संजय कुमार सिंह
नरेन्द्र मोदी नेता चाहे जैसे हों राजनीतिक व्यंग बहुत अच्छे करते हैं। अपने कार्यकाल व उपलब्धियों को भी व्यंग बना देते हैं जो समझने वालों को समझ में आ भी जाए तो मनोरंजन में कोई कमी नहीं छोड़ता। आज जब ज्यादातर अखबारों की लीड श्रीनगर के थाने में विस्फोट जैसे ‘सुशासन’ की खबर है तो अमर उजाला ने प्रधानमंत्री के इस दावे को लीड बनाया है कि, बिहार की जनता ने जातिवाद के जहर को नकारा, विकास को चुना। कहने की जरूरत नहीं है कि बिहार की जीत मोदी या भाजपा की जीत नहीं है। नीतिश कुमार की जीत है और महिलाओं के वोट के लिए अग्रिम भुगतान करके हासिल की गई है। राजग की जीत में वोट चोरी भी शामिल है। इसपर तरह-तरह के बयान, टिप्पणियां और खबरें हैं जो अमर उजाला जैसे अखबारों में होती नहीं हैं। गनीमत यही है कि नौगाम थाने में विस्फोट की खबर सेकेंड लीड है। हालांकि, शीर्षक में नौ लोगों की मौत की खबर नहीं है और बताया गया है कि यह आतंकी वारदात नहीं है। आतंकवाद खत्म करने का दावा करने वाली सरकार के शासन में कश्मीर के थाने में विस्फोट बड़ी बात है। यह आतंकी हरकत नहीं भी है और दुर्घटना ही है तो आखिर बरामद विस्फोटक थाने में क्यों रखा था। उसकी सुरक्षा की व्यवस्था किसे करनी थी, क्यों नहीं की गई। ऐसी कोई चर्चा अब की पत्रकारिता में नहीं होती है। मैं ढूंढ़ भी नहीं रहा। लेकिन हेडलाइन मैनेजमेंट का आलम यह है कि उपशीर्षक है, गृहमंत्रालय ने कहा – आतंकी संगठन पीएएफएफ का दावा शरारतपूर्ण। जाहिर है, दावा क्या था ढूंढ़ना पड़गा। मैं रहने देता हूं। मुझे तो खबरों का हाल बताना है। कुल मिलाकर, दावा नरेन्द्र मोदी का है जिसे प्रचारित किया गया है यह दावा रेखांकित करने लायक है। इसमें खबर जो थी या है वह रह गई कि विस्फोट जिसे पुलिस प्रशासन दुर्घटना बता रहा है उसकी किसी ने जिम्मेदारी ली है और विस्फोट थाने में खुले में रखे, सफेदपोश आतंकवाद में बरामद विस्फोटक की जांच के लिए नमूना लेने के समय हुआ। एक सफेदपोश आतंकवाद क्योंकि संदिग्ध डॉक्टर था और जहां आतंकी संगठन जिम्मा ले रहा है वह दुर्घटना – यह खबर है लेकिन बताई नहीं गई है। जहां तक प्रधानमंत्री के दावे की बात है, यह अजीब है कांग्रेस या राजद को कम वोट मिलने का मतलब यह लगा लिया गया कि बिहार की जनता ने जातिवाद के जहर को नकार दिया और विकास को चुना। कहने की जरूरत नहीं है कि दोनों दलों को कम वोट आने के कई कारण हैं और राजग की जीत के अलग। इसे जातिवाद से तब जोड़ा जा रहा है जब जाति के नाम पर वोट नहीं मांगने वाले प्रशांत किशोर और उनकी जनसुराज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली है। जातिवाद को ऊंची जाति वाले और भाजपा के समर्थक तो नहीं ही मानते हैं लेकिन वो क्यों नहीं मानेगा जिसके मुंह पर मूता जाता है। और अगर वह जातिवाद को नहीं मानेगा तो क्या ज्यादाती करने वालों को वोट देकर बताएगा और बताया तो इसे मान लिया जाए? इसका साफ संदेश है कि जातिवाद के पीड़िच लोग अपने मन से वोट भी नहीं दे पाए हैं। लेकिन प्रधानमंत्री कुछ और प्रचारित कर रहे हैं।
जहां तक विकास और विकास को चुनने की बात है, अगर बिहार की जनता ने वाकई राजग को चुना हो तो जाहिर है उसे इस विकास का मतलब नहीं पता है या उसे बता दिया गया है कि विकास का मतलब वही होता है जो बिहार में हुआ है। बिहार में चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार के अवसर बेहतर होने की कोई खबर नहीं है। सुशासन की चौथाई सदी में प्रति व्यक्ति आय औसत से कम रहना साधारण नहीं है। अगर इस दिशा में कुछ किया गया होता तो उसपर वोट मांगा जाता और इससे संबधित जानकारी सार्वजनिक होती जबकि विकास के लंबे चौड़े दावों के बारे में कहा जाता है कि कमीशन पहले ही देना होता है। इस तरह स्कूल और अस्पताल खोलने के मुकाबले सड़क और फ्लाइओवर बनाने में कमाई और कमीशन निश्चित है इसलिए अब कोई इसकी भी बात नहीं करता। सरकार क्या कर रही है, हर किसी को समझ में आने लगा है। इसलिए प्रधानमंत्री को अपनी बात ज्यादा जोर से कहनी पड़ रही है और उससे हेडलाइन मैनेजमेंट हो नहीं रहा है। कुल मिलाकर यह सरकार प्रचार और नैरेटिव पर ही टिकी हुई है। इसलिए प्रचारक परेशान हैं। वह भी दिख रहा है। लेकिन उसे छोड़िए आज की दूसरी खबर थाने में विस्फोट के ‘सुशासन’ को देखूं। देशबन्धु में यह खबर लीड है। शीर्षक है, श्रीनगर के थाने में धमाका, नौ की मौत। इसके साथ सिंगल कॉलम की खबर है, “नौगाम थाने में विस्फोट दुर्घटनावश : गृहमंत्रालय”। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक भी कुछ ऐसा ही है, नौगाम थाने में विस्फोट, नौ की मौत। वास्तविकता या पूरा मामला यह है कि सफेदपोश आतंकवाद की वारदात दिल्ली में, बरामदगी हरियाणा में, जब्त माल रखा गया कश्मीर में। वहां उसमें विस्फोट हो गया, आतंकी संगठन ने जिम्मेदारी ली पर पर दुर्घटना कहकर हात झाड़ लिया गया। अब नए सफेदपोश आतंकवाद की जांच और उसे खत्म करने के लिए समय दीजिए। यह सब करत हुए नौगांव थाने में नौ मरे।
अंग्रेजी अखबारों में इंडियन एक्सप्रेस और द हिन्दू में यह खबर कल भी छपी थी। इंडियन एक्सप्रेस ने डीजीपी के हवाले से लिखा है कि थाने में ब्लास्ट दुर्घटना थी, नौ मारे गए। खबर के अनुसार मरने वालों में पुलिस वाले, राजस्व अधिकारी, पुलिस फोटोग्राफर और दर्जी है। एक और खबर है जिसका शीर्षक है, पुलिस ने कहा – आतंकी वारदात का कोई मामला नहीं, सामग्री खुले में रखी थी, निरीक्षण जारी था। कश्मीर में थाने के पास खुले में कुछ सौ किलो विस्फोट रखे हों और उनमें विस्फोट हो जाए – तो यह दुर्घटना हो या जानबूझकर किया गया या हो जाए तो होने दिया गया वाला हादसा – मरने वालों को या उनके परिवार को क्या फर्क पड़ेगा? कहने की जरूरत नहीं है कि कानून ऐसा है कि इसे खुले में ही सही, सुरक्षित रखना और वह जगह थाने के पास होनी थी, इसमें अचानक विस्फोट की आशंका चाहे जितनी कम हो, हुई और मरने वालों से जितनी सहानुभूति हो परिवार के लिए उनकी भरपाई नहीं हो सकती है। फिर भी यह सब हुआ क्योंकि कानून है और कानून को बदला नहीं गया है क्योंकि बरामद विस्फोटक भी सबूत है। और सजा देने के लिए जज का संतुष्ट होना जरूरी है कि बरामद पदार्थ विस्फोटक ही था। लेकिन जो कानून बदल सकता है, लाखों लोगों के जीवन-मरण से संबंधित फैसले ले सकता है वह अपनी जरूरत या इच्छा से कानून बदल दे रहा है और यह मुद्दा नहीं है। राहुल गांधी जैसी हस्ती इसपर ध्यान दे रहा है, इसे ठीक करने के लिए परिश्रम कर रहा है, बदनामी और अपमान झेल रहा है लेकिन लोग समझ नहीं रहे हैं क्योंकि प्रचार कुछ और है। अभी यहां यह मुद्दा नहीं है।
द हिन्दू में भी यह खबर आज लीड है। शीर्षक है – आतंकी मॉड्यूल के जब्त जखीरे में विस्फोट, नौ की मौत। खबर में कहा गया है, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि शुक्रवार रात श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में एक आकस्मिक विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई और 32 अन्य घायल हो गए। पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने शनिवार को बताया कि विस्फोट उस समय हुआ जब अधिकारियों की एक टीम पुलिस स्टेशन परिसर में एक खुले क्षेत्र में रखे विस्फोटक पदार्थों की जाँच कर रही थी। उन्होंने बताया कि ये विस्फोटक 9 और 10 नवंबर को हरियाणा के फरीदाबाद से जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा एक “सफेदपोश” अंतर-राज्यीय आतंकी मॉड्यूल की चल रही जाँच के दौरान जब्त किए गए थे। खबरों से लग रहा है कि सफेदपोश अपराध की जांच का तरीका वही रहा और संबंधित पेशेवर विस्फोट की चपेट में आए हैं। इसमें गौर तलब है कि विस्फोट दिल्ली में हुआ, अपराधी हरियाणा के थे और हरियाणा में बरामद जखीरे को कश्मीर ले जाया गया और वहां न सिर्फ नौ लोगों की जान गई 32 लोग जख्मी भी हुए हैं। ऐसा नहीं है सुशासन में दुर्घटनाओं से छूट होती है। वैसे भी घुस कर मारने के वादे के बाद यह हादसा शर्मनाक है और सुशासन पर सवाल उठाता है लेकिन मोदी है तो मुमकिन है।
हिन्दुस्तान टाइम्स में भी यह खबर लीड है। बहुत रूटीन शीर्षक से और ऐसे जैसे बिल्कुल नई घटना हो। अमूमन छूटी हुई खबरें अगले दिन लीड नहीं बनती हैं। आप जानते हैं कि दिल्ली में इंडियन एक्सप्रेस और द हिन्दू ने इसे कल ही छाप दिया था। इसलिए यह खबर पुरानी है पर दोनों अखबारों में लीड है। इंडियन एक्सप्रेस ने तो दुर्घटना बताने का जिम्मा लिया है जबकि द हिन्दू ने रूटीन खबर के रूप में छापा है। पहले ही पैरे में लिखा भी है कि शुक्रवार रात की घटना है। कई पुरानी घटनाएं ऐसी खबरों के दोबारा पहले पन्ने पर नहीं होने की गारंटी है। बेशक सफेदकॉलर आतंकवाद का उदाहरण न मिले पर कल जो खबर छप चुकी है वह आज फिर लीड बनी है क्योंकि यह हेडलाइन मैनेजमेंट का निर्देश होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया ने शीर्षक में एक संयोग को याद दिलाया है। इसकी चर्चा मैं भी ऊपर कर चुका हूं। खास बात यह है कि यहां यह शीर्षक में है, “फरीदाबाद की बम सामग्री के जम्मू और कश्मीर थाने में फटने से नौ मरे”। वैसे तो विस्फोट की खबर के साथ छपी फोटो से लग रहा है कि बिल्डिंग क्षतिग्रस्त हुई है पर यह जानकारी प्रमुखता से नहीं दिखी। टाइम्स ऑफ इंडिया में दूसरी फोटो है पर फ्लैग शीर्षक में डीजीपी, एमएचए ने कहा विस्फोट दुर्घटना है – के साथ यह भी बताया गया है कि बिल्डिंग नष्ट हो गई। यह साधारण नहीं है कि पहली बार पता चले सफेदपोश आतंकवाद में जांच करने वालों का इतना नुकसान हो गया।
दि एशियन एज ने बिहार चुनाव की खबर को ही लीड बनाया है। शीर्षक है – राजग में सत्ता की चर्चा गरमाई, जेडी-यू ने कहा मुख्यमंत्री की कोई रिक्ति नहीं। आज कई अखबारों में नीतिश और चिराग की तस्वीर एक साथ है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि राज्य की 243 सीटों में से सबसे ज्यादा बीजेपी ने 89 सीटें जीती हैं। वहीं सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड को 85 सीटें मिली हैं। एनडीए में शामिल चिराग पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास ) को 19 सीटें मिली हैं। ऐसी हालत में कश्मीर के थाने में विस्फोट में मारे गए लोगों के तिरंगे में लिपटे ताबूत पर श्रद्धासुमन अर्पित करते उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की तस्वीर पुलवामा की याद दिलाती है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


