संजय कुमार सिंह
आज प्रदूषण पर भांति-भांति की खबरें हैं। हो सकती हैं लेकिन जो नहीं है और जो खास है उसी की चर्चा करना मेरा काम है। अमर उजाला की खबर का शीर्षक है, “प्रदूषण की मार : दिल्ली में 50 फीसदी कर्मचारियों को घर से करना होगा काम”। फ्लैग शीर्षक है, हवा हुई खराब तो सरकार ने ग्रेप-3 के तहत उठाया सख्त कदम। इसके साथ, गाजियाबाद-नोएडा की हवा भी जहरीली – हाईलाइट किया हुआ है। नवोदय टाइम्स की खबर का शीर्षक है, “प्रदूषण प्रदर्शन के दौरान हिडमा की पैरोकारी आरोप : पुलिस पर पेपर सप्रे फेंका, 22 गिरफ्तार। दो को न्यायिक हिरासत में भेजा”। प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस ज्यादाती, उसकी फोटो और उसे हटा लिए जाने की चर्चा मैं कल कर चुका हूं। पुलिस पर पेपर स्प्रे की खबर भी कल थी। आज यह पुलिस का बचाव या प्रचार है। कहने की जरूरत नहीं है कि मुद्दा प्रदूषण है। उसमें अगर कुछ लोगों ने गलत किया तो निश्चित रूप से वह गलत है, पुलिस कार्रवाई करती है, करे। पर मूल खबर वह नहीं हो सकती है और अगर हो रही है तो जाहिर है कि मुद्दे को पीछे करने की कोशिश है और यह सब कौन करता है, कबसे हो रहा है – बताने की जरूरत नहीं है। मीडिया के लिए कुछ नया नहीं है। पर हो वही रहा है जो सिस्टम चाहता है या उसके अनुकूल है। नवोदय टाइम्स की खबर बताती है कि पुलिस ने प्रदर्शन नहीं करने दिया। भारी तैनाती थी। जाहिर है, खबर यह है पर पुरानी सूचना को शीर्षक बनाया गया है। तय करना मुश्किल है कि यह अयोग्यता है या सेवा। सामान्य पत्रकारिता तो नहीं ही है।
नवोदय टाइम्स की खबर का शीर्षक है, दिल्ली में लोगों का सांस लेना दूभर। इसके साथ ही खबर है, प्रदर्शन कर रहे 22 लोगों को गिरफ्तार किया। इसमें लिखा है, दिल्ली पुलिस ने सोमवार को इंडिया गेट पर प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित तौर पर ‘मिर्च स्प्रे’ से हमला करने और यातायात बाधित करने के आरोप में 22 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया। यह प्रदर्शन शुरू में राजधानी में खराब वायु गुणवत्ता को लेकर किया जा रहा था। आप समझ सकते हैं कि मिर्च स्प्रे से हमला कितनी बुद्धिमानी है और कौन करेगा।। पर बात इतनी ही नहीं है, प्रदर्शनकारियों को यातायात बाधित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। देश भर में यातायात का जो हाल है सो सबको पता है। जरा सी बारिश में यातायात का जो हाल होता है और कोई दुर्घटना भी हो जाए तो घंटो जाम रहने पर कोई कार्रवाई नहीं करने वाली पुलिस या व्यवस्था प्रदर्शन के दौरान यातायात बाधित होने के लिए कार्रवाई कर कर रही है तो मुझे लगता है कि खबर है और ठीक ही छपा है। इसे और महत्व दिया जा सकता था। यह तो हुई हिन्दी अखबारों की बात।
अंग्रेजी अखबारों में दि इंडियन एक्सप्रेस की खबर है, राजधानी में गाड़ियों का गैर आनुपातिक भार जांच के घेरे में। दिल्ली का दम घुटा : पीएमओ ने वाहनों को चिन्हित किया, 37% अनुकूल नहीं हैं, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अपील। उपशीर्षक है – दिल्ली, यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान से कहा गया कि शीघ्र ‘व्यावहारिक परिणाम-उन्मुख’ उपाय अपनाएं। कहने की जरूरत नहीं है कि प्रदूषण पर पीएमओ की इस सक्रियता की सूचना अखबार के लीड के रूप में देना सरकार के काम का प्रचार है वरना खबर तो यही है कि दिल्ली का दम घुटने के बावजूद, प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन नहीं करने दिया गया क्योंकि कुछ ‘बुद्धिमान’ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पेपर स्प्रे से ‘हमला’ कर दिया और पुलिस ने उनके खिलाफ यातायात बाधित करने की कार्रवाई की है जबकि पीएमओ के अनुसार इसका कारण गाड़ियों का गैरआनुपातिक भार हो सकता है। कहने की जरूरत नहीं है कि 10 साल से नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री रहने के बावजूद है। इसका एक मतलब यह भी है कि सरकार या प्रधानमंत्री या पीएमओ ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। तथ्य है कि मेट्रो का किराया कम रखने की अपील पर ध्यान नहीं दिया गया और उसमें भारी वृद्धि होती रही है। इस और दूसरे कारणों से इसकी उपयोगिता सीमित रही हो तो उसपर कोई विचार, अनुसंधान या सर्वेक्षण की सूचना नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस ने लीड के साथ छपी खबर में बताया है कि दिल्ली में घर से काम करने के आदेश दिए गए हैं। निजी दफ्तरों से कहा गया है कि वे आधे कर्मचारियों से काम चलाएं और बाकी से घर से काम करवाएं। यह खबर (या आदेश) पुरानी है और मैं यहां पहले बता चुका हूं।
हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रदूषण, प्रदर्शन, पुलिसिया कार्रवाई और पीएमओ की सक्रियता से संबंधित इन खबरों में सिर्फ एक सूचना पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में है कि संशोधित ग्रैप 3 नियम लागू हो गए हैं और दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि 50 प्रतिशत लोगों से घर से काम करवाया जाए। यह विस्तार में खबर अंदर के पन्ने पर होने की सूचना है। टाइम्स ऑफ इंडिया में भी यही स्थिति है यहां सिंगल कॉलम की खबर को थोड़ी ज्यादा प्राथमिकता मिली है। एक और खबर है जो प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की सूचना देती है। यह डेढ़ कॉलम में छपी है। शीर्षक है, साफ हवा के लिए प्रदर्शन में नक्सल पोस्टर, 22 गिरफ्तार। द हिन्दू में दिल्ली के कार्यालय 50 प्रतिशत कर्मचारियों से काम करेंगे की खबर है। इसमें बताया गया है कि दिल्ली सरकार ने ऐसा आदेश दिया है और इसका विस्तार अंदर के पन्ने पर है। दि एशियन एज में मौसम की खबर के साथ बताया गया है कि एक्यूआई 382 रहा और न्यूनतम तापमान 9.3 डिग्री सेल्सियस रहा। अखबार की लीड यह बताती है कि अयोध्या प्रधानमंत्री के दौरे के लिए तैयार है। यह खबर इंडियन एक्सप्रेस में भी पहले पन्ने पर दो कॉलम में है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह सिगल कॉलम में है। द हिन्दू और टाइम्स ऑफ इंडिया में नहीं है। कोलकाता के द टेलीग्राफ में दिल्ली में प्रदूषण, इसके खिलाफ प्रदर्शन, इसपर पुलिसिया कार्रवाई और पीएमओ की सक्रियता के साथ-साथ प्रधानमंत्री के अयोध्या दौरे की खबर भी पहले पन्ने पर नहीं है। प्रधानमंत्री की धार्मिक यात्रा निश्चित रूप से खबर है। लेकिन यह रोज-रोज की बात है और उनकी राजनीति का हिस्सा है तो संपादकीय विवेक की आवश्यकता है और दिख रहा है कि दि एशियन एज का निर्णय दूसरे अखबारों से अलग है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


