आरके जैन-
सॉरी नजीब हम तुम्हें नहीं खोज पाए… देश की सबसे बड़ी जॉच एजेंसी सीबीआई ने नजीब को ढूँढने मे हाथ खड़े कर दिए हैं ।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए छात्र नजीब अहमद के केस को अब ऑफिशियल रूप से बंद कर दिया गया है ।
दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए केस की फाइलें बंद कर दीं हैं । इस रिपोर्ट में CBI ने कहा है कि नजीब की गुमशुदगी से जुड़ी कोई ठोस जानकारी या साक्ष्य नहीं मिल सके, जिससे किसी पर आरोप तय किया जा सके ।

नजीब अहमद अक्टूबर 2016 में लापता हुए थे । उस समय वह जेएनयू के माही-मांडवी हॉस्टल में रह रहे थे और MSc बायोटेक्नोलॉजी के छात्र थे । लापता होने से ठीक पहले ABVP से जुड़े कुछ छात्रों के साथ उनका कथित झगड़ा हुआ था । इसी घटना के बाद उनका कोई सुराग नहीं मिला ।
जेएनयू स्टूडेंट नजीब अहमद कहां हैं, अब शायद ही पता चले । क्योंकि देश की सबसे बड़ी एजेंसी ने कोर्ट में कह दिया कि हम उसे ढूंढ नहीं पाए । मजेदार बात यह है कि कोर्ट ने भी मान लिया कि सीबीआई अब तलाश नहीं कर सकती ।
आखिर नजीब अहमद है कहां ? कौन बताएगा ? इतना बडा देश ,जिसके पास जॉच कराने के लिये ढेर सारी संस्थाएं है , हजारों अधिकारी है , वह कैसे कह सकता है कि वह नजीब को नही ढूँढ पाये ?
किसी को तो बताना होगा ।
जब हर दरवाजा बंद हो रहा था, नजीब की मां फातिमा नफीस एक तस्वीर लेकर जंतर-मंतर, प्रेस क्लब और कोर्ट के बाहर खड़ी रहीं और सवाल पूछती रहीं कि मेरा बेटा वापस कब आएगा, कोई तो उसे वापस ला दो… यह एक मां की पुकार थी, जो बार-बार उठी, पर शायद किसी ने सुनी ही नहीं । उन्होंने न सिर्फ पुलिस, बल्कि सीबीआई तक को अदालत में चुनौती दी । कहा कि जांच अधूरी, एकतरफा और पक्षपाती थी । सवाल उठाए, अगर मेरा बेटा एबीवीपी से भिड़ा था, तो क्या यही उसकी सजा थी ?
नजीब की गुमशुदगी सिर्फ एक छात्र का गायब होना नहीं था, यह शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ती वैचारिक हिंसा और असहिष्णुता का आईना बन गया था । जेएनयू की गलियों में उस रात क्या हुआ, यह आज भी एक रहस्य है । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और वामपंथी छात्र संगठनों की झड़पों के बीच नजीब कहां गुम हो गया पता ही नहीं चला ।
नजीब की मां फातिमा नफीस की आंखों में कई सवाल हैं । पूछ रहीं मेरे बेटे को क्या हुआ ? उसे किसने गायब किया ? क्या देश की सबसे बड़ी एजेंसी भी उसे नहीं खोज सकती? कोर्ट में केस बंद हुआ, लेकिन मां के कमरे में अभी भी दरवाजा खुला है । नजीब का बैग रखा है, उसकी किताबें जस की तस हैं और हर रात फातिमा सिर्फ यही सोचती हैं कि क्या मेरे बेटे ने आखिरी बार कुछ कहा होगा ? कौन है जो उसका पता बताएगा ?



Deepak
July 6, 2025 at 8:05 pm
ABVP से नही टकराता तो पक्का मिल जाता। बीजेपी आरएसएस की यही नीति है। अपना संगठन, अपने से जुडे लोग चाहे कितना भी गलत कर दे, किसी का रे#प कर दे, मर्डर कर दे, लिचिंग कर दे,नफरती भाषण, किसी को कुछ भी बोल दे। पर पुलिस, सीबीआई व अन्य जाँच ऐजेंसिया कुछ नही करती, आँखे बन्द कर देती है। देश के तमाम छोटे-छोटे अदालतों का भी लगभग यही हाल है। एक माँ की पीड़ा को महसूस कर सकता हूँ।