योगी के जन्मदिन पर मोदी-शाह का ट्वीट न करना बता रहा कि बीजेपी एक बड़ी सुनामी दबाए बैठी है!

गौरव त्यागी-

बीजेपी की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है ।योगी के जन्मदिन पर मोदी और शाह का ट्वीट न करना बता रहा है…बीजेपी एक बड़ी सुनामी को दबाए बैठी है।

बीजेपी में योगी बनाम मोदी-शाह की सबसे बड़ी वजह एके शर्मा हैं । एके शर्मा मोदी के बेहद खास हैं और मोदी उन्हें यूपी की सत्ता में बड़ी जिम्मेदारी देना चाहते हैं लेकिन योगी इसके लिए तैयार नहीं हैं । योगी सत्ता में पावर का दूसरा बड़ा केंद्र बनने नहीं देना चाहते । योगी एके शर्मा को बड़ा पद देने की बजाय कोई छोटा मोटा पद देने पर राजी हैं लेकिन मोदी एके शर्मा को मजबूत पद देना चाहते हैं । दोनों के बीच मन मुटाव का यही सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है।

योगी बनाम मोदी-शाह विवाद में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। स्वामी ने ट्वीट करके कहा- योगी एक ईमानदार नेता हैं और वो कभी भी चापलूस नहीं हो सकते। स्वामी चापलूस किस सन्दर्भ में लिख रहे हैं… वो बताने की जरूरत नहीं है।

खैर सरकार चलाने का तरीका मोदी और योगी दोनों का ही एक जैसा है । केंद्र में जैसे मोदी सरकार चला रहे हैं.. ठीक वैसे ही योगी यूपी में चला रहे हैं । जैसे मोदी केंद्र में न तो किसी मंत्री की सुनते और न ही किसी सांसद की । ठीक वैसे योगी भी न तो किसी मंत्री की सुनते हैं और न ही किसी विधायक की । इसलिए पार्टी में नाराजगी अंदरूनी स्तर पर दोनों के खिलाफ मिल जाएगी । अगर पार्टी के भीतर मोदी-योगी के खिलाफ गुप्त वोटिंग कराई जाए तो नाराजगी दोनों के खिलाफ खुलकर सामने आएगी ।

लेकिन मोदी-योगी दोनों ही एक मामले में भाग्यशाली हैं दोनों ही अपने वोटर्स के बीच बेहद लोकप्रिय हैं । बीजेपी का वोटर सरकार के इसी शासन को पसंद कर रहा है । यही एकमात्र वजह है पार्टी में दोनों अपने स्थान पर मजबूती से खड़े हैं ।

पार्टी के अंदर से ये सुनामी जिस दिन बाहर आएगी… यकीन मानिए उस दिन बीजेपी को भयंकर नुकसान देकर जाएगी ।

गिरीश मालवीय-

उत्तर प्रदेश भाजपा में एक बड़ी फॉल्ट लाइन अब प्रत्यक्ष दिखने लगी है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन है लेकिन अभी तक ट्विटर पर न अमित शाह का कोई बधाई संदेश है और न प्रधानमंत्री मोदी का। राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दोनों ही सुबह ट्विटर पर यूपी सीएम को बधाई दे चुके हैं। ऐसे में पार्टी आलाकमान में ही अपने एक नेता को लेकर दरार साफ दिखती नजर आ रही है

पिछले कई दिनों से नजर आ रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व एक के बाद एक उत्तर प्रदेश में पर्यवेक्षक भेजकर राज्य में योगी को पीछे हटने के संकेत दे रहा है लेकिन योगी इन संकेतों की उपेक्षा कर रहे हैं।

अब यह पार्टी में यह सबको दिख रहा है कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है ऐसे में नारद मुनि के रूप में सुब्रमण्यम स्वामी सक्रिय हो गए हैं और खूब लगाई बुझाई कर रहे हैं।

सुब्रमण्यम स्वामी आज एक ट्वीट के रिप्लाई में लिख रहे हैं, “मैं योगी को 1974 से जानता हूं। तब नानाजी देशमुख मुझे गोरखनाथ मंदिर के महंत और योगी के गुरु स्वामी अवैद्यनाथ से मिलाने ले गए थे। मैं गोरखपुर में योगी के साथ सार्वजनिक सभाएं संबोधित की हैं। हम दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू में भी कई बार मिले। वे एक ईमानदार व्यक्ति हैं और वे कभी भी चापलूस नहीं हो सकते।”

ये चापलूसो को पसंद करने वाला ताना किसे मारा जा रहा है सब समझ रहे हैं। बड़ी बात यह भी है कि 2019 में भी मोदी ने ट्वीट कर योगी को बधाई दी थी उन्होंने उस ट्वीट में कहा था कि “उत्तर प्रदेश के गतिशील मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ जी को उनके जन्मदिन पर बधाई. योगी जी ने उत्तर प्रदेश को बदलने में सराहनीय काम किया है. विशेषकर कृषि, उद्योग जैसे क्षेत्रों में और साथ ही कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाया है. मैं उनके लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना करता हूं.”

उसके बाद जो साल 2020 में उन्होंने ट्वीट किया उसमे लिखा था कि ‘उत्तर प्रदेश के ऊर्जावान और मेहनती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जन्मदिन की बधाई. उनके नेतृत्व में राज्य सभी क्षेत्रों में प्रगति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है” पिछले साल अमित शाह का ऐसा ट्वीट ही सामने आया था तो आखिर 2021 में इस बार ऐसी बेरुखी क्यो दिखाई जा रही है ? साफ है कि अंदरखाने में कुछ तो गड़बड़ हुई है।

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