टीआरपी का तमाशा : एनडीटीवी जैसे चैनल को दसवें नंबर का बना डाला…

: आजतक फिर नंबर एक पर, न्यूज24 फिर हुआ न्यूज नेशन से पीछे : इस बाजारीकृत व्यवस्था में सब कुछ पूंजी से तय होता है. चैनल कितने देखे गए, इसका आंकड़ा जुटाने वाली प्राइवेट संस्था ‘टैम’ में घपले-गड़बड़ियां खूब है पर इसकी जांच कराने की किसी में हिम्मत नहीं होती. जो ज्यादा आंख तरेरता है और सत्ता में अच्छा खासा दखल रखता है, टैम वाले टामी उसकी ‘मुराद’ पूरी कर देते हैं. या तो उसके या उससे जुड़े चैनल को ज्यादा टीआरपी देकर बड़ा कर देते हैं या फिर उसको किसी अन्य तरीके से ‘ओबलाइज’ कर देते हैं. यही कारण है कि टैम वाले उन न्यूज चैनलों को तो ज्यादा टीआरपी देते हैं जिनका कंटेंट बेहद पूवर यानि घटिया है, लेकिन जो अच्छे कंटेंट दिखाता है, यथा एनडीटीवी जैसे चैनल, उनको बिलकुल आखिरी पायदान पर डाल देते हैं.

असल में एनडीटीवी वालों ने टैम की घपलेबाजी और फर्जीवाड़ा के खिलाफ केस-मुकदमा भी कर रखा है, इस कारण भी टैम के टामी काफी नाराज रहते हैं एनडीटीवी से. लेकिन इस बार यानि 42वें हफ्ते की टीआरपी में तो बिलकुल हद ही कर डाला. तेज नामक जो चैनल है टीवी टुडे समूह का यानि आजतक वालों का, उसे भी एनडीटीवी इंडिया चैनल से उपर दिखा दिया है. यहां तक कि न्यूज24, न्यूज नेशन, इंडिया न्यूज, आईबीएन7 जैसे न्यूज चैनलों को एनडीटीवी से उपर दिखाया जाता रहा है. इस फर्जीवाड़े से किसी और की नहीं बल्कि खुद टैम वालों की पोल खुल रही है और आम लोग इस रेटिंग के सिस्टम को संदेह की नजरों से देखने लगे हैं.

42वें हफ्ते की टीआरपी में जो दूसरी खास बात है वो ये कि आजतक फिर से इंडिया टीवी को पछाड़कर नंबर वन पर आ गया है. पिछले हफ्ते इंडिया टीवी नंबर वन पर आ गया था. एबीपी न्यूज ने 42वें हफ्ते में अच्छी खासी उछाल हासिल की है. न्यूज24 फिर न्यूज नेशन से पिछड़ गया है. सारे आंकड़े इस प्रकार हैं….

Week 42 cs 15+ 

Aaj tak 16.6 up .8

India TV 15.6 dn .4  

Abp news 15.4 up 1.3

Znews 10.5 dn .1

India News 9.9 dn .6 

News nation 7.9 up .1

News24 7.5 dn .7  

IBN7 6.5 up .4

TEZ 5.1 dn .2

NDTV India 4.9 dn .4


पिछले हफ्ते की टीआरपी….

नंबर वन से नीचे गिरा आजतक चैनल, इंडिया टीवी बना सरताज, न्यूज24 ने न्यूज नेशन को पछाड़ा

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Comments on “टीआरपी का तमाशा : एनडीटीवी जैसे चैनल को दसवें नंबर का बना डाला…

  • फेसबुक की दुनिया में एक परिचित नाम है- पंकज चतुर्वेदी . जहाँ तक मेरी जानकारी है, ये महाशय नेशनल बुक ट्रस्ट में सम्पादक रहे हैं, यानी सरकारी सम्पादक. हालाँकि अभी अपनी प्रोफाइल में फ्री लांसर लिख रखा है, खूब लिखते हैं, जब भी किसी अख़बार में कोई आर्टिकल छपता है तो तुरंत उसके कॉपी और लिंक फेसबुक पर डालना नहीं भूलते. ब्लॉग भी चलाते हैं,…हिंदी दिवस पर abp news की ओर से इन्हें सम्मानित भी किया गया था,पर्यावरण इनका प्रिय विषय है. यह सब लिखने का उद्देश्य यही है कि सरकारी संस्थानों में उच्च पदों पर रहे उच्च शिक्षित लोग भी मुसलमान और हिन्दू पर्वों के मौकों पर किस तरह से अपनी दोहरी मानसिकता (सर्वहारा की भाषा में दोगलेपन ) का परिचय देते हैं,इसे चतुर्वेदी जैसे लोगों की मौकापरस्त मानसिकता से समझा जा सकता है. 5 अक्टूबर को बकरीद के मौके पर इस ‘ पर्यावरण विशेषज्ञ ‘ ने धर्म के नाम पर दी जानी वाली पशु बलि को क़ुरबानी के नाम पर शर्मनाक तरीके से किस कदर महिमामंडित किया,उसे नीचे पढ़ा जा सकता है. इक्कीसवी सदी में पशु बलि का गुणगान करने वाले आदमी को पढ़े-लिखे की श्रेणी में रखा जा सकता है ??? क्या यह अपने आप में पाश्विक मानसिकता नहीं है??? बहरहाल…हर छद्म धर्मनिरपेक्षी ओर फर्जी टाइप के बुद्धिजीवियों की तरह दीपावली पर इस आदमी का ‘ पर्यावरण प्रेम ‘ जाग उठा और आतिशबाजी को लेकर लफ्फाजी कर डाली – ” आतिशबाजी या पटाखे ना केवल मानव शरीर को नुकसानदेह हैं, वरना उससे उपजा पर्यावरणीय संकट कई दिनों तक लोगों को ञस्‍त रखता है.” दो पर्व, दो धर्म और दो तरह की मानसिकता..???? शर्मनाक ! क्या यह आदमी जानता है कि बकरीद पर धर्म के नाम पर भारत में करोड़ों पशुओं की बलि दे जाती है,करोड़ों जानवरों का कितना लीटर खून नालियों में बहता होगा..कितना टन अपशिष्ट पदार्थ सड़कों पर आता होगा…उस समय पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता…???? और अब इनको पर्यावरण की चिंता सताने लगी, वो भी तब एक केन्द्रीय मंत्री ने इस बारे में लिखा-कहा..! यानी मंत्री की हाँ में हाँ मिलाकर उनकी नजरों में चढ़ने की चाटुकार कोशिश करना…! शर्मनाक पंकज चतुर्वेदी शर्मनाक !

    6 अक्टूबर बकरीद
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    Pankaj Chaturvedi

    October 5 at 8:12pm ·

    ईद उल जुहा की मुबारकबाद

    खुदाबंद उनकी कुर्बानी कबूल करें, और उन्‍हें मुल्‍क, कौम और सच्‍चाई की राह पर कुर्बान होनें का जज्‍जबा अता फरमाए

    पविञ रमजान महीने की ईद उल फितर के केाई 70 दिन बाद इस्‍लाम अनुयायियों का यह महत्‍वपूर्ण पर्व आता हैा यह बात है ईरान के ‘उर’ शहर की, हजरत मुहम्‍म्‍द साहेब से बहुत पहले की, हजरत इब्राहिम को बुढापे में बडी मुरादों के बाद औलाद हुई, उसका नाम रखा गया इस्‍माईल, खुदाबंद ने इब्राहिम की परीक्षा ली और कहा कि वह अल्‍लाह की राह में अपने सबसे प्रिय चीज कुर्बान कर दे, हजरत इब्राहिम को खुदा पर भरोसा था , सो उन्‍होंने अपने 11 साल के बच्‍चे को कुर्बान कर दिया, उन्‍होंने जैसे ही जिबह किया, परवरदिगार ने उनके बेटे की जगह एक मेढा या भेड रख दी, यह पर्व हज के अंत में होता है और लोग हजरत इब्राहिम की तरह कुर्बानी देते हैं, असल में अल्‍लाह ने अपनी सबसे प्रिय वस्‍तु की कुर्बानी की बात कही थी, आज इंसान को सबसे प्रिय उसका घमंड, गुस्‍सा, दि खावा है, भले ही हजरत इब्राहिम की परंपरा में भेड या बकरा कुर्बान करें, लेकिन पर्व का असली मसला भी याद रखें
    कुर्बानी के जानवर को तीन हिस्‍सों में बांटा जाता है, एक हिस्‍स गरीब को, दूसरा दोस्‍तों को व तीसरा परिवार को, आमतौर पर कुर्बान जानवर का चमडा मस्जिद को जाता है, जिसके पैसे से मदरसे व अन्‍य पावन कार्य होते हैं, इस बार सभी से गुजारिश है कि अपनी जकात, मस्जिद के चमडे की बिक्री का पैसा व अन्‍य दान कश्‍मीर के विपदा ग्रस्‍त लेागों के लि ए जरूर करेंा जिनकी भी भवनाएं, अस्‍था इस पर्व से जुडी हों, उन सभी को ईद मुबारक, खुदाबंद उनकी कुर्बानी कबूल करें, और उन्‍हें मुल्‍क, कौम और सच्‍चाई की राह पर कुर्बान होनें का जज्‍जबा अता फरमाए

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    23 अक्टूबर – दीपावली
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    Pankaj Chaturvedi
    2 hrs ·
    कल किसी टीवी चैनल पर केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंञी डा हषवर्धन को सुन रहा थ, संभवतया रवीश कुमार से बात कर रहे थे, उन्‍होंने आतिशबाजी के विरोध में जो स्‍वर उठाया है वह काबिलेतारीफ है और उसका समर्थन सभी वि भेद से उपर उठ कर करना चाहिए, आतिशबाजी या पटाखे ना केवल मानव शरीर को नुकसानदेह हैं, वरना उससे उपजा पर्यावरणीय संकट कई दिनों तक लोगों को ञस्‍त रखता है, दीवाली पर बारूद चलाना ना तो पौराणिक है और ना ही वैदिक और ना ही सनातनी परंपरा, हां डाक्‍टर साहब को भी अपनी बात सार्वजनिक मंच पर पुरजोर तरीके से कहना चाहिएा किसी के बहरे, काने, सांस के रोगी होने का इंतजार ना करें, पटाखों के बगैर दीवाली मनाएं, उस पैसे से समाज के उपे‍िक्षित वग के चैहरे पर मुस्‍कान लाने का प्रयास करें, जान लें ये पटाके बच्‍चों के श्रम शोषण का उत्‍पाद होते हैं, इनकों बनाने में ना जाने कितनी जानें जाती हें और उनको चलाने के बाद भी तन, मन धन का नुकसान होता है,

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  • Bikesh Kumar Pandey says:

    mere delhi ke ghar pe tam ka machine laga tha.. lagate time wo mujhe 200 ka mahina aur sal me 2 bar gift dene ka wada kiye the lekin kabhi wo time se payment nahi kiye aur nahi apne commitment ko kabhi pura kiye. mai jab bhi machine hatane ko bolta tha to uska executive request karne lagta tha.. maine mahino tak machine on hi nahi kiya tha..isliye unka sara TRP gadbad hai..kai gharo me unka machine mahino tak off rahta hai

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  • PANKAJ CHATURVEDI says:

    विजयकांत जी पता नहीं आपको किस बात की जलन है, मेरे लखिने से, छपने से, या और किसी से,एक बात मैं जहां नौकरी करता हूं वह सरकारी संस्‍था नहीं है, वह एक स्‍वायत्‍त संस्‍था है, दूसरा मेरे लखिने का मेरे संस्‍थान से कोई वास्‍ता नहीं होता सो अपना पद नहीं लखिता तीसरा आपने उसके बाद की पोस्‍अ नहीं देखी जिसमें उंट की कुर्बानी की आलोचा की थी, जिसे 600 से ज्‍यादा लोगाें ने तो शेयर कियश है, दोगली, कुटिल मानसिकता आपकी है, जिसमें जलन, ईर्ष्‍या और घटियापन की बू आती है

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