
राहुल गांधी पर एफआईआर की खबर है, व्हाइट टी शर्ट मूवमेंट की नहीं और कुमार विश्वास का तो जिक्र भी नहीं मिला। कुम्भ में आग की खबर भी है, कोई मरा नहीं इसलिए जो है, ठीक ही है।
संजय कुमार सिंह
आज जब ज्यादातर अखबार सैफ अली खान पर हमला करने वाले को बांग्लादेशी मुसलमान बता रहे हैं तो यह खबर इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया के अलावा नौवें अखबार दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में लीड है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर है लीड है। दि एशियन एज के साथ नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर है। द हिन्दू में सिंगल कॉलम की खबर है जबकि अमर उजाला में पहले पन्ने पर नहीं है। द टेलीग्राफ में यह लीड है लेकिन वैसे नहीं जैसे आपदा में अवसर बनाया जाता है। दि एशियन एज में यह दो कॉलम की फोटो के साथ पांच कॉलम में है जबकि नवोदय टाइम्स में दो कॉलम में है। यहां यह हाईलाइट किया गया है कि डक्ट में पाइप के सहारे 12वीं मंजिल पर चढ़ा और बाथरूम की खिड़की से घर में घुस गया। इससे पुलिस की शुरुआती कहानी तो धूल धुसरित होती है लेकिन बहुमंजली इमारतों में सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू उजागर होता है। थोड़ी चर्चा उसकी भी। आजकल घरों में जितने कमरे होते हैं उतने बाथरूम और बाथरूम के साथ यह जरूरी है कि उसमें पानी आने जाने के साथ गंदे पानी और सीवर के पाइप हों। इनमें आवश्यक मरम्मत के लिए सीढ़ी भी लगी होती है हालांकि इनसे ऊपर की मंजिल तक जाना मुश्किल होगा इसलिए काम करने वाले बाथरूम की खिड़की से ही आते-जाते हैं। इस लिहाज से मामला संभव लगता है लेकिन बाथरूम की खिड़की खुली होगी – यह नौकरों के राज में संभव है। इसलिये पुलिस की कहानी अविश्वसनीय नहीं है।
आपदा में अवसर इसलिए कि इसे अंतरराष्ट्रीय साजिश कहा गया है। आज छपी खबरों की कुछ खास बातों पर गौर कीजिये और सोचिये कि क्या यह सब संभव है और नहीं है तो ‘अंतरराष्ट्रीय साजिश’ का एंगल किसलिये। मोटे तौर पर हर कोई चाहता है कि उसकी गलती को सामान्य मानवीय भूल माना जाये पर वह दूसरों की गलती को ‘अंतरराष्ट्रीय साजिश’ नहीं कहता है। फिर भी आजकल यही सब हो रहा है और इसीलिए पुलिस का कहानी का पोस्टमार्टम जरूरी है। खबरों के अनुसार हमलावर – बांग्लादेशी घुसपैठिया है। उसका नाम मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद है और उसने अपना नाम बदलकर बिजॉय दास कर लिया था। वह आठ महीने से मुंबई में था। पर भाजपाई गुसपैठिये को सरंक्षण देने का आरोप केजरीवाल पर लगाते हैं। वह वहां छिट-पुट काम कर चुका है। अभी बेरोजगार था। सवाल है कि उसका नाम (और नागरिकता भी) सिर्फ पुलिस के कहने पर है या दस्तावेजों में भी ऐसा ही है। खबरों में यह नहीं बताया गया है और इसके बिना जो बताया गया है वह बेमतलब है। आठ महीने से बांग्लादेशी का भारत में रहना, काम भी पा लेना और चोरी के आरोप में निकाल भी दिया जाना – आधार कार्ड का मामला नहीं बना?
आधार कार्ड है कि नहीं और है तो किस नाम से, नहीं है तो बांग्लादेशी कहा ही जा सकता है लेकिन तब विजॉय दास कैसे? संभव है आधार कार्ड में नाम विजॉय दास ही हो, फिर बांग्लादेशी नागरिक कैसे और फिर नाम विजॉय दास ही क्यों नहीं, मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद कैसे? इन तथ्यों के बिना पुलिस की कहानी पर विश्वास करना मुश्किल है। इसी आधार पर इसे अंतरराष्ट्रीय साजिश कह देना भी गले से नहीं उतर रहा है। पर अदालत ने कहा है कि आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है और उसे पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार वह उसके पास मोबाइल भी था और खाने का भुगतान यूपीआई से किया उसी से मिले महत्वपूर्ण लीड से पकड़ा गया। इसका मतलब यह हुआ कि वह यहां अवैध रूप से रह रहा था। नाम भी बदल लिया था लेकिन उसके पास न सिर्फ मोबाइल था, यूपीआई से भुगतान भी करत था।
पुलिस ने यह भी कहा है और अखबारों में छपा है कि उसे नहीं पता था कि वह फिल्म अभिनेता के घर में घुस गया है। फिर साजिश कैसे और 12वीं मंजिल तक चढने की मेहनत कामयाब होगी कि नहीं जाने बिना, कोई ऐसा करेगा, मुझे शक है। और कर ही दिया तो अंतरराष्ट्रीय साजिश कैसी? और होगी भी तो अखबारों को इसे प्रचारित करने की क्या जल्दी? पुष्टि होने तक इंतजार क्यों नहीं? पुलिस की मानें तो उसका इरादा चोरी करने का था। वह बांग्लादेश भागने की योजना बना रहा था। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार चोरी के आरोप में उसे काम से निकाला जा चुका है। पहले उसने दूसरे फ्लैट में घुसने की कोशिश की थी। जाहिर है, सैफ निशाने पर नहीं थे। फिर भी अंतरराष्ट्रीय साजिश कैसे? वैसे, आदित्य ठाकरे ने कहा है, और यह भी टाइम्स ऑफ इंडिया में है कि, अगर आरोपी रोहिंग्या है तो दोषी (गृहमंत्री) अमित शाह हैं। जाहिर है, सैफ पर हमले के बड़े मामले में इस गिरफ्तारी के बाद आज छपी कहानी से यह बताने की कोशिश की गई है कि सैफ पर हमला करने वाला मुसलमान है, बांग्लादेशी है और मुंबई के पोश इलाके में12वीं मंजिल के घर में घुस गया (यह मानते हुए कि कुछ मिल ही जायेगा) और आप यकीन कीजिये कि देश में सब ठीक है। आप सुरक्षित हैं और सरकार ने 10 साल खूब अच्छा काम किया है। इसलिए उसे वोट देते रहिये। हालांकि वोट लेने के लिए वह और उसके समर्थक दूसरे तरीके इस्तेमाल करती है और अखबार बता रहे होते तो मुझे नहीं बताना पड़ता।
आप जानते हैं कि 55 साल के कुमार विश्वास कवि और सामाजिक राजनैतिक कार्यकर्ता हैं। वे आम आदमी पार्टी में रह चुके हैं। उनका मूल नाम विश्वास कुमार शर्मा है। वे हिंदी के प्राध्यापक भी रह चुके हैं। कुमार विश्वास आज हिन्दी कविता से सबसे लोकप्रिय और अधिक कमाने वालों में हैं। यहां उनकी चर्चा यह याद दिलाने और बताने के लिए कि, इस साल के शुरू में कुमार विश्वास ने एक कार्यक्रम में कहा था, “मायानगरी में बैठने वालों को समझना होगा कि ये देश क्या चाहता है। अब ये चलेगा नहीं कि लोकप्रियता हमसे लोगे, पैसा हम देंगे, टिकट हम खरीदेंगे, हीरोइन हम बनाएंगे, हीरो हम बनाएंगे और तुम्हारी तीसरी शादी से औलाद होगी तो उसका नाम तुम बाहर से आने वाले आक्रमणकारी के नाम पर रख लोगे। ये चलेगा नहीं। उन्होंने आगे कहा, रिजवान रख लेने, उस्मान रख लेते, युनूस रख लेते, हुजूर के नाम पर कोई नाम रख लेते, तुम्हें एक ही नाम मिला। जिस बदतमीज आदमी ने, जिस लंगड़े आदमी ने हिंदुस्तान में आकर यहां की मां-बहनों का बलात्कार किया वो लफंगा ही मिला तुम्हें इस प्यारे से बच्चे का नाम रखने के लिए।” मुझे लगता है कि कोई अपने बच्चे का क्या नाम रखता है यह उसका निजी मामला है और इस तरह सार्वजनिक धमकी का मुद्दा तो नहीं ही है। चूंकि दूसरे धर्म के व्यक्ति का मामला है इसलिए बहुत जरूरी हो तो भी इसे सार्वजनिक रूप से कहने से बचना चाहिये। कोई नासमझ, शैतान कहे तो अलग बात है, युवाओं में लोकप्रिय पूर्व प्रोफेसर को तो नहीं ही कहना चाहिये। इसके अलावा मामला पुराना है और इसपर स्पष्टीकरण भी आ चुका है। कुमार विश्वास को यह सब पता होना चाहिये था।
इन सबके बावजूद कहा गया तो सरकार को कार्रवाई करनी चाहिये थी। कम से कम जिम्मेदार लोगों को इसकी आलोचना करनी चाहिये थी। स्थानीय प्रशासन का भी काम था कि उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती और यह वैसी ही होती जैसे किसी मुसलमान के मामले में हाल-फिलहाल होती रही है। कइयों की जमानत नहीं हो रही है सुनवाई ही मुश्किल है। दूसरी ओर, अर्नब गोस्वामी को हफ्ते भर से भी कम समय में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। हालांकि, अभी वह सब मुद्दा नहीं है। मुझे यह कहना है कि कुमार विश्वास का समाज और प्रशासन में किसी ने विरोध नहीं किया। अखबारों में खबर और सोशल मीडिया पर चर्चा जरूर हुई। उसके बाद सैफ अली खान पर हमले का कारण चाहे जो इसपर किसी ने शक नहीं किया, इसकी चर्चा नहीं की। मुझे लगता है कि हमले के बाद भी कुमार विश्वास को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये थी। एक सामान्य संदेश दिया जाना चाहिये था कि मैं जो चाहता था वह कह चुका उससे प्रेरित होकर किसी को आगे कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिये। इस तरह का एक संदेश सत्तारूढ़ पार्टी और उनकी पुरानी पार्टी के किसी नेता का भी हो सकता था। इससे समाज को हिन्दू मुसलमान में बांटने के प्रयासों का असर कम करने की कोशिश भी नजर आती। कुमार विश्वास राजनीतिक कारणों से ऐसा कर रहे हैं तो यह लोगों को बताया जाना चाहिये या उन्हें अपनी गलती माननी चाहिये। मीडिया ने यह सब नहीं किया। अब यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि हमलावर कुमार विश्वास के कहे से प्रेरित या उत्तेजित नहीं था। भाजपा सरकारों का चुप रहना हमले का कारण नहीं है।
आइये, अब आज की इस खबर का शीर्षक देख लें। इंडियन एक्सप्रेस – सैफ पर हमले के लिए बांग्लादेशी गिरफ्तार : मुंबई पुलिस। टाइम्स ऑफ इंडिया – सैफ मामले में अपराधी की तलाश बांग्लादेशी घुसपैठिये की गिरफ्तारी से पूरी हुई। हिन्दुस्तान टाइम्स – पुलिस ने कहा कि सैफ को चाकू मारने के लिए बांग्लादेशी गिरफ्तार किया गया। द हिन्दू – सैफ पर हमले का मामला : संदिग्ध गिरफ्तार पांच दिन की हिरासत में भेजा गया। दि एशियन एज – पुलिस ने सैफ के हमलावर के रूप में बांग्लादेशी घुसपैठिये को गिरफ्तार किया। नवोदय टाइम्स : सैफ पर हमला करने वाला बांग्लादेशी ठाणे से गिरफ्तार, दैनिक जागरण – बांग्लादेशी नागरिक ने किया था सैफ पर हमला , ठाणे जिसे से गिरफ्तार। अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है लेकिन राहुल गांधी पर गैर जमानती धाराओं में एफआईआर की खबर है। इसके अनुसार, नये कांग्रेस मुख्यालय के उद्घाटन के दौरान राहुल ने कहा था कि भाजपा, आरएसएस ने हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हम इंडियन इस्टेट से लड़ रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि भाजपा ने राहुल गांधी के इस बयान को शुरू से ही देश विरोधी कहा है। एक अखबार ने तो इसे राहुल की जुबान फिसली भी लिखा था जबकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे वही बोल रहे थे जो बोलना चाहते थे। जो भी हो, इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा का उल्लंघन और कुमार विश्वास पर कोई कार्रवाई नहीं, उसकी खबर और चर्चा भी नहीं, राहुल गांधी के आरोपों को साबित करती है पर वह अलग मुद्दा है। आज राहुल गांधी की एक और खबर, न्याय, समानता के लिए शुरू की सफेद टी शर्ट मुहिम। आज नवोदय टाइम्स में है जिसे राजनीतिक महत्व के लिहाज से प्रमुखता नहीं मिली है।
द टेलीग्राफ ने सैफ अली खान के हमलावर की गिरफ्तारी की खबर को लीड तो बनाया है पर पुलिसिया कहानी को ही नहीं परोसा है। फ्लैग शीर्षक है, भाजपा को घुसपैठ का खतरा नजर आ रहा है, बंगाल सरकार पर उंगली उठाई। मुख्य शीर्षक है, सैफ को चाकू मारने पर विभाजनकारी टिप्पणी। नई दिल्ली डेटलाइन से जेपी यादव की खबर इस प्रकार है – भाजपा ने रविवार को मुंबई पुलिस के इस दावे का फायदा उठाया कि सैफ अली खान पर चाकू से हमला करने के संदेह में पकड़ा गया व्यक्ति बांग्लादेशी है और विपक्षी दलों पर “वोट बैंक” की राजनीति करने तथा पांच फरवरी को होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। वैसे यह आरोप कुमार विश्वास पर और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के कारण डबल इंजन की सरकार पर भी लग सकता है। भाजपा के सोशल मीडिया प्रमुख अमित मालवीय ने सैफ पर हमले का इस्तेमाल “हिंदुओं को बदनाम करने” करने के लिए विपक्षी दलों से माफी मांगने की मांग की, जबकि उनकी पार्टी के सहयोगियों ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों और रोहिंग्याओं के देश के लिए सुरक्षा खतरा पैदा करने का मुद्दा उठाया। मालवीय ने यह नहीं बताया कि विपक्ष ने हिंदुओं को कैसे बदनाम किया। कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने चाकू मारने के लिए भाजपा-आरएसएस को दोषी ठहराया था, जिसमें संदिग्ध हमलावर के सीसीटीवी फुटेज का हवाला दिया गया था, जिसमें वह “भगवा” दुपट्टा पहने हुए था और आगे की ओर इशारा कर रहा था। सैफ द्वारा अपने एक बेटे का नाम तैमूर रखने के लिए दक्षिणपंथी ट्रोलिंग की गई थी, जो 14वीं सदी के एक आक्रमणकारी का नाम भी है।
शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट ने भाजपा पर पलटवार करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भारत की सीमाओं को “इतना खुला” बना देने का आरोप लगाया कि “बांग्लादेशी न केवल अवैध रूप से प्रवेश करते हैं, बल्कि अपराध भी करते हैं….” मालवीय ने एक्स पर पोस्ट किया, “मुंबई पुलिस ने पुष्टि की है कि सैफ अली खान पर हमला करने वाला मोहम्मद शरीफुल इस्लाम बांग्लादेश से अवैध निवासी है और उसने हिंदू पहचान बना ली थी।” “कांग्रेस, टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन में शामिल अन्य राजनीतिक दलों ने अवैध प्रवासियों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया और हिंदुओं को बदनाम करने के लिए इस घटना को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की, उन्हें माफी मांगनी चाहिए।” दिल्ली चुनाव के दौरान यह मुद्दा गूंजा था, क्योंकि भाजपा ने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ आप राष्ट्रीय राजधानी में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों को पनाह दे रही है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने संवाददाताओं से कहा, “(मुंबई में) गिरफ्तारी से पता चलता है कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या देश और दिल्ली की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। अरविंद केजरीवाल को अब जवाब देना चाहिए कि अरविंद केजरीवाल ऐसे अपराधियों को पालने का काम क्यों करते हैं जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।” (पल वह मुंबई में रहा था जिस सीमा को पार कर आया है उसकी सुरक्षा का काम भारत सरकार का है वहां तैनात सीमा सुरक्षा बाल केंद्रीय गृहमंत्री के तहत है फिर भी ऐसा कहा जा रहा है तो इसलिए कि अखबार पूरी बात बताते नहीं हैं और भाजपाई अपने हिसाब से फैला लेते हैं।) सलमान खान के घर के बाहर गोलीबारी और जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी के बाद सैफ पर हुए हमले ने बॉलीवुड के खानों को निशाना बनाए जाने की अटकलों को और गहरा कर दिया था। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजीत पवार ने दावा किया कि गिरफ्तार व्यक्ति पहले कोलकाता आया और फिर मुंबई चला गया। उन्होंने मुंबई में कानून-व्यवस्था की स्थिति की आलोचना करने के लिए विपक्ष पर हमला किया। पवार ने कहा, “अभिनेता सैफ अली खान पर हमले के बाद कुछ विपक्षी नेताओं ने कहा कि मुंबई में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। लेकिन वास्तविकता यह है कि आरोपी बांग्लादेश से आया था। पहले वह कोलकाता आया और फिर मुंबई आया।”
कुल मिलाकर भाजपा नेताओं ने इसपर और भी राजनीति की है जो दूसरे अखबारों में नहीं है और सिर्फ टेलीग्राफ में है।


