अनिल कुमार-
उमस भरी गर्मी, उबलता मौसम, धान का बीज डालने का समय, लेकिन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था बदहाल है। जनता परेशान, किसान परेशान, व्यवसायी परेशान, व्यापारी परेशान, रोजी-रोजगार वाले परेशान, लेकिन बिजली मंत्री यूपी दर्शन पार्क का वीडियो डालकर मस्त हैं। दरअसल, आईएएस से नेता बने एके शर्मा को जब 2022 में ऊर्जा मंत्री बनाया गया, तब किसी को अंदेशा नहीं था कि श्रीकांत शर्मा के मंत्रित्व काल में सुधरी हुई बिजली व्यवस्था को यह पूर्व आईएएस इस बदहाली में लाकर छोड़ देगा कि जनता सरकार को कोसने तक पहुंच जायेगी।
गांव-कस्बों की बात ही क्या करना, जब राजधानी लखनऊ में यह हाल है कि बिजली कब जायेगी, कब आयेगी, कोई नहीं बता सकता। श्रीकांत शर्मा के कार्यकाल में लखनऊ में बिजली दो चार महीने में यदाकदा ही पांच-दस मिनट के लिये कटती थी, लेकिन अब ऐसा कोई दिन नहीं होता, जब बिजली ना कटती हो। तब गांव-कस्बों में भी बीस से बाइस घंटे बिजली आती थी, लेकिन अब राजधानी तक में घंटों बिजली गायब रहती है। सवाल होता है तो रटा रटाया जवाब मिलता है कि तार-ट्रांसफार्मर बदले जा रहे हैं। हकीकत यह है कि बिजली व्यवस्था सपा शासन काल से भी ज्यादा बदहाल हो चुकी है।
दरअसल, 2022 में योगी आदित्यनाथ की सरकार वापसी में जितना रोल कानून-व्यवस्था एवं अपराधियों के खिलाफ हुई कार्रवाई का था, उतना ही सुधरी हुई बिजली व्यवस्था का था। 2017 से 2022 के बीच तमाम लोगों ने अपने घरों में इनवर्टर रखना बंद कर दिया था या कहें कि पर्याप्त बिजली के चलते उन्हें इनवर्टर रखने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। परंतु, मोदी जी के खास दूत बनकर यूपी में आये एके शर्मा के हाथ में बिजली विभाग की जिम्मेदारी आते ही इनवर्टर उद्योग अपने पैरों पर खड़ा हो गया। इतनी बिजली कटौती होने लगी कि लोग इनवर्टर और जनरेटर खरीदने को मजबूर हो गये।

आरोप लगते हैं कि एके शर्मा जब से मंत्री बने तब से उनकी प्राथमिकता बिजली विभाग को प्राइवेट हाथों में सौंपने की है। वह लगातार इसी कोशिश में लगे हुए हैं। बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर रोज बवाल होता रहता है। यह आरोप भी लगते हैं कि पूरा खेल केवल और केवल बैक डोर से आगरा की तर्ज पर अडानी के टोरेंट पॉवर को बिजली विभाग सौंपने के लिये ही एके शर्मा को वीआरएस दिलाकर अडानी के पैरोल पर यूपी भेजा गया था। अब इसमें कितनी सच्चाई है भगवान जाने, लेकिन बिजली के बदहाल हालात को देखें तो कहीं ना कहीं इन बातों में दम नजर आता है।
एक अच्छी खासी व्यवस्था को कैसे बरबाद किया जा सकता है, बिजली विभाग और एके शर्मा इसके बेहद सटीक उदाहरण हैं। वह ऊर्जा विभाग के ऐसे अहले मंत्री हैं, जिनके बाराबंकी में निरीक्षण तथा मऊ में जनसभा के दौरान बिजली कट जाती है। इसके बावजूद एके शर्मा आईएएस अधिकारियों की तरह बेहद थेथरई से बिजली विभाग की व्यवस्था का गुणगान करते नजर आते रहते हैं। एक आईएएस मानसिकता वाला थोपा गया मंत्री बेहतर व्यवस्था को बदहाल कैसे कर सकता है, इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण उत्तर प्रदेश का ऊर्जा विभाग है।
उत्तर प्रदेश के ज्यादातर नहरों में पानी नहीं है, क्योंकि नदियों में पानी नहीं है और बिजली भी इतनी बदचलन हो चुकी है कि उसके आने-जाने का कोई टाइम नहीं है कि किसान निजी पंप चला सके। धान की नर्सरी डालने का समय है, लेकिन किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। ज्यादातर जगहों पर कवर्ड तार लगाये जाने के बावजूद भी आये दिन घटिया सामानों की आपूर्ति की वजह से ट्रांसफार्मर भी जलते रहते हैं। आप उत्तर प्रदेश के किसी भी कोने में चले जाइये, बिजली विभाग की बदहाली को लेकर आम जनता योगी सरकार को कोसती नजर आती है।
मंत्री जी दावा करते रहते हैं कि सबसे ज्यादा ट्रांसमिशन लाइन बिछा दी गई। सबसे ज्यादा बिजली आपूर्ति की गई, और मजे की बात यह है कि जब बिजली आपूर्ति कम थी और ट्रांसमिशन लाइन कम बिछे थे, तब प्रदेश को बिजली पर्याप्त मिलती थी, लेकिन एके शर्मा के कार्यकाल में सब काम बढि़या हो रहा है, लेकिन बिजली ही नहीं मिल रही है। बिजली के बगैर शानदार काम से जनता उब चुकी है। हालात ऐसे ही बने रहे तो योगी सरकार की फिर से वापसी में सबसे बड़ा रोड़ा यह बिजली विभाग ही साबित होगा। बिजली विभाग की बदहाली ही सपा को ऊर्जा भी देगा।



Awadh Bihari Yadav
June 20, 2025 at 6:57 am
करोड़ों का रिश्वत लेने वाला दलाल जब मंत्री बन जाए तो यही होगा इसे तो समय के साथ जनता जुतो से जवाब देगी
Rajesh mishra
June 23, 2025 at 5:04 pm
Bijli vibhag ka mukhya hi bhrastachar me lipt hai to je ae sdo ke bar me kya kahna.