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उत्तर प्रदेश

आईएएस अभिषेक प्रकाश केस में भ्रष्टाचार का मामला, सीबीआई जांच की मांग

लखनऊ | आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने आईएएस अफसर अभिषेक प्रकाश मामले की सीबीआई जांच की मांग की है.

प्रधानमंत्री, भारत सरकार को भेजे अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले को भ्रष्टाचार पर प्रहार के रूप में प्रस्तुत कर रही है, किंतु इस मामले में अब तक आए तथ्यों से यह निवेशकों और अफसरों के बीच पैसे के बंदर बांट में विवाद का मामला दिखता है.

उन्होंने कहा कि इस घटना के संबंध में थाना गोमती नगर में दर्ज एफआईआर, लखनऊ पुलिस के प्रेस नोट तथा अभिषेक प्रकाश के निलंबन आदेश से यह साबित हो जाता है कि यह उच्च स्तर पर दिए निर्देशों के क्रम में बेहद जल्दीबाजी में किया गया मामला है. इसमें शासनादेश का उल्लंघन कर आनन-फानन में जांच कर निलंबन किया गया, तथा घूस मांगने वाले दलाल पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन जिस अफसर के लिए घूस मांगा जा रहा था उनका नाम तक एफआईआर में नहीं तक नहीं किया गया.

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इन्वेस्ट यूपी में भारी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं और इसमें सरकारी धन का बंदर बांट किए जाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं. अतः उन्होंने सभी मामलों को एकीकृत करते हुए इसकी सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की है.

देखें पत्र…


दिनेश पाठक-

IAS Means I AM SAFE

मैं अयोध्या के डीएम से मिलने उनके सरकारी आवास पर पहुँचा। नाश्ते पर मिलना तय था। जब मैं पहुँचा तो डीएम साहब अपने आवासीय कार्यालय में मौजूद थे। चाय पीते हुए हम गप मार रहे थे। तभी अर्दली ने सूचना दी कि विजिलेन्स के एक इंस्पेक्टर साहब हुजूर से मिलना चाहते हैं।
डीएम साहब की त्योरी चढ़ गई। सुबह-सुबह विजिलेन्स के इंस्पेक्टर क्या करने आ धमके बंगले पर? यह कहते हुए उन्होंने अर्दली से कहा कि उनसे कहिए कि दफ्तर में आकर मिलें। फिर कुछ सोचने के साथ ही हुकूम दिया कि भेज दो। तनिक देर में छह फुटा स्मार्ट सा एक बंदा हाजिर हुआ। उन्होंने जय हिन्द बोला। डीएम साहब ने कहा-कैसे आना हुआ इंस्पेक्टर साहब?

वे बोले-हुजूर एक जांच में आपका बयान होना है। डीएम बोले-जाइए। स्टेनो बाबू के पास और बयान लिखवा लीजिए। मैं दस्तखत कर दूँगा। इंस्पेक्टर पलटे ही थे कि डीएम साहब ने कहा-सुनिए, ध्यान रहे। बयान वही लिखवाइएगा, जो मेरे हिसाब से हो। जी हुजूर-इंस्पेक्टर ने कहा। तब डीएम साहब ने कहा कि IAS का फुल फॉर्म जानते हैं, खुद ही जवाब दिया-I am Safe. यह भी एक फुल फॉर्म है। सावधानी से लिखवा लेना।

इस बातचीत के समय मेरा बिल्कुल टटका करियर था। बाद में मुझे उत्तर प्रदेश का होम डिपार्टमेंट कवर करने का मौका मिला तो पता चला कि इसी संवर्ग के खिलाफ विजिलेन्स निदेशालय में कई सैकड़ा जाँचें पड़ी फ़ाइलों में धूल खा रही है। यह एक ऐसा विंग है जो हाथी के दिखाने वाले दाँत की तरह है। जहाँ बात-बात और हर स्टेप पर शासन से अनुमति लेने का नियम है। इस दफ्तर में स्पीड से कोई काम हो ही नहीं सकता। क्योंकि जांच करने के लिए, मुकदमा दर्ज करने के लिए, चार्जशीट दाखिल करने के लिए गिरफ़्तारी करने के लिए अलग-अलग अनुमति शासन से लेने का नियम है।

जिन साहेबानों को अनुमति देना है, वे सबके सब IAS संवर्ग से ही आते हैं। और इस मामले में यह पूरा संवर्ग एक साथ है। सब एक-दूसरे को दिल से सपोर्ट करते हैं। इस सच को जानना हो तो आज भी विजिलेन्स दफ्तर में लटकी फ़ाइलें देखी जा सकती हैं। वे सिसक रही हैं लेकिन अनुमति नहीं मिलने को है।

ऐसे में उत्तर प्रदेश में IAS अभिषेक प्रकाश के निलंबन के बाद जो लोग बहुत खुश हो रहे हैं, उन्हें चाहिए कि सीएम साहब का ध्यान विजिलेंस में लटकी फ़ाइलों की ओर भी दिला दें। कुछ दिन की बात है। अभिषेक प्रकाश फिर से उसी शासन में शान से किसी न किसी महत्वपूर्ण पद पर बैठे मिलेंगे।

पूर्व में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते रहे हैं और आगे भी मिलते रहेंगे। भ्रष्ट सिस्टम में यह सिलसिला तब थमेगा जब निलंबन के बाद फिर वापसी न हो सके। पर, अभी यह दूर की कौड़ी है।

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