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प्रिंट मीडिया का जलवा : जनवरी-जून 2025 में 8 लाख से अधिक की बिक्री वृद्धि, ABC आंकड़ों ने साबित की साख

हरिशंकर पाराशर-

भारतीय प्रिंट मीडिया उद्योग के लिए एक नई उम्मीद की किरण उभर रही है। डिजिटल तूफान और सोशल मीडिया की बाढ़ के बीच भी, पारंपरिक समाचार पत्रों पर उपभोक्ताओं का विश्वास न केवल कायम है, बल्कि मजबूत हो रहा है। ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2025 की अवधि में दैनिक अखबारों की औसत योग्य बिक्री 2.77 प्रतिशत बढ़कर 29,74,148 प्रतियां पहुंच गई, जो पिछले छह माह (जुलाई-दिसंबर 2024) की 28,94,1876 प्रतियों से 8,02,272 प्रतियों की शुद्ध वृद्धि दर्शाती है। यह आंकड़ा न केवल प्रिंट की लचीलापन को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सत्यापित और गहन पत्रकारिता की भूख आज भी बरकरार है।

ABC के महासचिव अदिल कसाद ने एक बयान में कहा, “ये आंकड़े पाठकों के अटूट विश्वास को उजागर करते हैं। समाचार पत्र विश्वसनीय, सत्यापित और विस्तृत जानकारी का मजबूत स्रोत बने हुए हैं।” यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर प्रिंट उद्योग के पतन के दौर में भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जहां कई देशों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने पारंपरिक मीडिया को पीछे धकेल दिया है। लेकिन भारत में, जहां साक्षरता दर बढ़ रही है और आर्थिक विकास तेज हो रहा है, प्रिंट अभी भी सूचना का मुख्य माध्यम बना हुआ है।

बिक्री में उछाल: आंकड़ों की सच्चाई

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी-जून 2025 में दैनिक अखबारों की कुल बिक्री में 2.77 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो लगभग 3 प्रतिशत के करीब है। यह वृद्धि केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है; यह पाठकों की बढ़ती संख्या को प्रतिबिंबित करती है। उदाहरण के लिए, अंग्रेजी भाषा के शीर्ष दैनिक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की प्रसार संख्या 16,40,418 प्रतियों तक पहुंच गई, जो हिंदुस्तान टाइम्स (6,19,280 प्रतियां) से काफी आगे है। हिंदी दैनिकों में ‘दैनिक भास्कर’ ने भी मजबूत प्रदर्शन किया, जिसकी कुल प्रसार संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हुआ। ABC के आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में प्रिंट की मांग बढ़ी है, खासकर युवा और शिक्षित वर्ग में।

यह वृद्धि महामारी के बाद की रिकवरी का हिस्सा है। 2020 में कोविड-19 ने प्रिंट उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया था, लेकिन 2024 से शुरू हुई सुधार की प्रक्रिया अब गति पकड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 8 लाख से अधिक की वृद्धि प्रिंट मीडिया की बाजार हिस्सेदारी को 2025 के अंत तक और मजबूत करेगी।

उपभोक्ता विश्वास का बढ़ता ग्राफ: अफवाहों के दौर में प्रिंट की साख

सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और अफवाहों की बाढ़ के बीच, प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता एक बड़ा कारक बन गई है। ABC रिपोर्ट में उल्लेख है कि पाठक गहन विश्लेषण और सत्यापित तथ्यों की तलाश में समाचार पत्रों की ओर लौट रहे हैं। एक हालिया सर्वे में 70 प्रतिशत से अधिक पाठकों ने प्रिंट को डिजिटल से अधिक भरोसेमंद बताया। “डिजिटल की तेजी भले ही आकर्षक हो, लेकिन प्रिंट की गहराई ही इसे अमर बनाती है,” कहते हैं मीडिया विशेषज्ञ डॉ. रवि शर्मा, जो जयपुर विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के प्रमुख हैं।

इस विश्वास को मजबूत करने में क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों की भूमिका सराहनीय रही है। हिंदी, मराठी और तमिल दैनिकों में 5-7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो दर्शाता है कि स्थानीय मुद्दों पर गहन कवरेज पाठकों को बांधे रखती है।

लागत दबाव के बावजूद लचीलापन: उद्योग की ताकत

कागज की कीमतों में वैश्विक उथल-पुथल के कारण 20-25 प्रतिशत की वृद्धि और उत्पादन लागतों के दबाव के बावजूद, प्रिंट उद्योग ने अपनी बाजार हिस्सेदारी बनाए रखी। ABC ने इसे “प्रशंसनीय” करार दिया है। उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमने डिजिटल इंटीग्रेशन को अपनाया है—ई-पेपर और हाइब्रिड मॉडल से लागत को संतुलित किया जा रहा है।” यह लचीलापन प्रिंट को मुख्य सूचना स्रोत के रूप में स्थापित करता है, जहां कुल प्रसार संख्या में स्थिरता ने साबित किया कि प्रिंट का महत्व कम नहीं हुआ।

डिजिटल के साथ संतुलन: पूरक की भूमिका

रिपोर्ट में स्पष्ट है कि प्रिंट डिजिटल से प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहा, बल्कि पूरक बन रहा है। जहां डिजिटल ब्रेकिंग न्यूज देता है, वहीं प्रिंट गहन विश्लेषण और संपादकीय प्रदान करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि प्रिंट को डिजिटल इकोसिस्टम का मजबूत स्तंभ बनाएगी। उदाहरणस्वरूप, कई प्रमुख प्रकाशनों ने अपनी डिजिटल सब्सक्रिप्शन को प्रिंट संस्करणों से जोड़ा है, जिससे हाइब्रिड पाठक वर्ग उभर रहा है।

भविष्य की संभावनाएं: सकारात्मक पूर्वानुमान

ABC की रिपोर्ट प्रिंट मीडिया के लिए सकारात्मक भविष्यवाणी करती है। यदि यह रुझान जारी रहा, तो 2025 के अंत तक 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि संभव है। उद्योग नेता इसे “परिवर्तन का प्रमाण” बता रहे हैं, जो पारंपरिक मीडिया की मजबूती को दर्शाता है। PwC की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का प्रिंट विज्ञापन बाजार 2025 में 3 प्रतिशत बढ़कर 250 अरब रुपये तक पहुंच सकता है।

यह रिपोर्ट प्रिंट उद्योग के लिए उत्साहजनक संकेत है, जो साबित करती है कि सत्य और विश्वसनीय पत्रकारिता की मांग कभी कम नहीं होती। ABC ने सभी हितधारकों—प्रकाशकों, विज्ञापनदाताओं और पाठकों—से इस प्रवृत्ति को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने का आह्वान किया है। प्रिंट का युग समाप्त नहीं हुआ; यह नया रूप धारण कर रहा है।

लेखक हरिशंकर पाराशर वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया विश्लेषक हैं।

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