सुनील हजारी-
मेरे साथ एक ऐसा षड्यंत्र हुआ जो अक्सर फिल्मों और कहानियों में देखा-सुना गया। जिसमें एक आम आदमी को एक तंत्र आतंकी की तरफ पेश कर कई कहानियां गढ़ता है। अखबारों में भी वही कहानियां छपती हैं और कुछ कथित पत्रकार इसमें सनसनी के लिए अपनी कहानियां भी जोड़ देते हैं। जबकि संबंधित आदमी को अपनी बात रखने या सबूत दिखाने का मौका भी नहीं मिलता। कुछ ऐसा ही मेरे साथ हुआ। यदि शार्टकट में कहा जाए तो मेरी कहानी मुंबई की एक खोजी पत्रकार जिग्ना वोरा जैसी है जिस पर एक वेबसीरीज “स्कूप” भी बनी थी। जिसमें उसे एक केस में फंसाया जाता है। सालों बाद उसकी सच्चाई सामने आती है तब तक उसे भयंकर यातनाएं सहन करना पड़ती है।
यह असली कारण है: मेरे साथ हुई घटना के पीछे का कारण आरटीओ में होने वाली 10 करोड़ की अवैध वसूली के मामलों को दबाने से जुड़ा है। जिसका पैसा मंत्री तक जाता था। इसका खुलासा हमने किया। इसके बाद हम इसकी एक पीडीएफ के पीछे पड़ गए जिसमें कितना पैसा किस-किस के पास जाता है उसकी सारी अवैध वसूली का हिसाब है। इसमें नेता, पुलिस से लेकर कई पत्रकार और मीडिया घराने भी हैं।
मैं इस जानकारी के बिल्कुल करीब था। इसे हासिल करने के लिए कई बड़े अधिकारियों और सोर्स से लगातार संपर्क भी कर रहा था। मेरी घटना के कुछ दिनों पहले मैंने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को इसकी जानकारी दी कि किस तरह पुलिस विभाग में कुछ लोग इस बंटवारे में हिस्सा लेते हैं। एक ऐसे फ्लैट की जानकारी भी दी जहां इस रकम को जमा कर रखा जाता है और महीने की शुरुआत में यहां से यह पैसा बंटने के लिए जाता है। मैंने उन्हें ऐसी जगह छापा मारने के लिए भी कहा।
हालांकि उन्होंने कहा यह मामला बहुत ऊपर से चल रहा है, इसलिए उसी लेवल पर बात करिए। यही इस घटना के पीछे की असली वजह है। घटना के दो दिन बाद ही मुझे यह पीडीएफ मिलने वाली थी। इन सबके सबूत मौजूद हैं। जिसके पास इसकी पीडीएफ थी मैं उस दिन उसी से बात कर लौट रहा था और जिस रास्ते में अचानक रुका वहीं यह कांड हो गया।
मैने यह खुलासे किए : मुझे हमेशा खोजी पत्रकारिता करने की भूख रही है। यदि मेरे पूरे कैरियर की खबरों को उठाकर देखेंगे तो यह बात समाने आएगी। इसके लिए किसी भी स्तर तक गया हूं। कई छदम रूप रखे। शाम-दाम- दंड़-भेद के तरीके भी इस्तेमाल किए, बस मकसद था खबर और उससे जुड़े तथ्यों का खुलासा करना। जिन्होंने मेरे साथ काम किया है उनके पास इसके कई किस्से मिल जाएंगे। भारत-पाक मैच में किस मॉडल ने फिक्सिंग की, आसाराम और नारायण साईं को जब भगवान माना जाता था उसके पहले उनसे जुड़ी असली खबरों पर मैंने काम किया है। श्रीलंका टीम के पूर्व कप्तान सनथ जयसूर्या सुपारी की स्मगलिंग में शामिल हैं, जैसे खुलासे किए हैं, जिसमें दोनों देश की सरकारें तक प्रभावित हुईं।
पूरी दुनिया में मेरी खबर का रिफरेंस देकर मामले को उठाया गया। एजेंसियों ने इस बात की भी जांच की किे मुझे यह खबर कहां से मिली.. हालांकि बाद में खुद खबर की पुष्टि सरकार ने कर दी। ट्रेनी महिला पुलिसकर्मियों का कैसे अधिकारी शारीरिक शोषण कर करे हैं जैसे खुलासे के जिस पर मुझे खोजी पत्रकारिताक का राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया।
इसके अलावा नागपुर में एक पंकज मेहाड़िया कांड को उजागर किया, जिसमें 1000 करोड़ से अधिक की रकम हर साल पंकज के जरिए ब्लैक मनी को व्हाइट किया गया। इमें नागपुर सहित प्रदेश के कई मंत्री, विधायक, उद्योगपति, हवाला कारोबारी और कई धंधों के माफिया थे। जिनके एक-एक नाम का खुलासा फोटो और सबूतों के साथ किया। इस पर कई एजेंसियों ने कार्रवाई की और कई जगह छापे भी पड़े। हाल ही में मैंने कोर्ट के एक ऐसे रैकेट का खुलासा किया जिसमें कोर्ट की मशीनरी को मैनेज कर एक तरफा फैसले करवाए जाते थे। इसके लिए डमी वकील, फर्जी गवाह और कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया जाता था। इसमें करीब 55 मामलों का खुलासा किया।
जिस पर कई माफियाओं को अंदर जाना पड़ा और कई वकीलों पर विशेष जांच चल रही है। इसका मुझे मुख्य गवाह बनाया गया है। हर खबर के बाद मुझे लगता कि अगली खबर इससे बड़ी होना चाहिए और यह भूख बढ़ती जाती। यह सब मुझे बताने पर “अपने मुंह मियां मिट्ठु” बनने जैसा लग रहा है मगर मेरी कहानी समझने के लिए थोड़ा सा बैकग्राउंड समझा जरूरी है। ऐसी खबरों की बहुत लंबी सीरीज है।
आरटीओ में घोटाल का ऐसे हुआ था खुलासा : खैर अब सीधे अपनी कहानी पर लौटते हैं जिस मामले में मुझे फंसाया गया। कुछ माह पहले मुंबई क्राइम ब्रांच ने नागपुर ग्रामीण आरटीओ और अमरावती आरटीओ में छापा मारकर यहां चल रहे एक रैकेट का खुलासा किया। यहां देश के कई स्थानों से चोरी हुए वाहन रजिस्ट्रर्ड हो रहे थे। इसके लिए पूरी गैंग सक्रिए हैं जिसके तार कई प्रदेशों के माफियाओं से जुड़े हुए हैं। इसमें कई अधिकारी एजेंटों के नाम भी सामने आए। आज भी इसकी जांच चल रही है ताकि छिपे हुए चेहरे सामने आ सके। हमने इस मामले में लगातार खबरें भी छापी।
मुझे लगातार बड़ी लीड मिलने लगी : मुझे बार-बार लगता था कि यह मामला बहुत बड़ा है जिसके अंदर जाया जाए तो बहुत खुलासे हो सकते हैं। जब कुछ ऐसे मामले मेरे सामने आते हैं जहां मुझे लगता था कि मामले में बड़ी इन्वेस्टिगेशन की जरूरत है तो मैं खुद भी इसकी खोज-परख में लग जाता। जब रिपोर्टर उसकी खबर सबमिट करता तो उसमें अपनी जानकारी का व्लैयू एडिशन भी करता। कुछ चुनिंदा घोटालों पर नागपुर में मैंने खुद भी खबरें की हैं जिन पर मुझे बड़े स्तर पर जानकारी मिली थी। कई विभाग के सोर्स मुझसे ही बात करने में कंफर्म्ड थे, इसलिए भी। नागपुर आरटीओ में हुए घोटाले में मैं जांच कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच से सोर्स तक पहुंचा। जहां से मेरे इस घोटाले की ऐसी-ऐसी जानकारी मिलती जो किसी के भी पास नहीं थे, उसे हम दैनिक भास्कर में एक्सक्लूसिव रूप से छापते। इसमें हमने कई एजेंटों के साथ कई अधिकारियों के नाम भी लगातार ओपन कर रहे थे। जिसकी पुष्टी करते हुए विभाग ने बाद में इन पर खुद कार्रवाई भी की। पूरे विभाग में हमारे अखबार का हड़कंप था कि आज नया क्या खुलासा होने वाला है।
इससे परेशान होकर ऐसा नहीं कि खबरें रोकने के प्रयास नहीं किए गए हों या अन्य तरह के प्रलोभन नहीं दिए गए हों। मगर हम नहीं रुके। इस पर मुझको जान से मारने की योजना भी बनी, धमकियां भी आई और कोर्ट-कचहरी में फंसाने के लिए नोटिस भी भेजे गए। यहां तक की आरटीओ के भेजे नोटिस में मुंबई पुलिस कमिश्नर, मुंबई क्राइम ब्रांच से डीसीपी और करीब 11 अधिकारियों के साथ मुझको भी पार्टी बनाकर इस घोटाले की जांच रोकने का प्रयास भी हुआ। मगर न जांच रुकी और न ही खबरें। इससे सबसे ज्यादा परेशान यहां काम करने वाले माफिया थे।
मुझे फंसाने वाला कौन है? : अब बात करते हैं आरटीओ के इस घोटाले में शामिल टीटू शर्मा के रोल का जिसके नाम से मुझे फंसाया गया। नागपुर से शील नामक एक एजेंट को मुंबई क्राइम ब्रांच ने पकड़ा था जो इस घोटाले में शामिल था उसने चोरी के वाहनों के रजिस्ट्रेशन में शामिल कई एजेंटों के नाम का खुलासा किया। सूत्रों से मुझे इसके कुछ नाम मिले जिसको मैने 18 मई 2024 के अंक में घटना के तीन महीने पहले प्रकाशित किया। इसमें मेरे सोर्स जिसको मैं चीनी के नाम से जानता था जिसका नाम पवन अरोरा है उसका नाम भी इस घोटाले में था। यह मेरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण किरदार है। यह आरटीओ में खबरें देने का मेरा विश्वसनीय सोर्स था। यही लगातार मुझे जानकारियां दे रहा था। मैंने इसको अन्य जानकारियों की पुष्टि करने के काम में भी लगा रखा था।
ऐसी ही एक रिकॉर्डिंग का कुछ हिस्सा इसने वायरल किया जिसमें मैं इस घोटाले में शामिल कुछ एजेंटों के नाम सामने आने पर उनकी जानकारियां ले रहा हूं। इसमें जब मैंने कुछ नाम बताए जिसमें पवन अरोरा का नाम बताया तो वह कहने लगा यह तो मैं ही हूं। मेरा असली नाम पवन अरोरा ही है। इसके बाद मैंने कहा कि चलो तुम्हारा नाम तो छोड़ते हैं बाकी नाम कौन है? इस पर बात करने लगा। उसने अपने साथी टीर्टू शर्मा का नाम आने पर भी मुझसे कहा कि उसे छोड़ दें मगर मैं नहीं माना इसी तरह एक अन्य नाम पिंटू को भी छोड़ने के लिए बोलने लगा मगर मैंने मना कर दिया कि जो नाम मिले हैं वह बहुत विश्वसनीय सूत्रों से मिले थे, इसलिए उसमें कोई डाउट नहीं है। बाद में पता चला कि इस गिरोह में पवन अरोरा के यह साथी थे जिनके साथ यह अवैध काम कर रहा था।
मुझे जान से मारने की धमकी दी गई : 18 मई 2024 को ही दैनिक भास्कर के अंक में टीटू शर्मा सहित गजेंद्र ठाकुर, पिंटू, बिट्टू सरदार, मुन्ना शर्मा और नैनी के वाली खबर प्रकाशित की थी। इसके खुलासे के बाद मुझे 18 और 19 मई को तीन लोगों के धमकी भरे फोन आए जिसमें टीटू शर्मा सहित अन्य लोगों के नाम उजागर करने पर जान से मारने की खुली धमकी दी गई। जिसके खिलाफ मैंने 19 मई 2024 को एक प्रकरण क्रमांक-0223/2024 इमामवाड़ा पुलिस थाने में दर्ज करवाया जो फोन लगाकर धमकाने वाले मुन्ना शर्मा, गजेंद्र सिंह ठाकुर, नैनी, सुरजीत सिंह सैनी के खिलाफ था। मुझे पुलिस ने इस धमकी के खिलाफ ऑफिस में पुलिस सुरक्षा भी दी। तीनों को गिरफ्तार किया गया और उन्होंने अपना अपराध कबूला, जिसकी रिकॉर्डिंग मैं पहले ही टीआई को दे चुका था। उन्होंने थाने में माफी मांगी और यह बात यहीं खत्म हो गई। खबर लिखने के पहले या बाद में कभी भी टीटू शर्मा से बात तक नहीं हुई।
खबरों का असर हुआ और अवैध काम रुके तो दबाव बनाने पहुंचे माफिया: इसके बाद हम लगातार इस घोटाले से जुड़े मामलों का खुलासा करते रहे। इस कारण आरटीओ की विभागीय जांच भी बैठ गई हालांकि वह बस फार्मेल्टी वाली थी, क्योंकि सब मिल हुए थे। वहीं मुंबई पुलिस की जांच भी जारी थी। हमारे खुलासे के बाद कई अधिकारी-बाबू निलंबित हो चुके थे। उनकी जगह नए अधिकारी बड़ी मुश्किल से ज्वाइन हो रहे थे क्योंकि उन्हें इस घोटाले में फंसने की आशंका थी। इस कारण आरटीओ में होने वाली अवैध गतिविधियां रुक गईं। इसमें चोरी के वाहनों के रजिस्ट्रेशन का काम भी शामिल थे। इससे नाराज होकर इस काम में शामिल कुछ लोग नए आरटीओ अधिकारी विजय काठोले पर वापस से इस काम को शुरू करने के लिए दबाव बनाने पहुंचे।
दरअसल, ऐसे एक-एक ट्रक पर दलालों और अधिकारियों को 5 से 8 लाख मिलते हैं, तो इसमें शामिल माफियाओं को 20 से 30 लाख का फायदा होता। इसी विवाद में ट्रांसपोर्टरों ने खुलासा कर दिया कि हर माह विभाग में 10 करोड़ की अवैध वसूली होती है जिसका पैसा मंत्री तक भी जाता है, यदि पुरानी व्यवस्था शुरू नहीं हुई तो वह इसको ओपन कर देंगे। किस मद में कितना पैसा वसूला जाता है यह भी बताया। जिसके कुछ वीडियो भी हैं। हमने 25 जुलाई को यह खबर प्रकाशित की। इसी विवाद का मेरे सोर्स पवन अरोरा ने एक वीडियो और भेजा जो उसने बनवाया था, जिसमें एक ट्रांसपोर्टर आरटीओ अधिकारी विजय काठोले को खुले रूप से धमका रहा है कि यदि पुरानी व्यवस्था के काम शुरू नहीं हुआ तो वह आरटीओ चेकपोस्ट पर होने वाली करोड़ों की अवैध वसूली और एंट्रियों की पोल खोल देगा। उसने एक आरटीओ एजेंट शंभु साहनी को आगे करते हुए कहा कि 800 एंट्रियां तो केवल इसके पास है, जिसका राज खुल गया तो फिर देख लेना। वह यह भी कह रहा है कि हमारी तरफ से विभाग की सेवा में कोई कमी रहती है क्या?
इस एक अन्य अधिकारी कह रहा है कि नहीं। हमारा चोली दामन का साथ है, फिर अब क्या हुआ? हमने 26 जुलाई को यह खबर भी हू-ब-हु बातों के साथ प्रकाशित की और उनका फोटो भी छापा है। उस समय तक मुझे उस ट्रांसपोर्टर का नाम नहीं पता था। बाद में पता चला वह गुल्लू ढिल्लन है।
वीडियो में दिख रहे माफिया की जानकारी निकालने लग गया : इसके बाद मैं अधिकारी को धमकाने वाले ट्रांसपोर्टर गुल्लू ढिल्लन के बारे में जानकारी निकालने में लग गया। मुझे बताया गया कि वह चोरी के वाहनों के रजिस्ट्रेशन और वाहनों का बीमा लेने के लिए उन्हें गायब करवाने और फायनेंस में डिफाल्ट वाहनों को सामान्य कीमत में खरीदकर उनके चेसिस नंबर सहित अन्य बदलाव कर रजिस्टर्ड करवाने के गिरोह का मुखिया है। शुरुआत में यह काम उसने खुद के नाम से किया और बाद में वह अन्य के नामों से करने लगा।
ऐसे ही कुछ मामलों में उसके खिलाफ प्रकरण भी दर्ज हैं। कुछ 28 मामले हैं। इसमें हत्या और जबरल जमीन हड़पने जैसे मामले शामिल हैं। इससे जुड़े सबूत मैं जुटा ही रहा था। मुझे यह भी बताया गया कि इसके पास अवैध हथियारों का जखीरा भी है। इतने केस छिपाकर पंजाब से एक पिस्टल का लाइसेंस भी ले रखा है, जिसका धमकाने में उपयोग करता है। करीब 200 ट्रकों की हेरा-फेरी में शामिल है। इससे जुड़े वाहनों की एक सूची भी मिली। इन जानकारियों के सच्चई जानने के लिए प्रयास करने लगा। मुझे इसके कुछ सबूत मिलना शुरू भी हो गए थे।
अचानक माफिया मेरे सामने आ गया : एक दिन मेरे सोर्स पवन अरोरा ने मुझे कुछ जानकारी देने एक रेस्टोरेंट में बुलाया उस समय उसके साथ दो आदमी थे जिस का परिचय करवाते हुए उसने बताया कि यह गुल्लू ढिल्लन है और दूसरा टीटू शर्मा जिसकी आपने खबर भी छापी हैं। मुझे इस पर आश्चर्य भी लगा कि मुझे पहले क्यों नहीं बताया। इसके बाद मैं लगातार ढिल्लन से उससे जुड़ी जानकारियों पर सवाल करने लगा। करीब आधे घंटे की बात के बाद उसने स्वीकारा कि मेरा काम लीगल नहीं है। मेरे आरटीओ के कागजों से जुड़ा काम टीटू शर्मा ही देखता है, आप हमसे बनाकर चलिए। आप जो चाहेंगे हो जाएगा। विभाग के अधिकारियों की तरफ से भी मैं आपको आश्वसत करता हूं कि वह हमसे अलग नहीं है जो चाहेंगे वह भी हो जाएगा। हम आपको इससे जुड़ी ऐसी जानकारी भी दे सकते हैं जो आपने सोचे भी नहीं होगी, बस आप मेरा नाम अपने स्तर पर ही रखिए। किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि आपको जानकारी किसने दी।
इस पर मैंने कहा कि मैं खबरें तो नहीं रोक सकता, बस इतना कर दूंगा की आपसे जुड़ी खबरों में आपका पक्ष भी मैं छाप दूंगा। इसके बाद उसका कहना था कि मेरे पास कुछ दस्तावेज हैं, जिन्हें आप पहले देख लें इसके बाद ही छापें। हालांकि बाद में उसने यह नहीं दिए।
दरअसल, इस मीटिंग के भी उसने वीडियो भी बनाए जिसका ऑडियो म्यूट कर कुछ अंश वायरल किए। यदि इसका पूरा वीडियो आ जाए तो पूरी कहानी समाने आ जाएगी।
जब खबरें रोकने से मना किया तो एड की बात करने लगा : इस मीटिंग के खत्म होने के बाद रेस्टोरेंट के बाहर ढिल्लन ने बताया कि वह एक पॉलिटिकल पार्टी से जुड़ा है, उसमें कई काम किए हैं, क्या यह छाप सकते हैं, इस पर मैने कहा यह आपका एड जैसा मामला है, मैं नहीं छाप सकता। आप चाहें तो इसके लिए एड बुक करिए और अपने बारे में जो भी छापना है उसका एड में जिक्र करिए। तो वह तैयार हो गया, उसने चार पेज एड की कीमत भी पूछी जिसको अंदाजे से मैंने बताया और कहा कि यह काम मैं नहीं देखता आप आफिस में आकर इस संबंध में एड विभाग से बात कर लीजिए।
इसके बाद टीटू शर्मा ने कहा कि आरटीओ घोटाले में मेरा नाम ओपन हो गया है, मैं भी एक एड देना चाहता हूं जिसमें बताउंगा कि मैं केवल लाइसेंस बनवाने का काम करता हूं, वह कैसे बनवाया जाता है आदि ताकि जांच अधिकारियों की नजरों से बच सकें। तब उसने भी अलग-अलग साइज की एड की कीमत पर बात की उसे अंदाजे से मैने रकम भी बताई और उसे ऑफिस आकर एड विभाग से ही बात करने को कहा। यह एड लाने पर पवन अरोरा ने खुद का 10 प्रतिशत कमीशन भी पहले से तय कर लिया। यह मेरा काम नहीं था मगर अन्य खबरों की जानकारी निकालने के लिए मैं उनको एंटरटेन कर रहा था।
मेरा सोर्स माफियाओं के ईशारों पर काम कर रहा था : इसके बाद मेरे सोर्स पवन अरोरा ने बिना मुझसे पूछे बिना दो बार मिलने आया और अपने साथ अचानक से टीटू शर्मा से मिलवाया। उसका कहना था कि टीटू अपका सोर्स बनने को तैयार है। चूकि यह खुद घोटाले में शामिल है इसलिए वह चुपके से जानकारियां दे देगा। बस उसका नाम गोपनीय रखने का आपको कमेंटमेंट करना होगा, मैंने कहा यह मेरी जिम्मेदारी है। पवन कई खबरों की जानकारियां देने के लिए मुझे कई बार ऑफिस और कई बार बाहर मिलता था। टीटू दो बार कुछ मिनटों के लिए मिला वह विभाग की अन्य जानकारियों के साथ दोनों बार अचानक से एड की बात और उसकी कीमत कम करवाने की बात शुरू कर देता। और मैं उसे कहता है कि यह काम मेरा नहीं है, आप हमारे एड विभाग से बात करें, इसमें मेरी जरूरत भी नहीं है।
बस मेरी तरफ से जितना कम होगा करवा दूंगा। वैसे भी आपका कोई मामला नहीं है, इसलिए आप क्यों इसमें पड़े हैं। हालांकि बाद में मुझे पता चला कि मुझे फंसाने की योजना का यह सब हिस्सा था। जिनकी वह रिकॉर्डिंग भी कर रहा था बाद में उसमें से कुछ हिस्से मुझे बदनाम करने के लिए कांट-छांट कर वायरल किए। जबकि यदि पूरे ऑडियो सामने आ जाएं तो असलियत खुद-ब-खुद सामने आ जाएगी। बाद में मुझे पता चला कि मेरा सोर्स ही गद्दार निकला। माफियाओं से मिलकर खबरें रोकने के लिए वह एक मोटी रकम लेकर षड्यंत्र का हिस्सा बन गया। मुझे उसके खिलाफ कई लोगों ने आगाह भी किया मगर मुझे खबरों और जानकारियों का भूत सवार था। इसलिए इसकी अनदेखी की।
और यह हुआ था प्रकरण के दिन: 29 अगस्त को पवन अरोरा मेरे पास ऑफिस आया और कहा कि एक आदमी मिला है वह अपने को एंट्री से जुड़ी पीडीएफ देने तैयार है आप मिलने चलिए। संबंधित एजेंट पहले आरटीओ में अवैध एंट्रियों का काम करता था, मगर आजकल उसकी जगह अधिकारियों ने यह काम दूसरे को दे दिए। वह नाराज है और वसूली वाली पीडीएफ देने तैयार है। आप जल्दी चलिए, वह इंतजार कर रहा है। मैं अपना वाहन लेने लगा तो उसने मना कर दिया, कहा मेरे साथ ही चलिए। पहली बार वह मुझसे मिलने एक फोरव्हीलर लाया था। मैं उसी की गाड़ी पर बैठकर वाडी के उस आदमी से मिला यह करीब दो बजे की बात होगी। उसने कहा वह दो दिन बाद पीडीएफ दे देगा, जिसके पास है वह उससे लेकर देगा। इसके बाद मैं ऑफिस की तरफ लौट रहा था, अचानक से पवन ने कहा उसे काम है आप साथ चलिए वह निपटाकर ऑफिस छोड़ दूंगा। इस पर मैं रास्ते में ही रुक गया और कहा कि मुझे कुछ फोन करना है, आप जब तक काम निपटा लो। और मैं बीच रास्ते में ही रुक गया। मुझे बाद में पता चला कि वह वीसीए स्टेडिम चैकर प्वाइंट कहलाता है।
मैंने कभी शर्मा को नहीं बुलाया : फिर अचानक कुछ देर बार शर्मा को लेकर आ गया जिसे देखकर मैं चौंका। उसने फिर उसी एड की बात कर मुझे पैसे देने का प्रयास किया जिस पर मैं बार-बार दोहराता रहा कि एड की बात आप एड विभाग में आकर क्यों नहीं करते, कल भी आपको यही बात बताई थी। उसने कहा मैँ बाहर जा रहा हूं, आप पैसे जमा कर दीजिए मैं एड का मैटर लेकर ऑफिस में कल तक आता हूं। इसी दौरान पुलिस ने अवैध वसूली का केस बना दिया।
मैं उन्हें पूरा मामला बताता रहा मगर एक नहीं सुनी। बाद में पता चला कि यह साजिश बहुत ऊपर से रची गई थी। जिसमें मेरी सच्चाई से किसी को कोई मतलब नहीं है। मेरे पास इसके पूरे पुख्ता सबूत मौजूद हैं, मगर कोई भी अधिकारी को इसमें रुचि नहीं थी। यदि मेरे वकील मुझे इसकी अनुमति देते हैं तो मैं उसे एक-एककर सर्वाजनिक भी कर दूंगा। क्योंकि उनकी राय है कि यह हमें कोर्ट में पेश करने के काम आएंगे। मेरे पास पवन की सारी बातें भी रिकॉर्ड हैं, जो उसने की थी। एक तरफ वह आरोपियों की खुद जानकारी दे रहा था, उनको जबरदस्ती मुझसे मिलवा रहा था तो दूसरी तरफ टीटू का भतीजा बन गया। इसी तरह मेरे शंभु साहनी की फर्जी शिकायत में भी वह उसका गवाह। जबकि जिस घटना का जिक्र कर रहा है वहां कैमरे लगे हैं, इसलिए सच्चाई को जानाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। जल्द ही एक-एक कर इन चेहरों को बेनकाब करूंगा। इस साजिश में किसकी क्या भूमिका थी।
पुलिस की रुचि मेरे सोर्स जानने से लेकर अन्य खबरों में रही: पूरे मामले में एक और चौंकाने वाली बात है कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को मेरे आरटीओ के सोर्स और अन्य बड़ी खबरें के सोर्स जानने में थी, जिसके बारे में मुझसे विस्तार से बात हुई। मौजूदा मामले में मुझे कैसे फंसाया इस पर बात करने में भी रुचि नहीं थी। ऐसा नहीं कि वरिष्ठ अधिकारी मुझे नहीं जानते हों, मगर कोई भी बात करने या सुनने तैयार नहीं था। खैर बाद में मुझे उनकी मजबूरी का पता चला। इसकी भी एक लंबी कहानी है यदि हुआ तो फिर कभी लिखता हूं।
जिनके खिलाफ मैंने बड़े-बड़े मामले उजागर किए वह पहले से ही एकजुट थे और एक-एक कर मेरे सामने आने लगे, मेरी जमानत में अड़चन के लिए वकीलों की फौज भेजी गई।
मेरे मामले में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। मैंने जिन मामले में बड़े-बड़े खुलासे किए थे उनसे जुड़े लोग आरटीओ माफियाओं से मिलकर पहले से ही इसकी फील्डिंग लगाकर बैठे थे। इसमें एक रंजीत सारडे जैसे वकील थे। उनसे जुड़ी कहानी भी बहुत लंबी है। मैने कोर्ट में फैले एक गिरोह के बारे में छापा था जिसमें वकील रंजीत सारडे का नाम भी कागजों में आया था जिसका खुलासा लगातार में करता रहा। जिसके बारे में मैंने ऊपर जिक्र किया था। इस मामले में हाई कोर्ट ने एक जांच कर मेरी खबरों को सही माना और उसके आधार पर कोर्ट में शामिल इस गिरोह की गहन जांच शुरू कर दी जो अब भी जारी है। जबकि मैं कभी सारडा या जगदीश जैसवाल से मिला भी नहीं था। केवल वर्जन के लिए एक बार वकील साहब से बात हुई वह भी रिकॉर्डेड और वह छापा भी।
उन्होंने शहर के एक-एक कर टॉप वकीलों की फौज उतार दी जिससे मेरी जमानत नहीं हो सके। मेरे वकीलों को कई तरह से प्रभावित किया। वो कोर्ट में मेरा मामला एक तरफ रख अपनी खुंदस निकालते रहे। खैर इसके चलते दो दिन में होने वाली जमानत में मुझे कई दिन लग गए। ऐसी साजिश का जाल बुना कि मैं खुद हैरत में पड़ गया। इसके अलावा सालों पहले जिन घोटालों को उजागर किया उनको भी मेरे खिलाफ फर्जी शिकायतें करने तैयार रखा था।
अब मेरी जान पर बन आई है : मुझे इस मामले में मेरे कुछ विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी लगी कि मुझे फंसाने के लिए गुल्लू ढिल्लन, पवन अरोरा और टीटू, शंभु साहनी सहित कई माफियाओं ने लंबे स्तर पर बैठकें कर योजनाएं बनाई। जिसमें सेटिंग कर मुझ पर कई फर्जी मामले लादने की तैयारी की गई, ताकि मैं पुरी तरह से टूट जाऊं, मेरा कैरियर खत्म हो जाए और आरटीओ के घोटाले पर मैं कभी काम करने की स्थिति में नहीं रहूं। अब जब मैं किसी तरह बाहर आ गया तो उनकी अगली योजना मुझे अन्य मामलों में फंसाने की है। इसके लिए मेरे वाहन में ड्रग्स व अन्य नशीले पदार्थ रखने, हथियार रखने और अचानक से एक्सीडेंट करवाने की योजनाओं पर काम चल रहा है। इसके लिए लगातार रैकी भी की जा रही है। हो सकता है मुझसे जुड़ी कोई दु:खद खबर जल्दी ही आ जाए। सभी का मकसद एक ही है कि मैं अब इस घोटाले को वापस नहीं खुलना चाहिए।
मेरे परिवार वालों को भी माफिया थाने परिसर में धमका चुके हैं। कई लोगों ने इस माफियाओं की खबरें नहीं करने की सलाह भी दी थी, उन्होंने बताया था कि जिसकी खबर कर रहे हो वह कौन है तुमको पता नहीं है। अच्छा है, वह मामला ही छोड़ दो। हालांकि मैं कभी खबरों में रिस्क लेने से नहीं डरा। कई खबरों के लिए जीवन दांव पर लगाया है। इस मामले के खुलासे से जुड़ी बहुत सारी बातें हैं, यदि एक-एक पर लिखना शुरू किया तो पूरी वेबसीरीज बन सकती है। यदि कोई भी मेन स्ट्रीम मीडिया मेरी सच्चाई को छापने में रुचि दिखाता है तो मैं एक-एक कर इसके सबूत देने तैयार हूं, जिसमें कई बड़ी खबरों के खुलासे होंगे। हालांकि मुझे इसकी उम्मीद कम ही है। धन्यावाद!
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