टीआरपी के लिए आखिर कितना गिरेगी चैनल की रिपोर्टिंग?

टीआरपी में इजाफा के लिये कुछ चैनलों में कुछ भी हंगामाखेज दिखाने की ललक ने सही और गलत का फर्क खत्म कर दिया है। ‘इण्डिया न्यूज’ चैनल के रीजनल संस्करण ने तो हद ही कर दी। मामला कौशाम्बी जनपद के निवासी एक युवक रवीन्द्र यादव की लाश के फतेहपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में रेलवे पटरियों के बीच टुकड़ों में मिलने का है। शव की शिनाख्त उसके परिजनों द्वारा की गयी और उसकी हत्या की बात कहते हुए फतेहपुर के पुलिस कप्तान को तहरीर देते हुए मृतक युवक के मित्र पंकज सिंह सहित चचेरे भाई और तथाकथित प्रेमिका को नामजद कर दिया गया।

मृतक की बहन मीनू द्वारा मुख्यमंत्री को संबोधित तथाकथित खून से लिखे गये खत (इसमें पुलिस अधीक्षक पर सूबे के मंत्री के दबाव में आरोपियों की गिरफ्तारी न किये जाने का हवाला दिया गया है) के आधार पर खबर चला दिया गया। पुलिस अभी जांच ही कर रही है कि चैनल ने मृतक युवक की बहन मीनू यादव के हवाले से खबर को आनर किलिंग भी बता दिया।

इतना ही नहीं, चैनल ने सूबे के मंत्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह पर मीनू यादव के तथाकथित खूनी पत्र के आधार पर बिना किसी सबूत के गंभीर आरोप लगाया कि पुलिस कप्तान पर दबाव के चलते आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है। यह आरोप लगाते हुए मीनू यादव को दिखाया गया कि पुलिस कप्तान उमेेश कुमार सिंह ने उनसे कहा है कि मामले में मंत्री का दबाव है और वह उन्हीं से कहलवायें तभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकेगी।

मृतक युवक की बहन द्वारा पुलिस अधीक्षक के तथाकथित बयान और लगाये गये आरोपों की पुष्टि के लिये न तो चैनल ने पुलिस कप्तान से बात करने की जरूरत महसूस की और न ही सूबे के मंत्री, सरकार और भाजपा की छवि को प्रभावित करने वाली इस खबर को चलाने के लिये संबंधित मंत्री, सरकार या किसी जिम्मेदार पार्टी पदाधिकारी का वर्जन ही लिया।

पुलिस कप्तान के अनुसार ‘न तो वह किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव मानते हैं और न ही उन्होने ऐसा कोई बयान हीं दिया है।‘ उन्होने बताया कि  ‘मृतक के पिता द्वारा दी गयी तहरीर के अनुसार ही मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।‘

वहीं इस आरोप को मिथ्या और प्रोजेक्टेड बताते हुए मंत्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि ‘वह इस मिथ्या आरोप और चैनल द्वारा बिना पुष्टि के खबर चलाने से  आहत है। उन्हे तो इस मामले के बारे में ही जानकारी नहीं है। यह पूरी तरह से राजनीतिक विरोधियों द्वारा प्रायोजित ढ़ंग से उन्हे और सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने की गरज से किया गया कारनामा हो सकता है जिसे बेहद गैरजिम्मेदाराना ढंग से प्रसारित किया गया है।‘

सवाल उठना लाजमी है कि क्या किसी ऐसी खबर को जो सरकार, राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति विशेष की छवि को प्रभावित करने वाली हो को प्रसारित करने के पहले खबर की पुष्टि करना एक जिम्मेदार पत्रकारिता के लिये अब जरूरी नहीं रह गया है?    

चन्द्रभान सिंह
फतेहपुर
यूपी
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