यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जिस तरह अंधेरगर्दी मचा रखी है!

Nadim S. Akhter : यूपी के लखनऊ में अपने बेटे की मौत की रिपोर्ट लिखवाने के लिए इंस्पेक्टर के सामने गिड़गिड़ाती और उनके पैर पकड़ती बुजुर्ग महिला का वीडियो वायरल हुआ है। फैक्ट्री में काम करते वक़्त दुर्घटना से उसके जवान बेटे की मौत हो गयी थी। वीडियो में दिख रहा है कि राक्षस इंस्पेक्टर किसी शहंशाह की तरह कुर्सी पे पीठ टिकाए और पांव पसारे लद के बैठा हुआ है और लाचार-बेबस-अपने बेटे की मौत से टूट चुकी मां हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा रही है, बिलख-बिलखकर रो रही है कि हुज़ूर मेरे बेटे की मौत की रिपोर्ट लिख लो। इंस्पेक्टर पे इसका कोई असर नहीं हो रहा है।

ये सबकुछ बहुत हृदयविदारक है। वीडियो देखकर ऐसा लगा कि भारत के संविधान से खाकी वर्दी और सितारा लेकर राक्षस बने उस इंस्पेक्टर को सऊदी अरब के क़ानून की तरह बीच चौराहे पे सिर कलम करने की सज़ा दी जाए। ताकि आगे से कोई पुलिस वाला किसी गरीब बेबस भारत के नागरिक को अपना गुलाम और खुद को राजा समझने की गलती ना करे। यही आज़ादी है? क्या कर रही है यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार? क्या कर रहे हैं यूपी के डीजीपी?

आप को विश्वास नहीं होगा कि इतना निकृष्ट, निंदनीय, अमानवीय और घोर भर्त्सना के काबिल इस कांड को अंजाम देने के बाद भी यूपी सरकार और लखनऊ के एसपी और यूपी के माई-बाप डीजीपी ने इंस्पेक्टर को ससपेंड तक नहीं किया। कोई कारण बताओ नोटिस तक जारी नहीं किया। उसको नौकरीं से बर्खास्त तक नहीं किया। बल्कि उसे आराम देने के लिए उसका तबादला पुलिस लाइन में कर दिया। बस! हो गया काम। कुछ ही दिनों बाद अपने आकाओं की मदद से वो इंस्पेक्टर फिर किसी मलाईदार थाने में पोस्टिंग पा लेगा। अगर मैं यूपी का सीएम या डीजीपी होता तो अपने बेटे की मौत के बाद एक माँ को जार-जार रुलाने वाले उस इंस्पेक्टर को ऐसी सज़ा देता कि वर्षों तक यूपी पुलिस का कोई कर्मचारी किसी लाचार बेबस माँ की आंख में आंसू आने से पहले सारे भ्रष्टाचार और माफिया नेक्सस भूलकर अपनी वर्दी का फर्ज पहले निभाता। सोचिए हमारा सिस्टम कितना संवेदनहीन और रावण बन चुका है। अरे! रावण में भी संवेदना थी। ये लोग तो उससे भी गए गुजरे हैं।

मैं बार-बार कह रहा हूँ और दिनोंदिन मेरी ये धारणा पुष्ट होती जा रही है कि यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जिस तरह अंधेरगर्दी मचा रखी है, उससे आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी का यूपी से सफाया हो जाये तो अचरज मत करिएगा। चाहे मोदी जी और अमित शाह यूपी में कितना ही ज़ोर लगा लें। चाहे विपक्ष कोई भी गठबंधन बना ले लेकिन अगर जनता ने फैसला कर लिया हो कि इसको उखाड़ के फेंक देना है तो जनता जड़ से ऐसा उखड़ती है कि लम्बे समय तक पता ही नहीं चलता कि वहां कभी कोई पेड़ या पौधा लगा भी था।

अरे योगी से अच्छे तो एमपी वाले कांग्रेसी ज्योतिरादित्य सिंधिया निकले जिन्होंने एमपी में बिजली का ट्रांसफॉर्मर नहीं लगाने पे कलक्टर के पांव पे गिरे किसान का वीडियो देखने के बाद तुरन्त फोन किया और महीनों से दौड़ रहे किसान के खेत में कुछ ही घण्टों के अंदर ट्रांसफार्मर लग गया। अबे! कुछ तो मानवीयता बचा के रखो। सत्ता का इतना घमंड!!! कि अब जनता को जनता नहीं और इंसान को इंसान नहीं समझोगे! एक मां को यूपी की राजधानी में जार-जार रुलाओगे!! फिर दोषी पुलिस वाले के खिलाफ कारवाई भी नहीं करोगे??

यूपी से ऐसी कई सारी खबरें लगातार आ रही हैं। ये बीजेपी को लोकसभा चुनाव में बहुत महंगा पड़ने वाला है। बहुत ज्यादा महंगा। मेरी बात लिख के रख लीजिए। इनका दिमाग ठिकाने नहीं है। जनता ठिकाने लगा देगी।

वरिष्ठ पत्रकार नदीम एस. अख्तर की एफबी वॉल से.

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