Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

All posts tagged "sansmaran"

मध्य प्रदेश

भोपाल : वरिष्ठ पत्रकार चंदा बारगल का हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया। चंदा बारगल उन पत्रकारों में शामिल थे जिन्होंने अपनी लेखनी...

टीवी

आज इस ख़बर को पढ़ी, तो चेहरे पर मुस्कान छा गई। अब ये मेरी कहानी पढ़ने के बाद इस मुस्कान का अर्थ निकालने की...

सुख-दुख

Ravish Kumar गानों की दुनिया का अज़ीम सितारा था,मोहम्मद अज़ीज़ प्यारा था. काम की व्यस्तता के बीच हमारे अज़ीज़ मोहम्मद अज़ीज़ दुनिया को विदा...

सियासत

श्रीगंगानगर। डेट और दिन तो याद नहीं, लेकिन ये पक्का याद है कि सर्दी का मौसम था। दोपहर पूरी तरह ढली नहीं थी। सर्दी...

सुख-दुख

वरिष्‍ठ पत्रकार Raj Kishore नहीं रहे। मैं उनके लिखे का प्रशंसक था। आम बोलचाल की भाषा में सरलता-सहजता से वे जिस तरह गंभीर बात...

मध्य प्रदेश

Jayram Shukla : एक आम आदमी का जननायक बन जाना... श्रीनिवास तिवारी रीवा से लेकर भोपाल दिल्ली तक यथार्थ से ज्यादा किवंदंती के जरिए...

सुख-दुख

Upendranath Pandey : शेखर भाई, तुमने यह अच्छा नहीं किया! आखिर तुमने फेसबुक फेस न करने की मेरी कसम तुड़वा दी। इसी छह मार्च...

साहित्य

अवनीश सिंह चौहान सुविख्यात साहित्यकार श्रद्देय देवेन्द्र शर्मा 'इन्द्र' जी (गाज़ियाबाद) से कई बार फोन पर बात होती— कभी अंग्रेजी में, कभी हिन्दी में,...

सुख-दुख

स्वर्गीय संजय त्रिपाठी होते हैं कुछ लोग जो सिर्फ़ संघर्ष के लिए ही पैदा होते हैं। हमारे छोटे भाई और फ़ोटोग्राफ़र मित्र संजय त्रिपाठी...

सुख-दुख

भड़ास के एडिटर यशवंत अपने गांव गए तो सबसे गरीब ब्राह्मण परिवार के सबसे बेटे बिग्गन महराज की असमय मौत के घटनाक्रम को सुन-देख...

सुख-दुख

Yashwant Singh : गांव आया हुआ हूं. कल शाम होते-होते बिग्गन महाराज के गुजर जाने की खबर आई. जिस मंदिर में पुजारी थे, वहीं...

सुख-दुख

बड़ी ही मजेदार थी दिनेश ग्रोवर की जिन्दादिली…  बहुत साल पहले की बात है। वयोवृद्ध पत्रकार एवं कवि-लेखक इब्बार रब्बी राजेन्द्र यादव की साहित्यिक...

सुख-दुख

एक दुर्भाग्यपूर्ण संयोग या दुर्योग, जो कहिए... मेरे ज्यादातर प्रिय पत्रकारों का समुदाय धीरे-धीरे सिकुड़ता छोटा होता जा रहा है... दो-तीन साल के भीतर...

सुख-दुख

Rajendra Rao : दैनिक ट्रिब्यून के संपादक और मेरे अजीज संतोष तिवारी का असमय प्रस्थान स्तब्ध और उदास कर गया। सत्तर के दशक में...

आयोजन

गोरखपुर। कवि व समालोचक प्रो अनन्त मिश्र ने कहा है कि  रावण ने पूरी दुनिया से बटोरकर सोने की लंका बनाई थी। अन्तत: उसका...

सुख-दुख

मैं बनवारी जी से मिलने साढ़े चार सौ किमी की यात्रा तय कर दिल्ली आ गया वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल जब से विजुअल मीडिया...

साहित्य

वरिष्ठ पत्रकार बच्चन सिंह जी का अवसान हिंदी पत्रकारिता के एक युग का अंत है. बच्चन जी दरअसल पुरानी से लेकर अति आधुनिक पत्रकारिता...

सुख-दुख

Shambhunath Shukla : नौकरी छोड़े भी चार साल हो चुके और अमर उजाला में मेरा कुल कार्यकाल भी मात्र दस वर्ष का रहा पर...

वेब-सिनेमा

अलविदा डेविड कॉपरफील्ड. ये उपमा जस्टिस सुरेश दत्त झा के लिए है जो संयोग से हमारे पिता थे. वो अकसर खुद अपनी तुलना डेविड...

सुख-दुख

पार्ट वन से आगे.... भारत के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने जब मेल कर मुझे सूचित किया कि वेनेजुएला में होने वाले गुट...

सुख-दुख

(स्व. अशोक अज्ञात जी) कभी माफ़ मत कीजिएगा अशोक अज्ञात जी, मेरे इस अपराध के लिए ... हमारे विद्यार्थी जीवन के मित्र अशोक अज्ञात...

आयोजन

पिछले दिनों अलीगढ़ जाना हुआ. वहां के छात्रनेता और पत्रकार ज़ियाउर्रहमान ने अपनी पत्रिका 'व्यवस्था दर्पण' के एक साल पूरे होने पर आईटीएम कालेज...

सुख-दुख

जनसत्ता कोलकाता से शैलेंद्र (दाएं) के रिटायरमेंट के दिन उन्हें विदाई देते और यादगार के बतौर तस्वीर खिंचाते पलाश विश्वास (बाएं) पलाश विश्वास का...

सुख-दुख

बादशाहत सबकी सलामत रहे ! हालांकि अब बादशाहों, राजाओं का जमाना नहीं रहा, लेकिन मेरा दिल नहीं मानता। ये आज भी होते हैं और...

सुख-दुख

Rajiv Nayan Bahuguna : दरअसल इंदिरा गांधी और हेमवती नन्दन बहुगुणा में सन्देह के अंकुर 10 साल पहले ही पनप चुके थे, जिन्हें उनके...

सुख-दुख

सुनील छइयां की तीन तस्वीरें, तीन मुद्राएं... अब यादें शेष!   -पारस अमरोही- सुनील छइयां से पहली मुलाकात कब हुई, अब याद नहीं। शायद...

वेब-सिनेमा

Sant Sameer : रुडयार्ड किपलिंग की मशहूर रचना 'द जंगल बुक' पर बनी बहुप्रतीक्षित फ़िल्म आज रिलीज हो रही है। बनी कैसी है, यह...

सुख-दुख

सारा घर ले गया घर छोड़ के जानेवाला -रासबिहारी पाण्डेय- इस छोटे से जीवन में जिन बड़े कवि शायरों के साथ कुछ खुशनुमा शामें...

प्रिंट

विनय श्रीकर ढाई-तीन महीने पहले हिन्‍दी के महान पत्रकार बाबूराव पराड़कर की जयंती थी। लेकिन हिन्‍दी के किसी पत्रकार को उनकी याद नहीं आयी।...

सुख-दुख

Yashwant Singh : तंत्र साधना को जानने की इच्छा के तहत काफी समय से बहुत कुछ पढ़, देख, सुन, खोज रहा हूं. इसी दरम्यान...

सुख-दुख

Sant Sameer : भारतीय ज्ञानपीठ के पूर्व निदेशक और एक विशाल पाठक वर्ग के चहेते साहित्यकार रवीन्द्र कालिया जी के देहावसान के कई दिन...

आयोजन

मौत पर भारी एक शोकसभा : 'पंकज भाई की याद में' कवि पंकज सिह की शोक सभा, 14 जनवरी 2016, गांधी शांति प्रतिष्‍ठान, दिल्‍ली...

साहित्य

IIMC पास करने के कुछ दिनों की बात है। पत्रकारिता का नया-नया रंगरूट था। नौकरी नहीं करने का फैसला किया था। फ्रीलांसिंग शानदार चलती...

सुख-दुख

Shiv Kant : कुछ ही क्षण पहले रूपा झा के फ़ेसबुक संदेश से पता चला कि जाने-माने कवि और बीबीसी के पूर्व प्रसारक पंकज...

सुख-दुख

करेंट बुक डिपो कानपुर के संस्थापक महादेव खेतान का अब से तकरीबन 16 वर्ष पूर्व 6 अक्टूबर 1999 को निधन हुआ। महादेव खेतान ने...

साहित्य

मशहूर कवि और पत्रकार पंकज सिंह का निधन देश के क्रांतिकारी वामपंथी सांस्कृतिक आंदोलन के लिए एक बड़ी क्षति है। 26 दिसंबर को दिल्ली...

सुख-दुख

एक बेतकल्लुफ-सी मुलाकात थी वो। दिल्ली में औपचारिक तौर पर काम संभालने के बाद एक पुराने वरिष्ठ सहयोगी के इसरार पर मैं अजित राय...

आयोजन

शिलांग में राजस्थानी समाज द्वारा 1959 में बनाया गया राजस्थान विश्राम भवन। जिंदगी यादों का कारवाँ है। हम भी अपने इस यादों के कारवे...

साहित्य

Vinod Bhardwaj : पंकज सिंह से मेरा पुराना परिचय था. 1968 से उन्हें जानता था. आरम्भ लघु पत्रिका की वजह से. 1980 में जब...

सुख-दुख

Ashish Maheshwari : फेसबुक है कि याद दिला देता है... आज जब पत्रकारिता मैनेज करने और मैनेज होने भर का माध्यम बनकर रह गई...

सुख-दुख

(स्व. राजेंद्र हाड़ा) Yashwant Singh : राजेंद्र हाड़ा जी आज सुबह चल बसे. अजमेर के जाने माने वकील और दबंग पत्रकार थे. पत्रकारिता छोड़कर...

साहित्य

Pankaj Chaturvedi : तुम्हारे लिए कोई एक शब्द इस्तेमाल करने की विवशता हो, तो मैं कहूँगा : अकृत्रिम। यही सिफ़त तुम्हें ज़िन्दगी के बेहद...

सुख-दुख

मौजूदा दौर में पत्रकारिता करते हुये पच्चीस-छब्बीस बरस पहले की पत्रकारिता में झांकना और अपने ही शुरुआती करियर के दौर को समझना शायद एक...

सुख-दुख

Jaishankar Gupta : बात पुरानी है, तब की जब हम इंडिया टुडे के साथ थे और पूर्व उप राष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत राजस्थान के मुख्यमंत्री।...

साहित्य

Pankaj Chaturvedi : उत्सवधर्मिता तुम्हें रास नहीं आती थी। तुम अपनी डायरी के पहले पन्ने पर 'धम्मपद' में संरक्षित बुद्ध का यह वचन लिखते...

टीवी

Vikas Mishra : दफ्तर में मेरी ठीक बाईं तरफ की सीट खाली है। ये अक्षय की सीट है। अक्षय अब इस सीट पर नहीं...

आयोजन

मुंबई : सांताक्रुज पूर्व के नजमा हेपतुल्ला सभागार में मुंबई हिंदी पत्रकार संघ द्वारा दिवंगत पत्रकार साहित्यकार अलोक भट्टाचार्य और पत्रकार उमेश द्विवेदी की...

सुख-दुख

The death of Com. K.L. Monga, many times General Secretary of the Bennett Coleman and Company Employees Union, is not only sad and shocking...

सुख-दुख

हमारे सहकर्मी, हमारे स्वजन अमर उजाला हल्द्वानी के संपादक सुनील साह नहीं रहे.  राजीव लोचन साह, हमारे राजीव दाज्यू के फेसबुक वाल पर अभी-अभी...

साहित्य

ओमप्रकाश अश्क जीवन में जटिलताएं न आयें तो आनंद की अनुभूति अलभ्य है। मुंह जले को ही तो मट्ठे की ठंडाई का एहसास हो...

आयोजन

बड़े भाई आलोक तोमर को गुजरे चार बरस हो गए. कल बीस मार्च को उनकी चौथी पुण्यतिथि पर सुप्रिया भाभी ने कांस्टीट्यूशन क्लब में...

टीवी

चौथा स्तंभ आज खुद को अपने बल पर खड़ा रख पाने में नाक़ाम साबित हो रहा है.... आज ये स्तंभ अपना अस्तित्व बचाने के...

सुख-दुख

(स्व. विनोद मेहता जी) Sumant Bhattacharya : विनोद मेहता की रुखसती का मतलब... मैं शायद उन चंद किस्मत वाले पत्रकारों में हूं, जिनका साक्षात्कार...

सुख-दुख

Om Thanvi :  विनोद मेहता के निधन के साथ निरंतर कमजोर होती संपादक की संस्था थोड़ी और हिल गई। डेबनेयर से लेकर आउटलुक तक...

प्रिंट

(सुशील उपाध्याय)   मीडिया में विचार की कद्र रही है, ऐसा हमेशा से माना जाता रहा है। इस धंधे में विचार कोई बुरी चीज...

प्रिंट

(सुशील उपाध्याय) भुवनेश जखमोला एक सामान्य परिवार से आया हुआ आम लड़का था। वैसा ही, जैसे कि हम बाकी लोग थे। वो भी उन्हीं...

प्रिंट

प्रातः स्मरणीय भाई साहब अतुल माहेश्वरी की आज चौथी पुण्य तिथि है। हां हम 'उन्हें भाई' साहब नाम से ही पुकारते रहे हैं। अमर...

टीवी

नौकरी पाने की ख्वाहिश थी. राज्यसभा टीवी में काम करने की सपना था. इन्टरव्यू में खुद को साबित करने की चुनौती थी. हिन्दी और...

टीवी

नौकरी पाने की ख्वाहिश थी. राज्यसभा टीवी में काम करने की सपना था. इन्टरव्यू में खुद को साबित करने की चुनौती थी. हिन्दी और...

सुख-दुख

अमरेंद्र कुमार वरिष्ठ पत्रकार अमरेंद्र कुमार अब हमारे बीच नहीं हैं। 10 मई, 1945 को जन्मे इस शख्स ने 13 दिसंबर, 2014 को आखिरी...

साहित्य

लगभग अनायास ही शैलेन्द्र चौहान मेरी ज़िन्दगी में चले आये थे। मुझे कई बार हैरत भी होती है कि कोई किसी के करीब न...

उत्तराखंड

हमारे पत्रकारिता जीवन का यह 40वां वर्ष है। पत्रकारिता हमारे जीवन यापन का साधन न होने के बावजूद जिस शिद्दत से पत्रकारिता के प्रति...

सुख-दुख

Dear Yashwant ji,  Still my hands are trembling , am shaken and eyes full of tears. Do not know how am I even writing...

सुख-दुख

: मैं, अजय नाथ झा और पूर्वी दिल्ली में ईस्ट एंड अपार्टमेंट की वो शाम : तारीख तो याद नहीं...हां महीना यही रहा होगा...

Latest 100 भड़ास

Advertisement