
संजय कुमार सिंह
आज अमर उजाला की लीड केंद्रीय विदेश मंत्री जयशंकर का यह दावा है कि भारत में वैश्विक तनाव कम करने की क्षमता है और हम रूस-यूक्रेन के संपर्क में है। दूसरी ओर, दि एशियन एज की लीड है, भारत को सुरक्षित करने के लिए हिन्दुओं को एकजुट होना चाहिये, अनबन खत्म होना चाहिये। यह खबर नवोदय टाइम्स में भी लीड है। यहां शीर्षक है, “भागवत बोले, हिन्दुओं को एकजुट होना होगा”। उपशीर्षक है, उन्होंने आगे कहा, समाज ऐसा हो जहां संगठन, सद्भावना एवं आत्मीयता का व्यवहार हो। इस तरह, आज खबर यह है कि विदेश सेवा से रिटायर होने के बाद मोदी मंत्रिमंडल में शामिल कर लिये गये केंद्रीय विदेश मंत्री जयशंकर ने यह भी कहा है कि (नवोदय टाइम्स) पुरानी कंपनी की तरह जगह घेरे है संयुक्त राष्ट्र और यह दुनिया में चल रहे दो गंभीर संघर्षों पर मूकदर्शक बना हुआ है। यहां उल्लेखनीय है कि कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए एमजे अकबर राज्य मंत्री ही रहे, पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह को भी राज्य मंत्री बनाया गया था। कुल मिलाकर, भारतीय समाज के बारे में संघ प्रमुख की राय और अपेक्षा के साथ विदेश में भारत की क्षमता-योग्यता का प्रदर्शन आज हुआ है। आरएसएस प्रमुख के मुकाबले विदेश में भारत की क्षमता योग्यता का वर्णन विदेश मंत्री जयशंकर कर रहे हैं।
यह इस तथ्य के साथ या बावजूद है कि द टेलीग्राफ के अनुसार गाजा का युद्ध एक साल बाद नये चरण में है और हमास हमलों के एक साल पूरे होने के मौके पर 26 लोग मारे गये हैं और 93 घायल हुए हैं। एक दूसरी खबर के अनुसार बेरुत की बमबारी सबसे तेज थी, बिल्डिंग हिल गई। नवोदय टाइम्स में हमले की खबर टॉप पर चार कॉलम में है। इसका शीर्षक है, गाजा मस्जिद पर इजराइल का हमला, 21 की मौत। उधर इजराइल में भी आतंकी हमले की खबर है। इसमें एक व्यक्ति की मौत हुई है। इधर, भारत में भारतीय वायु सेना के प्रदर्शन में दर्शकों के लिए जमीन पर व्यवस्था ठीक नहीं होने से पांच लोगों के मारे जाने की खबर भी आज पहले पन्ने पर है। मतलब युद्ध की बरसी पर विशेष हमले में 26 मरे तो हमारे यहां पांच वैसे ही मर गये। सत्संग में 121 मरे थे और जिनने बुलाया था उनका नाम ही एफआईआर में नहीं है वो अलग मामला है। फिर भी यह दावा किया जा रहा है कि भारत वैश्विक तनाव कम करने में सक्षम है और यह दावा कोई पेशेवर या अनुभवी राजनीतिज्ञ नहीं कर रहा है और उस प्रधानमंत्री के शासन में हो रहा है जिनने एक टेलीविजन कलाकार को शिक्षा मंत्री बना दिया था। उनके बारे में बाद में पता चला कि उन्हें डिग्री और सर्टिफिकेट का अंतर नहीं पता था। हालांकि वह अलग मुद्दा है।
मीडिया की हालत यह है कि संघ प्रमुख का कहा किसी और अखबार में प्रमुखता से नहीं है। ऐसा भारत जब विश्वगुरू होने के मुहाने पर खड़ा है तब इंडियन एक्सप्रेस में आज छपी खबर के अनुसार यहां से विदेश घूमने जाने वालों की संख्या तो संख्या बढ़ गई है लेकिन विदेशों से भारत घूमने वालों की संख्या अभी कोविड से पहले की स्थिति में नहीं है। इस खबर के आधार पर यह दावा किया जा सकता है कि भारत में लोग अच्छा कमा रहे हैं, उनके पास पैसे हैं इसलिए विदेश घूम रहे हैं पर भारत में लोग कमायें, यहां घूमने आने का आकर्षण बना रहे इसके लिए जरूरी है कि विदेश से लोग भारत आते रहें, उसपर जरूरी काम हो और हो रहा है कि नहीं और विदेशों से लोग नहीं आ रहे हैं तो इस दिशा में काम सरकार को करना है। इसकी जरूरत बताने का काम अखबारों का है लेकिन यह काम अमूमन अखबार वाले नहीं करते हैं और अगर कोई करता है वह इंडियन एक्सप्रेस ही होता है।
आज जब आरएसएस के मुखिया की यह अपील छपी है कि हिन्दुओं को एकजुट होना चाहिये और अनबन नहीं रहनी चाहिये तो आज ही इंडियन एक्सप्रेस में खबर है कि डबल इंजन वाले उत्तर प्रदेश में 28 अगस्त को 1.5 करोड़ रुपए के जेवरों की लूट के बाद राज्य में यादव बनाम ठाकुर चल रहा है। दो मुठभेड़ हो चुकी है, दो लोग मारे गये हैं और डकैती व लूट के मामले में पुलिस ने नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा हिन्दू समाज में ऊंच-नीच या अगड़े पिछड़े और आरक्षण का भी मामला है और राहुल गांधी पिछड़ों को उनका हक दिलाने के लिए जितने गंभीर दिखते हैं उससे नरेन्द्र मोदी की परेशानी कुछ ज्यादा ही लगती है। ऐसे में हिन्दुओं का एकजुट होना कितना संभव है और किसी जरूरत, उसके राजनीतिक मायने क्या हैं यह समझने-समझाने की बात है। पर अखबारों में अब ऐसा भी बहुत कम होता है। इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर है वरना मीडिया में 28 अगस्त की डकैती का फॉलोअप ही मिलना है। जो पुलिस अपनी कामयाबी के रूप में खुद ही प्रचारित करती है।
आज अगर हिन्दुओं को एकजुट करने की खबर है तो आज ही कश्मीर में पांच नामांकित या नामजद विधायकों का मामला भी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की सेकंड लीड का शीर्षक है, जम्मू व कश्मीर में पांच नामांकित विधायक (सरकार बनाने में प्रमुख) भूमिका निभा सकते हैं। एलजी इनका नामांकन करेंगे इससे सदन में बहुमत का निशान बढ़कर 48 हो जायेगा। कहने की जरूरत नहीं है कि पांच विधायकों के नामांकन का मामला सीधा-सरल नहीं है और खबर में यह बताया जाना चाहिये कि पूरा माजरा यह क्या है। एक्जिट पोल में त्रिशंकु विधानसभा की उम्मीद के बाद यह चर्चा आम है कि एलजी भाजपा के पक्ष में पांच विधायक दे सकते हैं। खबर के अनुसार, भाजपा का कहना है नामांकन एलजी का विशेषाधिकार है, इस मामले में कानून अस्पष्ट है। पर मुद्दा यह है कि निर्वाचित विधायक और नामांकित विधायक एक कैसे हो सकते हैं और यह प्रावधान क्यों है, कबसे है, किसलिये?
इस संबंध में इंडियन एक्सप्रेस की आज की खबर का शीर्षक है, पार्टियों से लेकर विशेषज्ञों तक, जम्मू और कश्मीर विधानसभा में नामांकित विधायकों के मामले में कोई स्पष्टीकरण नहीं। आप जानते हैं कि संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति, राज्य और उपराज्यपाल भी मुख्यमंत्री या मंत्रिमंडल की सलाह पर काम करते हैं। इस हिसाब से उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना सदस्यों का मनोनयन नहीं कर सकते हैं। लेकिन भाजपा और उसके लोगों की कार्यशैली हम जानते हैं और इसी कारण यह मुद्दा है। यह नियम या प्रावधान राज्य को तोड़कर केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने के वक्त किया गया है और जम्मू व कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत नया है। कहने की जरूरत नहीं है कि अनुच्छेद 370 हटाने से देश, राज्य, सरकार और वहां की जनता को फायदा हुआ हो या नहीं, केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने अपने फायदे की व्यवस्था कर ली है और उसे बिना चुनाव लड़े-जीते ही पांच विधायक मिल सकते हैं। 96 सदस्यों की त्रिशंकु विधानसभा में केंद्र की सरकार को क्या लाभ कैसे मिल सकते हैं, बताने की जरूरत नहीं है वह भी तब जब हम गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र आदि में सरकार गिराने और भाजपा की सरकार बनाने वाले ऑपरेशन लोटस का हश्र देख चुके हैं।
कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगाने वाली भाजपा की ओर से कश्मीर में चुनाव प्रचार के दौरान ईद-मोहर्रम पर मुफ्त सिलेंडर की घोषणा की गई है। उसका वादा या उससे जनता की अपेक्षा विस्थापित हिन्दुओं को वापस कश्मीर में बसाने की थी। आजतक डॉट इन की एक खबर के अनुसार, कश्मीर में ईद-मोहर्रम पर मुफ्त गैस देने का भाजपा का वादा सोशल मीडिया को हजम नहीं हुआ है। इसमें बताया गया है कि, सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक यूजर गीता जिवाल का सवाल तो कटाक्ष भरा है, लेकिन बहुत ही छोटा सा है, ‘और हिन्दू त्योहार पर?’ चंद्र प्रकाश पांडेय नाम के यूजर ने तो बीजेपी नेता की बात पर गुस्से का ही इजहार किया है, ‘ये जिहादी बीजेपी को हराने की बात कर रहे हैं, और आप इनको मुफ्त में देने की बात कर रहे हैं।’ बोलता हिंदुस्तान ने अमित शाह की बात का हवाला देते हुए लिखा है, ‘बस अब बकरीद पर कुर्बानी वाले जानवर भी उचित रेट पर दिलवाने का वादा कर दें, फिर सब मुस्लिम वोट उनका’।
अमित शाह के बयान की चर्चा करते हुए झारखंड कांग्रेस सेवादल के हैंडल से तंज भरे लहजे में लिखा गया है, जैसे यूपी में होली और दीवाली के मौके पर दो सिलेंडर मिल रहा होगा… और, ठीक उसी तरह जैसे राजस्थान में 450 रुपये में गैस सिलेंडर मिल रहा है… ये भाजपा वाले माहौल देखकर अपना वेष बदल लेते हैं, और जनता को तरह तरह के प्रलोभन देकर दिग्भ्रमित करने का काम करते हैं।’ कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर पोस्ट किया है, ‘अमित शाह ईद और मुहर्रम पर मुफ्त सिलेंडर देने का वादा कर रहे हैं… यूपी वाले होली दिवाली के मुफ्त सिलेंडर का अभी भी इंतजार कर रहे हैं शाह साहेब… जुबानी जमा खर्च करने में क्या जाता है!’
ऐसे माहौल में संघ प्रमुख की अपील का क्या होना है, आप समझ सकते हैं। मुझे तो लगता है कि जो वे चाहते हैं वह संभव ही नहीं है। भाजपा केंद्र सरकार में नहीं हो तो असंभव है। लेकिन वह मुद्दा नहीं है। मुद्दा यह है कि भाजपा ने ही यह स्थिति बनाई है और अगर विधायक खरीद कर राज्य सरकारें बनाती रही है तो अपनी सरकार बनाने के लिए हर संभव उपाय किये हैं। इसमें शिवसेना नाराज हुई है और कई छोटी पार्टियां तोड़ी गई हैं। नया उपाय कश्मीर में नामांकित विधायकों का कोटा है। जहां तक समाज में अनबन खत्म करने की संघ प्रमुख की अपील का मुद्दा है, गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद गिरि ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक बातें की हैं और जम्मू व कश्मीर के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई की अपील केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से की है। समाज में धार्मिक शांति के लिए जरूरी है कि धार्मिक टिप्पणी नहीं हो और अगर हो तो करने वाले के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाये ताकि ऐसी टिप्पणी करने वालों में डर बना रहे और उससे प्रभावित होने वालों को यह आश्वासन रहे कि सरकार कार्रवाई करती है (करेगी)। यति नरसिंहानंद गिरि के मामले में ऐसा अपने आप तो नहीं ही हुआ है, मांग करने पर भी नहीं हुआ है और अब मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इसकी मांग की है।
बीबीसी डॉट कॉम की एक खबर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ़्रेंस से लेकर हैदाराबाद में असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले पर सख़्त कार्रवाई की मांग की है। नरसिंहानंद के बयान के ख़िलाफ़ देशभर में कई इलाक़ों में प्रदर्शन भी हुए हैं। कार्रवाई की मांग करने वालों में हिन्दू नेता भी है। एनडीटीवी डॉट इन के अनुसार बसपा प्रमुख मायावती ने भी मांग की है कि यति नरसिंहानंद के बयान पर कड़ी कार्रवाई हो। लेकिन कार्रवाई तो दूर जागरण डॉट कॉम की आज सुबह की एक खबर के अनुसार, यति नरसिंहानंद की गिरफ्तारी की मांग करने वालों पर केस दर्ज हुआ है, पुलिस और खुफिया वालों की लापरवाही से मंदिर तक पहुंची भीड़। और खबर इतनी ही नहीं है। इसमें कहा गया है, गाजियाबाद शहर में किसी बात को लेकर माहौल गर्म होता है तो पुलिस और एलआइयू की जिम्मेदारी बढ़ जाती है और कोई भी अप्रिय घटना न घटे इसके लिए योजना बनाकर काम करती है। डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद के बयान पर कुछ दिनों से शहर का माहौल ठीक नहीं है। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इस खबर की खास बातें इस प्रकार हैं 1) यति की सुरक्षा को लेकर पुलिस आयुक्त से मिलेंगे हिंदूवादी संगठन और 2) यति के बयान के बाद से चल रहे घटनाक्रम में यह नौवीं एफआईआर है।
बस मार्शल मामले में मंत्री के खिलाफ एफआईआर

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार की बात करूं तो आज द हिन्दू में प्रकाशित खबर के अनुसार, बस मार्शल मामले में दिल्ली के मंत्री और आम आदमी पार्टी के दो विधायकों के खिलाफ एफआईआर हुई है। अमर उजाला डॉट कॉम की खबर के अनुसार, विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने की शिकायत पर मंत्री सौरभ भारद्वाज समेत चार विधायकों पर एफआईआर हुई है। यह शिकायत तब की गई है जब टाइम्स ऑफ इंडिया में फोटो छपी थी कि सौरभ भारद्वाज विपक्ष के नेता के पैर पकड़े हुए थे। अगर इसे दिल्ली में आम आदमी पार्टी की राजनीति के मुकाबले भाजपा की राजनीति के रूप में देखें तो आज हिन्दुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने की खबर का शीर्षक है, “छत्रसाल रैली में केजरीवाल ने दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने की शपथ ली”। इसके साथ तीन कॉलम में छपी खबर का शीर्षक है, बुरारी में भाजपा ने केजरीवाल की आलोचना की। दि एशियन एज की खबर का शीर्षक है, “केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को चुनौती दी : मुफ्त बिजली दीजिये, दिल्ली का चुनाव नवंबर में करवाइये”। उपशीर्षक है, “भाजपा ने कहा : दिल्ली के पूर्व सीएम की रैली फ्लॉप शो; केजरीवाल ने कहा : डबल इंजन फेल हो गई”।
इतनी खबरों में कांग्रेस की एक ही खबर है और वह है दि एशियन एज में। शीर्षक है, “बासी भाषण नाकामियों को छिपा नहीं सकते : कांग्रेस”। बेहद नुकसानदेह आर्थिक झुकावों के लिए प्रधानमंत्री पर जमकर बरसे खरगे। अमर उजाला डॉट कॉम की खबर के अनुसार, ‘मोदीनॉमिक्स भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अभिशाप’। यह स्थिति तब है जब हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी खबर के अनुसार देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज ही सरकारी पद पर रहते हुए 23 साल पूरे कर लिये हैं। इस तथ्य के आलोक में कायदे से इस बात पर चर्चा होनी चाहिये कि उनके इस पद पर रहने से देश को क्या लाभ हुआ या आरएसएस ने जिस लाभ की उम्मीद में उन्हें प्रधानमंत्री बनाया था वह पूरा हुआ कि नहीं और हुआ तो क्या वह केशवकुंज में तीन नये टावर बनना ही था और दिल्ली में दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर आमने-सामने भाजपा के दो भवनों की उम्मीद थी या नहीं। क्या कुछ बाकी रह गया है और अगर हां तो उसका कारण इलेक्टोरल बांड को खत्म कर दिया जाना है या कुछ और। इस और ऐसे कई विषय पर चर्चा होनी चाहिये और यह चर्चा 20 साल पूरे होने पर भी हो सकती थी। प्रधानमंत्री के रूप में 10 साल पूरे होने पर भी हो सकती थी। नहीं हुई या बहुत कम हुई लेकिन तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर प्रधानमंत्री ने खुद अपनी पीठ थपथपाई। प्रधानमंत्री के अनुभव से देश को लाभ विषय पर चर्चा नहीं हुई क्योंकि उस चर्चा में कुछ कड़वी बातें भी हो सकती थीं।


