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इस तरह नरेन्द्र मोदी ने तो चिदंबरम को ‘कमजोर’ कांग्रेस का ‘मजबूत’ नेता साबित कर दिया, अपनी तो…

संजय कुमार सिंह

आज के अखबार (09.10.2025) भाग-दो

दि एशियन एज की आज की लीड का शीर्षक है – प्रधानमंत्री नरेन्द्र “मोदी ने कहा, ‘कमजोर’ कांग्रेस ने 26/11 का बदला नहीं लेने का निर्णय किया”। इस खबर के दो फ्लैग शीर्षक है, 1) पाकिस्तान के खिलाफ सैनिक कार्रवाई किसने रोकी : प्रधानमंत्री 2) नवी मुंबई एयरपोर्ट फेज 1, मेट्रो लाइन का उद्घाटन किया। कहने की जरूरत नहीं है कि प्रधानमंत्री ने सवाल उठाया है तो यह खबर है और लीड बनाना या नहीं बनाना संपादकीय विवेक का मामला है। मेरे नौ अखबारों में से दो में यह लीड है और एक अंग्रेजी का तथा दूसरा हिन्दी का है तो मामला हिन्दी-अंग्रेजी का भी नहीं है और जो हालात हैं उसमें प्रधानमंत्री के प्रचार का हो सकता है। अदाणी समूह जब प्रचार कर रहा है तो मामला प्रचार का है ही लेकिन मुंबई हमले से संबंधित खबर अदाणी के प्रचार में नहीं हो सकती है, नहीं है। संयोग से या किसी अनजान कारण से अदाणी का विज्ञापन अमर उजाला में तो है लेकिन दि एशियन एज में नहीं है। अब आते हैं प्रधानमंत्री के सवाल पर – ऐसा इसलिए भी कि अमर उजाला का शीर्षक है – “कांग्रेस बताए मुंबई हमले के बाद सैन्य कार्रवाई किसके दबाव में रोकी : मोदी”। मुझे लगता है यह सवाल अब बेमतलब है, नरेन्द्र मोदी की हस्ती ऐसी नहीं रह गई है कि वे कांग्रेस से यह सवाल पूछें। उस पर आने से पहले बता दूं कि कहा है तो खबर है और कैसे छापना है यह संपादकीय विवेक का मामला है और मेरा दृढ़ विश्वास है कि मीडिया में काफी समय पहले से संघ के लोग प्लांट किए गए हैं जो ऐसे निर्णय लेते हैं और यह अलग चर्चा का विषय है।

प्रधानमंत्री के इस सवाल का आधार कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त व गृहमंत्री पी चिदंबरम का एक बयान है। सच्चाई यह है कि उस बयान पर चल रही भाजपाई प्रतिक्रिया पर मैंने ध्यान नहीं दिया। मेरा मानना है कि चिदंबरम ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं होगा और भाजपा के लोग अपनी आदत और जरूरत के अनुसार यह सब फैला रहे हैं। आज जब देखा कि प्रधानमंत्री भी इसमें कूद पड़े तो मुझे लगा कि यह चिदंबरम की चाल भी हो सकती है और चिदंबरम कोई कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं जो भाजपा को इतनी आसानी से मौका देंगे जैसा अभी तक लग रहा था। मैं उसी समय यानी सुबह-सुबह चिदंबरम के ट्वीटर हैंडल पर गया और यह ट्वीट मिला।

उन्होंने जो लिखा है उसका हिन्दी तर्जुमा पेश है – मैं माननीय प्रधानमंत्री के शब्दों को उद्धृत करता हूँ (जैसा कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित हुआ है): “….उन्होंने कहा है कि भारत 26/11 के बाद जवाब देने के लिए तैयार था, लेकिन किसी देश के दबाव के कारण, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने भारतीय सशस्त्र बलों को पाकिस्तान पर हमला करने से रोक दिया।” इस बयान के तीन भाग हैं और हर एक भाग ग़लत है, बिल्कुल ग़लत। यह पढ़कर निराशा हुई कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने ये शब्द गढ़े और मेरे मत्थे मढ़ दिए।” पूरे मामले को समझने के लिए पुराने पत्रकारीय तरीके की जगह मैंने चेट जीपीटी का सहारा लेना सबसे आसान महसूस किया। मैंने चैट जीपीटी से पूछा, “पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम के हवाले से एक खबर थी कि उन्होंने कहा है, …. भारत 26/11 के बाद जवाब देने के लिए तैयार था, लेकिन किसी देश के दबाव के कारण तब की कांग्रेस सरकार ने भारत की सशस्त्र सेना को पाकिस्तान पर हमला करने से रोक दिया।” यह क्या विवाद है। कब कहा था, कहां कहा था और क्या कहा था। पहले के कहे पर ही विवाद था या हाल-फिलहाल दोहराया था। प्रधानमंत्री ने भी इसकी चर्चा की है। आज खबर है और पी चिदंबरम ने एक्स पर लिखा है कि यह टाइम्स ऑफ इंडिया में छपा है, गलत है। मैंने ऐसा नहीं कहा था। क्या माजरा है। मैंने फॉलो नहीं किया, अब समझना चाहता हूं। चैट जीपीटी के जवाब का संक्षिप्त संपादित रूप मेरी टिप्पणियों के साथ पेश है। साफ है कि प्रधानमंत्री ने आरोप लगाने से पहले जांचने की कोशिश भी नहीं की। उनकी ट्रोल सेना तो नहीं ही करती है और उनके शासन में फैक्ट चेक के नाटक का सच क्या है।

26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमले (26/11) के बाद भारत सरकार ने आतंकवाद पर कार्रवाई की, लेकिन युद्ध या पारंपरिक आक्रमण या सैन्य ऑपरेशन (घुसकर हमला) नहीं किया। नरेन्द्र मोदी ने किया तो क्या खोया क्या पाया पर कभी चर्चा नहीं हुई सो अलग। अब इस विषय पर नई चर्चा छिड़ी है। इसके अनुसार, पी चिदंबरम ने एक इंटरव्यू (पॉडकास्ट/टीवी) में कहा कि उस समय “मेरी अंतर्दृष्टि” थी कि हमें कुछ प्रतिकार करना चाहिए, लेकिन “अंतरराष्ट्रीय दबाव” और विदेश मामलों से जुड़े सुझावों ने सरकार को रोक दिया। उन्होंने उदाहरण दिया कि उस समय संयुक्त राज्य अमेरिका की सचिव विदेश नीति कॉन्डोलीज़ा राइस दिल्ली आई थीं और “कृपया कार्रवाई न करें” की बात कही थी। इन बयानों से राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ। बीजेपी ने चिदंबरम के दावों पर हमला किया — “यूपीए सरकार ने देश को जवाब देने का अवसर गंवाया”, “विदेशी दबाव पर झुक गई” आदि आरोप लगाए। नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) ने भी इस मुद्दे को अपने भाषणों में उठाया है, कांग्रेस से पूछा है कि “किसने उस समय सेना को कार्रवाई से रोका”। मुझे लगता है कि युद्ध नहीं करना तबकी सरकार का सामूहिक विवेकपूर्ण निर्णय था। जो किया वह सही कार्रवाई थी इसका मजाक बनाने के लिए आतंकी को बिरयानी खिलाने का आरोप लगाया गया। बाद में आरोप लगाने वाले को पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ाया गया। जनता ने नहीं चुना तो बतौर ईनाम राज्यसभा में मनोनीत कर दिया गया। यह पार्टी के लाभ के लिए सरकारी कर्मचारी के राजनीतिक योगदान का लाभ देना और सरकारी सुविधा लुटाने का स्पष्ट मामला है। दूसरी ओर, जवाब देने के अवसर का कथित उपयोग करके मुंह की खाने के बाद अब यह सवाल किया जा रहा है क्योंकि धुंआधार हेटलाइन मैनेजमेंट चल रहा है और उसमें कामयाबी भी मिल रही है। बहुत कुछ सरकारी पैसे से हो रहा है और बहुत कुछ भ्रष्टाचार है – जो मुद्दा ही नहीं है।

वैसे, मूल विवाद यह है कि क्या सचमुच उस समय भारत की सशस्त्र सेना पाकिस्तान में जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैयार थी लेकिन किसी देश (विशेष रूप से अमेरिका) के दबाव में रोक दिया गया। अगर हाँ, तो यह निर्णय किसका था, दुनिया भर के देशों ने कितना प्रभाव डाला और चिदंबरम ने क्या यह बात वास्तविक तौर पर कही थी। जब यह मामला सार्वजनिक हुआ, तो चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि “अमेरिका ने हमें रोक दिया” या कि भारत ने पूरी तरह हमला करने की नीयत बना ली थी लेकिन किसी ने उसे रोक दिया। उनके अनुसार, मीडिया ने उन्हें गलत तरीके से उद्धृत किया। फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने लिखा है: चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने नहीं कहा कि “अमेरिका ने हमें जवाबी कार्रवाई करने से रोक दिया।”। मीडिया द्वारा गलत कोट किए जाने की बात उन्होंने “पेरिल्स ऑफ टॉकिंग टू मीडिया” शीर्षक से भी कही है। चिदंबरम का कहना है कि उन्होंने जो कहा, वह “अंतरराष्ट्रीय दबाव” और “विदेश मंत्रालय/ भारतीय विदेश सेवा के सुझाव” थे। सीधे यह नहीं कहा था कि अमेरिका ने मजबूर कर दिया कि हम हमला न करें। यह विवाद नया नहीं है। कांग्रेस या अन्य नेताओं ने पहले से इस विषय पर टिप्पणियाँ दी हैं कि “नुकसान” या “सख्त कार्रवाई न कर पाना” हो चुका है। लेकिन अभी यह गंभीर हुआ है तो इसलिए कि भाजपा की राजनीति है, हेडलाइन मैनेजमेंट तो है ही। मीडिया ने भी चिंदबरम के बयान को, “अमेरिका ने हमें रोक दिया” की दिशा में मोड़ दिया। इससे चिदंबरम को सफाई देनी पड़ी। यह विवाद इस दावे को लेकर है कि 26/11 के बाद भारत की सेना ने जवाब देने की इच्छा जताई थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने “विदेशी दबाव/सुझाव” के कारण उस कार्रवाई को रोका। यह दावा चिदंबरम ने (हाल में) एक इंटरव्यू / पॉडकास्ट में व्यक्त किया, जिसमें उन्होंने कहा कि “अंतरराष्ट्रीय दबाव” और सलाहकारों ने निर्णय को प्रभावित किया। पहले से इस तरह की आलोचना थीं कि सरकार पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दे सकी। लेकिन चिदंबरम का यह विस्तृत बयान और उदाहरण (राइस की यात्रा आदि) नया है। ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री को यह सब पता नहीं होगा और नहीं था तो उन्हें अपने सूचना तंत्र को दुरुस्त करने की जरूरत है। किसी संजय बारु की सेवा ले सकते हैं लेकिन बाद में किताब नहीं लिखेगा इसकी गारंटी कैसे मिले?

एआई के जमाने में मुझे चिदंबरम का मूल बयान भी मिल गया जो विभिन्न समाचार स्रोतों के अनुसार, चिदंबरम ने एबीपी न्यूज के मेघा प्रसाद के साथ बातचीत में कहा था : “मेरा रुझान” था कि जवाबी कार्रवाई होनी चाहिए — “यह बात मेरे दिमाग में आई थी कि हमें कोई जवाबी कार्रवाई करनी चाहिए।” लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार ने विदेश मंत्रालय और विदेश सेवा अधिकारी की सलाह और “वैश्विक दबाव” को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया कि भौतिक कार्रवाई नहीं की जाए और कूटनीतिक/ राजनयिक उपायों को प्राथमिकता दें। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री कॉन्डोलीज़ा राइस ने दिल्ली आकर यह संदेश दिया था कि “कृपया जवाबी कार्रवाई न करें/युद्ध शुरू न करें)”। उन्होंने यह भी कहा कि यह चर्चा प्रधानमंत्री और अन्य “उन लोगों” के साथ की थी जो मतलब रखते थे। उन्होंने यह तर्क दिया कि उस समय स्थिति और तैयारियाँ वर्तमान (2025) से बहुत अलग थीं — युद्ध अभियानों, खुफिया और सैन्य तैयारियों आदि — इसलिए वर्तमान के अनुभव से 2008 की स्थिति की तुलना न करें। मुझे लगता है कि चिदंबरम ने इस मामले की चर्चा नरेन्द्र मोदी की विदेश नीति और कूट नीति का हल्कापन बताने के लिए की होगी और सरकार को जब लगा कि मामला उधर जा सकता है तो उसने सहयोगी मीडिया के सहयोग से मामले को ही पहले ही मोड़ दिया और ना कोई घुसा है …. की चर्चा ही नहीं हुई जबकि चीन कई बार वापस गया, पीछे हुआ आदि आदि। ऐसा ही जीएसटी के मामले में हुआ पर यह भाजपा की मजबूती है और इसीलिए मैं कहता हूं भाजपा पर रोक लगे। #BanBJP (समाप्त)

पहला पार्ट पढ़ें – आज के अखबार बता रहे हैं कि प्रधानमंत्री मुद्दे पर नहीं रहते हैं, आरोप लगाने से पहले जांच भी नहीं करते!

लिंक – https://www.bhadas4media.com/aaj-ke-akhbaar-bata-rahe-hain-ki-pradhaan-mantri-mudde/

लेखक संजय कुमार सिंह से संपर्क [email protected] के ज़रिए किया जा सकता है।

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