेश्वरी

Arun Maheshwari : रेलवे की लूट का एक छोटा सा अनुभव… इस बार 1 सितंबर को हम जब दिल्ली सियालदह राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली आ रहे थे, हमारे साथ 3एसी में हमारी घरेलू सहायक मंजुरी कुइल का टिकट भी था। ट्रेन चलने के काफी देर बाद पता चला कि भूल से मंजुरी का टिकट सियालदह राजधानी का न होकर कोलकाता राजधानी का बन गया था जो हावड़ा स्टेशन से छूटती है।

<script async src="//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js"></script> <script> (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-7095147807319647", enable_page_level_ads: true }); </script><p>Arun Maheshwari : रेलवे की लूट का एक छोटा सा अनुभव... इस बार 1 सितंबर को हम जब दिल्ली सियालदह राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली आ रहे थे, हमारे साथ 3एसी में हमारी घरेलू सहायक मंजुरी कुइल का टिकट भी था। ट्रेन चलने के काफी देर बाद पता चला कि भूल से मंजुरी का टिकट सियालदह राजधानी का न होकर कोलकाता राजधानी का बन गया था जो हावड़ा स्टेशन से छूटती है।</p>

Arun Maheshwari : रेलवे की लूट का एक छोटा सा अनुभव… इस बार 1 सितंबर को हम जब दिल्ली सियालदह राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली आ रहे थे, हमारे साथ 3एसी में हमारी घरेलू सहायक मंजुरी कुइल का टिकट भी था। ट्रेन चलने के काफी देर बाद पता चला कि भूल से मंजुरी का टिकट सियालदह राजधानी का न होकर कोलकाता राजधानी का बन गया था जो हावड़ा स्टेशन से छूटती है।

Advertisement. Scroll to continue reading.

बहरहाल, ट्रेन ख़ाली थी इसलिये मंजुरी को बिना टिकट का यात्री मान कर उसके लिये टिकट के दाम के बराबर जुर्माना देते हुए अर्थात टिकट का दुगुना दाम देकर नया टिकट कराना जरूरी था, और हमने टिकट चेकर को वैसा ही करने के लिये कह दिया। टिकट का मूल दाम बाईस सौ रुपया था, लेकिन टिकट चेकर ने बताया कि आजकल लागू की गई प्रोग्रेसिव मूल्य प्रणाली के अनुसार उसे टिकट का दाम अट्ठाईस सौ रुपये लेना पड़ेगा और उस पर जुर्माना और जीएसटी लगाने पर कुल उनसठ सौ रुपये पड़ेगा। खैर!

ट्रेन में ढेर सारी सीटें ख़ाली जा रही है और यात्री से ‘प्रोग्रेसिव’ मूल्य वसूला जा रहा है! यह कैसी व्यवस्था है, हमारी समझ के परे है! यह क्या इसीलिये संभव हो रहा है क्योंकि रेलवे पर सरकार की इजारेदारी है! कल Suraj Prakash जी की एक पोस्ट पर पढ़ रहा था कि कैसे उन्होंने मुंबई-दिल्ली के बीच की अगस्त क्रांति के डिब्बों में क्षमता से एक तिहाई से भी कम यात्री देखे थे। रेलवे की यात्री किराये की विवेकहीन नीतियों ने भारतीय नागरिकों की रेल यात्राओं में कटौतियाँ शुरू कर दी है। कहना न होगा, यह सब मोदी सरकार की देन है।

Advertisement. Scroll to continue reading.

साहित्यकार और प्रोफेसर अरुण माहेश्वरी की एफबी वॉल से.

Advertisement. Scroll to continue reading.
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement

भड़ास को मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप ग्रुप से जुड़ें- Bhadasi_Group

Advertisement

Latest 100 भड़ास

व्हाट्सअप पर भड़ास चैनल से जुड़ें : Bhadas_Channel

वाट्सअप के भड़ासी ग्रुप के सदस्य बनें- Bhadasi_Group

भड़ास की ताकत बनें, ऐसे करें भला- Donate

Advertisement