टाइम्स ऑफ इंडिया में आज पहले पन्ने पर एक दिलचस्प खबर है

संजय कुमार सिंह-

कोविड मौत पर एलआईसी का डाटा इतना लचर है? और वह भी आईपीओ के लिए सेबी को दिया गया है तब!

टाइम्स ऑफ इंडिया में आज पहले पन्ने पर एक दिलचस्प खबर है। इसके अनुसार सरकार ने कहा है, एलआईसी के आईपीओ आंकड़े का उल्लेख करते हुए कोविड से भारी मौत का दावा करने वाली रिपोर्ट वास्तविक नहीं (नॉट फैक्चुअल) है। संबंधित खबर के बाद सरकार यह दावा कर रही है कि देश में कोरोना से हुई मौत की रिपोर्टिंग की व्यवस्था बहुत ही पारदर्शी और कार्यकुशल है। कहने की जरूरत नहीं है कि जब शवों की लाइन लग रही थी, श्मशान घाट से उठने वाली लपटें बहुत ज्यादा थीं, दीवार ऊंची करवाई गई तो लाशें नदी में बहती मिलीं और ऐसे तमाम मौके आए जब कोविड से मौत को कम बताने के आरोप लगे तो सरकार ने जवाब देने की जरूरत नहीं समझी। अब जवाब दे रही है तो मामला क्या है समझना बनता है। अब अगली रिपोर्ट का इंतजार रहेगा। देखता हूं।

वैसे इस सरकारी खंडन के अनुसार, आईपीओ के लिए एलआईसी ने सेबी को डाटा की विस्तृत रेंज दी है। और सरकार की मानें तो उसपर यकीन नहीं करना चाहिए क्योंकि देश में कोविड से मौत के मामले दर्ज करने और उसकी रिपोर्ट करने की व्यवस्था बहुत कार्यकुशल और पारदर्शी है। एलआईसी के आंकड़ें को नहीं मानें क्योंकि वह गलत है ऐसा कुछ मैं ढूंढ़ने की कोशिश करता रहा पर नहीं मिला। आप भी टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर पढ़िए और समझने की कोशिश कीजिए कि सरकार कहना क्या चाह रही है। मुझे लगता है कि एलआईसी का डाटा गलत है तो उसे गलत कहा जाना चाहिए। नहीं तो उसका जो अर्थ निकलता है निकालने दिया जाना चाहिए। वरना सरकारी खंडन और दावों का मतलब कौन नहीं समझता है। बाकी इंतजार है, गोविड मीडिया को इसमें क्या खबर नजर आती है या वह राजा का बाजा ही बजाता है।



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