Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

योगी आदित्यनाथ के अफसर गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में लिप्त कंपनियों के एजेंट हैं…

गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में शामिल रही कंपनियों के खिलाफ इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट की लखनऊ समेत देश के कई अन्य शहरों में की गई छापेमारियां पिछले दिनों सुर्खियों में रहीं। इस कार्रवाई पर प्रदेश की भाजपा सरकार ने अपनी पीठ ठोकी और अखबारों ने भी सरकार की पीठ ठोकने में कोई कोताही नहीं की। इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट की कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की पारदर्शिता का अर्धसत्य है। सत्य का आधा हिस्सा खौफनाक है।

शीर्ष सत्ता गलियारे में शीर्ष पदों पर आसीन सरकार के कुछ खास नौकरशाह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ईमानदार चेहरे पर कालिख पोतने में लगे हैं, लेकिन योगी को प्रधानमंत्री होने के ‘वर्चुअल-ड्रीम’ में कुलांचे मारने से फुर्सत नहीं। यह स्वप्न भी उन्हीं नौकरशाहों द्वारा प्रोजेक्टेड ‘हैलुसिनेशन’ है, जिसमें वे सीएम को फंसा कर रखना चाहते थे, और योगी उसमें फंस भी गए।

योगी सरकार के भ्रष्ट नौकरशाहों ने गोमती रिवर फ्रंट घोटाले के नामजद अभियुक्तों की लिस्ट में शामिल कंपनी ‘केके स्पन इंडिया लिमिटेड’ को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में ढाई सौ करोड़ रुपए का ठेका दे दिया। अब आलमबाग में सैकड़ों करोड़ के सीवर प्रोजेक्ट का ठेका भी इसी कंपनी को देने की तैयारी है। इसके अलावा रिवर फ्रंट घोटाले की एक अन्य अभियुक्त कंपनी गैमन-इंडिया को भी बड़ा ठेका देने का कुचक्र चल रहा है। यह ‘पुनीत-कर्म’ नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज सिंह और जल निगम के एमडी एके श्रीवास्तव ने किया।

इन भ्रष्टों का दुस्साहस देखिए कि ये गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की अभियुक्त कंपनी को सैकड़ों करोड़ का ठेका देने से नहीं हिचक रहे। मुख्यमंत्री को अगर जमीन पर टिके होने के यथार्थ का एहसास होता तो उन्हें यह पता होता कि जिस घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश उन्होंने की, उसी घोटाले के अभियुक्तों को उन्हीं के नौकरशाह सैकड़ों करोड़ का ठेका बांट रहे हैं। योगी के नौकरशाह क्या यह धतकरम मुफ्त में कर रहे हैं..? इस सवाल का जवाब स्पष्ट है।

इस प्रसंग का एक और पक्ष आपके समक्ष रख ही देना चाहिए, हालांकि चर्चा में भी यह संक्षिप्त तौर पर आया है। जब संदर्भित खबर का प्रोमो दोपहर से चलने लगा तब खबर को ‘समझ-बूझ’ कर चलाने की सांकेतिक धमकी वाली हिदायत भिजवाई गई। हिदायत देने वाले अधिकारी तक यह प्रति-संदेश भी भेज दिया गया कि खबर तो चलेगी ही… हम उनकी भी करतूतों के धागे जल्दी ही धुनेंगे’… गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में लिप्त कंपनी को सैकड़ों करोड़ का ठेका देने वाले एक भ्रष्ट अफसर ने राजभवन की चाय-पार्टी में कहा, ‘टीवी पर दिखा देने से क्या फर्क पड़ता है..!’

यह है हमारी लोकतांत्रिक-व्यवस्था का नैतिक-स्तर। जरा देखिए, निकृष्ट-धन ने ऐसे अफसरों की खाल कितनी फिसलन भरी बना दी है कि शर्म-हया कहीं टिक नहीं रही… भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई समग्रता से हो तभी उसकी सार्थकता स्थापित होती है। ईमानदारी तो शीशे की तरह होती है… इस पार से उस पार साफ साफ… ईमानदार छवि के योगी अपने ही भ्रष्ट नौकरशाहों पर ध्यान नहीं दे रहे, यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है।

लेखक प्रभात रंजन दीन लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन