
संजय कुमार सिंह
देशबन्धु में आज एक खबर है, उड़ी में एक भारतीय जवान शहीद। इसके बाद जम्मू कश्मीर हाई अलर्ट पर है। खबर में कहा गया है कि सीमा पार से कई आतंकी घुस चुके हैं। खबर के साथ यह भी बताया गया है कि आतंकवादियों ने तारबंदी को हुए नुकसान का लाभ उठाया है। खबर के अनुसार, बरसात के कारण नदी-नालों के इलाकों में तारबंदी को नुकसान हुआ है और आतंकियों ने उसका लाभ उठाया है। इसका एक मतलब यह भी है कि बरसात के कारण तारबंदी को जो नुकसान हुआ उससे बचाव के उपाय भारतीय पक्ष ने नहीं किये जबकि आतंकियों ने उसका लाभ उठा लिया। यह ऑपरेशन सिन्दूर और उस समय के बड़बोलेपन के मुकाबले बहुत ही खराब, कमजोर और शर्मनाक स्थिति है। ऑपरेशन सिन्दूर और उससे संबंधित दावों का प्रचार करने वाले मीडिया ने इस खबर को दबा दिया है और अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। ढूंढ़ने पर इसके दूसरे पहले पन्ने पर यह खबर मिली लेकिन मेरे तमाम अखबारों में आज यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। एनडीटीवी डॉट इन के अनुसार, पाकिस्तानी घुसपैठ को नाकाम करने के दौरान एक भारतीय जवान शहीद। खबर यह है कि पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ की कोशिश की जा रही थी, जिसे नाकाम करने के दौरान भारतीय जवान शहीद हुआ। यह घुसपैठ की सामान्य कोशिश से अलग थी, क्योंकि घुसपैठिए जब भारत की सीमा में दााखिल हो रहे थे तो पाकिस्तानी सेना की ओर से गोलीबारी की जा रही थी ताकि गोलीबारी की आड़ में पाकिस्तानी घुसपैठ कर सकें।
जम्मू डेटलाइन से देशबन्धु की खबर है, उत्तरी कश्मीर के उड़ी सेक्टर में बुधवार को नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारतीय सेना द्वारा घुसपैठ की कोशिश नाकाम करने के बाद आतंकवादियों के साथ भीषण मुठभेड़ में एक जवान शहीद हो गया। सेना का कहना था कि यह हमला पाकिस्तानी सेना के कमांडो ने किया था जिसे सैन्य भाषा में बैट हमला कहा जाता है। यह हमला भारतीय सीमा चौकी पर कब्जा करने के लिए किया गया था। इसलिये जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बताया जा रहा है कुछ आतंकी उस पार से घुसने में कामयाब हुए हैं जो फिदायीन हमलों को अंजाम दे सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, उनके निशाने पर जम्मू-पठानकोट हाईवे पर स्थित सैनिक संस्थानों के साथ ही इंटरनेशनल बार्डर के साथ गुजरने वाली रेल लाइन भी है। सीमा सरक्षा बल के बाद सेनाधिकारियों ने भी ऐसी आशंका प्रकट की है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सैनिकों ने घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों के साथ एक संक्षिप्त लेकिन भीषण गोलीबारी की। एनडीटीवी और देशबन्धु की खबर का अंतर गौर करने लायक है। कहने की जरूरत नहीं है कि दोनों खबरें अखबारों के मालिकों ने नहीं लिखी होगी। ना ऐसे लिखने के लिए कहा होगा। मेरा मानना है कि यह व्यवस्था है और पहली खबर वह है जो सरकारी है। दूसरी खबर पूरी खबर है, जैसी होनी चाहिये। मीडिया के बड़े हिस्से ने खबर नहीं छापी और जो छापी उसके तथ्य खा गये और यह खास विचारधारा के कारण ही हुआ होगा। वरना गुणवत्ता देखने वालों को खराब खबर लिखने के लिए कार्रवाई करनी चाहिये।
जो भी हो, आज हमारा मीडिया जब इस खबर को खा गया है तो यह याद दिलाना जरूरी है कि ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान या उसके नाम पर पाकिस्तान से युद्ध छेड़कर उसे अचानक वापस लेने के बाद और दौरान क्या सब दावे किये गये और कैसे प्रधानमंत्री ने देश की कीमत पर अपना प्रचार किया, छवि बनाई और मीडिया ने उनका साथ दिया। चैट जीपीटी से कुछ पुराने उदाहरण पेश हैं ताकि सनद रहे।
1. बीकानेर रैली (22 मई 2025) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए “पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया गया”। उन्होंने कहा था कि सुरक्षा बलों ने केवल 22 मिनट में नौ आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। ये ऑपरेशन पहलगाम हमले का जवाब था।
2. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने मीडिया से कहा था, “अगर भारत हमला रोक दे, तो हम भी पीछे हट जाएंगे”। इसके आधार पर, “ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की हेकड़ी ढीली हो गई — पाकिस्तान घुटने पर आ गया” जैसा शीर्षक प्रकाशित हुए थे।
3. ऑपरेशन के बाद पाकिस्तानी मीडिया और विश्लेषकों ने कहा कि इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक खलबली मच गई। इसके आधार पर कहा गया, पाकिस्तान की सरकार ने शांति की गुहार लगाई। ऐसे जैसे वे अब सीधे टकराव को टालना चाहते हैं।
4. बीकानेर रैली में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि “जब सिंदूर बारूद बन जाता है तो नतीजा क्या होता है…”। उन्होंने बताया था कि “देश की तीनों सेनाओं को खुली छूट दी गई थी, और उन्होंने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।” यह भी कि, “हमने आतंकवादियों को मिट्टी में मिला दिया। ऑपरेशन सिंदूर केवल नाम नहीं, भावनाओं का प्रतिबिंब है। … जब पाकिस्तान में आतंक के अड्डों पर भारत की मिसाइलों ने हमला बोला… आतंकी संगठनों की इमारतें ही नहीं, हौसला भी थर्रा गया।”
5. लोकसभा में दावा किया गया था, “जब पाकिस्तानी सेना आतंक का समर्थन कर रही थी, हमारी सेनाओं ने मिसाइल और ड्रोन से जबाव देकर, पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।”
6. बेंगलुरु रैली में कहा गया था, “दुनिया ने भारत का नया स्वरूप देखा”। “ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को घंटों में ही घुटने पर ला दिया… यह आत्मनिर्भर भारत की ताकत और तकनीकी उन्नति का प्रतीक है।”
7. “गोली का जवाब गोले से होगा” और “वैश्विक समर्थन”लोकसभा में नरेन्द्र मोदी ने कहा था, “दुनिया ने हमें रुकना नहीं कहा। केवल तीन देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया; बाक़ी देश हमारे साथ थे या तटस्थ। … अगर पाक गोली चलाएगा, तो जवाब तोप से मिलेगा।”
8. एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में कम से कम पाँच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान और एक एयरबोर्न सर्विलांस विमान मार गिराए गए—यह सबसे बड़ी सतह–विमानों पर दर्ज किल है।”
9. जब भारत निर्मित सैन्य उपकरणों का प्रचार और अमेरिकी टैरिफ का बवाल चल रहा था तो रूस निर्मित एस‑400 एयर डिफेंस सिस्टम का प्रभाव बताया गया – भारतीय वायु सेना ने कहा (या कहलवाया गया) कि एस‑400 सिस्टम ने ऑपरेशन में रणनीतिक लाभ दिया और पाकिस्तान का एक बड़ा सैन्य विमान गिराया था, जो आधुनिक तकनीकी सशक्तता को दर्शाता है। उड़ी हमले से लगता नहीं है कि पाकिस्तान को भारत की इन क्षमताओं का ‘डर‘ है।
10. एनएसए अजीत डोभाल ने आईआईटी, मद्रास के दीक्षांत समारोह में कहा था, ऑपरेशन केवल 23 मिनट चला, नौ आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर 100 से अधिक आतंकियों को निष्प्रभावी किया गया। उन्होंने विदेशी मीडिया को चुनौती दी कि भारत में कोई क्षति नहीं हुई — “यहाँ तक एक काँच भी नहीं टूटा।”
11. केबीसी 17: शो के ‘स्वतंत्रता दिवस महा उत्सव स्पेशल’ एपिसोड के प्रोमो के अनुसार, प्रमुख महिलाओं ने ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी साझा की है। इसे कुछ लोग प्रचार का “मास्टरस्ट्रोक“ मान रहे हैं तो कुछ सैन्य विषय का मनोरंजनकरण। आपको बता दूं कि खबरों के अनुसार भारतीय सेना की महिला शक्ति का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें भारतीय नौसेना की कमांडर प्रेरणा देवस्थली और ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ की प्रेस ब्रीफिंग को लीड करने वाली इंडियन आर्मी की कर्नल सोफिया कुरैशी और इंडियन एयर फोर्स की विंग कमांडर व्योमिका सिंह अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर नजर आएंगी।
इतने जबरदस्त प्रचार अभियान के साथ यह तथ्य कि पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया, अपने आतंकी प्रवेश करवा दिये हैं – खबर पहले पन्ने पर नहीं है। सैन्य भाषा में इसे बैट हमला कहा जाता है और भले ही यह कहा जाये कि बैट हमला असल में हमला नहीं है और इसलिए खबर बड़ी नहीं है या मामूली है।
हिन्दी के मेरे तीसरे अखबार नवोदय टाइम्स में उड़ी हमले में जवान के शहीद होने की यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। ऑपरेशन सिन्दूर के बाद इस पहले पाकिस्तानी हमले की खबर बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन सेना ने भी इसे महत्व नहीं दिया है। पहले के दो उदाहरणों के अलावा दे टेलीग्राफ की खबर में लिखा है, सेना के श्रीनगर स्थित चिनार कॉर्प्स ने कहा कि सैनिक की मृत्यु एलओसी पर ड्यूटी के दौरान हुई पर मौत से जुड़ी परिस्थितियों का विवरण साझा नहीं किया गया है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी ऊपर की फोटो से पता चलता है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ऑपरेशन सिन्दूर को भुनाने की तैयारी है और यही कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) के प्रोमो से साबित है। ऐसे में कल की घटना और उसे महत्व न देने के कारण स्पष्ट हैं। दूसरा कोई यह सब करे तो प्रचारक संघ के लोग देशभक्ति से जोड़ देंगे पर तथ्य यह है कि तमाम दावों और बड़बोले पन के बावजूद आतंकी सीमा में प्रवेश करने में कामयाब रहे और उसकी खबर दबा दी जायेगी और जब वे वारदात करेंगे तो नाम पूछकर मारा जैसी राजनीति खबर से जोड़ दी जायेगी। मामला इतना ही नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार अग्निवीर योजना और बेरोजगारी की देशव्यापी स्थिति से छवि को हुए नुकसान की भरपाई के लिए अग्निवीर को काम पर रखना बढ़ाने की योजना-चर्चा को भी प्रमुखता दी गई है। यह पहले पन्ने पर चार कॉलम में है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एसआईआर कब और कहां किया जाये यह चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है (टाइम्स ऑफ इंडिया) तो सेना के पराक्रम या ऑपरेशन सिन्दूर का प्रचार सरकार के पक्ष में किया जा रहा है। यही नहीं, राहुल गांधी ने मतदाता सूची में चुनाव आयोग की गलतियां उजागर की, यह दिखाई दे रहा है कि बिहार में एसआईआर के बावजूद वही गलतियां हैं तो सुप्रीम कोर्ट का यह विचार बताता है कि उसकी गलतियों के लिए (अगर इसे गलती माना जाये) तो कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। चुनाव आयोग का प्रचार और बचाव सत्तारूढ़ भाजपा जिस ढंग से कर रही है उससे साफ है कि चुनाव आयोग की गलतियों का मकसद भाजपा को लाभ पहुंचाना हो सकता है फिर संवैधानिक संस्थाओं को यह स्वतंत्रता तो है ही कि वे स्वतंत्र रूप से काम करते रहें। मीडिया को इसे रिपोर्ट करने का अधिकार है पर उसे अपने अधिकारों का उपयोग करने के लिए बाध्य तो नहीं ही किया जा सकता है।
इस बीच आवारा कुत्तों का मामला इतना गंभीर हो चुका है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति या चयन के मामले में सुनवाई नहीं हो रही है और आज तीन जजों की पीठ आवारा कुत्तों के मामले में फिर से सुनवाई करने वाली है। यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड है। अमर उजाला की आज की लीड का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, एसआईआर में 11 दस्तावेज स्वीकारना (असल में मांगना) मतदाताओं के हित में है। मैं अभी तक यही जानता था कि किसी चुनाव क्षेत्र में सामान्य तौर पर रहने वाला उस क्षेत्र का मतदाता होता है भले वह देश के किसी और हिस्से का मूल निवासी हो। अब शिकायत की जा रही है कि गुजरात भाजपा के नेता बिहार में मतदाता हो गये हैं जबकि बाकायदा हो सकते हैं और अगर आदित्य श्रीवास्तव का नाम लखनऊ, मुंबई के बाद बेंगलुरु में होना सही है तो गुजराती भाजपा नेता का नाम बिहार में होने पर दिक्कत नहीं होनी चाहिये लेकिन तमाशा यह है कि आरोप या खबरों के अनुसार, गुजराती नेता का नाम बिहार की हिन्दी की मतदाता सूची में गुजराती में लिखा है। इन खबरों के बीच आज द हिन्दू में एक खबर है, 2025 में पूर्वी सीमा से भारत छोड़कर जाने वालों की संख्या तीन गुना बढ़ गई। खबर के अनुसार भारत सीमा पार कर बांग्लादेश जाना चाहने वाले जो लोग सीमा सुरक्षा बल द्वारा पकड़े जाते हैं उनकी संख्या 2024 के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। बिना दस्तावेज वाले इन प्रवासियों को बांग्लादेशी घुसपैठिया (अवैध प्रवासी) कहा जाता है।
द टेलीग्राफ ने आज सोनिया गांधी के मामले में भाजपा के आरोप को पहले पन्ने पर छापा है। शीर्षक है, जली–भुनी भाजपा ने सोनिया गांधी के वोटर कार्ड का मामला जिन्दा किया। आप जानते हैं कि एसआईआर के बाद बिहार की मतदाता सूची से मृत बताकर हटा दिये गये दो मतदाताओं को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया तो चुनाव आयोग की ओर से इसे ड्रामा बताते हुए ऑनलाइन सुधार का सुझाव दिया गया। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों का कोर्ट आना गर्व की बात है। ऐसे में कल भाजपा ने सोनिया गांधी के वोटर आई कार्ड का मामला उठाया जो आज अखबारों में छपा है। उस पर आने से पहले बता दूं कि देशबन्धु में पहले पन्ने पर छपी खबर के अनुसार, चाय पर मृत लोगों से मिले राहुल। इस खबर का उपशीर्षक है, कांग्रेस नेता ने अनोखे अनुभव के लिए चुनाव आयोग को धन्यवाद दिया। फोटो के साथ यह खबर चार दशक पुराने सोनिया गांधी के वोटर आई कार्ड से संबंधित आरोप या खबर के मुकाबले निश्चित रूप से महत्वपूर्ण और दिलचस्प है लेकिन यह पहले पन्ने पर नहीं है। सोनिया गांधी के मामले में भाजपा के अमित मालवीय ने जो आरोप लगाया है उसे तो आप कहीं भी पढ़ सकते हैं। मैं आपको एक और विदेशी बहू का मामला बताता हूं जो आमतौर पर पढ़ने को नहीं मिलेगा। इससे पता चलता है कि भारत में मतदाता सूची कैसे बनती रही है और अब जो हो रहा है वह कैसे उससे बहुत अलग या गैर जरूरी है।
फेसबुक पर मेरी पोस्ट, तो आधार किस मर्ज की दवा है? पर कमेंट में राजेन्द्र राज जी ने लिखा है, कई देशों में सिटीजन कार्ड भी होता है। भारत में केवल पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया गया है और पासपोर्ट केवल देश की सीमा पार करने के इच्छुक लोग ही बनवाते हैं। अन्य कोई भी डॉक्यूमेंट गैर नागरिकों के लिए भी बनवाया जा सकता है। मेरी पत्नी ब्राजीलियन है, उसके पास पैनकार्ड , आधारकार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे डॉक्यूमेंट हैं जो उसे भारत का निवासी बताते हैं (और वे हैं भी) लेकिन इनमे से कोई भी नागरिकता के बारे में कोई सूचना नहीं देता। उसके पास ओसीआई कार्ड है जिसमे उसके मूल देश का नाम है और स्थानीय पता भी है। यह अकेला कार्ड है जिसमे उसकी नागरिकता ब्राजील की बताई गई है। लेकिन नागरिकता के रूप में कुछ लोग वोटर आईडी को मान्यता देने की वकालत करते हैं (मेरे हिसाब से यह निवास का प्रमाणपत्र है नागरिकता का बिल्कुल नहीं) क्योंकि भारत में केवल भारत का नागरिक ही वोट दे सकता है। इसके बाद राजेन्द्र राज जी ने लिखा है, कई साल पहले एक बार मेरे घर पर गाँव में बीएलओ आये, वे वोटर लिस्ट अपडेट कर रहे थे। मेरी अनुपस्थिति में उन्होंने मेरे बूढ़े पिता से घर के वयस्क सदस्यों के नाम पूछे। मेरे बूढ़े पिता जी ने अपना, मेरा और मेरी पत्नी का नाम (जिस नाम से वह उसे पुकारते थे – मीरा) बता दिया। कुछ ही महीनों बाद मेरे घर पर एक निर्वाचन के लिए कोई तीन मतदाता पर्चियां दे गया। मेरे पिता और मैं वोट देने गए। वहां एजेंट ने पूछा कि मैडम नहीं आयीं। तो मैंने कहा कि मेरी पत्नी भारत की नागरिक नहीं है। उसने कहा कि उनका नाम तो वोटर लिस्ट में है, मैंने कहा कि ये डबल गलती है क्योंकि उन्होंने कभी वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की प्रार्थना नहीं की है और उनका नाम जो आप लिस्ट में बता रहे हैं, वो भी गलत है क्योंकि वह नाम उनका है ही नहीं। अच्छी बात ये हुई कि अगले दौर में बनी वोटर लिस्ट में यह नाम काट दिया गया।
मेरा मानना है कि पहले यही होता था और यही तरीका सही है। वैसे भी, चुनाव आयोग प्रारूप मतदाता सूची सार्वजनिक करता है और विदेशी नागरिकों के मामले में आपत्तियों के बाद नाम कट जाने चाहिये। यहां तो नाम लिखा गया था उसका परिचय पत्र नहीं होता तो वोट नहीं पड़ता और आईकार्ड बनाने के लिए आवेदन किया जाता, फोटो लगाई जाती तो गलत होता और फोटो या सही (विदेशी) नाम से मामला पकड़ा भी जा सकता था। इसलिए मुझे अभी भी लगता है कि यही तरीका सही था और इस तरीके में अगर कुछ विदेशी जुड़ भी जाते या घुसपैठिये जुड़ जाते हैं तो वे निवासी होते ही हैं और वोटर निवासी ही होता है। इसलिए उससे पहड़ नहीं गिरेगा पर सैकड़ो निवासी मतदाता नहीं होंगे तो गलत होगा। इस पर मैंने लिखा है, आधार का विकास ऐसे ही होना चाहिये था और उसकी बुनियाद वोटर आईकार्ड से अलग, ऐसी ही है। पर यह काम अब लगता है कि निहित स्वार्थ के कारण नहीं किया गया। दूसरी ओर, भारत में जो व्यवस्था है उसमें ड्राइविंग लाइसेंस पर पता लिखा होता है लेकिन वह पते का सबूत नहीं है। इससे संबंधित एक कहानी सुनी थी, किसी दुर्घटना की पुलिस जांच में पता चला कि लाइसेंस पर चालक का पता गलत था (बदल गया होगा)। जांच करने वालों ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने वाले को भी अभियुक्त बना लिया। उसके बाद से कहा जाने लगा कि ड्राइविंग लाइसेंस पता का सबूत नहीं है, पैन कार्ड उम्र का, आधार नागरिकता का। बेईमान और भ्रष्ट राजनीतिज्ञों के नेतृत्व में सरकारी बाबू अपनी सुरक्षा (और कमाई) का पूरा इंतजाम रखते हैं, बदले में कमाई का हिस्सा पहुंचाते हैं और यह सब चल रहा है। कोई अधिकारी वेतन लेकर भी अपने काम के लिए जिम्मेदार नहीं है। जनता सरकार की अनुमति के बगैर उसपर मुकदमा नहीं कर सकती है, अनुमति नहीं मिलती है। दूसरी ओर, भाजपा सरकार ने तो अपना काम करने के लिए ही उज्जवल निकम और रंजन गोगई को पुरस्कृत किया है।
इस पर मनोहर लाल लुधानी का कहना है, “मजे की बात यह है कि आधार कार्ड से आप सिम खरीद सकते है, बैंक खाता खोलकर सरकारी सब्सिडी ले सकते है,किसान सम्मान निधि ले सकते है बस वोट देने के लिए मान्यता नही है उसके लिए जन्म प्रमाणपत्र चाहिए।” इसलिये आधार कार्ड की तरह या आधार कार्ड की जगह भारत सरकार को एक नागरिकता कार्ड जारी करना चाहिए जो हर अन्य कार्ड की जगह ले। हर व्यक्ति का एक ही कार्ड हो, जिस पर क्यू आर कोड हो जिससे उससे संबंधित समस्त सूचनाएं जैसे राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैनकार्ड, वोटर कार्ड, डोमिसाइल और पासपोर्ट सम्बन्धी सूचनाएं कोडेड हों। मेरा मानना है कि सरकार एक देश एक चुनाव से जरूरी और व्यावहारिक है। सरकार को यह काम जरूर और जल्दी करना चाहिये था। यह शौंचालय बनाने से भी जरूरी था। लेकिन इससे चुनाव होते तो भाजपा शायद नहीं जीत पाती और इसलिये उसने इसपर ध्यान नहीं दिया और वह सिर्फ चुनाव जीतने वाले काम करती रही। नागरिकों ने तो नहीं ही देखा जिसे देखना है, वह भी आंख मूंदे बैठा है। बदले में ईनाम बंटते रहे। मीडिया इनमें सबसे महत्वपूर्ण है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का भी अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


