निगेटिव रिपोर्टिंग होने पर रोहतक पीजीआई में मीडिया की एंट्री बैन

रोहतक : हेल्थ यूनिवर्सिटी और पीजीआई प्रशासन ने मीडिया की एंट्री पर पूर्ण रूप से बैन लगा दिया है। प्रशासन ने संस्थान की निगेटिव रिपोर्टिंग होने के चलते यह निर्णय लिया है।

प्रशासन ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल के निर्देशों को भी मानने से इंकार कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पीजीआई में मीडिया पर किसी प्रकार का बैन नहीं होगा। रोहतक के पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी और पीजीआई निदेशक ने साफ तौर पर कह दिया है कि सिर्फ पॉजीटिव न्यूज ही प्रसारित व प्रकाशित होनी चाहिए। निगेटिव न्यूज होने पर प्रशासन की ओर से किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिलेगा। महीने में एक बार पीजीआई निदेशक पॉजीटिव न्यूज ब्रीफिंग करेंगे। 

पीजीआई रोहतक और विवादों का आपस में नाता है। अकसर ही पीजीआई में डाक्टर्स की लापरवाही से मरीजों की मौत की खबर आती रहती है, लेकिन इस तरह की खबरों की जब न्यूज चैनल और अखबारों में रिपोर्टिंग आती है तो वे पीजीआई प्रशासन को रास नहीं आती। पीजीआई प्रशासन चाहता है कि संस्थान की सिर्फ पॉजीटिव छवि ही पेश की जाए। निगेटिव न्यूज से पीजीआई की छवि पर नकारात्मक असर पड़ता है। यही वजह है कि तीन दिन पहले पीजीआई में रिपोर्टिंग करने गए दो पत्रकारों के साथ पीजीआई के डाक्टर्स व सुरक्षा कर्मियों ने न केवल दुर्व्यवहार किया गया था, बल्कि उन्हें बंधक भी बना लिया गया था। 

दरअसल ये पत्रकार एक डाक्टर के ड्यूटी पर मौजूद न होने और मरीजों की लाइन लगने की खबर मिलने के बाद वहां गए थे। इस तरह की निगेटिव खबरों के प्रकाशित और प्रसारित होने के बाद ही हेल्थ यूनिवर्सिटी व पीजीआई प्रशासन ने मीडिया की एंट्री पर बैन लगाया है। 

रोहतक के पत्रकारों ने तीन दिन पहले ही इस घटना पर कड़ा एतराज जताया था। तब हेल्थ यूनिवर्सिटी और पीजीआई प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात करने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भी गया था, लेकिन किसी अधिकारी ने मुलाकात नहीं की थी। मुलाकात के लिए सोमवार का समय तय गया था। निर्धारित समय पर पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी डा. ओपी कालड़ा से मुलाकात करने के लिए पहुंचा। शुरूआत में तो वीसी ने प्रतिनिधिमंडल से मिलने से ही इंकार कर दिया। 

उनकी तरफ से संदेश आया था कि सिर्फ एक पत्रकार अपनी बात रखने के लिए मिल सकता था। जब पत्रकारों ने एतराज जताया तो प्रतिनिधमंडल को बुलाया गया। उस दौरान पीजीआई निदेशक डा. राकेश गुप्ता भी वहां मौजूद थे। पत्रकारों से मुलाकात के दौरान दोनों आला अधिकारियों ने निगेटिव रिपोर्टिंग पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने पत्रकारों से आश्वासन मांगा कि वे पाॅजीटिव रिपोर्टिंग प्रकाशित व प्रसारित करने का आश्वासन दें। इस पर पत्रकारों ने इंकार कर दिया। तब वीसी व निदेशक ने कहा कि वे निगेटिव रिपोर्टिंग की इजाजत नहीं दे सकते क्योंकि इससे संस्थान की छवि पर गलत असर पड़ता है। 

हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी ने पिछले माह स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के पीजीआई दौरे की रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विज के दौरे की रिपोर्टिंग भी सही नहीं की गई। विज ने पिछले माह पीजीआई रोहतक का दौरा कर अनेक अनियमितताओं को उजागर किया था। इस बारे में तमाम न्यूज चैनल्स व समाचार पत्रकारों ने रिपोर्टिंग की थी। वीसी कालड़ा ने कहा कि पत्रकारों से इस तरह की खबरों को प्रसारित व प्रकाशित नहीं करना चाहिए। ऐसा पहली बार नहीं है कि जब पीजीआई में मीडिया की एंट्री बैन की गई हो, इससे पहले भी कई बार रोक लगाई गई है। लेकिन इस बार तो मीडियाकर्मियों से साफ तौर पर कह दिया गया है कि पॉजीटिव न्यूज प्रकाशित व प्रसारित करने पर ही मीडिया से रोक हटेगी। पत्रकारों ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के सामने भी मीडिया पर बैन की बात उठाई थी, तब उन्होंने पीजीआई के अधिकारियों को साफ तौर पर निर्देश दिए थे कि इस प्रकार की रोक न लगाई जाए। लेकिन पीजीआई के अधिकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों की भी परवाह नहीं की। 

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