सोशल मीडिया में आशुतोष के आंसुओं की किरकिरी

अजित अंजुम और राना यशवंत, दोनों ने आशुतोष के आंसुओं पर यक़ीन करते हुए, फेसबुक पर हम सबको भी यक़ीन दिलाने की कोशिश की, कि आशुतोष वाकई भावुक थे…गम्भीर थे…और ये आंसू असली थे…

हम आपकी बात पर यक़ीन करना चाहते हैं, लेकिन अगर आप वाकई आशुतोष को इतनी अच्छी तरह जानते हैं और इस सच की पुष्टि कर रहे हैं…तो आपके चैनल इस तथ्य की पुष्टि क्यों नहीं कर रहे हैं? आप दोनों ही के, बल्कि और भी चैनल्स ने लगभग इसके उलट थ्योरी प्रसारित की है…

विनोद कापड़ी का कहना है कि चूंकि, फिलहाल कहीं सम्पादक नहीं हैं…इसलिए उनकी राय पर कोई सवाल नहीं उठा रहा हूं…

ऐसे में भरोसा किस पर किया जाए, आपके चैनलों पर, जहां आप सम्पादक हैं…या फेसबुक की वॉल पर….जहां आप आम आदमी हैं…

क्या दोनों एक साथ सच हो सकते हैं…इसको एक जिज्ञासा के तौर पर ही लीजिएगा…क्योंकि आप सम्पादक के साथ पत्रकार भी हैं…तो फिर आपके द्वारा प्राप्त तथ्यों का प्रयोग चैनल की ख़बर में क्यों नहीं होगा…????

प्रदीप शेखर लिखते हैं- आशुतोष के ड्रामे के बाद ‪आम‬ के भाव गिरे।

शीतल पी सिंह लिखते हैं – गजेन्द्र (जो अब नहीं हैं) के गाँव खेत खलिहान पिता बच्चे भाई और गाँव जवार के लोगों से मिलकर वापस होते हुए…..पहले सोचा था बहुत दिनों बाद इसे रिपोर्ट की तर्ज़ पर लिखूँगा पर अब पता नहीं क्यों मन बदल गया ….शायद ट्विटर और FB पर आशुतोष के आजतक के स्टूडियो में रो पड़ने पर या कुछ और सहज हो लूँ फिर देखता हूँ।

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