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सियासत

ट्रम्प-मस्क महायुद्ध में कौन विजेता बनेगा!

मनोज अभिज्ञान-

यह कोई सामान्य झगड़ा नहीं है—यह है दो टाइटनों की टक्कर। एक वो जो खुद को अमेरिका का सबसे बड़ा डीलमेकर मानता है और दूसरा वो जो खुद को पृथ्वी छोड़ने लायक मानता है। ट्रंप और मस्क की ये भिड़ंत अब किसी बंद कमरे की कानाफूसी नहीं रही, सार्वजनिक तमाशा बन चुकी है, जिसमें ट्वीट और ट्रुथ सोशल पोस्ट मिसाइलों की तरह दागे जा रहे हैं।

कभी ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पर मिलकर मुस्कुराने वाले ये दोनों अब एक-दूसरे पर ‘ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम’ और ‘अहसान फरामोशी’ के आरोप चस्पा कर रहे हैं। ट्रंप ने अपने सदाबहार अंदाज़ में मस्क को याद दिलाया कि वो व्हाइट हाउस में उनकी वजह से नहीं बल्कि जनता के प्यार से बैठे हैं। और मस्क ने तपाक से जवाब दे दिया, बिना मेरे, आप चुनाव हार गए होते।

अब यह विवाद सिर्फ शब्दों का युद्ध नहीं रहा। ताज़ा आंकड़े के रूप में टेस्ला के $152 बिलियन के डूब चुके हैं । शेयर धारकों के चेहरों पर मस्क की ट्वीट्स से कहीं ज्यादा शिकन है। और ट्रंप की कोपदृष्टि से SapceX की ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट अब रिटायरमेंट की ओर बढ़ रही है—कम से कम मस्क के ट्वीट्स तो यही कह रहे हैं।

मज़े की बात ये है कि इस सियासी सर्कस में जनता को मनोरंजन फ्री मिल रहा है। व्हाइट हाउस कह रहा है कि मस्क सिर्फ इसलिए चिढ़े हैं क्योंकि बिल में उनकी पसंद के EV क्रेडिट नहीं हैं। और मस्क कह रहे हैं कि बिल आधी रात को, पढ़े बिना पास कर दिया गया—जैसे कोई चोरी से गटर में डायनासोर फेंक दे। रिपब्लिकन पार्टी में तो अब सिर खुजाने की स्थिति है। सांसदों को समझ नहीं आ रहा कि अब उनकी पार्टी की असली दिशा ट्विटर से तय होगी या सेनेट से। जेफ्रीज़ और डेमोक्रेट्स इस GOP सिविल वॉर का लुत्फ उठा रहे हैं—जैसे दुश्मन की सेना खुद अपने टैंक फोड़ने लगे हों।

मस्क का यह दावा कि ट्रंप एपस्टीन फाइल्स में हैं, और यही कारण है कि फाइलें सार्वजनिक नहीं हुईं—यह तो सीधे महाभियोग की घंटी बजा बैठा है। ट्रंप समर्थक अब उलझन में हैं: मस्क को छोड़ें या ट्रंप को बचाएं? और मस्क मज़े से पूछ रहे हैं—क्या नया राजनीतिक दल बनाया जाए? ट्रंप भी पीछे नहीं हटे, बोले—बिलियनों डॉलर बचाने का सबसे अच्छा तरीका है एलन की सब्सिडी और कॉन्ट्रैक्ट खत्म करना। फिर जो हुआ वो इतिहास में दर्ज होने लायक है—एक राष्ट्रपति ने अपने सबसे हाई-प्रोफाइल सहयोगी के साथ सरकारी व्यापारिक संबंध तोड़ने की धमकी सार्वजनिक मंच से दे दी।

जैसे-जैसे जुलाई 4 की डेडलाइन पास आ रही है, ट्रंप चाहते हैं कि यह विवादास्पद बिल उनके सिग्नेचर के लिए उनकी टेबल पर रखा जाए। लेकिन बिल को पास कराना अब उतना आसान नहीं रहा जितना ट्रंप का हेयरस्टाइल फिक्स करना। कुछ सांसद अब मस्क की तरह डेफिसिट की दुहाई दे रहे हैं।

इस पूरे किस्से में अगर सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है तो वह है अमेरिका के लोकतंत्र की गंभीरता को। जहां राष्ट्रपति और दुनिया का सबसे अमीर आदमी ट्विटर के मंच पर एक-दूसरे को धमकी दे रहे हैं, वहां राष्ट्रीय हित नाम की चीज़ सिर्फ हास्य का पात्र रह जाती है। देखना ये है कि इस महायुद्ध में कौन विजेता बनेगा—वो जो व्हाइट हाउस में है लेकिन समय सीमित है, या वो जो ट्विटर का किंग है और खुद को अगली सदी तक प्रासंगिक मानता है।

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