साथियों, मुनव्वर राना से बच कर रहिए!

Mohammad Anas : मशहूर क्रांतिकारी शायर और गजब की अदा से अशआर पढ़ने वाले मुनव्वर राना साहब ने कहा है कि अगर नरेंद्र भाई मोदी कहेंगे तो वे उनका जूता भी उठाने को तैयार हैं। ये लीजिए, एक और जीतनराम मांझी आपके सामने आ गए। इट्स ओके राना साहब, चिल कीजिए। हो जाता है। लेकिन हम लोगों से यह नहीं हो पाता है इसलिए आप पर हम लोग तो बात करेंगे। तो साथियों, मुनव्वर राना से बच कर रहिए। टीवी ने उन्हें अब तक के साहित्यिक प्रतिरोध का हीरो बना दिया है। यह जानबूझ कर किया गया है क्योंकि हममें से ज्यादातर लोग जानते हैं कि भाजपा से उनके बहुत करीबी रिश्ते रहे हैं। इस बार उन्हें साहित्य अकादमी अवार्ड मोदी सरकार के कहने पर मिला था।

यदि आप उनके फेसबुक पेज पर पिछले हफ्ते के पोस्ट पर जाएंगे तो देखेंगे कि वे सम्मान लौटाने वाले लोगों को बुरी तरह लताड़ रहे थे। बुरा भला बोल रहे थे फिर अचानक से ABP न्यूज़ पर प्लांटेड तरीके से सम्मान वापस कर देते हैं। वहां वे जिस तरह से डिबेट करते हैं वह तो बेहतरीन था जिसके बाद हममें से बहुत से लोग उनकी तारीफ करने लगे थे यह भूल कर की यह वहीं इंसान है जिसने कवियों, लेखकों और बुद्धिजीवियों को ‘थके हुए लोग’ कह कर आलोचना की।

अब जिस तरह से टीवी वाले राना को झुका हुआ, घुटना टेक चुके, पर स्टोरी कर रहे हैं उससे यह संदेश जाएगा कि जब राना संवाद के लिए ऐसा कर सकते हैं तो बाकि लेखक क्यों नहीं। यह शर्मनाक चाल है मुनव्वर राना की। मुनव्वर साहब, सब आपकी तरह नहीं होते। प्रधानमंत्री से संवाद क्यों करना? उनके पास देश का कानून है वे हत्यारों के खिलाफ उसका इस्तेमाल करके दिखा दें, सब खुद ब खुद ठीक हो जाएगा। नरेंद्र मोदी से बातचीत क्यों करना भला? क्या वे रेडियों या फिर टीवी अथवा ट्विटर अकाउंट से असहिष्णुता फैलाने वालों को डांट डपट नहीं सकते? मुनव्वर, बड़ी बेइज्जती करा दिए भई। कौम को बेचने का आरोप आज तक नेताओं पर लगता रहा लेकिन आपने तो सारी हदे ही लांघ डाली।

महान कवि गोपाल दास नीरज ने कहा है कि नरेंद्र मोदी को साहित्यकार लोग बेवजह परेशान कर रहे हैं जबकि वे विकास करना चाहते हैं। गोपालदास नीरज को समाजवादी पार्टी अपना ऑफिशियल कवि घोषित कर चुकी है। नीरज अक्सर अखिलेश यादव जी के पास पहुंचे रहते हैं। मजे की बात यह है कि एक दिन पहले मध्य प्रदेश के एक शहर में गोपालदास और मुनव्वर राना एक ही मंच पर थे। राना और नीरज जैसे लोग नरेंद्र मोदी की तरफ ही रहें तो बेहतर है। राना पहले टीवी पर भावुक होते हुए अब तक के सारे प्रतिरोध के हीरो बनाए जाते हैं और उसके तुरंत बाद वे ऐसा कहते फिरते हैं कि मोदी जी कहें तो जूता उठा लूंगा।

राना साहब, आप मोदी जी का जूता उठाएं चाहें चप्पल हमें इससे मतलब नहीं है। लेकिन आप जब भी मुसलमान या फिर पीड़ित जनता के प्रतिरोध पर अपनी गंदी राजनीति करेंगे तो ठीक नहीं होगा। आपसे लाख गुना बेहतर Rahman Abbas हैं जिन्होंने महाराष्ट्र सरकार का पुरूस्कार सबसे पहले लौटाया और ऊर्दू ज़ुबान की लाज रख ली।

युवा पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.


अनस का लिखा ये भी पढ़ सकते हैं>>

भाजपाई कब तक मुसलमानों और दलितों के लिए कुत्ता और कुत्ते के बच्चे जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते रहेंगे?

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप पर पाएं
  • भड़ास तक कोई भी खबर पहुंचाने के लिए इस मेल का इस्तेमाल करें- bhadas4media@gmail.com

Comments on “साथियों, मुनव्वर राना से बच कर रहिए!

  • Anas babu bahut desperate hai, Modi sahab kei nafrat mei ardhkapari hue jaa rahe hai, babu full character assassination mode mei hai, Do din pehle tak jo sonia mata kei rachayeta rana sahab inke hero honge aaj bjp kei karibi ban gaye hai, saath mei babu ye bhul gaye ki Internet pei saara material uplabdh hai, saare ye jo rebel bane hue hai, sabka history, geography sab noted hai, phor phor kei sabka khulega, bakhiya udher dee jayegi, aaj kei hero inkei Gulzar sahab hai, madam pei film banaye the ek baar, khoob khoos hue the jab award mila tha emergency madam kei naam kaa, sonia madam di hai, aur kaun dega? Jo modi kei saath hai aap unko gaali dijiyega, hum jo aapke saath unko.. Per thik hai aapke lie ek exception hai, aap minority hai, aap khooleaam kaum ko bhechne kharidne kaa baat kar sakte hai, communal ban sakte hai, hum sirf fact per baat karenge.. Jai Shree Ram

    Reply
  • CONGRESSI V KAMREDO KI HALAT BIN PANI MACHHALI KI TARAH HO RAHI H, CONGRESS RAJ ME SARKARI PAISO PAR FALNE, FULNE WALE SAHITYAKAR V CHATUKARO KI AAKHARI VECHARIK LADAI CHALRAHI H ISME BHI HAR DIKHAI DE RAHI H,

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *