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रामभद्राचार्य ने व्यास पीठ पर बैठकर अपने एक चेले शाश्वत शर्मा को विधानसभा में समीक्षा अधिकारी बनाने की सिफारिश,
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से की है.
खुद को जगद्गुरु कहने वाले रामभद्राचार्य की ये सिफारिश धर्मसम्मत है या नहीं. या इतनी बड़े स्थान पर बैठकर की गई ये सिफारिश को आप अनैतिक मानते हैं.
अगर रामभद्राचार्य की सिफारिश मानकर उनके चेले की अवैध नियुक्ति हुई तो क्या इससे एक प्रतिभाशाली अभ्यर्थी का हक नहीं मारा जाएगा?
रामभद्राचार्य ने अपने चेले शाश्वत शर्मा की नौकरी की सिफारिश करके दुनिया को बता दिया कि बीते 75 वर्षों के दौरान कैसे बहुजनों का हक मारकर नौकरियों की लूट होती रही है.
मेरिट के धोखे के नाम पर ऐसे ही अयोग्य चेलों और रिश्तेदारों को नौकरियों में भर दिया गया. इन्हीं अयोग्य लोगों की वजह से भारत तरक्की में दुनिया के बाकी देशों से पीछे रह गया.
नौकरियों की ये लूट आज भी जारी है. कभी पेपर लीक के माध्यम से, कभी नॉर्मलाईजेशन के नाम पर, कभी NFS के नाम पर.
सुनें रामभद्राचार्य को, इस एक्स लिंक पर क्लिक करें!
https://x.com/anilyadavmedia1/status/1857395256142037083?s=46
गुरु जी ने समीक्षा अधिकारी की Post चेले के लिए क्यों मांगी? समीक्षा अधिकारी की शुरूआती सैलरी 60 से 70 हजार होती है. समीक्षा अधिकारी प्रमोशन पाकर विषेश सचिव की Post तक जाता है, जिसकी सैलरी आज की तारीख में डेढ़ से दो लाख ₹ तक हो सकती है.
अगर समीक्षा अधिकारी विशेष योग्यताओं से लैस है, तो वो रिटायर्डमेंट तक 50 खोखे तक की संपत्ति अर्जित कर लेता है,
कई लोग तो 100 खोखे तक भी पहुंच जाते हैं.
ये सभी बातें अभी एक समीक्षा अधिकारी से हुई वार्ता के बाद लिखी गई हैं. इसीलिए गुरु जी ने अपने चेले के लिए इतनी बड़ी Post मांगी है.
वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की टिप्पणी-
ये बेहद दुखद है। भारत देश फ़र्ज़ी केस में फँसाने, नियमों के नाम पर वसूली और अपने आदमी को फ़िट करने का स्वर्ग बन गया है। धर्म की रक्षा में युवाओं को लगा दिया गया है और इधर राम भद्राचार्य सिफ़ारिश से शाश्वत शर्मा की भर्ती करवा रहे हैं। युवाओं को क्या ही दिलासा दे सकते हैं । धर्म की राजनीति में यही मिलेगा। यही नया भारत है। शाश्वत ने सही जुगाड़ बिठाया है। उसके लिए माइक से खुलेआम पैरवी हो रही है। इस घटना से युवाओं को मनोबल कितना टूट गया होगा। युवाओं को नौकरी की तैयारी छोड़ कर सरकार से डीजे की माँग करनी चाहिए।



