कराची के साठ साल पुराने प्रेस क्लब में घुसकर हथियाबंद बदमाशों ने पत्रकारों पर किया हमला

K Vikram Rao 


कराची का प्रेस क्लब…

कराची से एक बुरी खबर मिली है. गत रात कुछ सशस्त्र घुसपैठियों ने पत्रकारों को धमकाया, घायल कर दिया, अलमारियाँ खंगाली, वीडियो तस्वीरें खींची. हालांकि, सिंध के गवर्नर इमरान इस्माइल और वजीरे आला सैयद मुराद अली ने मीडिया को आश्वस्त किया कि दोषी दण्डित होंगे. पर ऐसी घटना इस साठ साल पुराने प्रेस क्लब में पहली बार हुई है. Continue reading

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शैलेन्द्र दीक्षित, राजेन्द्र तिवारी व पुनीत खंडेलिया ला रहे हैं ‘बिफोरप्रिंट डॉट इन’

पुनीत, राजेंद्र और शैलेंद्र

जमाना ऑनलाइन पोर्टल का है और जब प्रिंट मीडिया के दिग्गज डिजिटल मीडिया में कदम रखेंगे, तो कुछ अलग होना लाजिमी है। बिहार की पत्रकारिता के तीन दिग्गज मिलकर डिजिटल मीडिया में धमाकेदार एंट्री कर रहे हैं। बिफोरप्रिन्ट डॉट इन www.beforeprint.in नाम से शुरू हुए इस न्यूज पोर्टल की अभी विधिवत शुरुआत होनी बाकी है, पर अभी से ही कई ब्रेकिंग खबर देकर यह चर्चा में आ गयी है। Continue reading

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इंडिया टीवी ने चौंकाया, जी न्यूज ने गोता लगाया, अंबानी के चैनल के अच्छे दिन जारी

इस साल के 41वें हफ्ते की टीआरपी के आंकड़े इंडिया टीवी के लिए अच्छी खबर ले आए हैं. लगातार नीचे गिरे पड़े इस चैनल ने जबरदस्त छलांग लगाकर तीसरे पायदान पर कब्जा जमा लिया है. अभी तक इंडिया टीवी पांचवें नंबर पर था. वहीं जी न्यूज का भाव गिरने से इसे पांचवें नंबर पर संतोष करना पड़ रहा है. Continue reading

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नोएडा पुलिस से डरा ‘प्रयुक्ति’ का मालिक संपत सेलरी देने को हुआ मजबूर

बार-बार ठिकाने बदल कर अखबार निकालने वाला प्रयुक्ति का मालिक संपत गत मंगलवार को नोएडा के सेक्टर-20 थाने में लाया गया। इससे पहले उसे दो घंटे सेक्टर-15 की गोल चक्कर चौकी में पुलिस ने बैठाए रखा। लगातार लेट हो रही सेलरी के चलते नौकरी छोड़कर जा चुके कर्मचारियों का पैसा तो फंसा ही हुआ है, संस्थान में डटे चमचे पत्रकारों को भी समय पर पैसा नहीं मिल रहा। जिन लोगों को चेक दिए हैं, वह घड़ाधड़ बाउंस हो रहे हैं। कुछ लोगों को तो अभी संपत ने चेक भी नहीं दिए हैं। Continue reading

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10 वर्ष पूरे होने पर प्रवक्ता डॉट कॉम ने इन 12 लोगों को दिया ‘अटल पत्रकारिता सम्मान’

नई दिल्ली। हिन्दी वेब पत्रकारिता में वर्ष 2008 में शुरू हुआ प्रवक्ता डॉट कॉम का 16 अक्टूबर 2018 को 10 वर्ष पूरा हो गया। इस अवसर पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी वार्षिक समारोह का आयोजन किया गया। नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में करीब 250 से अधिक ब्लॉगर्स, पत्रकार, स्तंभकार तथा डिजिटल मीडिया पर लिखने वाले कई विचारक भी शामिल हुए। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव भी शामिल हुए। Continue reading

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metoo में फंसे विनोद दुआ की ‘द वायर’ ने जांच अवधि तक के लिए कर दी छुट्टी!

Rana Yashwant : विनोद दुआ दो दिनों से द वॉयर से गायब हैं. २३ तारीख को लौटेंगे ये बताने कि उस रोज उनका एपिसोड आखिरी है या फिर ये सिलसिला आगे जारी रहेगा. विनोद दुआ के वीडियो पोस्ट को सुनने और पसंद करनेवालों की अपनी एक जमात है, लेकिन मी टू अभियान के दौरान उनपर लगे आरोपों की सफाई के लिए उन्होंने या फिर द वॉयर ने जो रास्ता अख्तियार किया, उसकी तारीफ होनी चाहिए. Continue reading

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खुद को आईपीएस और तांत्रिक बताने वाले इस ठग से सावधान रहिये!

हम लोग ठगी के शिकार हो गये है। 35 दिन बाद भी देवरिया पुलिस और गाजीपुर सहयोग नहीं कर रही है। मैंने गाजीपुर के एसएसपी को जो चिट्ठी लिखी है, पढ़ लीजिए…

एस. एस. पी. महोदय,
जिला गाजीपुर
उत्तर प्रदेश

नमस्कार,

विषय: -मुझ एक बधिर दिव्यांग को आपकी की मदद की बहुत ज़रूरत है।

बेल्थरा रोड उत्तर प्रदेश के 6 साल पुराने फेसबुक मित्र और कथित तांत्रिक अरविंद पांडेय ( मोबाइल नंबर 09415144352, 09839074877, 07400701818) ने मेरे बधिर दिव्यांग होने और मेरे जीवन की कुछ परेशानियों का गलत फायदा उठा लिया। उसने मेरे माता पिता जी को बताया कि मेरे गाँव के घर में 5 आत्माएं हैं। किसी के द्वारा तंत्र क्रिया करवाना पड़ेगा। तभी इन पांच आत्माओं को जमीन में गाड़ा जा सकेगा। किसी के द्वारा तांत्रिक क्रिया करवाने के लिए 30,000/- की ठगी की।

अरविंद पांडेय पैसे न देने पर पिता जी को डांट भी रहा था। अरविंद पंडित के कहने पर उसके यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बैंक खाता में ( A/c 572802010003222 UNION BANK OF INDIA, TULSI SAGAR, NEAR SICHAI VIBHAG CHAURAHA, GHAZIPUR) में 20,000/-और 3400/-जमा करवाया हूँ। अलग से उनको 600/- का नया vip नंबर का सिम कार्ड 7400701818 भी ख़रीदकर दिया। इसके लिये 2 बार गाड़ी बुक किया। इससे 2500/-का भी चूना लग गया था। 2 बार AC3 का टिकट बनवाकर दिया था। इसमें भी 2000/- खर्च हो गए।

एक तरह से उसने मेरे विश्वास और भलमनसाहत का गलत फायदा उठा लिया है। 3 दिन पहले मैंने पुलिस में लिखित शिकायत की है। इस पर कार्यवाही करके 30,000/-की वापसी करवाया जाये। मैं आप का आभारी रहूंगा। अरविंद पांडेय ने मेरे जैसे बधिर दिव्यांग के साथ भावना का खेल करके मेरे पैसे से अपना शौक पूरा किया है। वो बेरोजगार है। उसके पास अपने शौक पूरा करने का कोई साधन नहीं है। दिनांक 04 सितम्बर 2018 रात 8 बजे को up police के हवलदार का इस मोबाइल नंबर 8052483001 पर कॉल आया था। पिता जी ने बात किया था। उसने आधार कार्ड के बाद भी उसका निवास और थाना का नाम पूछकर मोबाइल रख दिया था। कोई कार्यवाही नहीं होने की बात साफ साफ नहीं बताया है।

कुंवर मानवेन्द्र सिंह
s/o श्री विजय पाल सिंह (retd ias)
मंगला रोड, बिलासपुर
छत्तीसगढ़ 09589701600

पुनश्च : मुझे facebook में उसके लोकल दोस्तों से जानकारी मिली कि अरविंद पांडेय बेरोजगार है और उसके पास ठगों का पूरा गिरोह है। यह ठगी के जरिए ही अपनी दालरोटी चलाता है। कहा जाता है कि इसने पुलिस में अच्छी खासी सेटिंग कर रखी है। अरविंद पांडेय कभी खुद को आईपीस बताता है तो कभी तांत्रिक होने का दंभ भरता है। उसके पास 4 फोन नंबर हैं। इससे उसे ट्रैक कर उसकी लोकेशन पुलिस जान सकती है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में ऐसे ठगों और नकली तांत्रिकों को उनके मोबाइल नंबर से ट्रैक कर पुलिस पकड़ लेती है। अभी मैंने अरविंद पांडेय को उसके ह्वाट्सअप पर ये संदेश भेजा है-

अरविंद पांडेय, बेल्थरा रोड के ठग राजा साहब (बेल्थरा रोड रेलवे स्टेशन से 4 KM आगे उसका गाँव इशरू है, यहीं पर उसका घर और खेत है), “तंत्रमंत्र” के नाम पर लोगो को लूटना और ठगना बंद कर दीजिये। आप एक्स आईपीएस नहीं हैं। जब आप बिलासपुर आये थे, तब आपकी आंखें लाल थी। मतलब साफ है आप शराब पीकर आये थे और लहसुन प्याज वाला खाना खाते हैं। हम लोगों को पूरी तरह से धोखा देने से आपको शर्म नहीं आयी थी। आप के कहने पर विश्वास करके आप के खाते में तुरंत पैसा जमा किया था। आप भी तुरंत ईमानदारी से मेरे खाते में मम्मी पापा का सब पैसा वापस कीजिये। मैं अपना खाता नंबर दे रहा हूँ।

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प्रवर्तन निदेशालय ने हजारों करोड़ के घोटाले में फंसे एनडीटीवी को भेजा नोटिस

एनडीटीवी को 4,000 करोड़ रुपये के फेमा उल्लंघन के मामले में ईडी का नोटिस… प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एनडीटीवी को 4,000 करोड़ रुपये के विदेशी विनिमय कानून (फेमा) के उल्लंघन के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ईडी का कहना है कि जांच में एनडीटीवी द्वारा 1,637 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में विदेशी विनिमय प्रबंधन कानून (फेमा) के उल्लंघन का मामला सामने आया है। इसके लिए एक अन्य मामला 2,732 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश का है। Continue reading

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बरेली में महिला पत्रकार को कथित पत्रकार ने बंदूक लेकर दौड़ाया

बरेली। बुधबार को एक महिला पत्रकार पर चार व्यक्तियों द्वारा हमला किया गया। महिला पत्रकार शाहनाज फातिमा ने बताया कि वह बरेली पुलिस लाइन परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यूज कवरेज को गई थी। वहां पर अपने को ऑल इण्डिया रिपोर्टर एसोसिएशन का जिलाध्यक्ष बताने वाले कथित पत्रकार बी एस चंदेल उर्फ भगवान सिंह पुत्र राजेंद्र पाल सिंह निवासी चौपला प्रेस कॉन्फ्रेंस में आया। उसने महिला पत्रकार से अश्लील इशारे करते हुए बदतमीजी करना शुरू कर दिया। Continue reading

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राफेल विमान सौदों पर हुई रिपोर्टिंग से नाराज अनिल अंबानी ने एनडीटीवी पर दस हजार करोड़ का मुकदमा ठोका

अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने एनडीटीवी पर 10 हजार करोड़ रुपये का मुकदमा ठोका है। राफेल विमान सौदों को लेकर एनडीटीवी की रिपोर्टिंग को लेकर यह मुकदमा अहमदाबाद की अदालत में किया गया है। इस मामले पर सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी। Continue reading

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पत्रकारों की ब्लैकमेलिंग से परेशान है हर आम-ओ-खास!

ब्लैकमेलिंग के खिलाफ कोई भी पत्रकार संगठन कभी नहीं बोला! अब नौबत यहां तक आ गई है कि सरकार और गैर सरकारी व्यवसायिक संस्थायें ब्लैकमेलिंग वाली पत्रकारिता से बचने की तरकीबों पर काम करने लगे हैं। पत्रकारिता के बलात्कार के इस तमाशे के दौरान ईमानदार पत्रकार और इनके संगठन अभी भी आंख, कान और मुंह बंद किये हैं। दूसरी के स्याह-सफेद में झांकने के प्रोफेशन पत्रकारिता में सक्रिय ये जिम्मेदार पत्रकार अपने घर में घुसे बहुरूपियों को खदेड़ने की जिम्मेदारी नहीं निभाते। Continue reading

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मजीठिया वेज बोर्ड प्रकरण में कोई मालिक भले न जेल गया, एक बेरोजगार मीडियाकर्मी जरूर अंदर कर दिया गया

हटाया जा चुका भास्कर का पूर्व ब्यूरोचीफ जेल गया… प्रबंधन सुध लेने को तैयार नहीं!

मध्य प्रदेश के बैतूल से एक बड़ी खबर आ रहीहै. मजीठिया वेज बोर्ड मामले में दैनिक भास्कर का एक पूर्व ब्यूरो चीफ बलि का बकरा बन गया है। एक तरफ कम्पनी ने उसे 15 साल की सेवा के बाद करीब दो साल पहले दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंका। दूसरी तरफ अब उसे जेल जाना पड़ा है। Continue reading

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झूठ की फैक्ट्री से बापू के बारे में विष-वमन!

राष्ट्रपिता, महात्मा गांधी, बापू आदि अत्यंत सम्मान सूचक नामों से याद किये जाने वाले मोहनदास कर्मचंद गांधी अहिंसक तरीकों से नागरिक अवज्ञा आंदोलन के लिए प्रसिद्ध हुए। सत्याग्रह उनका लोकप्रिय हथियार था। कानून के ज्ञान का उपयोग जनहित और देशहित में करते हुए उन्होंने सारी उम्र अंग्रेजों से लोहा लिया। उनकी पारदर्शिता, ईमानदारी, सच्चाई और सादगी ने सबका मन मोहा। उनके चरित्र की मजबूती इससे झलकती है कि उन्होंने भारत-पाक विभाजन के समय भी पाकिस्तानी नेताओं को उनका हक दिलवाने में अग्रणी भूमिका निभायी। धोती उनकी वेशभूषा थी तो चरखा उनका कर्म। वे सन् 1930 की डांडी यात्रा और नमक आंदोलन के लिए तो सुर्खियों में रहे ही, लेकिन सन् 1942 के उनके अंग्रेजो भारत छोड़ो अभियान की परिणित भारतवर्ष की स्वतंत्रता के रूप में हुई। Continue reading

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मोदी सरकार में पीएम से लेकर मंत्री तक अपना काम छोड़ दूसरे का भार हलका करने में जुटा है!

Abhishek Srivastava : अपना काम तो सभी करते हैं। बड़ाई इसमें है कि आप दूसरे का काम करें। वो भी पूरे निस्‍वार्थ भाव से। यह सरकार मुझे इसीलिए इतनी पसंद है। बंधुत्‍व और सहयोग की भावना यहां भयंकरतम रूप में दिखती है। अब देखिए जेटलीजी को। होंगे वकील, लेकिन कानून मंत्री थोड़े हैं। फिर भी एलजी बनाम दिल्‍ली सरकार के मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कानूनी व्‍याख्‍या कर दिए। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का बोझ कम हुआ, तो वे अफ़वाहों पर लगाम लगाने के लिए वॉट्सएप के इस्‍तेमाल पर ज्ञान देकर संचार मंत्री मनोज सिन्‍हा को हलका कर दिए। लगे हाथ सिन्‍हाजी वोडाफोन और आइडिया के विलय में जुट गए। Continue reading

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योगीराज में अंधेरगर्दी : सौ से ज्यादा शिक्षकों को मनमाने तरीके से लखनऊ में पोस्टिंग दे दी गई!

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही साफ-सुथरी और सबको न्याय दिलाने का वादा करती हो लेकिन उसके अधिकारी सरकार की मंशा पर पलीता लगाये हुए हैं। ‘पैसे और पहुंच’ के बल पर कई शिक्षकों का अंतर जनपदीय स्तर पर मनमाने ढंग से तबादला करके ‘प्राइम पोस्टिंग’ दे दी गई। वहीं वे शिक्षक-शिक्षिकाएं दर-दर भटक रही हैं, जिनके पास ‘पैसा और पहुंच’ नहीं है। हाल यह है कि तबादला नीति के लिये स्कोरिंग के जो मापदंड तय किये गये थे, उसमें भी खूब खेल हुआ है। Continue reading

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कोर्ट में मीडियाकर्मियों द्वारा डाले गए केस को घुमाने-लटकाने में उस्ताद है दैनिक जागरण प्रबंधन

Brijesh Pandey : दैनिक जागरण, हिसार के 41 कर्मियों के टर्मिनेशन का मामला… ये टर्मिनेशन मामले 16 A के तहत सरकार ने 29 जनवरी 2018 को निर्णय के लिए श्रम न्यायालय, हिसार भेजे थे। प्रबंधन को 22 मार्च को क्लेम स्टेटमेंट का जबाब देना था, तो उस दिन प्रबन्धन ने सरकार के रेफर को गलत बताते हुए मामले को ख़ारिज करने की लिखित पत्र दिया। Continue reading

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IFWJ (Jaipur) sweeps election, Pink City Press Club gives 7 out of 15 seats

Jaipur (Rajasthan): The Indian Federation of Working Journalists (I.F.W.J.) nominees have won the posts of President, General Secretary, Vice President, Treasurer and four in the executive committee in a keen contest for the Pink City Press Club. Results were announced today (March 27 2018). Mr Abhay Joshi won the presidentship securing 192 votes while his immediate rival Mr. Radha Raman Sharma also polled 192 votes.

Both will hold office by turn. Mr. Mukesh Chaudhry of the daily Navjyoti was re-elected general secretary. Abhay Joshi was till recently the Vice President of the IFWJ unit in Rajasthan, headed by Com. Upendra Singh Rathore of Jodhpur. IFWJ veteran Devendra Singh formerly of ETV won the Vice Presidentship. A senior journalist Raghuvir Jangid was elected Treasurer. The four elected to the club executive included Giriraj Gurjar, Vinay Joshi, Vimal Singh Tanwar and Ramendra Singh Solanki.

A notable feature of the Press Club election was that a vetran journalist and former president Ish Madhu Talwar’s fraction suffered crushing defeat. His candidate for Presidentship Harish Gupta, who claims to be general secretary of Rajasthan Working Journalists Union, came fourth in the contest in a six-cornered poll.

Ashok Bhatnagar who broke from the IFWJ and joined the dead outfit, got just two votes. He was also blessed by Talwar. Talwar had lost very badly last year when he had himself contested for Press Club presidentship. His clout with the BJP government was lost when the Rajasthan Govt. evicted him from the Govt. flat as Talwar is no more a working journalist.

Full credit for this glorious victory goes to Comrade Upendra Singh Rathore, State Unit President. Com. Rathore had organized the IFWJ Working Committee meeting in Jaipur on 28th October last year to mark the 67th Anniversary, presided over by Com. K. Vikram Rao president IFWJ He had hosted the IFWJ’s National Council 71st session in the frontier town of Jaisalmer 23-26 September 2016 when delegates had demonstrated at the Pakistan Border  for a free Balochistan and the liberation of Pak-occupied Kashmir. Three days after the IFWJ rally, the Modi government carried of a “Surgical Strike ” inside Pakistan.

Yours fraternally
Vipin Dhuliya
Secretary: IFWJ

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स्वतंत्र मिश्रा ने ‘समाचार प्लस’ छोड़ा, सहारा में हुई वापसी, पढ़ें सहाराश्री का पत्र

सहारा समूह से एक बड़ी खबर आ रही है. स्वतंत्र मिश्रा को फिर से सहारा मीडिया का हिस्सा बना लिया गया है. उन्हें काफी बड़े पद पर लाया गया है. स्वतंत्र मिश्रा की रिपोर्टिंग सीधे सहाराश्री सुब्रत राय और अभिजीत सरकार को रहेगी. सहारा श्री सुब्रत राय ने स्वतंत्र मिश्रा की ज्वायनिंग को लेकर एक पत्र जारी किया है.

इस पत्र में कहा गया है कि सहारा में अपने पिछले कार्यकाल के दिनों में स्वतंत्र मिश्रा पर कई किस्म के आरोप लगे थे. इन आरोपों की जांच कराई गई जिसमें स्वतंत्र मिश्रा पर कोई आरोप सच नहीं पाया गया. सहारा समूह के प्रति प्रतिबद्धता और पिछली पारी की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र मिश्रा को फिर से सहारा समूह का हिस्सा बनाया गया है.

सुब्रत राय का पत्र पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें.. 

Sahara Shri Letter

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‘हिंदी खबर’ चैनल के एडिटर इन चीफ अतुल अग्रवाल का स्टिंग देखें

कोबरा पोस्ट ने कई मीडिया हाउसों में काम करने वालों का स्टिंग किया. ज्यादातर उनमें मार्केटिंग वाले थे. संपादकीय विभाग के कम लोग ही फंसे.  लेकिन एक ऐसे एडिटर इन चीफ को कोबरापोस्ट ने फांसने में कामयाबी पा ली जो एक न्यूज चैनल संचालित करते हैं. चैनल का नाम है ‘हिंदी खबर’. एडिटर इन चीफ हैं अतुल अग्रवाल.

ये महोदय पहले भी कई चैनलों में काम कर चुके हैं और कई किस्म के विवादों-आरोपों के लिए जाने जाते हैं. कोबरा पोस्ट की टीम के स्टिंग में ये न सिर्फ लपेटे में आए बल्कि बिना एडवांस पैसा मिले ही पेड न्यूज चलाना शुरू कर दिए. साथ ही साथ अपने ‘क्लाइंट’ को बताने भी लगे कि हमने ‘एजेंडे’ को लागू करना शुरू कर दिया है…

ये संपादक महोदय क्लाइंट के मालदार और प्रभावशाली होने का एहसास कर उसे चरणस्पर्श भी बोलने लगे.बड़बोले अतुल अग्रवाल यहीं तक नहीं रुके. उन्होंने ‘क्लाइंट’ द्वारा कोबरा पोस्ट पर परेशान करने का आरोप लगाने पर कोबरा पोस्ट को ही नेस्तनाबूत कर देने की बात करने लगे…

सुनिए देखिए अतुल अग्रवाल का स्टिंग… नीचे क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=5iAFRGW0nN4

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कितना आसान हो गया है सच लिखने-बोलने वालों को मार देना…

Prashant Mishra : मप्र के भिंड के पत्रकार संदीप शर्मा की हत्या करने के लिए एक्सीडेंट को हथियार बनाया गया. रांग साइड जाकर ट्रक ने उन्हें कुचल दिया. यह एक्सीडेंट है या हत्या सब जानते हैं. इसके लिए दस सेकेंड का सीसीटीवी फुटेज देख लीजिए, सब जाहिर हो जाएगा. संदीप द्वारा कुछ दिन पहले लिखा एक पत्र भी है. उन्होंने हत्या की आशंका जताई थी. रेत माफिया और सरकारी सिस्टम के लोग मिलकर खुलेआम एक पत्रकार की हत्या करवा देते हैं. बिहार में भी दो पत्रकारों की हत्या कर दी गई. कितना आसान हो गया है आवाज़ उठाने वाले को मार देना. कितना आसान हो गया है सच लिखने-बोलने वालों को मार देना. आप भी हर रोज पत्रकार को गरिया देते हैं. लेकिन किसी पत्रकार के पक्ष में आवाज़ उठाने से बचते हैं.  यह लोकतंत्र है. जय हो ऐसे लोकतंत्र की.

Om Thanvi : ग़नीमत है दिल्ली में पत्रकारों से मारपीट भर हुई है। कैमरे तोड़े गए हैं। मध्यप्रदेश में तो पत्रकार को सरे-राह ट्रक से कुचल दिया गया। बिहार में दो पत्रकारों को एसयूवी चढ़ा कर मार डाला। पत्रकारिता में अच्छे दिन तो पहले ही आ चुके थे। अब उन पर क़ानून-व्यवस्था की मेहरबानी है। और इस आड़ में संदेश साफ़ है – जो बोलेगा, मारा जाएगा।

Abhishek Tiwari Cartoonist : दुखी हूँ। क्षुब्ध हूँ। हमारे भिंड के एक युवा पत्रकार संदीप शर्मा ने भिंड शहर में सिटी कोतवाली के सामने अपनी जान गंवा दी। संदीप के परिवार वालों ने सीधे तौर पर इसे सड़क दुर्घटना न मानकर हत्या बताया है। हत्या की आशंका संदीप को थी। अपनी जान की रक्षा की गुहार उसने देश के पीएम से लेकर, मध्यप्रदेश के सीएम और स्थानीय प्रशासन से बार बार की। दअरसल संदीप एक स्थानीय टीवी न्यूज चैनल के लिए काम करते थे। चम्बल से होनेवाले अवैध रेत खनन पर उन्होंने एक स्टिंग किया था। चम्बल में रेत माफिया किस कदर बुलन्द है। यह किसी से छुपा नहीं है। बानमोर एसपी की मौत सबको याद है। संदीप ने पत्रकारिता धर्म निभाया। बदले में उसे क्या मिला? पुलिस ने SIT गठित की है। पुलिस कैसे जांच करती है, कैसे जांच के परिणाम तय करती है। सबको मालूम हैं। फिर भी हम निष्पक्ष जांच की उम्मीद कर रहे हैं। संदीप के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो छोटे बच्चे हैं. संदीप के एक भाई फौज में थे जो अप्रैल 2004 में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे।

Paramendra Mohan : अद्भुत संयोग है! मध्य प्रदेश के भिंड में रेत माफिया के खिलाफ स्टोरी करने वाले पत्रकार संदीप शर्मा को ट्रक ने कुचलकर मार डाला। अपनी जान को खतरा को लेकर दिवंगत संदीप शर्मा ने पुलिस से शिकायत भी दर्ज कराई थी। उधर, बिहार के आरा-सासाराम रोड पर पत्रकार नवीन निश्चल और विजय सिंह स्कॉर्पियो से कुचल कर मार दिए गए। इन्हें एक पूर्व मुखिया पति ने एक स्टोरी को लेकर हाल ही में धमकाया था, संयोग से स्कॉर्पियो उसी की थी। संदेश बहुत सीधा है, पत्रकार वैसी कवरेज न करें, जो अपराधी, रसूखदार न चाहते हों। मीडियाकर्मी ऐसी खबरें न दिखाएं, जो आम लोगों से जुड़ी हों, क्योंकि आम लोगों के हित की खबरों का मतलब ही है राजनीतिक दलों, राजनेताओं, प्रशासनिक संस्थाओं, सत्ता संरक्षित अपराधियों, अपराधियों के खिलाफ खबरें। अगर किसी व्यक्ति को कोई पुलिसकर्मी पीट रहा हो और क्यों पीट रहा है, ये पूछने पर जवाब भी न दे, तस्वीर लेने पर कैमरा भी छीन कर तोड़ दे, महिला पत्रकार होने पर भी बदसलूकी करे, तो बाकी सब भी इससे सबक लेकर पुलिस के हाथों पिटते आम लोग की कवरेज न करे। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में भारत दुनिया के भ्रष्टतम देशों की लिस्ट में विकास करता हुआ 79वें से 81वें पर आ पहुंचा है। रिपोर्ट में भ्रष्टाचार, प्रेस की आज़ादी और पत्रकारों की हत्या के मामले में भारत को फिलीपींस और मालदीव जैसे देशों के समकक्ष बताया गया है। अब चूंकि मीडिया या तो गोदी मीडिया है या देशद्रोही मीडिया है तो पत्रकारों की हत्या हो या पिटाई, किसी को क्या फर्क पड़ता है? लेकिन, हमें फर्क पड़ता है क्योंकि मेरा अभी भी मानना है कि जो पत्रकार होते हैं, वो भी इंसान होते हैं, उनके भी बुजुर्ग माता-पिता होते हैं, उनकी पत्नी भी हत्या के बाद विधवा होती हैं, उनके बच्चे भी पिता की मौत के बाद अनाथ होते हैं। एक बात नोट कर लें कि जिस दिन वाकई मीडिया सौ फीसदी कर्तव्यविहीन और सौ फीसदी मीडियाकर्मी बिकाऊ हो गए, उस दिन जनता के लिए कोई बोलने वाला बचेगा नहीं, सिर्फ राजनेता, सत्ता संरक्षित रसूखदार, अपराधी ही बोलेंगे या फिर उनके समर्थक-विरोधी और वो भी फिक्स्ड क्योंकि तब कवरेज भी सौ फीसदी फिक्स्ड ही होगी। छोटा सा हिंट देता हूं, एक राज्य में एक सत्ताधारी दल का नेता अपने चहेते को ठेका दिलवाता है और विपक्षी दल का नेता ठेका लेने वाली कंपनी में अपने चहेते की ट्रांसपोर्ट कंपनी को माल आवाजाही का काम दिलाता है, दोनों नेता मस्त कमा-खा रहे हैं और दोनों ही एक-दूसरे की आलोचना कर रहे हैं। एक और हिंट, एक सत्ताधारी दल और दूसरा विपक्षी दल दोनों मिलकर विदेशी चंदे के नाम पर करोड़ों का बेहिसाबी गोलमाल करते हैं और इसे कानून का कवच पहना दिया जाता है और ये दोनों भी अपने दल-बल के साथ एक-दूसरे की आलोचना करते हैं। समझना चाहें तो समझें वर्ना पप्पू-गप्पू सीरीज़ तो चल ही रहा है.. चमचे और चम्मचचोर पत्रकारों (पत्तलकारों) का क्या है, मारे जाएं तो अपनी बला से..है कि नहीं?

Pushya Mitra : बिहार में फिर दो पत्रकारों की हत्या हो गयी। इस बार दो पत्रकारों को एक मुखिया द्वारा स्कार्पियो से कुचल कर मारने की बात सामने आ रही है। पत्रकार बाइक पर थे। कल की घटना को मिला दें तो पिछले डेढ़-दो साल में इस तरह पत्रकारों की हत्या के मामले दहाई में पहुंच गए होंगे। इस लिहाज से बिहार पत्रकारों के लिये संभवतः देश का सबसे खतरनाक राज्य बन गया है। अब चुकी इनमें से ज्यादातर पत्रकारों की हत्या राजनीतिक कारणों से नहीं होती, मतलब मोदी विरोध या लालू- नीतीश विरोध के कारण तो यह बड़ा सवाल नहीं बनता। जबकि बस्तर की छोटी-छोटी घटनाएं भी दिल्ली के प्रेस क्लब के आंदोलन का मसला बन जाती है।

मगर सच यह भी है कि ये पत्रकार भी सत्ता के विरोध में पत्रकारिता करते हुए मारे जा रहे हैं। जिलों और प्रखंडों में मुखिया, कोई बड़ा नेता, विधायक भी आखिरकार सत्ता का प्रतीक ही है। पत्रकार जब उनसे टकराता है तो वे इन्हें सबक सिखाते हैं। पिछले साल ही एक टेप भी वायरल हुआ था, जिसमें एक विधायक एक पत्रकार को कुत्ते की तरह गालियां दे रहा था। जिलों और कस्बों के पत्रकार यहां लगातार ऐसे लोगों के निशाने पर रहते हैं। मगर इनके लिये कोई सुरक्षा नहीं है।

यह एक कड़वा सच है कि बिहार के ग्रामीण एवं कस्बाई पत्रकारों के जीवन पर खतरे की एक बड़ी वजह यहां के समाचार समूह हैं। इन्हें पत्रकारिता के साथ-साथ विज्ञापन वसूलने के काम के लिये भी बाध्य किया जाता है। अब चुकी इनका वेतन इतना कम होता है कि कमीशन के लालच में इन्हें यह काम करना ही पड़ता है। वरना घर कैसे चले।

और यह काम इन्हें खतरों की जद में डाल देता है, क्योंकि आपको जिसके खिलाफ खबर लिखना है उसी से विज्ञापन भी वसूलना है। और एक बार जब आप किसी मुखिया, प्रमुख या विधायक से विज्ञापन ले लेते हैं तो वह अपेक्षा करता है कि आप उसके खिलाफ खबरें न लिखें। उसकी बड़ी से बड़ी चूक और अपराध पर चुप्पी साध लें। मगर एक संवेदनशील पत्रकार के लिये यह मुमकिन नहीं। उसे अपने पाठक समाज को जवाब भी देना होता है, उसकी अपनी भी इंटिग्रिटी होती है। लिहाजा वह खबर तो लिख ही देता है। मगर बाद में उसे कीमत चुकानी पड़ती है।

इस लिहाज से राजधानियों के पत्रकार सुरक्षित हैं। एक तो उनके जिम्मे विज्ञापन का काम नहीं है। दूसरा वह सरकार के खिलाफ जरा भी टेढ़ी खबर लिखे वह खबर संपादक के विचार सूची में कैद हो जाती है। वर्षों उस पर विचार और मंथन चलता रहता है। इस बीच अखबार में गुणगान छपता रहता है। लिहाजा हम पत्रकारों को फेसबुक पर उल्टी करने के अलावा और कुछ नहीं आता। और फेसबुक की सूचनाओं की वजह से जान खतरे में नहीं पड़ती।

यह बिहार की पत्रकारिता का नंगा सच है। और पत्रकारिता किस तरह यहां खतरे में है, इसे समझने का रास्ता। बहरहाल हमारे पास अपने इन दोनों साथियों को श्रद्धाजंलि देने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। कल स्कार्पियो को जला ही दिया गया है। कुछ कानूनी कार्रवाईयां होंगी, मगर न कोई नतीजा निकलेगा, न हालात बदलेंगे। दिवंगत साथी को श्रद्धांजलि

सौजन्य : फेसबुक

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अपनी भाषाई सभ्यता को बाकी लोगों पर थोपना IIMC के प्रोफेसरों से सीखें

पत्रकारिता के क्षेत्र में चोटी का संस्थान माने जाने वाले भारतीय जनसंचार संस्थान में इन दिनों प्लेसमेंट हो रहे हैं. यूं तो संस्थान अपने विवरणिका में 100 फीसदी प्लेसमेंट का दावा नहीं करता फिर भी कंपनियां आती हैं और विद्यार्थियों को अपने यहां नौकरी देती हैं. यहां कई भाषाओं, मसलन उर्दू,मलयालम, मराठी (संभवतः पिछले साल या इस साल से शुरू हुआ है या होगा), उड़िया अंग्रेजी, हिन्दी की पढ़ाई होती है. इसके साथ विज्ञापन और रेडियो टीवी के विभाग हैं.

हर साल कोई ना कोई नया हंगामा होता है. सो इस बार भी हो रहा है. इसमें गलती विद्यार्थियों की नहीं है. गलती उन लोगों की है जो प्लेसमेंट सेल के हेड होते हैं. मसलन कभी श्रीमती सुरभी दहिया जी तो कभी रिंकू पेगू जी. अपनी भाषाई सभ्यता को बाकी लोगों पर थोपना हो तो ईस्ट इंडिया कंपनी से नहीं IIMC के प्रोफेसरों से सीखना चाहिए.

आप उस कंपनी की परीक्षा में नहीं बैठ सकते (ऐसी पुष्ट-अपुष्ट जानकारी है. विद्यार्थियों और प्रोफेसरों के इनकार करने पर बदल सकती है.) जिस विभाग के आप छात्र नहीं हैं. मसलन विज्ञापन के प्लेसमेंट कंपनी में हिन्दी और रेडियो टीवी विभाग के लोगों को नहीं बैठने दिया गया. छात्रों ने एक पत्र लिखा है.

हिन्दी का इतना बड़ा बाजार होने पर भी अगर विद्यार्थियों को विज्ञापन विभाग की परीक्षाओं में बैठना पड़ रहा है तो यह भी अपने आप में एक चोटी के संस्थान लिए शर्म की बात है, वो भी तब जबकि संस्थान के महानिदेशक श्री केजी सुरेश जी खुद DD समेत कई संस्थानों में काम कर चुके हैं.

खैर, अभी तो बात सिर्फ विज्ञापन विभाग की है. दावा कर रहा हूं जो सच होगा भी कि रेडियो और टीवी की प्लेसमेंट परीक्षाओं में भी ऐसी कारगुजारियां होंगी. IIMC में प्लेसमेंट उसी दिन संपन्न मान लिया जाता है जब विज्ञापन और कुछ एक अन्य विभागों में छात्रों की नियुक्तियां अथवा इंटर्नशिप की व्यवस्था संपन्न हो जाती है.

हिन्दी विभाग के विद्यार्थियों को RTV से जुड़ी क्लासेज में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इक्विपमेंट नहीं दिलाए जाते. यह सब तब है जबकि IIMC एक स्वायत्त संस्थान हैं. (समझ रहे हैं ना जो बीते दिनों 60 संस्थाओं के साथ किया गया है. फायदा नुकसान यहीं देख लें.)

अंग्रेजी में पीपीटी मुहैया करा देने वाले प्रोफेसर, आपसी लड़ाई (मसलन नेताओं और राजनीतिक दलों से संस्थागत करीबी, HOD और DG के पद के लिए ) में बिजी रहते हैं. लेकिन किसी के पास इतना वक्त नहीं होता कि कोई नौकरियों पर ध्यान दे ले. सबके बहुत संपर्क है. इतना की एक बार में मेरे सरीखे शख्स का गूगल कॉन्टैक्ट भर जाए (अगर ऐसा होता हो तो) लेकिन सब संपर्क नौकरी के नाम पर ना जाने कहां गायब हो जाते हैं.

क्लास में लेक्चर के समय विद्यार्थी अक्सर (मैंने सुना है) प्रोफेसर का इतिहास सुनते रह जाते हैं. फिर प्लेसमेंट के समय खुद इतिहास होकर रह जाते हैं. बेहतर हो कि आने वाली बैच यह सोच कर बिल्कुल ना आए कि उसे यहां से नौकरी मिलेगी. प्रोफेसर लोगों की आपसी खींचतान, EG0 (काम शुरू करे 6 सेकेंड में) और DG की लफ्फाजियों के चलते विद्यार्थियों का जीवन चौपट होता है.

मेरी राय है कि संस्थान इस साल जारी किए जा रहे विवरणिका में यह स्पष्ट कर दे कि हम नौकरी नहीं दे सकते. हम अभी आपसी लड़ाई, खींचतान और EGO में बिजी हैं. जब खुद इन सबसे मुक्त हो जाएंगे तो आपकी चर्चा करेंगे.

विभागों में प्रोफेसर नहीं हैं. जो बाहर से पढ़ाने आते हैं उनका भी मानदेय का बिल देख कर साहबान-मालिकान भड़क जाते हैं. मिड टर्म में एक हिन्दी विभाग के एक शिक्षक का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने वाले हैं ऐसी खबर है. हो सकता है कोई अपना बेरोजगार बैठा हो.

फिलहाल इस प्लेसमेंट में अब तक जो कारगुजारियां हुई हैं उन पर रोक लगाया जाए और फेयर प्लेसमेंट कराया जाए. बाद बाकी मुझे उनकी बड़ी चिंता हो रही है जो ‘हंगामा नहीं नौकरी चाहिए’ का पोस्टर पीठ पर टांगे घूम रहे थे.

सादर

राहुल सांकृत्यायन

युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार राहुल सांकृत्यायन की एफबी वॉल से.

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ये एंकर अब जन विरोधी गुंडे हैं : रवीश कुमार

…पुण्य प्रसून वाजपेयी ने हाल ही में कहा है कि ख़बरों को चलाने और गिराने के लिए पीएमओ से फोन आते हैं। कोबरा पोस्ट के स्टिंग में आपने देखा ही कैसे पैसे लेकर हिन्दू मुस्लिम किए जाते हैं। इस सिस्टम के मुकाबले आप दर्शकों ने जाने अनजाने में ही एक न्यूज़ रूम विकसित कर दिया है जिसे मैं पब्लिक न्यूज़ रूम कहता हूं। बस इसे ट्रोल और ट्रेंड की मानसिकता से बचाए रखिएगा ताकि खबरों को जगह मिले न कि एक ही ख़बर भीड़ बन जाए…

Ravish Kumar : न्यूज़ चैनल निर्लज्ज तो थे ही अब अय्याशियां भी करने लगे हैं। इस अय्याशी का सबसे बड़ा उदाहरण है अभी बारह महीने बाद होने वाले चुनाव में कौन जीतेगा। ताकि दिल्ली के आलसी पत्रकारों और एंकरों और बंदर और लोफर प्रवक्ताओं की दुकान चल सके। आम आदमी सड़कों पर मरता रहे।

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पब्लिक ही मेरा संपादक है और मैं पब्लिक न्यूज़ रूम में काम करता हूं। हमारा चैनल अब कई शहरों में नहीं आता है। इससे काम करने के उत्साह पर भी असर पड़ता है। शहर का शहर नहीं देख पा रहा है, सुनकर उदासी तो होती है। इससे ज्यादा उदासी होती है कि संसाधन की कमी के कारण आपके द्वारा भेजी गई हर समस्या को रिपोर्ट नहीं कर पाते। कई लोग नाराज़ भी हो जाते हैं। कोई बेगुसराय से चला आता है तो कोई मुंबई से ख़बरों को लेकर चला आता है। उन्हें लौटाते हुए अच्छा नहीं लगता। आपमें से बहुतों को लगता है कि हर जगह हमारे संवाददाता हैं। सातों दिन, चौबीसों घंटे हैं। ऐसा नहीं है। दिल्ली में ही कम पड़ जाते हैं। जिन चैनलों के पास भरपूर संसाधन हैं उन्हें आपसे मतलब नहीं है। आप एक एंकर का नाम बता दें तो सुबह चार घंटे लगाकर सैंकड़ों लोगों के मेसेज पढ़ता है। इसलिए धीरज रखें। मेरा सवाल सिस्टम से है और मांग है कि सबके लिए बेहतर सिस्टम हो। आपमें से किसी की समस्या को नहीं दिखा सका तो तो आप मुझे ज़रूर उलहाना दें मगर बात समझिए कि जो दिखाया है उसी में आपका सवाल भी है।

आपके मेसेज ने पत्रकारिता का एक नया मॉडल बना दिया है। उसके लिए मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करना चाहता हूं और प्रणाम करना चाहता हूं। स्कूल सीरीज़, बैंक सीरीज़, नौकरी सीरीज़, आंदोलन सीरीज़ ये सब आप लोगों की बदौलत संभव हुआ है। दो तीन जुनूनी संवाददाताओं का साथ मिला है मगर इसका सारा श्रेय आप पब्लिक को जाता है।दुनिया का कोई न्यूज़ रूम इतनी सारी सूचनाएं एक दिन या एक हफ्ते में जमा नहीं कर सकता था। महिला बैंकरों ने अपनी सारी व्यथा बताकर मुझे बदल दिया है। वो सब मेरी दोस्त जैसी हैं अब। आप सभी का बहुत शुक्रिया। हर दिन मेरे फोन पर आने वाले सैंकड़ों मेसेज से एक पब्लिक न्यूज़ रूम बन जाता है। मैं आपके बीच खड़ा रहता हूं और आप एक क़ाबिल संवाददाताओं की तरह अपनी ख़बरों की दावेदारी कर रहे होते हैं। मुझे आप पर गर्व है। आपसे प्यार हो गया है। कल एक बुजुर्ग अपनी कार से गए और हमारे लिए तस्वीर लेकर आए। हमारे पास संवाददाता नहीं था कि उसे भेजकर तस्वीर मंगा सकूं।

जब मीडिया हाउस खत्म कर दिए जाएंगे या जो पैसे से लबालब हैं अपने भीतर ख़बरों के संग्रह की व्यवस्था ख़त्म कर देंगे तब क्या होगा। इसका जवाब तो आप दर्शकों ने दिया है। आपका दर्जा मेरे फ़ैन से कहीं ज़्यादा ऊंचा है। आप ही मेरे संपादक हैं। कई बार मैं झुंझला जाता हूं। बहुत सारे फोन काल उठाते उठाते, उसके लिए माफी चाहता हूं। आगे भी झुंझलाता रहूंगा मगर आप आगे भी माफ करते रहिएगा। यही व्यवस्था पहले मीडिया हाउस के न्यूज़ रूम में होती थी। लोगों के संपर्क संवाददाताओं से होते थे। मगर अब संवाददाता हटा दिए गए हैं। स्ट्रिंगर से भी स्टोरी नहीं ली जाती है। जब यह सब होता था तो न्यूज़ रूम ख़बरों से गुलज़ार होता था। अब इन सबको हटा कर स्टार एंकर लाया गया है।

आपसे एक गुज़ारिश है। आप किसी एंकर को स्टार होने का अहसास न कराएं। मुझे भी नहीं। ये एंकर अब जन विरोधी गुंडे हैं। एक दिन जब आपके भीतर का सियासी और धार्मिक उन्माद थमेगा तब मेरी हर बात याद आएगी। ये एंकर अब हर दिन सत्ता के इशारे पर चलने वाले न्यूज रूम में हाज़िर होते हैं। पुण्य प्रसून वाजपेयी ने हाल ही में कहा है कि ख़बरों को चलाने और गिराने के लिए पीएमओ से फोन आते हैं। कोबरा पोस्ट के स्टिंग में आपने देखा ही कैसे पैसे लेकर हिन्दू मुस्लिम किए जाते हैं। इस सिस्टम के मुकाबले आप दर्शकों ने जाने अनजाने में ही एक न्यूज़ रूम विकसित कर दिया है जिसे मैं पब्लिक न्यूज़ रूम कहता हूं। बस इसे ट्रोल और ट्रेंड की मानसिकता से बचाए रखिएगा ताकि खबरों को जगह मिले न कि एक ही ख़बर भीड़ बन जाए।

मैंने सोचा है कि अब से आपकी सूचनाओं की सूची बना कर फेसबुक पर डाल दूंगा ताकि ख़बरों को न कर पाने का अपराधबोध कुछ कम हो सके। यहां से भी लाखों लोगों के बीच पहुंचा जा सकता है। कभी आकर आप मेरी दिनचर्या देख लें। एक न्यूज़रूम की तरह अकेला दिन रात जागकर काम करता रहता हूं। कोई बंदा ताकतवर नहीं होता है। जो ताकतवर हो जाता है वो किसी की परवाह नहीं करता। मैं नहीं हूं इसलिए छोटी छोटी बातों का असर होता है। आज कल इस लोकप्रियता को नोचने के लिए एक नई जमात पैदा हो गई है जो मेरा कुर्ता फाड़े रहती है। यहां भाषण वहां भाषण कराने वाली जमात। एक दिन इससे भी मुक्ति पा लूंगा। शनिवार रविवार आता नहीं कि याद आ जाता है कि कहीं भाषण देने जाना है। उसके लिए अलग से तैयारी करता हूं जिसके कारण पारिवारिक जीवन पूरा समाप्त हो चुका है। जल्दी ही आप ऐसे भाषणों को लेकर आप एक अंतिम ना सुनेंगे। अगर आप मेरे मित्र हैं तो प्लीज़ मुझे न बुलाएं। कोई अहसान किया है तब भी न बुलाएं। मैं अब अपनी आवाज़ सुनूंगा साफ साफ मना कर दूंगा। अकेला आदमी इतना बोझ नहीं उठा सकता है। गर्दन में दर्द है। कमर की हालत खराब है। चार घंटे से ज्यादा सो नहीं पाता।

आप सब मुझे बहुत प्यार करते हैं, थोड़ा कम किया कीजिए, व्हाट्स अप के मेसेज डिलिट करते करते कहीं अस्पताल में भर्ती न हो जाऊं। इसलिए सिर्फ ज़रूरी ख़बरें भेजा करें। बहुत सोच समझ कर भेजिए। मुझे जीवन में बहुत बधाइयां मिली हैं, अब रहने दीजिए। मन भर गया है। कोई पुरस्कार मिलता है तो प्राण सूख जाता है कि अब हज़ारों बधाइयों का जवाब कौन देगा, डिलिट कौन करेगा। मुझे अकेला छोड़ दीजिए। अकेला रहना अच्छा लगता है। अकेला भिड़ जाना उससे भी अच्छा लगता है। गुडमार्निग मेसेज भेजने वालों को शर्तियां ब्लाक करता हूं। बहुतों को ब्लाक किया हूं। जब नौकरी नहीं रहेगी तब चेक भेजा कीजिएगा! तो हाज़िर है पब्लिक न्यूज़ रूम में आई ख़बरों की पहली सूची।

उत्तर प्रदेश में बेसिक टीचर ट्रेनिंग कोर्स एक पाठ्यक्रम है। प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक की नौकरी पाने के लिए यह कोर्स करना होता है। प्राइवेट कालेज में एक सेमेस्टर की फीस है 39,000 रुपए। राज्य सरकार हर सेमेस्टर में 42,000 रुपये भेजती है। मगर इस बार छात्रों के खाते में 1800 रुपये ही आए हैं। छात्रों का कहना है कि अगले सेमेस्टर में एडमिशन के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। आगरा के एम डी कालेज के छात्र ने अपनी परेशानी भेजी है। उनका कहना है कि प्राइवेट और सरकारी कालेज के छात्रों के साथ भी यही हुआ है।

छात्र ने बताया कि बेसिक टीचर ट्रेनिंग का नाम सत्र 2018 से बदलकर डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन कर दिया है। इसमें राज्यभर में 2 लाख छात्र होंगे। अब जब 2 लाख छात्र अपने साथ होने वाली नाइंसाफी से नहीं लड़ सकते तो मैं अकेला क्या कर सकता हूं। इन्होंने कहा है कि मैं कुछ करूं तो मैं लिखने के अलावा क्या कर सकता हूं। सो यहां लिख रहा हूं।

बिहार से 1832 कंप्यूटर शिक्षक चाहते हैं कि मैं उनकी बात उठाऊं। लीजिए उठा देता हूं। ये सभी पांच साल से आउटसोर्सिंग के आधार पर स्कूलों में पढ़ा रहे थे। मात्र 8000 रुपये पर। अब इन्हें हटा दिया गया है। आठ महीने से धरने पर बैठे हैं मगर कोई सुन नहीं रहा है। इन्हें शिक्षक दिवस के दिन ही हटा दिया गया। कई बार लोग यह सोचकर आउटसोर्सिंग वाली नौकरी थाम लेते हैं कि सरकार के यहां एक दिन परमानेंट हो जाएगा। उन्हें आउटसोर्सिंग और कांट्रेक्ट की नौकरी को लेकर अपनी राजनीतिक समझ बेहतर करनी होगी। नहीं कर सकते तो उन्हें रामनवमी के जुलूस में जाना चाहिए जिसकी आज कल इन 1832 कंप्यूटर शिक्षकों की भूखमरी से ज़्यादा चर्चा है। ऐसा कर वे कम से कम उन्माद आधारित राजनीति के लिए प्रासंगिक भी बने रहेंगे। नौकरी और सैलरी की ज़रूरत भी महसूस नहीं होगी क्योंकि उन्माद की राजनीति अब परमानेंट है। उसमें टाइम कट जाएगा। सैलरी की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी। वैसे इन शिक्षकों ने एक ट्विटर हैंडल भी बनाया है जहां वे मुख्यमंत्री को टैग करते रहते हैं। मगर कोई नहीं सुनता है। पचास विधायकों ने इनके लिए लिखा है मगर कुछ नहीं हुआ। ये सांसद विधायक भी किसी काम के नहीं है। पत्र लिखकर अपना बोझ टाल देते हैं।

हज़ारों की संख्या में ग्रामीण बैंक के अधिकारी और कर्मचारी तीन दिनों से हड़ताल पर हैं मगर इन्हें सफलता नहीं मिली है। रिटायरमेंट से पहले एक लाख रुपये की सैलरी होती है और रिटायर होने के अगले ही महीने इनकी पेंशन 2000 भी नहीं होती है। बहुत से बुज़ुर्ग बैंकरों की हालत ख़राब है। कोई 2000 में कैसे जी सकता है। आप नेताओं की गाड़ी और कपड़े देखिए। अय्याशी चल रही है भाई लोगों की। ज़ुबान देखिए गुंडों की तरह बोल रहे हैं। आपका सांसद और विधायक पेंशन लेता है और आप से कहता है कि पेंशन मत लो। यह चमत्कार इसलिए होता है क्योंकि आप राजनीतिक रूप से सजग नहीं है। आखिर ऐसा क्यों है कि सरकारें किसी की नहीं सुनती तो फिर क्यों इन दो कौड़ी के नेताओं के पीछे आप अपना जीवन लगा देते हैं।

कटिहार मेडिकल कालेज के छात्र लगातार मेसेज कर रहे हैं। वहां डॉक्टर फैयाज़ की हत्या हो गई थी। कालेज प्रशासन ख़ुदकुशी मानता है। फ़ैयाज़ की हत्या को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं। कैंडल मार्च कर रहे हैं। बहुत दुखद प्रसंग है। गोपालगंज, कटिहार में भी छात्रों ने प्रदर्शन किया है। दोस्तों अपनी लड़ाई में मेरे इस लेख को ही शामिल समझना। मिलने की ज़रूरत नहीं है न बार बार मेसेज करने की। काश संसाधनों वाले चैनल के लोग आपकी खबर कर देते तब तक आप अपने घरों से हर न्यूज़ चैनल का कनेक्शन कटवा दें। एक रुपया चैनलों पर ख़र्च न करें।

अनवर बर्ख़ास्त हो गया, अनिल बच गया। हांसी से किसी पाठक ने दैनिक भास्कर की क्लिपिंग भेजी है। खबर में लिखा गया है कि गवर्नमेंट पी जी कालेज प्रशासन ने प्रोग्रेसिव स्टुडेंट यूनियन के सदस्य अनवर को बर्ख़ास्त कर दिया और एक अन्य सदस्य अनिल को चेतावनी दी है। अच्छी बात है कि सभी छात्रों ने इसका विरोध किया है और प्रिंसिपल सविता मान से मिलकर आंदोलन की चेतावनी दी है।

भास्कर ने लिखा है कि कालेज के इतिहास विभाग ने 22 मार्च को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत के मौके पर भाषण प्रतियोगिता कराई थी। कार्यक्रम में प्रोगेसिव स्टुडेंट्स फ्रंट के सदस्यों ने पुस्तक प्रदर्शनी लगाई। भगत सिंह की जेल डायरी,दस्तावेज़ व अन्य प्रगतिशील पत्रिकाएं रखी गईं। छात्रों ने कहा कि प्रिंसिपल ने क्रायक्रम के बीच से ही सब हटवा दिया। छात्रों के आई कार्ड छीन लिया। इसके बाद नोटिस लगाया गया जिसने अनवर का नाम काटने और अनिल को चेतावनी देने की बात लिखी हुई है। छात्रों ने विरोध किया है। प्रिंसिपल ने कहा कि अनवर अनुशासनहीनता करता है। प्राध्यापकों की बात नहीं मानता है। दीवार पर पोस्टर चिपका देता है। उसे कई बार चेतावनी दी गई मगर नहीं माना। हमने भास्कर की ख़बर यहां उतार दी।

एनडीटीवी के चर्चित एंकर रवीश कुमार की एफबी वॉल से.

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संदीप ने जिस तरीके से हत्या किए जाने की आशंका जताई थी, वैसे ही उन्हें मारा गया, पढ़िए पत्र

भिंड में रेत माफिया और पुलिस के गठजोड़ का स्टिंग करने वाले पत्रकार संदीप शर्मा ने अपनी जिस किस्म की हत्या किए जाने की आशंका जताई थी, उनकी हत्या वैसे ही कर दी गई. पुलिस प्रशासन और शासन से उनका गुहार लगाना, पत्र लिखना सब बेकार गया.

रेत मफिया द्वारा भेजे गए एक ट्रक ने रांग साइड जाकर बाइक से जा रहे संदीप को कुचल कर मार डाला. पढ़िए वो पत्र जो संदीप ने शासन-प्रशासन को भेजा था और एक्सीडेंट कराकर हत्या करा दिए जाने की आशंका जताई थी….

संदीप शर्मा की जघन्य हत्या पर ग्वालिय के पत्रकार Arpan Raut फेसबुक पर लिखते हैं :

एक पत्रकार को मरना ही चाहिए! पत्रकार एक ऐसा जीव है जो दूसरों के लिए आजीवन संघर्ष करता है। उसकी सामाजिक बुराइयाँ व भलाइयाँ कभी व्यक्तिगत नही होती। बस अख़बार मे १२ पॉइंट बोल्ड की बायलाइन स्टोरी और चैनल पर एक्सक्लूसिव ब्रेकिंग उसका धर्म है। जबकि उसका जब अंत होता है तो वह नितांत अकेला होता है। जिनके लिए वह ख़बरें लिखता, गढ़ता और बुनता है वो कभी पलटकर साथ नही देते। जिस अख़बार व चैनल के लिए वह अपना पूरा जीवन दे देता है वह भी बुरे समय में पहचान तक नही दिखाते। मसला भिंड में पत्रकार संदीप शर्मा से जोड़कर कह रहा हूँ।

अंचल का खनन माफ़िया इतना क़द्दावर है कि वह पत्रकार से पहले एक आईपीएस समेत कई पुलिस वालों को भी खा चुका है। रूपये की पंजीरी जब बँटती है तो फिर पुलिस मरे या पत्रकार जवाबदार और नज़दीकी भी दोमुँहे साँप बन जाते है। एक मुँह से माल खाते है दूसरे से उपवास रखते है। हैरानी तब हुई है कि संदीप केवल कांग्रेस , आम आदमी या वामियो और कला क्षेत्र से जुड़ा पत्रकार नही था।

कल शहर के बुध्दीजीवी वर्ग के आव्हान पर सत्ता से जुड़ा एक व्यक्ति दुख जताने नही आया, और ना ही हाइ फाइ क्लब वाले आंटी अंकल जो फोटो खिंचाकर खुदको सबसे बड़ा समाजसेवी होने का स्वाँग रचते है। विपक्ष का आना लाज़िमी है कि वह सत्ता का विरोध करना चाहता है। उनके आने का आशय यह तो नही कि मरने वाला पत्रकार सत्ता की विरोधी था ! वह सत्ता का नही वरन भ्रष्टाचार व अव्यवस्था का विरोधी था। खैर, आज सुबह हम हकीकत में इन सभी को कोसने का नैतिक हक़ भी खो चुके है। दरअसल कल के विरोध प्रदर्शन में केवल एक समाचार पत्र ने ही जगह दी। बाकी सब बड़े ही बेशर्मी से नज़रअंदाज़ कर गये। यक़ीन मानिये एक पत्रकार की हत्या का विरोध मीडिया हाउस ही बेशर्मी से अनदेखा करने लगे तो उसे मर ही जाना चाहिए।

मूल खबर :

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अबकी भिंड में पत्रकार संदीप शर्मा की ट्रक से कुचलकर रेत माफिया ने करा दी हत्या

भिंड में रेत माफिया और पुलिस के गठजोड़ का स्टिंग करने वाले पत्रकार संदीप शर्मा की ट्रक से कुचलकर हत्या कर दी गई। उन्होंने अपनी हत्या की आशंका पहले ही जता दी थी। संदीप शर्मा तत्कालीन अटेर एसडीओपी इंद्रवीर भदौरिया का स्टिंग कर चर्चा में आए थे। संदीप न्यूज चैनल के लिए काम करते थे.

ट्रक से कुचले जाने का सीसीटीवी फुटेज सामने आ गया है. इसमें साफ नजर आ रहा है कि ट्रक ड्राइवर ने किस तरह रांग साइड जाकर बाइक से रहे संदीप को कुचला और फिर तेजी से भाग गया. संदीप को डायल 100 से तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.

रेत माफिया और पुलिस के गठजोड़ के स्टिंग के बाद संदीप इस तरह के हादसे की आशंका पहले ही जता चुके थे. हत्या की आशंका को लेकर संदीप ने भिंड एसपी सहित पीएम और सीएम को भी पत्र लिखा था.

गौरतलब है इससे पहले भी रेत माफिया प्रदेश में कई बार बड़े अधिकारियों तक पर हमला कर चुके हैं.

पत्रकार संदीप शर्मा की मौत की जांच के लिए एसपी प्रशांत खरे ने एसआईटी गठित की है. इस एसआईटी में डीएसपी राकेश छारी, टीआई मेहगांव नरेंद्र त्रिपाठी, टीआई कोतवाली शैलेन्द्र कुशवाह, एसआई आशुतोष शर्मा, एएसआई सत्यवीर सिंह और साइबर सेल के लोग शामिल हैं.

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तो क्या यूपी में राघवेंद्र प्रताप सिंह की हैसियत डिप्टी सीएम जैसी है! सुनें ये टेप

ये तो सभी जानते हैं कि योगी आदित्यनाथ जब सीएम नहीं थे, तब भी उनके सबसे करीबी आदमी राघवेंद्र प्रताप सिंह हुआ करते थे. डुमरियागंज से विधायक बने राघवेंद्र प्रताप सिंह की हैसियत इन दिनों अघोषित रूप से डिप्टी सीएम की हो चुकी है. ऐसा उनके सगे बड़े भाई का कहना है.

एक आडियो वायरल हुआ है जिसमें राघवेंद्र प्रताप सिंह के सगे बड़े भाई एक पंडीजी को बहुत मीठे तरीके से समझा रहे हैं. पंडीजी को शराब की एक दुकान चलाने के लिए ठेका मिला है. इस दुकान को राघवेंद्र प्रताप सिंह अपने खास लोगों की दुकान बताते हुए इस पर से दावेदारी वापस लेने की बात पंडीजी को समझा रहे हैं.

इस बातचीत में कहीं कोई सीधी धमकी या गाली-गलौज नहीं है. लेकिन ये स्पष्ट है कि शराब की दुकान चलाने का लाइसेंस वैध तरीके से पाने के बावजूद पंडीजी को इस पर से अपना दावा वापस लेने के लिए समझाया जा रहा है. इस समझाने में धमकाना तो निहित ही है. 

फिलहाल इस टेप को योगी के ठाकुर राज में राजपूतों के बढ़े हुए प्रभुत्व और ब्राह्मणों की मलिन हुई हैसियत के रूप में प्रचारित किया जा रहा है.

कुल मिलाकर बातचीत मजेदार है जिसमें आप ये सुन सकते हैं कि किस तरह डीएम के बारे में टिप्पणी की जा रही है और विधायक राघवेंद्र को किस रूप में प्रचारित किया जा रहा हैं.

टेप सुनने के लिए नीचे क्लिक करें :

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राजन अग्रवाल इंडिया न्यूज़ हरियाणा के संपादक बने

राजन अग्रवाल को इंडिया न्यूज़ हरियाणा का संपादक बनाया गया है. वे पहले भी इस चैनल के हिस्से रह चुके हैं. इसके पहले वह ‘लीविंग इंडिया न्यूज़’ में काम कर रहे थे.

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इन दो उगाहीबाज पत्रकारों से सिपाही तक गिड़गिड़ाते हैं, सुनिए ये आडियो

यूपी के जिला महोबा के थाना खन्ना का है ये आडियो. असफाक खां और राजेंद्र यादव नाम के दो शख्स, जो खुद को दैनिक जागरण और अमर उजाला का पत्रकार बताते हैं,  की शिकायत पुलिस कप्तान से की गई है. शिकायत करने वाले सिपाही हैं.

ये दोनों पत्रकार थाने के सिपाहियों को सस्पेंड और लाइन हाजिर कराने की झूटी खबर छापने की बात कह कर इनसे वसूली करते हैं. वसूली इस हद तक पहुँच गयी कि सिपाही गिड़गिड़ाने लगते हैं और अपनी माँ की बीमारी का वास्ता देते हैं. इसके बावजूद दोनों उगाहीबाज पत्रकार इन सिपाहियों से बदसलूकी करने से नहीं बाज आ रहे हैं.

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चंडीगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार संजीव सलारिया का हार्ट अटैक से निधन

चंडीगढ़ से एक बुरी खबर है. दैनिक सवेरा टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार संजीव सलारिया का मंगलवार को हार्ट अटैक से निधन हो गया. हंसमुख स्वभाव वाले संजीव सलारिया अपने काम के प्रति निष्ठावान थे. उनके निधन पर दैनिक सवेरा के संपादक शीतल विज ने गहरा दुख व्यक्त किया है. सालारिया अपने पीछे मां-बाप, दो बहन व भाई को छोड़ गए हैं.  संजीव सलारिया दैनिक जागरण और दिव्य हिमाचल जैसे अखबारों में भी काम कर चुके हैं.

Chandigarh : Sanjeev Salaria , Senior Reporter of Dainik Savera Times dies here due to heart attack. He was in Sector 17 to attend regular editorial meeting. After meeting he fell down in Sector 17 and he was rushed to Sector 32 Govt.Medical College and Hospital where doctor declared him dead. Media persons immediately rushed to Hospital.

The sad demise of Salaria , a major loss to his family and in media world. He worked in Divya Himachal, Dainik Jagaran and now he was working with Savera Times. His last story was a major hit which was on Railway tracks.

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रतन टाटा ने शेखर गुप्ता के मीडिया वेंचर को दिए साढ़े तीन करोड़ रुपए

‘द प्रिंट’ नाम से शेखर गुप्ता का जो मल्‍टीमीडिया वेंचर है, उसमें रतन टाटा ने साढ़े तीन करोड़ रुपये लगाया है. पत्रकार शेखर गुप्‍ता द प्रिंट के ऑनलाइन प्लेटफार्म के जरिये राजनीति, अर्थशास्त्र समेत कई फील्ड्स की खबरों को कवर करते हैं. यह वेंचर पिछले साल शुरू हुआ था.

इस वेंचर के निदेशकों में रतन टाटा, उदय कोटक, नंदन नीलेकणि, रवि ठाकरान और विजय शेखर शर्मा जैसे पूंजीपति हैं. शुरुआत में इनके जरिये 45 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया गया था. अब फिर से टाटा ने इसमें निवेश कर दिया है.

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