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आज के अखबार : हिन्दुस्तान टाइम्स ने पूछा है,  जब राजधानी रेंग रही है, यातायात पुलिस वाले कहां हैं? 

राजा का बाजा बताते हुए अमर उजाला, इंडियन एक्सप्रेस और द हिन्दू में हेडलाइन मैनेजमेंट वाली सुर्खियां है। पता चला, कपड़ा क्षेत्र पर असर की आशंका नहीं भारत को भी मिलेगा शून्य टैरिफ लाभ। जनहित की सूचनाएं सिंगल कॉलम में हैं। हालांकि, जनरल नरवणे की किताब लीक होने में विदेशी हाथ की खबर आज द टेलीग्राफ में है। अगर कानून के पालन और सरकारी काम-काज की बात करें तो टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने पर खबर है, सांप काटना दहेज के लिए मौत नहीं है। न्यू इंडिया की कुछ खबरें जानिए।

संजय कुमार सिंह

राहुल गांधी ने अमेरिका से हुए करार की किसान विरोधी नीतियों का खुलासा किया तो सरकारी प्रचार आज कई अखबारों में लीड है। जहां लीड नहीं है वहां तीन कॉलम में है। अमर उजाला में लीड इस खबर का शीर्षक है, कपड़ा क्षेत्र पर असर की आशंका नहीं भारत को भी मिलेगा शून्य टैरिफ लाभ। यह खबर आज द हिन्दू की भी लीड है और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री के हवाले से है। खबर के अनुसार वाणिज्य मंत्री ने कहा कि ढाका की वॉशिंगटन के साथ डील पक्की होने के बाद भारत को टेक्सटाइल एक्सपोर्ट पर छूट मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि करार को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हमारे पास बारीक विवरण हैं। जाहिर है कि करार अभी हुआ नहीं है और बारीकियों की चर्चा जरूरी नहीं है लेकिन जिन खास बातों को राहुल गांधी ने भारत के खिलाफ बताया वह गलत नहीं था और अब जो खबर है वह अमर उजाला के शीर्षक से अनुमान या उम्मीद है। मैं नहीं कहता कि अनुमान या उम्मीद खबर नहीं है लेकिन जिस ढंग से इस खबर के कारण दूसरी खबरें दब या पिट रही हैं, मुद्दों को घुमाया या बदला जा रहा है वह हेडलाइन मैनेजमेंट के सिवा कुछ और नहीं है। इसीलिए यह खबर, हिन्दुस्तान टाइम्स में पीटीआई के हवाले से सिंगल कॉलम में है। कुछ और अखबारों में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। 

इस खबर की जगह आज जो दूसरी खबरें छप सकती थीं उनमें हिन्दुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर छपी लीड और टाइम्स ऑफ इंडिया के पहले पन्ने पर छपी सिंगल कॉलम की एक अन्य पर संबद्ध खबर उल्लेखनीय है। सिंगल कॉलम वाली खबर उत्तर प्रदेश की है और अमर उजाला में तो पहले पन्ने की लीड भी हो सकती थी। पहले कई अखबारों में ऐसी खबरों को पूरी प्रमुखता  मिलती थी। हिन्दुस्तान टाइम्स की जिस खबर की चर्चा मैं कर रहा हूं वह जनहित में सरकार से एक महत्वपूर्ण सवाल है। अखबार ने पूछा है, जब राजधानी रेंग रही है, यातायात पुलिस वाले कहां हैं? अखबार ने बताया है, किसी भी दिन दिल्ली के यातायात पुलिस के लोगों की तैनाती अपर्याप्त होती है। सड़क पर गड्ढों में मौत के मामले यातायात पुलिस की लापरवाही के कारण ही होते हैं। सड़क सुरक्षित रहे इसकी जिम्मेदारी किसकी है, मुझे नहीं पता लेकिन सिपाहियों की नहीं होने का कोई मतलब नहीं है। सड़क पर अंधेरा होना, सड़क पर खड़ी खराब गाड़ी में लाइट, रिफ्लेक्टर नहीं होना या फिर गड्ढ़ा किया जाए तो प्रकाश या चेतावनी संकेतक की व्यवस्था किए-कराए बगैर मौके से हट जाना उनकी घोषित जिम्मेदारियों में न भी हो तो उनका कर्तव्य है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, पांच साल में गड्ढों के कारण 9,438 मौतें हुईं। इनमें 5127 मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं। कहने की जरूरत नहीं है कि उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है। खबर के अनुसार, सड़क परिवहन मंत्रालय ने लोकसभा को जानकारी दी है – आंध्र प्रदेश, बिहार, गोवा और चंडीगढ़ समेत करीब आधा दर्जन राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में गड्ढों के कारण ‘ज़ीरो’ या शून्य मौत की खबर है। कुल मिलाकर, गड्ढों की वजह से होने वाली मौतें 2020 (कोविड साल) में 1,555 से बढ़कर 2024 में 2,385 हो गईं थीं।

नवोदय टाइम्स ने 114 राफेल खरीदे जाएंगे शीर्षक खबर को पांच कॉलम में छापकर लीड से ज्यादा महत्व दिया है। विपक्ष के नेता, राहुल की लोकसभा सदस्यता रद्द करने और उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने के लिए नोटिस सेकेंड लीड। इसके साथ उनका बयान भी है कि, किसानों की लड़ाई लड़ता रहूंगा। देशबन्धु की लीड का शीर्षक, यही है – किसानों के लिए लगातार लड़ता रहूंगा। दूसरी कई बातें इस खबर के साथ हैं। मुख्य बात यह है कि राहुल गांधी को जनरल नरवणे की तथाकथित अप्रकाशित पुस्तक के अंश जो कारवां में प्रकाशित है, पढ़ने नहीं दिया गया और मुद्दा किताब के प्रकाशित होने या न होने पर मोड़ दिया गया। इसके लिए प्रतिबंधित किताब की चर्चा हुई और वह मुद्दा नहीं है। मुद्दा यह भी नहीं है कि ऐसे निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया है और वह लीड बन गई है। प्रस्ताव का जो हो, हेडलाइन मैनेजमेंट तो हो ही गया। निशिकांत दुबे की बात करूं तो वे अपने बयानों को लेकर भी सुर्खियों में रहे हैं। न्यायपालिका, मीडिया या विपक्षी नेता को तो नहीं बख्शते लेकिन सरकार के खिलाफ राहुल गांधी की टिप्पणी पर चाहते हैं कि उन्हें चुनाव लड़ने से ही अयोग्य ठहरा दिया जाए जबकि चुनाव चोरी और वोट चोरी की आरोपी पार्टी में होने का लाभ पाते रहे हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी आरोप हैं क्योंकि  उनके चुनावी हलफनामे में डिग्री संबंधी विसंगतियां सार्वजनिक हैं। पत्नी की आय में अचानक वृद्धि को लेकर भी विवाद है। शिकायत पर लोकपाल ने लीपापोती ही की है। दूसरी ओर, दुबे ने आरोपों को निराधार बताया है।

राफेल विमानों की खरीद से संबंधित खबर इंडियन एक्सप्रेस और हिन्दुस्तान टाइम्स में भी लीड है। द टेलीग्राफ की लीड राहुल गांधी के मामले में निशिकांत दुबे का नोटिस है। खबर में दुबे का परिचय इस प्रकार है, झारखंड के गोड्डा से सांसद और भाजपा के सर्वोच्च नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले निशिंकात दुबे ने विपक्ष के नेता पर देश को अस्थिर करने के लिए बार-बार “बेबुनियाद आरोप” लगाने का आरोप लगाया। यह घटनाक्रम सदन में राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने के एक दिन बाद हुआ। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील उनकी तरफ से “थोक में सरेंडर” है। राहुल गांधी ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर भी निशाना साधा था, उन पर गलत आचरण का आरोप लगाते हुए कहा कि एपस्टीन फाइलों में उनका नाम है। खबर में नोटिस का कारण इस तरह बताया गया है – दुबे ने रिपोर्टर्स से कहा, “मैंने राहुल गांधी के खिलाफ एक सबसटेंशिव मोशन लाने के लिए कहा है। यह इस बात पर आधारित है कि कैसे वे देश को नुकसान पहुंचाना चाहने वाले (जॉर्ज) सोरोस (अमेरिकी निवेशक, समाजसेवी और उदार मूल्यों के रक्षक) जैसी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं।” खबर की शुरुआत ऐसे होती है, भाजपा  सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म करने और उन्हें भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलकर “देश को गुमराह करने” के लिए चुनाव लड़ने से हमेशा के लिए अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए एक “सब्सटैंटिव मोशन” के लिए नोटिस दिया है। इससे भी लगता है कि पूरा मामला भाजपा का हेडलाइन मैनेजमेंट है। कहने की जरूरत नहीं है कि इस खबर के कारण जो दूसरी खबरें छूटीं वे अपनी जगह, लेकिन एक खबर यहां ऐसी है जो किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है। यह खबर है, जनरल नरवणे की किताब लीक होने में विदेशी हाथ। नई दिल्ली डेटलाइन से इमरान अहमद सिद्दीक की बाई लाइन वाली खबर के अनुसार, दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने कहा कि पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण के कथित लीक में “विदेशी हाथ” का संकेत मिलता है और यह “रक्षा मंत्रालय की क्लीयरेंस को बेमतलब करने की वैश्विक साज़िश” का हिस्सा हो सकता है। …. “शुरुआती जांच से पता चलता है कि पांडुलिपि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया समेत ग्लोबल डिजिटल मार्केट में वितरित और बेच दी गई थी,” …. “लीक से कुछ विदेशी हाथों का इशारा मिलता है जो रक्षा मंत्रालय की क्लीयरेंस को रोकने की ग्लोबल साज़िश का हिस्सा हो सकते हैं। यह एक प्लान्ड और कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन लगता है।” वैसे, यह अंदेशा पहले दिन से था और इसलिए इसे खोदा पहाड़ निकली चुहिया…. कह सकते हैं। उधर, संभव है कि यह दिल्ली पुलिस के दो-चार अफसरों के लिए ‘विदेश’ घूमने का मौका बन जाए। पुलिस की कार्यकुशलता और जनसेवा में लगी होने की ऐसी ही एक और खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में है और उत्तम प्रदेश की ही है। खबर का विस्तार अंदर है, मैं यहां पहले पन्ने की खबर का अनुवाद पेश कर रहा हूं। तीन साल जेल काटने के बाद एक 32 साल के आदमी और उसके माता-पिता को बरी कर दिया गया है। इन पर दहेज के लिए अपनी 24 साल की पत्नी और बहू की हत्या का आरोप था। बुलंदशहर की एक कोर्ट ने फैसला सुनाया कि उसकी मौत सांप के काटने से हुई थी। मेडिकल, फोरेंसिक और तहसीलदार की रिपोर्ट में मौत सांप के जहर से बताई गई थी। जज ने जांच अधिकारी को खराब जांच के लिए फटकार लगाई और परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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