बनारस में अब महिला पत्रकार के घर पर दबंगों-भूमाफिया का कब्जा

लाक डाउन के दौरान दंबगो-भूमाफिया ने लगाया महिला पत्रकार के घर पर ताला

अप्रैल में हुई घटना जून में मामूली धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

आज अखबार में वरिष्ठ पत्रकार हैं सुमन द्बिवेदी

वाराणसी। क्या यूपी में यही कानून का राज है कि कोई भी माफिया आकर किसी पत्रकार के घर पर ताला लगा जाए? पहले वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत तिवारी के घर पर माफियाओं ने ताला लगाया। लंबी लड़ाई के बाद उन्हें दुबारा कब्जा मिला। अब एक महिला पत्रकार का घर दबंगों के कब्जे में है। ‘आज’ अखबार में वरिष्ठ उपसंपादक के पद पर कार्यरत महिला पत्रकार सुमन द्बिवेदी के भदैनी स्थित आवास पर दंबगों-भूमाफिया का ताला बंद है।

बीते तीन महीने से लाक डाउन के दौरान बंद भूमाफिया के ताले को अनलॉक करवाने के लिए वरिष्ठ महिला पत्रकार सुमन द्बिवेदी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर भेलूपुर थाने तक दौड़ रही हैं और पुलिस कानों में तेल डाले हुए न जाने कौन-सी कानून-व्यवस्था कायम करने में व्यस्त है।

सुमन की जुबानी उनके घर पर कब्जे की कहानी सुनने पर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वो बताती हैं कि लाक डाउन के दौरान अप्रैल महीने में घर पर कब्जे की जानकारी मिलने पर मैं अकेले पैदल सूनी सड़कों से गुजरते हुए जब भदैनी स्थित अपने घर पहुंची तो वहां श्रवणदास के साथ मौजूद दंबगों ने मेरे साथ हाथापाई की, मुझे गालियां दी गईं। वहां से किसी तरह खुद को बचाकर अस्सी पुलिस चौकी पर पहुंची तो चौकी इंचार्ज मुझसे इस तरह पेश आए जैसे मैंने ही कोई गलती की हो।

मुझे हर दो दिन में थाने बुलाया जाता है और वहां कई घंटे इंतजार करने के बाद दोबारा आने को कहा जाता। मैं जब अपने अखबार के दफ्तर पहुंचती तो मुझे फोन करके कहा जाता तुरंत आईए।

मेरे स्वर्गीय पिता तक को पुलिस अशोभनीय शब्द कहती हैं। मेरे बार-बार कहने पर कि मेरे कमरे से सामान गायब किया जा रहा है, जलाया जा रहा है लेकिन मेरी बात सुनी ही नहीं गई। मैंने सारे जरूरी कागजात पेश किए। इसके बावजूद मेरा मानसिक उत्पीड़न हो रहा है और घटना को अंजाम देने वाले बेखौफ घूम रहे हैं। मुझे जान का खतरा है।

सुमन जी अपने 78 वर्षीय बीमार मां के साथ अकेले रहती हैं। उन्हें इस बात का डर है कि उन्हें अगर कुछ हो गया तो मां को देखेगा कौन? सुमन काशी पत्रकार संघ की सदस्य हैं और संघ भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। न्याय और इंसाफ के लिए सुमन अकेले ही मोर्चा लेते हुए घर पर बंद ताले को खुलवाने के लिए लड़ रही हैं। उनके हक में बोलने के लिए न तो काशी पत्रकार संघ है और न ही पत्रकार हितों पर मंचों को हिला देने वाले अन्य पत्रकार नेतागण।

दूसरी ओर घटना के दो महीने बाद भेलूपुर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की खानापूर्ति भर की है। लेकिन दंबगों-भूमाफियाओं का ताला आज भी सुमन के भदैनी स्थित आवास पर बंद है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का आगाज करने वाले प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में एक बेटी अपने हक से महरूम है।

बनारस से भास्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट.

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