
संजय कुमार सिंह
चुनावी तैयारियों के क्रम में रक्षा मंत्री ने कहा है, झारखंड में एनआरसी जल्दी ही और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा नौ नवंबर से समान नागरिक संहिता। केंद्रीय गृहमंत्री आतंकवाद के खात्मे के दावे के बाद वामपंथी अतिवाद को अंतिम चरण में होना बता रहे हैं।
आज हरियाणा और जम्मू कश्मीर के चुनावों के नतीजे आने हैं। हेडलाइन मैनेजमेंट के हिसाब से आज का दिन बहुत ठंडा है। फिर भी, अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, भारत न भर दी मालदीव की झोली और सोशल मीडिया पर ट्रोल तेजस्वी पर टोंटी चोरी का आरोप लगा रहे हैं। यही नहीं, भाजपा ने दिल्ली में मुख्यमंत्री निवास से अरविन्द केजरीवाल के जाने और आतिशी के आने पर भी विवाद खड़ा किया है। यह आरोप लगाया है कि बंगला अभी तक मुख्यमंत्री को आवंटित नहीं हुआ है। आज हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर फोटो के साथ चार कॉलम की खबर है। शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, “आवासीय विवाद – दिल्ली की उलझन : आतिशी 6, फ्लैग स्टाफ रोड में रहने पहुंची; भाजपा ने कहा बंगला अभी तक आवंटित नहीं हुआ है”। अरविन्द केजरीवाल कुछ दिन पहले ही इसे खाली कुर चुके थे। भाजपा का कहना है कि संबंधित विभाग ने अभी तक बंगला उन्हें आवंटित नहीं किया है और मुख्यमंत्री अवैध रूप से उसमें रहने चली गई हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसा हो भी तो यह दोनों मुख्यमंत्रियों की सुविधा के लिए होगा औऱ कागजी कार्रवाई बाद में हो सकती है। यही नहीं, नवोदय टाइम्स में आज पांच कॉलम के बॉटम का शीर्षक है, “आरोप : सरकारी बंगले से टोंटी से बेड तक ले गये तेजस्वी“।
यह सब तब है जब आज ही खबर है कि मालदीव को 40 करोड़ डॉलर की सहायता दी गई है। नवोदय टाइम्स में खबर का इंट्रो है, “याराना जारी रहेगा, भारत व मालदीव ने सहयोग बढ़ाने के लिए पेश किया खाका”। इसके साथ तीन कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, “मुइज्जु का राष्ट्रपति भवन में किया गया स्वागत”। आपको याद होगा, सोशल मीडिया पर सरकार समर्थकों ने मालदीव और राष्ट्रपति मुइज्जु का कैसा और कितना विरोध किया था। बीबीसी डॉट कॉम की इसी साल 12 जनवरी की खबर है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल की तो इसका सीधा असर मालदीव से संबंधों पर पड़ा। इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस-विवाद भी हुआ। मालदीव में मोहम्मद मुइज़्ज़ू के राष्ट्रपति बनने के बाद से संबंधों में पहले से ही तनातनी थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के कारण तीन मंत्रियों का निलंबन भी हुआ था।
मालदीव और भारत के संबंधों में कड़वाहट की इन खबरों के बाद 7 अक्तूबर 2024 को बीबीसी डॉट कॉम की खबर थी, … लगता नहीं था कि चीन समर्थक कहे जाने वाले मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू इतनी जल्दी भारत के राजकीय दौरे पर होंगे। मोहम्मद मुइज़्ज़ू भारत के चार दिवसीय दौरे पर हैं और सोमवार को दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए। मुइज़्ज़ू पिछले साल नंवबर में मालदीव के राष्ट्रपति बने थे और उन्होंने अपने चुनावी कैंपेन में ‘इंडिया आउट’ का नारा बुलंद किया था। इससे पहले, भारत ने मालदीव की सहायता के लिए अपनी सेना भेजी थी और वहां चुनाव में ‘इंडिया आउट’ मुद्दा था और सत्ता में आते ही मुइज़्ज़ू ने भारत के सैनिकों को मालदीव छोड़ने का आदेश दे दिया था। जरूरी नहीं है कि यह आदेश अपने आप में भारत विरोधी हो पर प्रधानमंत्री का अपमान और मंत्रियों को निलंबित किया जाना तो मुद्दा है ही।
यही नहीं, मालदीव के नए राष्ट्रपति शपथ लेने के बाद आम तौर पर भारत का दौरा करते थे। मुइज़्ज़ू ने जिन दो देशों – तुर्की और चीन को अपने पहले दौरे के लिए चुना था, उनसे भारत के अच्छे संबंध नहीं हैं। ऐसे में अब ये क्या हुआ और कैसे हुआ कौन समझायेगा? लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि मुइज़्ज़ू भारत को लेकर नरम पड़ गए? इसके बाद, आज की खबर तो चौंकाने वाली है। यह नरेन्द्र मोदी की राजनीति हो सकती है पर सरकार जो करे उसका मकसद होना चाहिये और इसे समझ में आना चाहिये। यह इसलिए भी जरूरी है कि सोशल मीडिया पर हाल तक मालदीव का विरोध कर रहे लोग अब सरकार और मालदीव का समर्थन करेंगे क्या? यह एक मुश्किल सवाल हो सकता है क्योंकि अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, भारत न भर दी मालदीव की झोली। यह सेवा या उदारता किस खुशी में है, पता नहीं और अगर यूं ही है तो मालदीव का विरोध कर रहे लोग अब इसे कैसे देखते हैं, जानना दिलचस्प होगाल।
आरजी कर अस्पताल मामला
आज एक और दिलचस्प व महत्वपूर्ण खबर है। खबर के अनुसार कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर से बलात्कार और हत्या के मामले में सीबीआई ने चार्ज शीट दायर कर दी है और इसमें एक ही अभियुक्त है जिसे कोलकाता पुलिस ने घटना के 12 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया था। तब इस मामले में और भी लोगों के शामिल होने का शक जताया गया था मरम्मत के नामपर हो रही तोड़फोड़ को सबूत मिटाने का आरोप लगाया गया था और कहा गया था सबूत बचाने के लिए तोड़-फोड़ नहीं होनी चाहिये थी। यही नहीं पोस्टमार्ट रिपोर्ट और दूसरे कारणों के आधार पर सामूहिक बलात्कार के आरोप आदि हवा-हवाई हो गये हैं जबकि प्रचारकों ने बंगाल सरकार को बदनाम और परेशान करने के लिये हर संभव आरोप लगाये थे। एक प्रचारक संपादक एंकर ने ट्वीट किया था कि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट बताने में कलेजा मुंह को आता था। लंबा आंदोलन चला और इतने आरोप लगे कि सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। अब कहा जा सकता है कि खोदा पहाड़ निकली चुहिया। अगर मामला कार्यस्थल पर डॉक्टर की सुरक्षा का था तो कोलकाता मामले के बाद ऐसे कई वारदात हुए पर वैसा हंगामा नहीं हुआ। ना मीडिया में और ना जमीन पर। मुझे लगता है कि बाकी मामलों में भाजपा ने दिलचस्पी नहीं दिखाई इसलिए ऐसा नहीं हुआ।
नवोदय टाइम्स में इस खबर का शीर्षक है – आरोप पत्र में सामूहिक बलात्कार के आरोप का उल्लेख नहीं। अमर उजाला में यह खबर आज दूसरे पहले पन्ने पर सेकेंड लीड है। शीर्षक है, डॉ. से दरिन्दगी…. सीबीआई के आरोपपत्र में रॉय ही आरोपी, सामूहिक दुष्कर्म का जिक्र नहीं। इंडियन एक्सप्रेस में यह तीन कॉलम में है, आरजी कर बलात्कार-हत्या मामला : सीबीआई ने चार्जशीट दायर की, रॉय अकेला अभियुक्त। द टेलीग्राफ में आज यह खबर तीन कॉलम की लीड है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह तीन कॉलम में सीकेड लीड है। शीर्षक है, आरजी कर मामले में सीबीआई ने बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज किया। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह दो कॉलम में टॉप पर है। शीर्षक है, सीबीआई चार्जशीट के अनुसार संजय रॉय ने आरजी कर अस्पताल की डॉक्टर से बलात्कार कर उसकी हत्या की। इंट्रो है, 9 अगस्त के अपराध में पुलिस वालंटीयर अकेला अभियुक्त है। द हिन्दू में यह चार कॉलम की खबर है। शीर्षक है, आरजी कर मामले में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की। स्पष्ट है कि इस मामले को जितना बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया उतना बड़ा यह निकलना नहीं। सीबीआई से जांच करवाने का मकसद अगर भ्रष्टाचार के आरोप में कुछ और लोगों को लपेटना हो तो वह अभी बाकी है।
झारखंड चुनाव की भाजपाई तैयारी
इस बीच, झारखंड चुनाव की भाजपा की तैयारियों में परियोजनाओं की घोषणा के अलावा सत्ता में आने पर एनआरसी तैयार करने की घोषणा है। झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौजूदगी का आरोप भाजपा का ही है और संयोग हो या प्रयोग, आग लगाने वालों को कपड़ों से ही पहचानने के बाद आरोप लगाया जा रहा है। इससे पहले बांग्लादेशी घुसपैठियों के झारखंड में होने का आरोप लगा है। उसपर मैं लिख चुका हूं कि अगर ऐसा है तो इसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है क्योंकि सीमा पर सीमा सुरक्षा बल ही लोगों की घुसपैठ रोकने या कराने के लिए जिम्मेदार है। एक बार अगर कोई सीमा से अंदर घुस भी जाये तो यह वहां इसे रोकने के लिए जिम्मेदार बीएसएफ की नालायकी है। उसे यहां रहने के लिये रोजगार व्यवसाय की जरूरत होगी जो आसान नहीं है। इसके लिए और यह सब भी हो जाये तो यहां रहने के लिए आधार कार्ड, मतदाता कार्ड, पैन कार्ड आदि की आवश्यकता होगी। यह सब बनवाना मुश्किल नहीं है और दावा है कि घुसपैठियों के पास ये सब होते हैं। ऐसे में असली घुसपैठियों की पहचान कैसे होगी और होगी तो वह ठीक है यह कैसे तय होगा?
नौकरी के बदले जमीन घोटाला
बिहार में चुनाव जीतने के लिए बहु-प्रचारित नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में लालू प्रसाद और उनके बेटों को जमानत मिलने की खबर आज ही छपी है। अमर उजाला में यह पहले पन्ने पर है। बिहार-झारखंड में चुनाव जीतना भाजपा के लिए मुश्किल है क्योंकि उसके पास न तो 10 साल में किये गये काम का विवरण है और ना आगे के लिए 15 लाख जैसी कोई योजना है। साख और गारंटी की हालत ऐसी हो गई है कि जनता किसी पर भरोसा करे या नहीं, भाजपा पर करेगी इसमें शक है। इसलिए एनआरसी और सीएए जैसे मामले फिर से गर्माये जा रहे हैं। भाजपा ने झारखंड में चुनाव जीतने पर एनआरसी लागू करने की बात की है तो उत्तराखंड में नौ नवंबर से समान नागरिक संहिता लागू होने की खबर है (अमर उजला)। खबर का उपशीर्षक है, नियमावली समितियों ने नियमों को दिया अंतिम रूप।
दूध की धुली हों तो भी आप जानते हैं कि सेबी प्रमुख माधवी पुरी बुच पर भ्रष्टाचार के कई मामले हैं और एक के बाद एक लगे गंभीर आरोपों से वे चौतरफा घिरी हुई हैं। अब एक खबर आई है कि सरकारी खर्चों पर निगरानी रखने वाली, लोक लेखा समिति (पीएसी) ने सेबी के प्रदर्शन की समीक्षा को शामिल करने का निर्णय लिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संसदीय समिति ने अपना एजेंडा अधिसूचित कर दिया है और समीक्षा प्रक्रिया के दौरान वर्तमान सेबी प्रमुख को तलब कर सकती है। ऐसे में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को लग रहा है कि पीएसी प्रमुख और कांग्रेस नेता अपने पद का दुरुपयोग कर सकते हैं। माधवी पुरी बुच को सेबी प्रमुख बनाने और बनाये रखने में पद के दुरुपयोग का मामला नहीं देखने वाले दुबे को पीएसी प्रमुख द्वारा पद के दुरुपयोग का मामला दिख रहा है जबकि माधवी पुरी बुच दूध की धुली भी हों तो पीएसी के बुलाने पर उसके समक्ष उपस्थिति होने में क्या दिक्कत हो सकती है? बाकी सब मामले और खबरें तो जो हैं तो हइये हैं।


