काश कि बीबीसी अच्युता जी की इस किताब को भी देख लेता

भारतीय जनसंचार संस्थान में हमारे सहपाठी रहे टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार अक्षय मुकुल ने गीता प्रेस पर किताब लिखी है. ‘गीता प्रेस एंड द मेकिंग ऑफ़ हिंदू इंडिया’….उसके आधार पर गीता प्रेस को बीबीसी ने उग्र हिंदुत्व का पैरोकार संस्थान बताया है… बीबीसी की रिपोर्ट में गीता प्रेस को गांधी का विरोधी भी बताया गया है… हालांकि हाल के दिनों में वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र के संपादन में गीता प्रेस के व्यवस्थापक-संपादक रहे हनुमान प्रसाद पोद्दार के पत्रों का संग्रह निकला है-पत्रों में समय-संस्कृति… उसमें शामिल पत्र कुछ और ही कहानी कहते हैं…

हनुमान प्रसाद पोद्दार को गांधी ने ही सुझाव दिया था कि विज्ञापन ना लेना… कल्याण में कभी विज्ञापन नहीं लिया गया… कल्याण के ईश्वर अंक के लिए गांधी ने भी लिखा… प्रेमचंद प्रगतिशील थे… फिर भी उन्होंने कल्याण के लिए कई लेख लिखे… लेकिन बीबीसी का ध्यान इस पर नहीं है… आखिर सिर्फ उग्र हिंदुत्व के पक्ष को ही क्यों उभारा जा रहा है… काश कि बीबीसी अच्युता जी की इस किताब को भी देख लेता…ऐसी रिपोर्ट बीबीसी की साख के अनुरूप नहीं है.

बीबीसी संवाददाता विनीत खरे की रिपोर्ट पढ़ने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें:

एक छापाख़ाना, और हिंदू इंडिया बनाने की मुहिम

वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी के फेसबुक वॉल से.

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