Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

गुजरात

अदाणी प्रकरण में पत्रकार रवि नायर को एक महीने की राहत, सज़ा पर स्टे!

मांसा (गांधीनगर): आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी ठहराए गए स्वतंत्र पत्रकार रवि नायर को शुक्रवार, 13 फरवरी को अदालत से बड़ी राहत मिली। मांसा (गांधीनगर) की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट दमिनी दीक्षित की अदालत ने नायर की सज़ा पर एक महीने का स्टे दे दिया है, जिससे उन्हें उच्च अदालत में अपील दायर करने का समय मिल गया है।

इससे पहले 10 फरवरी को मजिस्ट्रेट अदालत ने नायर को एक साल की जेल और 5,000 रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई थी। यह मामला 2021 में Adani Enterprises Limited द्वारा दायर आपराधिक मानहानि याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नायर ने सोशल मीडिया पर अदाणी समूह के खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक पोस्ट किए।

सज़ा के कुछ घंटे बाद ही रवि नायर ने X (पूर्व में ट्विटर) पर एक संक्षिप्त लेकिन प्रतीकात्मक पोस्ट साझा किया था —“हम देखेंगे (Hum Dekhenge)”।

नायर के वकील वेदांत राजगुरु ने कहा-

“रवि नायर शुक्रवार को मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुए और उन्हें 30 दिन का स्टे मिल गया है, यानी 10 मार्च तक। हम जल्द ही उच्च अदालत में अपील दाखिल करेंगे।”

नायर पर क्या आरोप थे?

अदालत ने रवि नायर को IPC की धारा 499 (मानहानि) के तहत दोषी माना, जो धारा 500 के तहत दंडनीय है। इस धारा में अधिकतम दो साल की सज़ा का प्रावधान है।

अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने 3 सितंबर 2021 को शिकायत दर्ज कराई थी कि नायर ने अक्टूबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच X पर अदाणी समूह को लेकर 17 ट्वीट किए, जो कथित रूप से झूठे, भ्रामक, अपमानजनक और मानहानिकारक थे।

शिकायत में यह भी कहा गया कि नायर ने www.adaniwatch.org नाम की वेबसाइट पर भी ऐसे लेख साझा किए, जिनका संयुक्त प्रभाव यह दिखाने का था कि:

  • अदाणी समूह को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है
  • सरकार नीतियां और कानून अदाणी के पक्ष में बदल रही है
  • समूह अवैध, अनैतिक और नियमों के खिलाफ व्यापार कर रहा है

अदाणी समूह ने यह भी आरोप लगाया कि नायर के पोस्ट्स में:

  • भ्रष्टाचार
  • ज़मीन अधिग्रहण में जबरदस्ती
  • वित्तीय गड़बड़ी
  • पर्यावरण नियमों का उल्लंघन
  • मानवाधिकार हनन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।

अदाणी समूह का दावा

कंपनी का कहना था कि नायर ने ये आरोप बिना किसी आधिकारिक पुष्टि या तथ्यात्मक आधार के लगाए, जिससे अदाणी की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। समूह को अपने निवेशकों, बैंकों और विदेशी साझेदारों को सफाई देनी पड़ी।

नायर की दलील

नायर के वकीलों ने अदालत में कहा कि: ये सभी ट्वीट सार्वजनिक डोमेन में मौजूद रिपोर्ट्स पर आधारित थे। नायर ने कोई नई जानकारी गढ़ी नहीं बल्कि उन्होंने केवल स्थापित मीडिया रिपोर्ट्स साझा कीं, जिन लेखों को साझा किया गया, उनके मूल लेखक मुकदमे में पक्षकार नहीं बनाए गए इसलिए नायर को दोषी ठहराना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।

हालांकि अदालत ने यह दलील स्वीकार नहीं की और उन्हें दोषी ठहरा दिया।

विवादित X पोस्ट्स क्या थे?

अदाणी समूह ने नायर के कुल 17 ट्वीट अदालत में पेश किए। इनमें से 16 पोस्ट अभी भी X पर उपलब्ध हैं।

इनमें प्रमुख पोस्ट्स शामिल थे:

5 नवंबर 2020: Guardian के एक लेख को साझा कर लिखा – “Bravus का मतलब लैटिन में ‘crooked’ होता है, फिट बैठता है?”

24 दिसंबर 2020: श्रीलंका के Newsfirst का लेख शेयर करते हुए लिखा – “मोदी सरकार अदाणी का बिज़नेस डेवलपमेंट संभाल रही है।”

20 अक्टूबर 2020: Adaniwatch का लेख साझा कर लिखा – “मोदी सरकार ने पर्यावरण कानून बदले ताकि अदाणी प्रोजेक्ट को मंजूरी मिले।”

26 नवंबर 2020: Times of India के लेख के साथ लिखा – “अदाणी एक बुलबुला है, फूटेगा तो बैंकों और निवेशकों को भारी नुकसान होगा।”

15 जनवरी 2021: पोस्ट किया – “अमेरिका Magnitsky Act के तहत अदाणी और अंबानी पर प्रतिबंध लगा सकता है।”

29 जुलाई 2021: लिखा – “अदाणी कंपनियों में निवेश करने वाले FPIs के पीछे BVI में रजिस्टर्ड कंपनियां हैं, जिनका संबंध भगोड़ों से है।”

“अपमानजनक हैं, लेकिन मानहानिकारक नहीं”

नायर के लंबे समय के सहयोगी वरिष्ठ पत्रकार Paranjoy Guha Thakurta ने कहा:

“पूरे सम्मान के साथ, मेरा मानना है कि यह फैसला नहीं दिया जाना चाहिए था। ये पोस्ट्स अपमानजनक हो सकती हैं, लेकिन मानहानिकारक नहीं। ये सब सार्वजनिक जानकारी पर आधारित थीं। यह फैसला दरअसल इस बात को मजबूत करता है कि भारत में मानहानि को अपराध की श्रेणी से हटाया जाना चाहिए।”

वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने भी कहा:

“अदालत को लेखों के मूल स्रोतों की जांच करनी चाहिए थी, न कि उन्हें साझा करने वाले पत्रकार को सज़ा देनी चाहिए थी।”

पहले भी मिली थी राहत

सितंबर 2025 में दिल्ली की रोहिणी अदालत ने अदाणी की याचिका पर रवि नायर, अबीर दासगुप्ता, आयुष जोशी और आयस्कांत दास को रिपोर्ट हटाने के आदेश पर स्टे लगा दिया था। जिला जज आशीष अग्रवाल ने कहा था कि पत्रकारों को सुने बिना दिया गया यह आदेश अस्वीकार्य है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन