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इस युवा पत्रकार की टिप्पणियां गजब चुटीली होती हैं, पढ़ लो टीवी वाले गोदी-संपादकों!

युवा पत्रकार श्याम मीरा सिंह पिछले दिनों चर्चा में थे. नरेंद्र मोदी को शेमलेस पीएम की उपमा देकर ट्वीट करने के कारण आजतक ग्रुप ने उन्हें नौकरी से जाने के लिए बोल दिया. तब बहादुर पत्रकार श्याम मीरा ने पूरे प्रसंग को पब्लिक डोमेन में ला दिया और अपने स्टैंड पर कायम रहे.

श्याम मीरा सिंह ने नई नौकरी ज्वाइन कर ली. न्यूज क्लिक डिजिटल मीडिया संस्थान में काम शुरू करने के बाद श्याम मीरा ने सोशल मीडिया पर अपनी चुटीली टिप्पणियों से सत्ताधारियों और गोदी मीडिया के संपादकों-पत्रकारों को आइना दिखाने का काम काम शुरू कर दिया है.

देखें कुछ टिप्पणियां-

रुबिका जी से लोकतंत्र और तानाशाही पर चर्चा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

एक दोस्त से बात हो रही थी, उसने कहा तुम क्यों दीपक चौरसिया से बहस करते रहते हो, वो ख़राब आदमी है.
मैं बोला “आदमी???”… क्यों अफ़वाह फैला रहे हो यार.

आज फिर रुबिका जी से स्वतंत्रता दिवस के विषय पर चर्चा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

सुशील मोदी जी की स्मृतियाँ.. नमन रहेगा!


मोदीजी की दो टिप्पणियों पर श्याम की जवाबी टिप्पणियां…

श्याम मीरा सिंह की कुछ अन्य पोस्ट्स देखें-

Shyam Meera Singh-

मुसलमानों के लिए 24 घंटे ज़हर उगलने वाले गोदी मीडिया ने रुबिका लियाक़त और कई अन्य मुस्लिम एंकर उसी काम के लिए रखे हुए हैं जैसे गाँव में क्रिकेट खेलते समय एक-दो लौंडे केवल नाली में से गेंद निकालने के लिए टीम में रख लिए जाते थे.


मीडिया, मुस्लिम एंकरों को हमेशा आगे कर देती है जबकि मुस्लिमों को नीचा दिखाना हो. लेकिन मुस्लिमों पर अत्याचार के वक्त ये एंकर कहीं नहीं दिखेंगे. गलती मुस्लिम एंकरों की नहीं है, वे तो बेचारे आपकी हमारी तरह ही अपने मन ही मन खुद को दबाते होंगे. मैं बस मीडिया के चरित्र की बात कर रहा हूँ. इसलिए रुबिका लियाक़त जैसे तमाम एंकरों से नाराज़गी है पर उनसे नफ़रत नहीं.


लोग पहले ही टीवी चैनलों को खो चुके हैं, समाचार चैनलों ने पहले से ही जनता की जगह सरकार का पक्ष चुन रखा है. जनता के लिए बचा सोशल मीडिया, जहां वो अपने मुद्दे उठा लिया करती थी, धीरे धीरे फ़ेसबुक पर सरकार ने कंट्रोल कर ही लिया, अब नियम क़ानूनों का पेंच बनाके सरकार ने ट्विटर पर भी नियंत्रण करना शुरू कर दिया है, कुल मिलाकर सूचनाओं और मुद्दे रखने की दो जगहों पर सरकार पहले ही क़ब्ज़ा कर चुकी है और तीसरे माध्यम यानी सोशल मीडिया पर सरकार अपना पूर्ण नियंत्रण करने की ओर है. अब जनता को वही पढ़ने को मिलेगा जो सरकार चाहेगी, जो भी जनता के मुद्दे रखने की कोशिश करेगा, सरकार के बैठे लोग उसकी आइडी उड़ा देंगे. जनता सूचनाओं के तीनों माध्यम खोने के मुहाने पर है, और तुमको लगता है ट्विटर वाला मामला सिर्फ़ कांग्रेस का है, हमारा क्या मतलब.


मेनस्ट्रीम मीडिया में अच्छे लोगों का होना बहुत ज़रूरी है. वे एंकरों को नहीं रोक सकते मगर वेबसाइटों पर आने वाली खबरों को प्रो मोदी होने की जगह उन्हें न्यूट्रल और कभी कभी प्रो जनता भी कर सकते हैं. मैं पत्रकारिता के छात्रों से बस यही कहूँगा मेनस्ट्रीम में जाने का मौक़ा मिले तो जाएँ.


अगर बाहर बारिश आ रही है. सरकार कहे बारिश नहीं आ रही है. विपक्ष कहे बारिश आ रही है. तब पत्रकार का काम केवल ये बताना नहीं है कि पक्ष ये कह रहा, विपक्ष ये कह रहा है.

बल्कि पत्रकार का काम है कि वो जनता को बताए “बारिश आ रही और सरकार झूठ बोल रही है”

लेकिन भारतीय मीडिया का 80% हिस्सा इतना अधिक गिर चुका है कि अगर बारिश आ रही है और सरकार कहे कि नहीं आ रही है, तब भारतीय मीडिया कहेगा “बारिश नहीं आ रही है.” कुछ कहेंगे “According to government sources बारिश नहीं आ रही है.” कुछ कहेंगे पुलिस के अनुसार बारिश नहीं आ रही है.

दो तीन टीवी चैनल जो हैं तो सरकार की साइड लेकिन खुद को न्यूट्रल दिखाने के लिए कहेंगे “विपक्ष कह रहा है कि बारिश नहीं आ रही है, लेकिन सरकार ने कहा है बारिश आ रही है”.

लेकिन न्यूट्रल मीडिया, गोदी मीडिया दोनों में से कोई बाहर आकर ये नहीं दिखाएगा कि सच में बारिश आ रही है या नहीं.

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