
संजय कुमार सिंह
आज हिन्दुस्तान टाइम्स में सोनिया गांधी को जन्म दिन की बधाई देने वाला विज्ञापन पहले पन्ने पर है और दूसरे अखबारों के पहले पन्ने की एक प्रमुख खबर भाजपा का आरोप है – सोनिया ऐसे संगठन से जुड़ीं, जिसे सोरोस से मिल रहा धन। अमर उजाला ने पहले पन्ने पर इस खबर के साथ कांग्रेस सांसद शशि थरूर की टिप्पणी भी छापी है, भाजपा का व्यवहार शर्मनाक। भाजपा न तो लोकतंत्र को समझती है ना कूटनीति को। वे तुच्छ राजनीति में इतने अंधे हो गये हैं कि लोकतंत्र में स्वतंत्र प्रेस और जीवंत स्वतंत्र नागरिक समाज संगठनों के महत्व को भूल जाते हैं। यह हमलावर व्यवहार भारत के लिए शर्म की बात है। कहने की जरूरत नहीं है कि भाजपा जो कर रही है और उसके नेतृत्व में जो हो रहा है वह न सिर्फ शर्म बल्कि चिन्ता की भी बात है। इसपर संवैधानिक संस्थाओं की नजर नहीं है तो मीडिया को यह काम करना था। लेकिन नवोदय टाइम्स में आज अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक दिवस का सरकारी विज्ञापन पहले पन्ने पर है तो सरकारी पार्टी का आरोप पहले पन्ने पर नहीं है। यह संयोग हो या प्रयोग भाजपा की हालत ऐसी है कि जब सोनिया गांधी को जनता ने प्रधानमंत्री चुन लिया तो रोने लगी, उन्होंने मनमोहन सिंह जैसी हस्ती को प्रधानमंत्री बनाया तो उन्हें भष्टाचारी और मौन मोहन सिंह साबित करने लगे और अब जब तमाम गैर सरकारी संगठनों का विदेशी चंदा बंद कर दिया गया है तो सोनिया गांधी पर सोरोस से पैसा पाने वाले संगठन से जुड़े होने का आरोप है।
मैं पहले कई बार लिख चुका हूं कि चंदे और विदेशी सहायता से देश में जनहित के काम करने वाले कई बड़े और नामी गिरामी संगठनों को इस सरकार के सख्त नियमों के कारण धन मिलना बंद हो गया है और वे जन सेवा के काम नहीं कर पा रहे हैं। इससे नौकरियां गई हैं और अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ा है। यह सब सरकार की मनमानी और जबरदस्ती है। सब नरेन्द्र मोदी अकेले करते हैं फिर भी मनमोहन सिंह पर आरोप लगाया जाता था कि वे सोनिया गांधी से पूछकर काम करते हैं। मैं नहीं कह रहा कि कौन ठीक था और कौन गलत पर यह तो दिख ही रहा है कि कौन किसपर आरोप लगा रहा है। सोरोस चाहे जितने बुरे हों, भारत के लिए पाकिस्तान और नवाज शरीफ से बुरे तो नहीं होंगे और हैं तो वे किसी ऐसे संगठन को धन कैसे दे पा रहे हैं जिससे सोनिया गांधी जुड़ी हैं। यही नहीं, जब तमाम दूसरे संगठन दूसरी संस्थाओं से धन नहीं ले पा रहे हैं तो सोनिया गांधी से जुड़ा यह संगठन किसी विदेशी संस्था या सोरोस से धन कैसे प्राप्त कर पा रहा है। कहने की जरूरत नहीं है कि यह संगठन और सोरोस दोनों उन संगठनों से बेहतर और अलग हैं जो भारतीय गैर सरकारी संगठनों को दान नहीं दे पा रहे हैं या जिनसे बंद हो चुके भारतीय गैर सरकारी संगठन दान और चंदा नहीं ले पा रहे थे। जाहिर है, सोरोस से चंदा लेने पर कोई रोक नहीं है और अगर इसमें कुछ गलत है तो उसे रोकना सरकार का ही काम है। अगर अनुचित है तो सोनिया गांधी के खिलाफ कार्रवाई भी सरकार औऱ सरकारी पार्टी को ही करनी है।
यहां यह याद दिलाया जा सकता है कि 2014 में चुनाव जीतने के बाद नरेन्द्र मोदी ने शपथग्रहण समारोह में नवाज शरीफ को भी बुलाया था और जब सरकार बनी ही नहीं थी तो निर्णय उन्हीं का होगा। सरकार बनने के बाद उनकी पाकिस्तान और नवाजशरीफ से जो रिश्तेदारी रही वह भी सब को पता है। ऐसे में सोरोस इतने बुरे क्यों हैं और हैं तो सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। जहां तक चंदा और दान का मामला है, सरकार ने पीएम केयर्स में करोड़ों रुपये प्राप्त किये हैं, उसमें सीएसआर का भी पैसा है जो किसी और को मिला होता तो कुछ काम हुआ होता अभी वह सरकारी या पार्टी का धन बना हुआ है। गलत तो यह भी है खासकर तब जब दूसरे संस्थान छोटा-मोटा दान भी नहीं ले सकते हैं पर भाजपा अपनी कमजोरियों-लापरवाहियों को छोड़कर दूसरों पर आरोप लगाती रहती है। यह उसकी राजनीति हो सकती है और शशि थरूर ने इसी ओर इशारा किया है। यह बात मीडिया वालों को क्यों नहीं समझ में आती है? खासकर तब जब बांग्लादेश के बाद आज ही सीरिया की खबर है और यह बताने या याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि जनता जिसे सर पर बैठाती है उसे उतार कर फेंक भी देती है। अभी मेरा मुद्दा यह नहीं है पर यह तो सोचने वाली बात है कि अपने तमाम अलोकतांत्रिक आचरण के बावजूद ओम बिरला ना सिर्फ सांसद के रूप में चुनकर आ गया दोबारा लोकसभा अध्यक्ष भी बन गये।
आज खबर है कि राहुल नरवेकर फिर चुनाव जीत कर आ गये हैं और उनका निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष बनना तय है। इस तरह महाराष्ट्र में न सिर्फ भाजपा दोबारा चुनाव जीत कर आ गई है बल्कि वो भी जीत कर आ गये जिनकी बदौलत बहुमत की जांच हुए बगैर सरकार चलती रही। ठीक है कि यह भाजपा की राजनीति है और लोगों ने भाजपा को पसंद किया है तो उन्हें भी पसंद किया है। लेकिन ईवीएम पर आरोप भी तो हैं और यह इसलिए भी चिन्ताजनक है कि ऐसा कर्नाटक में भी हुआ था जब कई विधायकों ने पार्टी छोड़कर भाजपा का समर्थन किया था। उस समय वहां के विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई के कारण दलबदल करने वालों को दोबारा विधानसभा का चुनाव लड़ना पड़ा था और आश्चर्यजनक रूप से उनमें से ज्यादातर फिर चुनाव जीत गये थे। आम जनता ऐसा करेगी और दल बदलने वाले फिर जीत जायेंगे यह कुछ असामान्य सी बात है पर भाजपा के शासन में यह भी हो चुका है और जनता बार-बार भाजपा को चुने जा रही है। हरियाणा में भी चुन लिया जबकि न सिर्फ किसानों का बल्कि पहलवान बेटियों का मामला भी उलझा हुआ था।
ऐसे में ईवीएम की चिन्ता किसी को नहीं है और द हिन्दू में आज पांच कॉलम की खबर का शीर्षक है, पवार ने ममता का समर्थन किया तो राहुल के नेतृत्व कौशल पर सवाल। कहने की जरूरत नहीं है कि सवाल और चर्चा का विषय नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व होना चाहिये जो किसानों के मामले में अभी तक कोई निर्णय नहीं ले पाये हैं और निर्णय तो छोड़िये, बातचीत क स्थिति भी नहीं बनी है। दूसरी ओर, किसानों को दिल्ली की सीमा पर रोकने की व्यवस्था इतनी अच्छी हो गई है कि अब 100 किसानों के जथ्ये को भी रोक लिया जाता है और दिल्ली में उनसे भी बात करने की व्यवस्था नहीं है। द हिन्दू में आज अगर पांच कॉलम की यह विचित्र खबर है तो छह कॉलम का जीवन बीमा निगम का विज्ञापन है, बीमा सखी योजना। विज्ञापन के अनुसार प्रधानमंत्री आज इसका लोकार्पण करेंगे। विज्ञापन के बाद खाली बच जगह में आज सीरिया की खबर लीड है पर संजीव भट्ट को 1997 के मामले में अब बरी किये जाने की खबर भी दो कॉलम में है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छोटी सी खबर बताती है कि दिल्ली का एक्यूआई लेवल आठ दिन बाद फिर बहुत खराब की स्थिति में पहुंच गया है। इतवार को यह एक दिन पहले के 233 से बढ़कर 302 हो गया। संभवतः ग्रेप 4 के तहत लागू प्रतिबंधों के कारण एक्यूआई कुछ बेहतर हुआ था और इसमें ढील देते ही कल फिर एक्यूआई बढ़ जाना बहुत कुछ कहता है। आज यहां चार कॉलम का एक विज्ञापन है जो जन स्मॉल फाइनेंस बैंक का है और लोगों से इंवेस्ट, रिलैक्स और रिपीट करने के लिए कहता है। मुद्दा यह नहीं है कि विज्ञापन क्या है। मुद्दा यह है कि नरेन्द्र मोदी के शासन में 10 साल में जो हुआ हो सो हुआ ही है पर कई बैंक बंद हुए हैं, कई बैंकों का विलय हुआ है और अमीरों के कर्जे माफ हुए हैं पर गरीबों को कोई राहत नहीं है। बैंकों के पैसे लेकर भागे लोगों को वापस नहीं लाया जा सका है और देश छोड़कर जाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रह रहे लोगों को यहां की व्यवस्था से कोई शिकायत नहीं और तमाम जरूर सुविधाओं पर भी जीएसटी लगा दिये जाने से बचने का कोई तरीका जनता के पास नहीं है। आज ही टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने पर एक खबर का शीर्षक है, देसी अरबपतियों क संपत्ति पिछले वित्त वर्ष में 42 प्रतिशत बढ़ने की खबर है। मुफ्त राशन पाने वालों की स्थिति सुधरने की कोई खबर नहीं दिखी है। और मतदान के नतीजों से नहीं लगता है कि उन्हें कोई शिकायत है। लाख टके का सवाल है इस इसमें ईवीएम की भूमिका है कि नहीं पर उसकी को अहमियत नहीं दिखती है।
दि एशियन एज में गांधी परिवार को सोरोस से जोड़ने का भाजपाई आरोप सबसे बड़ी खबर है और सरिया की खबर लीड है तो इसे सेकेंड लीड बनाया गया है। एशियन एज के पहले पन्ने पर आज कोई विज्ञापन नहीं है। किसानों पर आंसूगैस के गोले छोड़े जाने की खबर यहां सेकेंड लीड के नीचे दो कॉलम में है। दि टेलीग्राफ में भी आज छह कॉलम का एलआईसी का विज्ञापन है जो बीमा सखी योजना के बारे में है ऐसे में खाली बची जगह पर दो ही खबरें हैं और दोनों सीरिया की। अमर उजाला में आज तीन कॉलम का विज्ञापन पानी की टंकी का है और साथ में खबर है, नोएडा एयरपोर्ट पर आज पहली बार उतरेगा व्यावसायिक हवाई जहाज। रनवे की तस्वीर का शीर्षक है, घने कोहरे और अंधेरे में भी होगी आसान लैंडिंग। यहां किसानों की खबर लीड है। शीर्षक है, किसानों का पहले फूल-चाय-बिस्किट से किया स्वागत, कूच पर अड़े तो दागे आंसू गैस के गोले। यह सरकार की कार्यशैली भी है और साथ में सीरिया की खबर है, असद शासन का अंत देश छोड़ भागे, रूस में ली सरण। उपशीर्षक गौरतलब है, 24 साल लंबे शासन को खत्म कर देश पर विद्रोहियों ने किया कब्जा।


