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सोशल मीडिया पर पत्रकार ही नहीं, कोई भी, कुछ भी लिख देता है, गलती बताने पर भी नहीं मानता

आज के अखबार – दो

संजय कुमार सिंह

नरेन्द्र मोदी की सरकार में पत्रकारिता का तो जो हुआ सो हुआ ही है, पीआईबी से फैक्ट चेक कराना और सोशल मीडिया की ट्रोल सेना का उपयोग (असल में आम जनता के लिए दुरुपयोग) भी आम है। लेकिन बात इतनी ही नहीं है, सरकार चाहती है कि उसके पास यह अधिकार रहे कि सोशल मीडिया से जिस पोस्ट (या वीडियो) को चाहे उसे हटवा सके और जिसे चाहे उसे रहने दे। कारण नहीं बताना पड़े और बिग बॉस चाहते हैं कि जैसे जुमले से काम बन जाए। नतीजा यह है कि पुराने, बेमतलब हो चुके कानूनों को खत्म करने के दावे के साथ वे ऐसे कानून बना रहे हैं जिससे उनकी मनमानी आसान हो। मुख्य चुनाव आयुक्त को सुरक्षा ऐसे कानूनों में एक है। इन सारी कोशिशों का असर यह है कि सोशल मीडिया पर कोई भी कुछ भी लिख देता है और ज्ञान की बातें करता है। इसमें कार्रवाई उसी पर होती है जो सरकार के खिलाफ होती है। बाकी सब बेरोक-टोक जारी है। मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने का समर्थन-प्रचार आदि भी। व्हाट्सऐप्प तो ऐसी खबरों का यूनिवर्सिटी ही है। छोटे-मोटे प्रचारकों के साथ प्रधानमंत्री भी इसके लिए सामग्री देते रहते हैं। कल के अखबारों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हवाले से छपा था कि सरदार पटेल चाहते थे कि पूरा कश्मीर हमारा हो, नेहरू ने उन्हें ऐसा होने नहीं दिया। यह बात सही भी हो तो अब बोलने का क्या मतलब और जब कहा ही गया था तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मांग की कि आरएसएस पर फिर प्रतिबंध लगे। उन्होंने यह भी कहा कि देश में भाजपा-आरएसएस के कारण कानून व्यवस्था की दिक्कतें हो रही हैं। यही नहीं, खरगे ने यह भी कहा था कि जिन लोगों ने गांधी जी की हत्या की आज उसी विचारधारा के लोग कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी सरदार पटेल को याद नहीं करती है। यह सब अखबारों में प्रमुखता से नहीं छपा।

जहां तक कश्मीर के भारत में विलय की बात है, पूरा मामला जो जानना चाहते हैं उन्हें पता है। मोटे तौर पर स्थिति यह है और भाजपाइयों को नहीं पता होने का कोई कारण नहीं है कि विलय सशर्त थी और उसी शर्त (संविधान के अनुच्छेद 370 को) के तहत मोदी सरकार ने 2019 में बहुमत मिलने के बाद 5 अगस्त 2019 को हटा दिया था। इसका नफा-नुकसान तो छोड़िये सरकार पांच साल चुनाव नहीं करा पाई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जब करा पाई तो उसकी लोकप्रियता का पता चल गया और उस समय राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने से पता चला कि पूरे कश्मीर का एक साथ विलय कितना आसान होता और हो गया होता तो मोदी जी 370 भले नहीं हटाते या होता ही नहीं। एक राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश बनाते कि नहीं और नहीं बनाते तो अब क्यों बनाया। जाहिर है कि इन सवालों का जवाब नहीं मिलने वाला है। तथ्य यह है कि 370 हटाने और ये सब करने के लिए मोदी सरकार ने जो आदेश जारी किया था उसमें टाइपिंग और हिज्जे की ढेरों गलतियां थीं। छपी खबरों के अनुसार तब शुद्धि पत्र निकालकर इन्हें ठीक किया गया था। इससे समझा जा सकता है कि 1947 में पूरे कश्मीर का विलय कितना आसान रहा होगा कि उस समय भी कुछ पाकिस्तान में गया तो कुछ अभी भी चीन के कब्जे में है और केंद्र शासित प्रदेश बनाने का विरोध सोनम वांगचुक भी करने लगे थे और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे। भाजपा समर्थक, अंतरराष्ट्रीय हस्ती होने के बावजूद जेल भेज दिए गए। सरकार के पुरजोर विरोध के कारण जमानत नहीं हो पा रही है।

प्रधानमंत्री के खुलासे के आधार पर कल छपी खबर के बारे में एस इरफान हबीब (एएमयू वाले प्रोफेसर इरफान हबीब नहीं) ने कहा है कि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है। प्रधानमंत्री की गलतबयानी पर चर्चा हुई तो यह भी सार्वजनिक हुआ कि नरेंद्र मोदी ने दैनिक भास्कर को 2013 में दिए इंटरव्यू में कहा था, “जवाहरलाल नेहरू सरदार पटेल की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हुए थे!” इंटरव्यू छपने के तत्काल बाद सरदार पटेल की अंतिम यात्रा की तस्वीर आ गई थी जिसमें नेहरू सरदार पटेल के पार्थिव शरीर के पास खड़े दिखाई दे रहे हैं। मोदी ने अपनी गलत बयानी के लिए खेद व्यक्त नहीं किया, अखबार ने कोई स्पष्टीकरण छापा हो तो वह इतनी प्रमुखता से नहीं ही छपा होगा और इस तरह मोदी ने अपना काम कर लिया। अब लगता है कि रणनीति वही है। कश्मीर वाला मामला भी वैसा ही होगा। अगर प्रधानमंत्री के स्तर पर यह सब चल रहा है तो देश भर में क्या सब हो रहा होगा अनुमान लगाना भी मुश्किल है। इसका नुकसान हुआ है कि झूठ प्रकाशित होना और सच को झूठ की चाशनी में परोसना आम है। इससे खबरों और मीडिया संस्थानों की साख खराब हुई है और जब सभी संस्थानों की हुई है तो अखबारों की भी हुई है। संभव है, ऐसा जानबूझकर किया जा रहा हो क्योंकि इसके लाभार्थी सरकार समर्थक लोग ही हैं। हेडलाइन मैनजमेंट के बावजूद सरकार समर्थकों और प्रचारकों को सबसे ज्यादा परेशानी फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर से है। 

उदाहरण के लिए स्वाति मालीवाल ने ट्वीटर पर एक पोस्ट में लिखा, दिल्ली का शीश महल ख़ाली होने के बाद अरविंद केजरीवाल जी ने पंजाब में दिल्ली से भी शानदार शीश महल तैयार करवा लिया है। चंडीगढ़ के सेक्टर दो में सीएम कोटे की दो एकड़ की आलीशान सात स्टार सरकारी कोठी अरविंद केजरीवाल जी को मिल गई है। कल अंबाला के लिए घर के सामने से सरकारी हेलीकॉप्टर में बैठे, फिर अंबाला से पंजाब सरकार का निजी विमा उन्हें पार्टी के काम से गुजरात ले गया। पूरी पंजाब सरकार एक आदमी की सेवा में लगी है। जाहिर है, स्वाति मालीवाल का उद्देश्य अरविन्द केजरीवाल को पंजाब सरकार के कोटे से चंडीगढ़ में एक बंगला मिल जाने की खबर देना था हालांकि इसमें भी वे केजरीवाल के नाम के आगे जी लगाना नहीं भूलीं और दोनों दफा जी है। इसके साथ गूगल नक्शे का स्क्रीन शॉट था और एक खाली मैदान को तीर से हाईलाइट किया गया था। इसे शेयर करते हुए मोहम्मद जुबैर ने लिखा, नमस्ते। आपने गूगल मैप का जो स्क्रीनशॉट पोस्ट किया हैं, वह हरियाणा के कृषि मंत्री कार्यालय के बगल वाली एक इमारत का है। यह इमारत अभी नहीं बनी है, बल्कि सालों से वहाँ है। यहाँ उस इमारत की 2013-2024 की गूगल तस्वीरें हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि आपको दो एकड़ का आँकड़ा कैसे मिला। इमारत के सामने खाली ज़मीन (जैसा कि तीर से दर्शाया गया है) अधिकतम 20,000 वर्ग फुट है। दो एकड़ (87,120 वर्ग फुट) नहीं।

जाहिर है कि इसमें सिर्फ तथ्यों को सुधारा गया है और उन तथ्यों को ही जो सार्वजनिक तौर पर आसानी से उपलब्ध हैं। स्वाति मालीवाल का मकसद जो था उसपर यह कोई टिप्पणी नहीं करता है। हालांकि, फैक्ट चेकर को बताना चाहिए था कि भाजपा सरकारों ने किन राज्यों में और केन्द्र में कितने लागों को ऐसे बंगले बांट रखे हैं और यह राज्यपाल बनाने पर मिलने वाले बंगलों के अलावा है। ऐसे में पंजाब सरकार ने अगर केजरीवाल को बंगला आवंटित किया है तो खबर नहीं है या खबर है तो पहले की भी खबरें हैं। इसके बावजूद स्वाति मालीवाल ने आज इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर साझा करते हुए लिखा है, तथाकथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने यह साबित करने में दिन-रात मेहनत की कि केजरीवाल जी चंडीगढ़ के जिस आलीशान बंगले का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह कोई सामान्य इमारत है। इंडियन एक्सप्रेस की यह रिपोर्ट ज़रूर पढ़ें जो उनके झूठे प्रचार का पर्दाफ़ाश करती है!अब उन्हें अपना ट्वीट डिलीट कर देना चाहिए और बिना शोध किए पोस्ट करने के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए। मालीवाल ने खबर का जो हिस्सा साझा किया है वह इस प्रकार है, चड्ढा का फोकस बदल गया। सूत्रों ने बताया कि केजरीवाल के लिए बंगले की सफाई और “सजावट” की गई, जो पहले राज्य के दौरे पर मोहाली के विकास भवन गेस्ट हाउस में ठहरते थे। कुछ दिन पहले चंडीगढ़ पहुँचे केजरीवाल के बारे में बताया जा रहा है कि वे बंगले में बैठकें कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवत मान अक्सर केजरीवाल से मिलने और बैठकों में हिस्सा लेने के लिए बंगले में आते-जाते देखे जाते हैं। मान बंगला नंबर 44 में रहते हैं, जो बंगला नंबर 50 से कुछ ही मीटर की दूरी पर है। मुख्यमंत्री का कैंप कार्यालय बंगला नंबर 43 में है जो मुख्यमंत्री के पूल में उन्हें ही आवंटित है। यह खबर भाजपा के आरोपों पर आधारित है और संभव है मालीवाल की पोस्ट के बाद बनी हो या मालीवाल ने इस खबर को प्रचारित करने के लिए ट्वीटर पर पोस्ट किया हो। जहां तक मालीवाल का मामला है, वे केजरीवाल को बंगला आवंटित किए जाने की खबर में तथ्य सुधारे जाने या तथ्यों के सही होने से बेफिक्र है। और दिलचस्प यह कि केजरीवाल ने इस प्रतिभाशाली महिला को राज्यसभा में भेजा है जो अब सीधे-सीधे भाजपा के लिए काम कर रही हैं। मैं समझता था कि केजरीवाल प्रतिभाशाली लोगों को ही साथ लेते हैं पर ऐसा नहीं करने का जो हश्र हो सकता है, स्वाति मालीवाल उसकी उदाहरण लगती है। पुराने कुमार विश्वास से लेकर प्रशांत भूषण को हम देख ही रहे हैं। (समाप्त)  

पहला भाग – आज के अखबार : कश्मीर के भारत में विलय पर नरेन्द्र मोदी के दावे को लेकर कोई सक्रियता-प्रतिक्रिया नहीं है

लिंक – https://www.bhadas4media.com/kashmir-ke-bharat-mein-vilay-par-narendra-modi/

लेखक, संजय कुमार सिंह [email protected] से के जरिए संपर्क किया जा सकता है।

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