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सुख-दुख

मस्ती की एक रात इस Osho पंथी संत ने यशवंत को दीक्षित कर नाम दे दिया स्वामी प्रेम संतति!

Yashwant Singh : तंत्र साधना को जानने की इच्छा के तहत काफी समय से बहुत कुछ पढ़, देख, सुन, खोज रहा हूं. इसी दरम्यान चंद रोज पहले लखनऊ में एक ओशो पंथी संन्यासी मिल गए, स्वामी आनंद भारती. उनसे तंत्र को लेकर त्रिपक्षीय वार्ता हुई. एक कोने पर Kumar Sauvir जी थे. दूसरे कोने पर खुद स्वामी आनंद भारती और तीसरे कोने पर मैं, श्रोता व वीडियो रिकार्डर के रूप में. ये 25 मिनट का वीडियो आपको बहुत कुछ बताएगा.

 

Yashwant Singh : मुंबई के सिनेविस्टा स्टूडियो में जब हम लोग घुसे तो एक गंजी और खूब सजीधजी औरत दिखी. जिन सज्जन के साथ मैं गया था, उनने हाथ मिलाकर उस औरत से जाने क्या कहा कि वो तेज तेज हंसते हुए बोलीं- ”अपनी खेती है, फिर उग आएगी.”  भारत में किसी औरत द्वारा हंसी-खुशी खुद अपना सिर मुंड़ा लेना भारी हिम्मत की मांग करता है. संबंधित दो वीडियो नीचे हैं, क्लिक करें..

 

 

https://www.youtube.com/watch?v=UqS8aAWJ_zQ

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https://www.youtube.com/watch?v=–pbXC-0bXU

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मुंबई में मजीठिया वेज बोर्ड के लिए लगातार लड़ने वाले और श्रम विभाग की नाक में नकेल कसने वाले योद्धा पत्रकार शशिकांत सिंह का जब इंटरव्यू कर रहा था तो उन्होंने भड़ास को भगवान की श्रेणी में लाकर रख दिया. बताइए भला, इतनी तारीफ कैसे पचा सकता हूं. संबंधित वीडियो का लिंक ये है. https://www.youtube.com/watch?v=8ralZqKWVPQ

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मुम्बई प्रवास की आखिरी शाम ब्लॉगिंग के दिनों के मित्र शशि सिंह के नाम रही। हंसमुख, कर्मठ और बहुधंधी भाई शशि किसी बहते जल की तरह सरल तरल हैं। ख़राब सेहत से थोड़े मंदे से दिखे लेकिन उत्साह पहले वाला ही कायम मिला। कंटेंट, बिज़नेस, मुम्बई, ब्लॉग, वेब, मोबाइल, तकनीक ढेरों विषयों पर गपियाए हम लोग। मीरा रोड पर उनके दूसरे वाले फ्लैट में एक बजे लेट कर आँख बंद करने की कोशिश की तो पता ही नहीं चला कितनी जल्दी तीन बज गए और अलार्म चिल्लाने लगा। बहुत सारे साथियों से मुलाकात की बेहतरीन यादों और जल्द लौटने के कई वादों के साथ दिल्ली वापस जाने को निकल चुका हूँ।

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अमेरिका में रहने वाले और लाखों डालर कमाने वाले कई महान लोग हम इंडिया में रह गए देसी टाइप चिरकुट इंडियन्स को बहुते उपदेश इनबक्सियाते हैं. अमां यार. एक्के काम कर लो. खुद तो उमर गुजार रहे परसनल सेविंग बढ़ाने में और दूसरों को लेक्चर देते हो मीडिया, राजनीति टाइप स्तंभों, संस्थाओं को सुधारने के लिए. कभी काशी वालों से सबक लिया करो. वो सब फुल टाइम चिंतक होते हैं. न नोकरी करते हैं और न चिंतन से बचते हैं. इसीलिए वो सब दावे से सबको गरिया गरिया कर अच्छाई बुराई बतियाते ऐलानियाते हैं.

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पूर्वांचल के एक आश्रम में भून पका कर खाने का सुख लेकर अब यात्री लखनऊ की ओर चला। सारे जुआरियों शराबियों और अमन-उत्पात पसंदों से अनुरोध है कि अपनी अपनी लोकेशन देवें।

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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