मेरठ। दैनिक शाह टाइम्स कार्यालय पर हुए हमले के विरोध में पत्रकारों ने पूरी घटना से आला अधिकारी को अवगत कराया, इसके बाद जिले भर के पत्रकारों ने इकट्ठे होकर सिविल लाइन थाने में तहरीर दी, जिसका संज्ञान लेते हुए पुलिस ने कांग्रेसियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करा लिया है।
बताते चलें कि गुरुवार को शाह टाइम्स में एक समाचार प्रकाशित हुआ था, जिससे नाराज होकर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष गौरव भाटी ने अपने प्रवक्ता आमिर रजा एवं दर्जनों अज्ञात बदमाशों को भेजा था, जिन्होंने अखबार के कार्यालय में हंगामा कर उत्पाद मचाया था। हंगामे के दौरान उपद्रवी ने अखबार की प्रति फाड़कर पत्रकारों को गालियां दी। डेस्क प्रभारी के साथ धक्का मुक्की की। उपद्रवियों ने फोन पर शाह टाइम्स के जिला प्रभारी शाहवेज खान को भी धमकी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में कांग्रेस जिला अध्यक्ष के खिलाफ खबर छापी तो अंजाम बहुत बुरा होगा।
इस दौरान कंप्यूटर में लगी दो पेन ड्राइव एवं विज्ञापन के रुपये 5500 भी गायब हुए हैं। शाह टाइम्स कार्यालय में कांग्रेसियों के द्वारा किए गए उपद्रव की जिले भर के पत्रकारों ने घोर निंदा करी है। शुक्रवार को सभी पत्रकार साथी एवं विभिन्न संगठनों के सदस्य इसके विरोध में इकट्ठा हुए।
उपज के जिला अध्यक्ष अजय चौधरी ने कहा कि कांग्रेस के जिला अध्यक्ष गौरव भाटी ने ऐसी घटना कराकर यह बता दिया है कि वह किस मानसिकता के हैं। यदि इस मामले में पत्रकारों को न्याय नहीं मिला तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
जिला उपाध्यक्ष लियाकत मंसूरी ने कहा कि एक पत्रकार अगर किसी के खिलाफ कोई समाचार लिख रहा है तो पूरे प्रमाण उसके पास होते हैं। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अपनी जान जोखिम में डालकर वह सच्चाई को जनता के सामने पेश करता है। उसको ये मालूम होता है कि समाचार प्रकाशित होने के बाद उसे किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, निडरता ही पत्रकारिता का दूसरा नाम है।
ग्रामीण अंचलीय पत्रकार एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष संजीव तोमर ने कहा कि हम इस घटना के खिलाफ हाई कमान तक जाएंगे, पत्रकारों की आजादी को दबाया नहीं जा सकता। पत्रकारों की आवाज को दबाने वालों के खिलाफ पूरा मीडिया जगत एकजुट है।
इस घटना की सूचना मिलने के बाद राजनीतिक गलियारे में भी हलचल है, साथ ही साथ कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने भी इस घटना पर खेद व्यक्त किया है और इस घटना को बहुत ही निन्दनीय बताया है।
सिविल लाइन थानाध्यक्ष सौरभ शुक्ला ने कहा कि जिन्होंने हंगामा कर जान से मारने की धमकी दी है, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की जाएगी। थानाध्यक्ष ने कहा कि कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को भी नहीं है।
क्षेत्राधिकारी सिविल लाइन अभिषेक तिवारी ने शाह टाइम्स कार्यालय पर जाकर वहां की जांच की और पत्रकारों से यह वादा किया कि जो व्यक्ति भी कानून को हाथ में लेगा वह कितना भी ताकतवर क्यों ना हो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, की तहत हुआ मुकदमा दर्ज
- धारा 115(2) के तहत, दोषी व्यक्ति को एक साल तक की कैद या 10,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.
- धारा 351(2): इस अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। इसके अनुसार, आपराधिक धमकी का दोषी पाया जाने वाला व्यक्ति को दो साल तक की कैद या जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है।
- धारा 352: यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर किसी को गालियां देता है, या अपमानजनक इशारे करता है, और यह जानता है कि इससे उस व्यक्ति को गुस्सा आएगा और वह हिंसक प्रतिक्रिया दे सकता है, तो उस पर धारा 352 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।
- धारा 131 के अनुसार, जो कोई किसी व्यक्ति पर गंभीर और अचानक उकसावे के अलावा किसी अन्य कारण से हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उसे तीन महीने तक की कैद या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
- धारा 324 शरारत के अपराध को परिभाषित करती है, जिसमें किसी भी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शामिल है, और इसके लिए सजा का प्रावधान भी है. इस धारा के तहत, शरारत के अपराध के लिए, आरोपी को कारावास और/या जुर्माना हो सकता है.
देखें एफआईआर की प्रति…



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