लेफ्टिस्ट से लेकर राइटिस्ट तक, हर कोई दे रहा राज किशोर को श्रद्धांजलि

वरिष्‍ठ पत्रकार Raj Kishore नहीं रहे। मैं उनके लिखे का प्रशंसक था। आम बोलचाल की भाषा में सरलता-सहजता से वे जिस तरह गंभीर बात लिख जाते थे, वह उन्‍हें विशिष्‍ट बनाता था। हिंदी के अनेक समाचार-पत्रों में उनके स्‍तंभ थे। दैनिक जागरण, जनसत्ता, अमर उजाला आदि में उनके नियमित लेख छपते थे। मैं बड़े ही चाव से पढ़ता था। कारण कि वे गांधी और लोहिया के विचारों के आलोक में लेखन करते थे और मैं भी इन दोनों महापुरुषों के विचार से अनुप्राणित होता हूं। वे साम्‍यवाद के आलोचक थे।

वे संघ विचार परिवार के कट्टर आलोचक थे। एकांगी विरोध करते थे। हिंदुत्‍व के घोर विराेधी थे। इस कारण, उनसे अनेक बार बहसें भी हुईं। एक संस्‍मरण है। एक बार मित्र पंकज कुमार झा के साथ साहित्‍य अकादमी जाना हुआ था। अकादमी में राजकिशोरजी मिल गए। वे सिगरेट पी रहे थे। मुझे ठीक नहीं लगा। कारण कि वे अपने लेखों में अकसर नैतिकता-सामाजिकता का प्रश्‍न उठाते रहते थे।

मैंने उनसे कह ही दिया कि राजकिशोरजी, आपके लिखे का जबरदस्‍त प्रशंसक हूं, लेकिन आप सार्वजिनक जगह, वह भी साहित्‍य अकादमी भवन, पर सिगरेट पी रहे हैं। लेकिन यह उनका बड़प्‍पन था कि वे नाराज नहीं हुए। बड़े मन का परिचय देते हुए स्‍वीकार किया कि आदत का शिकार हूं और तुरंत उन्‍होंने उसे फेंक दिया।

उनके नहीं रहने की जब आज खबर मिली तो पता चला कि फेफड़ों के संक्रमण के चलते उनका देहांत हुआ। वे लिखकर बेहतर दुनिया बना रहे थे। उनसे कुछ मुद्दों पर वैचारिक मतभेद थे लेकिन उनका लिखा अधिकांशत: प्रेरित करता था। प्रख्‍यात आलोचक डॉ. नामवर सिंह यहां तक कहते थे कि राजकिशोर हिंदी के एकमात्र पत्रकार हैं। हिंदी के ऐसे श्रेष्‍ठ पत्रकार को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि!

राइटिस्ट थिंकर संजीव सिन्हा की एफबी वॉल से.


IFWJ pays rich tributes to Raj Kishore, a thinker journalist

Dear Comrade,

IFWJ is sad and grieved at the passing away of a well known journalist and litterateur Raj Kishore (71) today in New Delhi. He was suffering from lung infection. Only two months ago he had lost his young and talented son, thereafter he fell into deep depression and could not cope up his loss. Shri Kishore was one of the very few intellectually surcharged and well-read journalists, who wrote his articles with commitment and conviction in a persuasive and logical manner. His language was lucid, succinct and very convincing.

He came into limelight of journalism from the famous Hindi daily ‘Ravivar’, where he used to write on different subjects. His famous interview with Osho Rajneesh and reports of the activities of his Ashram were awaited week after week by readers with bated breath. It will not be an exaggeration to say that the reports of Raj Kishore contributed a lot in taking the circulation of the magazine ‘Ravivar’ to dizzy heights.

Later he joined the famous Hindi daily ‘Navbharat Times’ as an Assistant Editor and worked for many years. He wrote for various newspapers including ‘Jansatta’ and Rastriya Sahara. He was known for his meticulous research and never allowed the ethical deficit in his writings of the sake of popularity. He was a person of a recluse nature and disliked the cheap tendency of playing to the gallery, a weakness that has become very common among journalists of today.

Raj Kishore ji has had his ancestral roots to the Azamgarh district of Eastern Uttar Pradesh but he has had his schooling and education in Kolkata. He had tremendous sense belonging for the ‘city of joy’ and Bengali culture. He was also the member of the Indian Journalists Association (IJA), an affiliate of the ‘Indian Federation of Working Journalists’ (IFWJ) in West Bengal.

IFWJ pays its respectful homage to the departed soul.

Parmanand Pandey

Secretary General-IFWJ


राजकिशोर ने पत्रकारिता की एक पीढ़ी के बहुत सारे लोगों पैदा किया

Mahendra Mishra : अभी निगम बोध घाट से पत्रकार राज किशोर जी के अंतिम संस्कार से लौटा हूं. उनके साथ ही पत्रकारिता का एक स्तंभ चला गया. अगर ये कहा जाए कि पत्रकारिता की एक पीढ़ी के बहुत सारे लोगों को उन्होंने पैदा किया है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.अच्छी बात ये है कि एक बड़ा हिस्सा ख़ुद इस बात को स्वीकार करता है.

वैचारिक स्पष्टता और प्रतिबध्दता के मामले में वो बहुत लोगों से बहुत आगे खड़े थे. इस दौर में जबकि देश और समाज सबसे ज्यादा संकट में हैं उनकी सक्रियता देखने लायक थी. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक हर मोर्चे पर उन्हें देखा जा सकता था. वो इसकी जरूरत को कितना समझ रहे थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब एम्स में उन्हें icu में ले जाया जा रहा था तो उस समय उन्हें कर्नाटक में सरकार के गठन की चिंता सता रही थी. उसके बारे में पास खड़े लोगों से पूछ रहे थे.

इस समय जबकि उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी. उनका जाना खल गया. लेकिन राज किशोर जी अपने लिखे के जरिए अपने पाठकों और अपने सिखाए पत्रकारों के जरिए हमेशा हमारे बीच जिंदा रहेंगे. और इस तरह से अन्याय के खिलाफ उनकी लड़ाई भी जारी रहेगी. आज इस मौके पर बहुत सारे वरिष्ठ पत्रकारों ने मौजूद होकर राजकिशोर को अंतिम विदाई दी. एक बार फिर राज किशोर जी को भावभीनी श्रद्धांजलि.

लेफ्टिस्ट थिंकर महेंद्र मिश्र की एफबी वॉल से.

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